06 August, 2026
16वीं एशियाई सिंह जनसंख्या आकलन, 2025
Mon 10 Aug, 2026
संदर्भ
गुजरात वन विभाग द्वारा ग्रेटर गिर परिदृश्य में किए गए 16वें एशियाई सिंह जनसंख्या आकलन, 2025 ने भारत में एशियाई सिंहों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाया है। वर्ष 2025 में सिंहों की अनुमानित संख्या बढ़कर 891 हो गई, जबकि 2020 में यह 674 और 2015 में 523 थी। इस प्रकार, पिछले पाँच वर्षों में 32.2% और पिछले एक दशक में 70.36% की वृद्धि दर्ज की गई है। ये निष्कर्ष गुजरात में दीर्घकालिक आवास संरक्षण, जनसंख्या निगरानी और संरक्षण उपायों की प्रभावशीलता को रेखांकित करते हैं।
प्रमुख निष्कर्ष
- 2020 से 2025 के बीच कुल सिंह आबादी 674 से बढ़कर 891 हो गई। जनसांख्यिकीय संरचना में 196 वयस्क नर, 330 वयस्क मादा, 140 उप-वयस्क और 225 शावक शामिल हैं।
- 2020 में वयस्क मादा सिंहों की संख्या 260 थी, जो 2025 में बढ़कर 330 हो गई। यह वृद्धि विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि एक स्वस्थ प्रजननशील आबादी दीर्घकालिक जनसांख्यिकीय स्थिरता के लिए आवश्यक है।
- सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रमों में से एक सैटेलाइट आबादी का उभरना है। 2025 के आकलन में पारंपरिक गिर क्षेत्र के मुख्य हिस्से के बाहर भी बड़ी संख्या में सिंह दर्ज किए गए।
- सैटेलाइट क्षेत्रों में कुल 497 सिंह दर्ज किए गए, जो पारंपरिक संरक्षित क्षेत्रों से बाहर के परिदृश्यों के बढ़ते पारिस्थितिक महत्व को दर्शाता है। सौराष्ट्र क्षेत्र में सिंहों के सक्रिय प्रसार का संकेत देते हुए वन्यजीव गलियारों का उपयोग करते हुए भी सिंहों को दर्ज किया गया।
बरडा वन्यजीव अभयारण्य: संरक्षण की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि
- बरडा वन्यजीव अभयारण्य सिंहों के क्षेत्रीय विस्तार का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। 2025 के आकलन में बरडा में सिंह दर्ज किए गए, जो लंबे समय के बाद यहां एक स्थायी सिंह आबादी के पुनः स्थापित होने को दर्शाता है। आकलन से संबंधित शोध के अनुसार, सिंहों ने 2023 में बरडा क्षेत्र में पुनः निवास स्थापित किया था और 2025 के आकलन में वहां उनकी उपस्थिति दर्ज की गई।
- इसी प्रकार, मितियाला वन्यजीव अभयारण्य में भी विशेष रूप से मजबूत वृद्धि दर्ज की गई, जबकि जेतपुर और बाबरा-जसदण के आसपास नए अथवा उभरते हुए सिंह समूह भी देखे गए।
क्षेत्रीय रुझान
- उपलब्ध सामग्री के अनुसार, अमरेली जिला 257 सिंहों के साथ सबसे अधिक सिंहों वाला क्षेत्र रहा। हालांकि, सभी क्षेत्रों में वृद्धि दर्ज नहीं की गई। गिरनार वन्यजीव अभयारण्य और भावनगर तट सहित कुछ क्षेत्रों में मामूली गिरावट दर्ज की गई। इससे स्पष्ट होता है कि संरक्षण की सफलता का आकलन केवल कुल जनसंख्या के आधार पर नहीं, बल्कि पूरे परिदृश्य के स्तर पर किया जाना चाहिए।
जनसंख्या आकलन की पद्धति
- यह आकलन 10–13 मई 2025 के दौरान लगभग 35,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में किया गया, जिसमें 11 जिले और 58 तालुके शामिल थे। मुख्य क्षेत्रीय पद्धति प्रत्यक्ष बीट सत्यापन (Direct Beat Verification) थी, जिसे आधुनिक तकनीकी उपकरणों का समर्थन प्राप्त था।
- इस अभ्यास में हजारों कर्मियों को शामिल किया गया। उच्च-रिज़ॉल्यूशन कैमरे, कैमरा ट्रैप, GPS आधारित अवलोकन, GIS मैपिंग और ई-गुजफॉरेस्ट (e-GujForest) एप्लिकेशन ने आंकड़ों के संग्रह और सत्यापन को बेहतर बनाने में सहायता की।
- आकलन से संबंधित शोध प्रकाशन के अनुसार, 3,254 प्रशिक्षित कर्मियों को तैनात किया गया था तथा अलग-अलग सिंहों की पहचान और दोहरी गणना को रोकने के लिए विभिन्न तकनीकों का उपयोग किया गया।
संरक्षण का महत्व
