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Thu 13 Aug, 2026

राष्‍ट्रीय समाचार

राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026

  • संसद ने राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • विधेयक पेश किया : सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने
  • विधेयक का उद्देश्य : राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम, 1962 में और संशोधन करना
  • नया अधिकार (सीधा लोन): अब NCDC राज्य सरकारों के माध्यम से जाने के बजाय पात्र संस्थाओं को सीधे ऋण और वित्तीय सहायता दे सकेगा
  • शक्तियों का विस्तार: NCDC अब सहकारी समितियों की शेयर पूंजी में सीधा निवेश कर सकता है।
  • भौगोलिक सीमा का हटना: औद्योगिक सामानों के उत्पादन और लोन के लिए भौगोलिक प्रतिबंधों को पूरी तरह हटा दिया गया है।
  • NCDC का पूरा नाम : National Cooperative Development Corporation (राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम)
  • स्थापना वर्ष: 1963 (यह एक वैधानिक निकाय/Statutory Body है)
  • किस अधिनियम के तहत: NCDC अधिनियम, 1962
  • संबंधित मंत्रालय: यह सहकारिता मंत्रालय के अंतर्गत
  • वर्तमान में देश के सहकारिता मंत्री : अमित शाह
  • NCDC का मुख्यालय : नई दिल्ली

संविधान एवं सहकारिता :

  • मौलिक अधिकार : अनुच्छेद 19(1)(c) के तहत नागरिकों को 'संघ या संगठन' के साथ-साथ 'सहकारी समितियां' बनाने का अधिकार एक मौलिक अधिकार के रूप में दिया गया
  • राज्य के नीति निदेशक तत्व (DPSP): भाग IV में अनुच्छेद 43B जोड़ा गया, जो राज्य को सहकारी समितियों के स्वैच्छिक गठन, स्वायत्त कामकाज, लोकतांत्रिक नियंत्रण और व्यावसायिक प्रबंधन को बढ़ावा देने का निर्देश देता है।
  • नया भाग जोड़ना (New Part): संविधान में भाग IX-B (Part 9B) जोड़ा गया, जिसका शीर्षक "सहकारी समितियां" है। यह अनुच्छेद 243ZH से 243ZT तक फैला हुआ है।

भाग IX-B के मुख्य कानूनी प्रावधान :

  • बोर्ड के सदस्यों की अधिकतम संख्या (Article 243ZJ): किसी भी सहकारी समिति के निदेशक मंडल में अधिकतम 21 सदस्य हो सकते हैं
  • आरक्षण : बोर्ड में 1 सीट अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (SC/ST) के लिए और 2 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होना अनिवार्य है
  • कार्यकाल : चुने गए पदाधिकारियों का कार्यकाल उनके चुनाव की तारीख से 5 वर्ष का होता है
  • ऑडिट (Audit - Article 243ZM): वित्तीय वर्ष की समाप्ति के 6 महीने के भीतर खातों का ऑडिट कराना अनिवार्य है

सातवीं अनुसूची और विधायी शक्तियां :

  • राज्य सूची (State List - प्रविष्टि 32): एक ही राज्य की सीमाओं के भीतर काम करने वाली सहकारी समितियों पर कानून बनाने का विशेष अधिकार राज्य विधानसभाओं के पास है।
  • संघ सूची (Union List - प्रविष्टि 44): एक से अधिक राज्यों में काम करने वाली सहकारी समितियों, जिन्हें मल्टी-स्टेट सहकारी समितियां कहा जाता है, पर कानून बनाने का अधिकार संसद के पास है।
  • भारत का पहला राष्ट्रीय सहकारी विश्वविद्यालय : त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय
  • स्‍थान : गुजरात, आणंद
  • नामकरण: इस विश्वविद्यालय का नाम भारत में सहकारिता आंदोलन के प्रणेता और 'अमूल' (AMUL) के संस्थापक त्रिभुवनदास काशीभाई पटेल के नाम पर रखा गया है।

केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026

  • संसद ने केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 को पारित किया।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • विधेयक का नाम : केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 [The Kerala (Alteration of Name) Bill, 2026]
  • विधेयक का उद्देश्य : संविधान में दर्ज राज्य के अंग्रेजी नाम 'Kerala' को बदलकर आधिकारिक तौर पर 'Keralam' (केरलम) करना
  • विधेयक पेश किया : गृह मंत्रालय की ओर से गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय द्वारा
  • संसदीय स्वीकृति : संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) द्वारा पारित
  • संशोधित अनुसूची : इस विधेयक के माध्यम से संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन किया जाएगा
  • राज्य विधानसभा का प्रस्ताव : जून 2024 में केरल विधानसभा द्वारा सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से नाम बदलने की मांग की गई थी

राज्य का नाम बदलने की संवैधानिक प्रक्रिया :

  • संबंधित अनुच्छेद : अनुच्छेद 3 (Article 3) — नए राज्यों का निर्माण और वर्तमान राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन करने की संसद की शक्ति
  • विधेयक पेश करने की शर्त : ऐसा विधेयक संसद में केवल राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश से ही पेश किया जा सकता है
  • राज्य विधानसभा की सहमति : राष्ट्रपति विधेयक को संबंधित राज्य विधानमंडल को विचार के लिए भेजते हैं (हालांकि राज्य की राय संसद पर बाध्यकारी नहीं होती)
  • पारित करने के लिए बहुमत : संसद में यह विधेयक साधारण बहुमत से पारित होता है
  • संविधान संशोधन की स्थिति : अनुच्छेद 4 के अनुसार, अनुच्छेद 3 के तहत किया गया नाम परिवर्तन अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन नहीं माना जाता है

केरल राज्य का गठन और इतिहास :

  • मलयालम भाषा में नाम : मलयालम भाषा और स्थानीय संस्कृति में राज्य को सदैव 'केरलम' कहा जाता है
  • ऐतिहासिक उल्लेख : अशोक के शिलालेखों (2nd Rock Edict) में इस क्षेत्र का उल्लेख 'केरलपुत्र' के रूप में मिलता है
  • ऐक्य केरल आंदोलन : 1920 के दशक में सभी मलयालम भाषी क्षेत्रों को एकीकृत करने के लिए शुरू हुआ आंदोलन
  • केरल राज्य का गठन : 1 नवंबर 1956 (राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के तहत फ़ज़ल अली आयोग की सिफारिशों पर)
  • केरल पिरवी : प्रत्येक वर्ष 1 नवंबर को केरल स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है

राज्यों के नाम बदलने के प्रमुख ऐतिहासिक उदाहरण :

  • संयुक्त प्रांत → उत्तर प्रदेश : 1950
  • मद्रास → तमिलनाडु : 1969
  • मैसूर → कर्नाटक : 1973
  • उत्तरांचल → उत्तराखंड : 2007
  • उड़ीसा → ओडिशा : 2011
  • केरल → केरलम : 2026

लोकसभा की सीटों को स्थायी रूप से 543 पर फ्रीज (स्थिर) रखने का प्रस्ताव

  • तमिलनाडु विधानसभा द्वारा 12 अगस्त, 2026 को लोकसभा की सीटों को स्थायी रूप से 543 पर फ्रीज (स्थिर) रखने का प्रस्ताव पारित किया गया है।
  • मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय द्वारा पेश किए गए इस विशेष प्रस्ताव का उद्देश्य जनसंख्या नियंत्रण में सफल रहे दक्षिणी राज्यों के संसदीय प्रतिनिधित्व की रक्षा करना और 2029 के चुनावों में महिला आरक्षण को बिना किसी देरी के लागू करना है।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • प्रस्ताव का विषय : लोकसभा सीटों की कुल संख्या को स्थायी रूप से 543 पर बनाए रखना
  • प्रस्ताव पारित करने वाली राज्य विधानसभा : तमिलनाडु विधानसभा
  • प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य : जनसंख्या नियंत्रण नीतियों को सफलतापूर्वक लागू करने वाले राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की रक्षा करना
  • चिंता का मुख्य कारण : आगामी नए परिसीमन में अधिक जनसंख्या वाले राज्यों की लोकसभा सीटें बढ़ने और सफल जनसंख्या नियंत्रण वाले राज्यों (जैसे दक्षिण भारतीय राज्य) की सीटें आनुपातिक रूप से घटने की आशंका
  • वर्तमान में तमिलनाडु की लोकसभा सीटें : 39 सीटें

संविधान एवं परिसीमन आयोग :

  • संबंधित अनुच्छेद : अनुच्छेद 82 (प्रत्येक जनगणना के बाद परिसीमन) और अनुच्छेद 81 (लोकसभा की संरचना)
  • परिसीमन का अर्थ : जनसंख्या में बदलाव को दर्शाने के लिए लोकसभा और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण करना
  • सीटों पर रोक : 42वें संविधान संशोधन 1976 द्वारा 1971 की जनगणना के आधार पर सीटों को वर्ष 2000 तक फ्रीज किया गया था
  • 84वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 : इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभा सीटों की कुल संख्या को वर्ष 2026 तक (2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना तक) के लिए फ्रीज (स्थिर) कर दिया गया
  • परिसीमन आयोग : इसकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और यह भारत के निर्वाचन आयोग के साथ मिलकर काम करता है। इसके आदेशों को किसी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती
  • लोकसभा की वर्तमान क्षमता : 543 चुनी हुई सीटें (104वें संविधान संशोधन 2019 द्वारा एंग्लो-इंडियन समुदाय की 2 नामित सीटों का प्रावधान समाप्त कर दिया गया)
  • SC और ST आरक्षण जारी: इसी 104वें संशोधन अधिनियम द्वारा लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षण की अवधि को और 10 वर्षों (25 जनवरी 2030 तक) के लिए बढ़ा दिया गया था

सर्वाधिक लोकसभा सीटों वाले राज्य :

  • उत्तर प्रदेश (80 सीटें)
  • महाराष्ट्र (48 सीटें)
  • पश्चिम बंगाल (42 सीटें)
  • बिहार (40 सीटें)
  • तमिलनाडु (39 सीटें)

बालिग बच्चेां को जीवनसाथी चुनने का अधिकार : बॉम्बे हाई कोर्ट

  • बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने एक याचिका में स्पष्ट किया कि बालिग बच्चे माता-पिता की संपत्ति नहीं, वे स्वतंत्र व्यक्ति हैं और उन्हें अपनी मर्जी से जीवनसाथी चुनने या अपनी इच्छा से रहने का पूरा अधिकार है।
  • बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच का यह फैसला भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार) के तहत व्यक्तिगत स्वायत्तता और निजता के अधिकार को सुदृढ़ करता है।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • मामला: अदालत ने एक मां द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। मां ने अपनी बालिग (वयस्क) बेटी की कस्टडी मांगी थी, जो अपनी मर्जी से घर छोड़कर अपने साथी के साथ रह रही थी
  • न्यायालय का रुख: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई वयस्क व्यक्ति स्वेच्छा से किसी के साथ रह रहा है, तो उसे 'अवैध हिरासत' नहीं माना जा सकता और ऐसे मामलों में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का उपयोग नहीं किया जा सकता

मौलिक अधिकार:

  • अनुच्छेद 21 : प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण
  • निजता का अधिकार : वर्ष 2017 के ऐतिहासिक के. एस. पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने निजता के अधिकार को अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार घोषित किया था
  • अनुच्छेद 21 का दायरा : इसमें स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार, आजीविका का अधिकार, त्वरित सुनवाई का अधिकार, और अपनी पसंद के व्यक्ति से विवाह करने का अधिकार भी शामिल है
  • संविधान का भाग III : मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 12 से 35 तक)
  • स्रोत : इसे अमेरिका के संविधान से लिया गया है
  • संविधान का मैग्नाकार्टा: भाग 3 को भारत का मैग्नाकार्टा कहा जाता है
  • प्रकृति : ये न्यायोचित हैं। उल्लंघन होने पर आप सीधे सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट जा सकते हैं।
  • मूल संविधान में 7 मौलिक अधिकार थे। लेकिन 44वें संविधान संशोधन (1978) द्वारा 'संपत्ति के अधिकार' (अनुच्छेद 31) को मौलिक अधिकारों की सूची से हटा दिया गया। अब यह अनुच्छेद 300A के तहत एक कानूनी अधिकार (Legal Right) है। वर्तमान में केवल 6 मौलिक अधिकार हैं।