- सिंहों की संख्या में वृद्धि दीर्घकालिक संरक्षण उपायों की सफलता को दर्शाती है, लेकिन इसके साथ नई चुनौतियां भी उत्पन्न होती हैं। जैसे-जैसे सिंहों की संख्या और उनका भौगोलिक क्षेत्र बढ़ रहा है, मानव–सिंह संघर्ष, रोग, सड़क एवं रेलवे से होने वाली मृत्यु, आवास विखंडन और आनुवंशिक संवेदनशीलता जैसे मुद्दों पर निरंतर ध्यान देने की आवश्यकता है।
- सैटेलाइट आबादी और वन्यजीव गलियारों का विस्तार इसलिए महत्वपूर्ण है। अधिक विस्तृत और विभिन्न क्षेत्रों में फैली आबादी एक ही क्षेत्र में अत्यधिक संकेंद्रण को कम कर सकती है, लेकिन इसके लिए इन आवासों का सुरक्षित और आपस में जुड़ा होना आवश्यक है।
आगे की राह
- भारत को प्रोजेक्ट लायन के माध्यम से प्राप्त उपलब्धियों को मजबूत करने, आवासीय संपर्क में सुधार करने, वन्यजीव गलियारों को सुदृढ़ करने, रोग निगरानी बनाए रखने तथा मानव–वन्यजीव संघर्ष को कम करने के प्रभावी उपाय विकसित करने की आवश्यकता है। बरडा जैसे वैकल्पिक आवासों का निर्माण और सुदृढ़ीकरण अधिक पारिस्थितिक सुरक्षा प्रदान कर सकता है।
- 16वां जनसंख्या आकलन केवल सिंहों की संख्या की गणना नहीं है। यह एक महत्वपूर्ण संरक्षण उपलब्धि का प्रमाण है और साथ ही जनसंख्या संरक्षण से परिदृश्य-स्तरीय संरक्षण की ओर बढ़ने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
- दीर्घकालिक उद्देश्य यह होना चाहिए कि बढ़ती सिंह आबादी के अनुरूप पर्याप्त आवास, शिकार-प्रजातियों की उपलब्धता, आनुवंशिक विविधता, समुदाय की भागीदारी तथा वैज्ञानिक रूप से प्रबंधित मानव–वन्यजीव सह-अस्तित्व सुनिश्चित किया जाए।
एशियाई सिंह के बारे में
| वैज्ञानिक नाम | Panthera leo persica |
| सामान्य नाम | एशियाई सिंह / भारतीय सिंह |
| वैश्विक वन्य आबादी | केवल भारत में पाई जाती है |
| भारत में प्राकृतिक क्षेत्र | गुजरात का सौराष्ट्र क्षेत्र |
| प्रमुख मुख्य परिदृश्य | गिर राष्ट्रीय उद्यान और गिर वन्यजीव अभयारण्य |
| प्रमुख सैटेलाइट क्षेत्र | मितियाला, गिरनार, तटीय क्षेत्र, अमरेली परिदृश्य और अन्य क्षेत्र |
| महत्वपूर्ण उभरता आवास | बरडा वन्यजीव अभयारण्य |
सिंह संरक्षण की प्रमुख पहल
| प्रोजेक्ट लायन | आवास प्रबंधन, रोग निगरानी, सामुदायिक भागीदारी और पशु चिकित्सा सहायता के माध्यम से एशियाई सिंहों का परिदृश्य-स्तरीय संरक्षण। |
| गिर संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क | एशियाई सिंहों की आबादी के लिए प्रमुख संरक्षित आवास उपलब्ध कराता है। |
| बरडा वन्यजीव अभयारण्य | सिंहों के भौगोलिक विस्तार को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण वैकल्पिक/द्वितीयक आवास के रूप में विकसित किया गया। |
| आवास सुधार | संरक्षित क्षेत्रों के भीतर और बाहर घासभूमि, शिकार-प्रजातियों की उपलब्धता तथा आवास की गुणवत्ता में सुधार। |
| वन्यजीव गलियारे | मुख्य और सैटेलाइट आबादी के बीच सुरक्षित आवागमन और प्रसार को सुगम बनाना। |
| सैटेलाइट आबादी रणनीति | पारंपरिक गिर परिदृश्य से बाहर सिंहों की आबादी स्थापित करने को प्रोत्साहित करना, जिससे एक ही क्षेत्र में अत्यधिक संकेंद्रण कम हो। |
| प्रत्यक्ष बीट सत्यापन | प्रत्यक्ष अवलोकन के माध्यम से व्यवस्थित क्षेत्रीय जनसंख्या आकलन। |
| ई-गुजफॉरेस्ट एप्लिकेशन | GPS और फोटोग्राफिक साक्ष्यों के साथ अवलोकनों की वास्तविक समय में रिकॉर्डिंग में सहायता। |
| कैमरा ट्रैप एवं उच्च-रिज़ॉल्यूशन कैमरे | अलग-अलग सिंहों की पहचान, निगरानी और सत्यापन में सहायता। |
| GIS आधारित मैपिंग | सिंहों के वितरण, आवागमन के पैटर्न और आवास उपयोग की निगरानी। |
| पूनम अवलोकन | गुजरात वन विभाग द्वारा सिंहों की निरंतर निगरानी के लिए किया जाने वाला अंतरिम निगरानी अभ्यास। |
| एशियाई सिंह संरक्षण परियोजना | वन्यजीव आवास विकास के लिए केंद्र प्रायोजित योजना के अंतर्गत केंद्र और राज्य की वित्तीय भागीदारी से समर्थित। |
| मानव–वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन | सिंहों की संख्या और उनके क्षेत्र के विस्तार के साथ बढ़ने वाले मानव–सिंह संघर्ष को कम करने के उपाय। |