मौलिक अधिकारों के हनन होने पर सुप्रीम कोर्ट 5 प्रकार की रिट जारी करता है:

  • बंदी प्रत्यक्षीकरण - व्यक्ति को सशरीर प्रस्तुत करना
  • परमादेश - हम आदेश देते हैं (कर्तव्य पालन के लिए)
  • प्रतिषेध - रोकना (उच्च न्यायालय द्वारा निचली अदालत को)
  • उत्प्रेषण - पूर्णतः सूचित कीजिए या केस ऊपर भेजिए
  • अधिकार पृच्छा - आपका क्या अधिकार/दावा है?
  • आपातकाल का प्रभाव: राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) के दौरान सभी मौलिक अधिकार निलंबित किए जा सकते हैं, सिवाय अनुच्छेद 20 और 21 के। ये दोनों कभी निलंबित नहीं होते।
  • केवल भारतीयों के लिए उपलब्ध अधिकार: अनुच्छेद 15, 16, 19, 29, और 30 केवल भारतीय नागरिकों को प्राप्त हैं, विदेशियों को नहीं।
  • विदेशियों को भी प्राप्त अधिकार: अनुच्छेद 14, 20, 21, 21A, 22, 23, 24, 25, 26, 27, और 28 भारतीय और विदेशी (शत्रु देश के नागरिकों को छोड़कर) दोनों को प्राप्त हैं।
  • रिट जारी करने की शक्ति: मौलिक अधिकारों के लिए सर्वोच्च न्यायालय अनुच्छेद 32 के तहत और उच्च न्यायालय अनुच्छेद 226 के तहत रिट जारी कर सकते हैं

‘ग्रामीण ज्ञान सेतु’ ऐप का शुभारंभ

  • केन्‍द्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने ‘ग्रामीण ज्ञान सेतु’ ऐप का शुभारंभ किया।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • ऐप का नाम : ग्रामीण ज्ञान सेतु ऐप
  • शुभारंभकर्ता : केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह
  • संबंधित मंत्रालय : सहकारिता मंत्रालय
  • ऐप का मुख्य उद्देश्य : गांधीनगर, कलोल और साणंद विधानसभा क्षेत्रों के गांवों में बच्चों को पढ़ने की आदत से जोड़ना और उन्हें गांव में ही ज्ञान के व्यापक संसाधन उपलब्ध कराना
  • प्रमुख लाभार्थी : प्राथमिक कृषि ऋण समितियां (PACS), किसान और ग्रामीण सहकारिता से जुड़े लोग
  • इस ऐप से अब तक 752 पुस्तकालय जुड़ चुके हैं, जबकि 2 लाख 80 हजार पुस्तकों के भंडार वाले चार बड़े पुस्तकालयों को ग्रामीण पुस्तकालयों के साथ जोड़ा गया है।

अर्थव्‍यवस्‍था तथा बैंकिग

जुलाई 2026 में CPI

  • जुलाई 2026 में देश की खुदरा महंगाई दर (CPI) वार्षिक आधार पर मामूली बढ़कर 4.45 प्रतिशत हो गई, जो जून में 4.38 प्रतिशत थी।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई बढ़कर 4.84 प्रतिशत, जबकि शहरी क्षेत्रों में 3.96 प्रतिशत हो गई।
  • अखिल भारतीय उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक पर आधारित खाद्य महंगाई दर पिछले महीने बढ़कर 5.52 प्रतिशत रही, जो विगत जून में 5.32 प्रतिशत थी।

खुदरा महंगाई दर (CPI) : जुलाई 2026

  • महंगाई दर (जुलाई 2026) : 4.45 प्रतिशत (वार्षिक आधार पर)
  • पिछला आंकड़ा (जून 2026) : 4.38 प्रतिशत
  • प्रवृत्ति (Trend) : मामूली वृद्धि (0.07% की बढ़ोतरी)
  • जारीकर्ता संस्था : राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO)
  • संबंधित मंत्रालय : सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI)
  • सूचकांक का आधार : उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index - CPI)
  • मापन का आधार वर्ष (Base Year) : 2012

वित्त वर्ष 2026-27 में शुद्ध प्रत्यक्ष कर

  • आयकर विभाग ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ₹8.11 लाख करोड़ से अधिक का शुद्ध प्रत्यक्ष कर एकत्र किया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 23.09% की वार्षिक वृद्धि को दर्शाता है।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह: ₹8.11 लाख करोड़ (23.09% की वृद्धि)
  • सकल (ग्रॉस) प्रत्यक्ष कर संग्रह: ₹9.55 लाख करोड़ (19.75% की वृद्धि)
  • गैर-कॉरपोरेट कर (व्यक्तिगत आयकर): ₹5.07 लाख करोड़ (लगभग 23% की वृद्धि)
  • कॉरपोरेट कर संग्रह: ₹2.70 लाख करोड़ (19.83% की वृद्धि)
  • सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT): ₹33,824 करोड़ (51% की भारी वृद्धि)
  • जारी किया गया रिफंड: ₹1.43 लाख करोड़
  • शीर्ष निकाय : केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT - Central Board of Direct Taxes)
  • संबंधित मंत्रालय : वित्त मंत्रालय
  • कर का प्रकार : प्रत्यक्ष कर — जिसमें कॉर्पोरेट कर और व्यक्तिगत आयकर शामिल हैं
  • प्रत्यक्ष कर का अर्थ : वह कर जिसका भुगतान वही व्यक्ति या संस्था करती है जिस पर यह कानूनी रूप से लगाया जाता है (इन्हें दूसरों पर स्थानांतरित नहीं किया जा सकता, जैसे— Income Tax, Corporate Tax)
  • अप्रत्यक्ष कर का अर्थ : वह कर जिसे उपभोक्ताओं पर स्थानांतरित किया जाता है (जैसे— GST, Customs Duty)
  • CBDT की स्थापना : केंद्रीय राजस्व बोर्ड अधिनियम, 1963 के तहत एक वैधानिक निकाय के रूप में
  • CBIC (केन्द्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड) : भारत में अप्रत्यक्ष करों (GST, कस्टम्स आदि) को प्रबंधित करने वाला शीर्ष निकाय
  • कराधान का सिद्धांत : प्रत्यक्ष कर आमतौर पर प्रगतिशील प्रकृति के होते हैं, यानी आय बढ़ने के साथ कर की दर बढ़ती है

चर्चा में व्‍यक्ति

पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़

  • रूस ने यूक्रेन के सरकारी बैंक ओशचाडबैंक के साथ चल रहे सैकड़ों मिलियन डॉलर के बड़े निवेश संधि विवाद के निपटारे के लिए भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ को अपना मध्यस्थ नियुक्त किया।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • मामला / विवाद : यूक्रेन के सरकारी बैंक ओशचाडबैंक के साथ चल रहे बड़े निवेश विवाद का निपटारा
  • रूस द्वारा नियुक्त मध्यस्थ : भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़
  • नियुक्तिकर्ता : रूसी संघ
  • विवाद का मुख्य कारण : 2014 में रूस द्वारा क्रीमिया के विलय के बाद ओशचाडबैंक की संपत्ति/संपत्तियों के नुकसान से जुड़ा मुआवजा मामला
  • क्षेत्र : अंतरराष्ट्रीय निवेश मध्यस्थता

डीवाई चंद्रचूड़ :

  • पूरा नाम : धनंजय यशवंत चंद्रचूड़
  • पद : भारत के 50वें मुख्य न्यायाधीश
  • पिता का नाम : वाई. वी. चंद्रचूड़ (भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले 16वें CJI)
  • मुख्य लैंडमार्क फैसले : निजता का अधिकार (Right to Privacy - पुट्टास्वामी मामला), अनुच्छेद 370 को हटाना सही ठहराना, समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर करना (Sec 377)

अंतरराष्ट्रीय कानून एवं मध्यस्थता :

  • अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता : दो देशों या संस्थाओं के बीच कानूनी/व्यापारिक विवादों को अदालत के बाहर निष्पक्ष तीसरे पक्ष द्वारा सुलझाने की प्रक्रिया
  • PCA (Permanent Court of Arbitration) : नीदरलैंड्स के 'द हेग' में स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय, जो अंतरराष्ट्रीय विवादों का निपटारा करता है
  • PCA की स्थापना : 1899
  • भारतीय मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम : 1996
  • नोट : सेवानिवृत्त न्यायाधीश निजी या अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता मामलों में भाग ले सकते हैं क्योंकि यह किसी सरकारी लाभ का पद या भारतीय अदालतों में वकालत करने जैसा नहीं है
  • ओशचाडबैंक → यूक्रेन का बैंक
  • आर्बिट्रेटर → मध्यस्थ (अदालत के बाहर आपसी विवाद सुलझाने वाला निष्पक्ष विशेषज्ञ)
  • 1998 संधि → रूस-यूक्रेन द्विपक्षीय निवेश समझौता

डॉ. भूमा वी.जी.

  • सेवानिवृत्त IRPS डॉ. भूमा वी.जी. को मॉरीशस के अटल बिहारी बाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक सर्विस एंड इनोवेशन (AIPSI) के कुलपति पद के लिए चुना गया।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • संस्थान की पृष्ठभूमि: AIPSI को पहले 'सिविल सर्विस कॉलेज, मॉरीशस' के नाम से जाना जाता था
  • उद्घाटन: मार्च 2025 में भारत और मॉरीशस के प्रधानमंत्रियों द्वारा संयुक्त रूप से इसका उद्घाटन किया गया था
  • उद्देश्य: इस संस्थान को पूरे अफ्रीकी क्षेत्र के लिए एक प्रमुख लोक सेवा प्रशिक्षण एजेंसी और 'उत्कृष्टता केंद्र' के रूप में विकसित किया जा रहा है।
  • डॉ. भूमा वी.जी. का परिचय: वह भारतीय रेलवे कार्मिक सेवा (IRPS) की वरिष्ठ अधिकारी रही हैं, जिन्हें लोक प्रशासन, मानव संसाधन और संस्थागत परिवर्तन में 3 दशकों से अधिक का अनुभव है

अंतर्राष्‍ट्रीय समाचार

'गोल्डन डोम फॉर अमरीका इकोसिस्टम हब' पोर्टल

  • अमेरिका ने 'गोल्डन डोम' मिसाइल डिफेंस सिस्टम के विकास में तेज़ी लाने के उद्देश्‍य से 'गोल्डन डोम फॉर अमरीका इकोसिस्टम हब' नामक पोर्टल का शुभारंभ किया।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • पोर्टल का नाम : 'गोल्डन डोम फॉर अमरीका इकोसिस्टम हब'
  • पोर्टल का मुख्य उद्देश्य : रक्षा उद्योग और व्यावसायिक प्रौद्योगिकी कंपनियों को एक साथ लाकर 'गोल्डन डोम' प्रोजेक्ट के विकास में तेजी लाना
  • प्रोजेक्ट का नाम : 'गोल्डन डोम फॉर अमरीका'
  • पहल की शुरुआत करने वाला देश : संयुक्त राज्य अमेरिका (USA)
  • मिसाइल प्रणाली का स्वरूप : बहु-स्तरीय रक्षा कवच, जो बैलिस्टिक, हाइपरसोनिक और क्रूज मिसाइलों को ट्रैक कर नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है
  • प्रेरणा स्रोत : इज़राइल की 'आयरन डोम' तकनीक से प्रेरित, लेकिन यह वैश्विक और अंतरिक्ष-आधारित स्तर की अधिक व्यापक प्रणाली है

प्रमुख वैश्विक मिसाइल डिफेंस सिस्टम :

  • आयरन डोम : इज़राइल का प्रसिद्ध कम दूरी का वायु रक्षा प्रणाली (Short-range Air Defense System)
  • एस-400 (S-400 Triumf) : रूस की लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली (भारत ने भी इसे आयात किया है)
  • थाड (THAAD - Terminal High Altitude Area Defense) : अमेरिका की अत्यधिक ऊंचाई वाली एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली
  • एस-500 (S-500 Prometey) : रूस की अगली पीढ़ी की वायु व अंतरिक्ष रक्षा प्रणाली
  • पेट्रियट : अमेरिका की लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली
  • SAMAR / S400 (सुदर्शन) : भारत द्वारा विकसित व प्रयुक्त वायु रक्षा प्रणालियाँ
  • मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (MTCR) : 1987 में गठित एक बहुपक्षीय निर्यात नियंत्रण व्यवस्था (भारत 2016 में इसका 35वां सदस्य बना)
  • DRDO (भारत) : रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन, जो भारत में बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा (BMD) कार्यक्रम का विकास करता है
  • भारत का प्रक्षेप्यास्त्र विकास कार्यक्रम (IGMDP) : 1983 में डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के नेतृत्व में शुरू हुआ (इसके तहत पृथ्वी, अग्नि, त्रिशूल, नाग और आकाश मिसाइलें बनीं)

मृत्युदंड समाप्त करने वाला प्रथम अरब देश

  • लेबनान, मृत्युदंड समाप्त करने वाला अरब जगत का प्रथम देश बन गया है।
  • लेबनान की 128 सदस्यीय संसद में हिज़्बुल्लाह के संसदीय गुट को छोड़कर अधिकांश सदस्यों ने मृत्युदंड समाप्त करने के पक्ष में मतदान किया।

लेबनान :

  • पश्चिमी एशिया में भूमध्य सागर के पूर्वी तट पर स्थित एक प्रमुख मध्य-पूर्वी देश है
  • राजधानी: बेरूत
  • मुद्रा: लेबनानी पाउंड ( LBP)
  • राष्ट्रपति: हमेशा एक मारोनाइट ईसाई होगा (वर्तमान: जोसेफ औन)
  • प्रधानमंत्री: हमेशा एक सुन्नी मुस्लिम होगा (वर्तमान: नवाफ सलाम)
  • संसद का अध्यक्ष : हमेशा एक शिया मुस्लिम होगा (वर्तमान: नबीह बेरी)
  • संसद : इसमें कुल 128 सीटें हैं, जो ईसाइयों और मुसलमानों के बीच 50:50 के अनुपात में विभाजित हैं।
  • प्रमुख नदी: लिटानी नदी

लिटानी नदी :

  • लेबनान की सबसे महत्वपूर्ण जलधारा है, जो वर्तमान में इजरायल-लेबनान भू-राजनीतिक विवाद और सैन्य समझौतों का मुख्य केंद्र बिंदु बनी हुई है
  • उद्गम : यह नदी पूर्वी लेबनान की उपजाऊ बेका घाटी में बालबेक शहर के पश्चिम से निकलती है
  • विशेषता: यह पूरी तरह से लेबनान के भीतर बहने वाली वहाँ की सबसे लंबी और सबसे बड़ी नदी है (यह किसी अन्य देश के साथ सीमा साझा नहीं करती)
  • बहाव मार्ग: यह बेका घाटी से होते हुए दक्षिण की ओर बहती है, फिर मारजायून के पास पश्चिम की ओर एक तीखा मोड़ लेती है और पहाड़ों को काटते हुए भूमध्य सागर में गिरती है
  • आर्थिक महत्व: इसे लेबनान की "जीवन रेखा" कहा जाता है। इस पर बना करौन बांध लेबनान का सबसे बड़ा जलविद्युत और सिंचाई प्रोजेक्ट है

 

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