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बंगाल की उत्तरी खाड़ी के ऊपर असामान्य ओजोन वृद्धि

Tue 11 Aug, 2026

संदर्भ

वैज्ञानिकों ने बंगाल की उत्तरी खाड़ी के ऊपर लगभग 21–23 किमी की ऊँचाई पर समतापमंडलीय ओजोन की असामान्य रूप से सघन परत का पता लगाया है। यह ऊँचाई उस स्तर से काफी नीचे है, जहाँ सामान्यतः ओजोन की अधिकतम सांद्रता पाई जाती है। यह खोज NetRAD-ASMA 2024 शीतकालीन अभियान के दौरान सामने आई और वर्ष 2026 में Earth and Space Science पत्रिका में प्रकाशित हुई। यह अध्ययन इस बात की महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है कि वायुमंडलीय परिसंचरण किस प्रकार ओजोन का पुनर्वितरण कर सकता है और भारतीय उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्र में इसके ऊर्ध्वाधर वितरण को प्रभावित कर सकता है।

क्या देखा गया?

  • अध्ययन में 21–23 किमी के बीच ओजोन की एक द्वितीयक और असामान्य रूप से सघन परत का पता चला, जबकि समतापमंडल में ओजोन की मुख्य अधिकतम सांद्रता सामान्यतः 25–30 किमी की ऊँचाई पर पाई जाती है।
  • ओडिशा के बालासोर में ओजोन की अधिकतम सांद्रता 21.2–22.1 किमी की ऊँचाई के बीच लगभग 150 नैनोबार (nbar) तक पहुँच गई। यह सामान्य दिनों में दर्ज अधिकतम स्तर की तुलना में लगभग 50 nbar अधिक थी।
  • इस बढ़ी हुई ओजोन परत की मोटाई लगभग 2.1–2.4 किमी थी और यह 24 घंटे से अधिक समय तक बनी रही।
  • महत्वपूर्ण बात यह है कि यह घटना दिन और रात दोनों समय देखी गई। हालांकि, उपग्रह अवलोकनों में वृद्धि समान नहीं थी।
  • Aura-MLS ने दिन के समय लगभग 20–25 nbar और रात के समय 8–10 nbar की वृद्धि दर्ज की।
  • दोनों समय इस परत के बने रहने से संकेत मिलता है कि अल्पकालिक सूर्य-प्रेरित प्रकाश-रासायनिक उत्पादन इस घटना का प्रमुख कारण नहीं था।

यह खोज क्यों महत्वपूर्ण है?

  • वायुमंडल में ओजोन का निरंतर निर्माण, परिवहन और विनाश होता रहता है। समतापमंडलीय ओजोन परत एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करती है और हानिकारक पराबैंगनी-B (UV-B) विकिरण को अवशोषित करके जीव-जगत को अत्यधिक UV विकिरण से बचाती है।
  • यह खोज इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पता चलता है कि वायुमंडलीय गतिशीलता किसी स्थानीय क्षेत्र में ओजोन का महत्वपूर्ण पुनर्वितरण कर सकती है।
  • अध्ययन इसे बंगाल की उत्तरी खाड़ी के ऊपर स्थानीयकृत एवं गतिशील रूप से प्रेरित समतापमंडलीय ओजोन वृद्धि का पहला प्रायोगिक प्रमाण बताता है।
  • हालांकि, इसे वैश्विक स्तर पर ओजोन परत की पुनर्बहाली के प्रमाण के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह घटना स्थानीयकृत और अस्थायी ओजोन पुनर्वितरण एवं वृद्धि को दर्शाती है, न कि वैश्विक समतापमंडलीय ओजोन में स्थायी वृद्धि को।

वैज्ञानिक तंत्र

वैज्ञानिकों के अनुसार, इस घटना का मुख्य कारण क्षैतिज अभिवहन (Horizontal Advection) और समतापमंडलीय वायु का ऊर्ध्वाधर संपीड़न (Vertical Compression) है।

  • सबसे पहले, मध्य-अक्षांशों से ओजोन-समृद्ध वायु क्षैतिज रूप से बंगाल की उत्तरी खाड़ी की ओर पहुँची। Potential Vorticity Analysis ने इस वायुराशि के संचरण का समर्थन किया।
  • इसके बाद, रडार अवलोकनों से क्षेत्र के निकट निचले समतापमंडल में लगातार नीचे की ओर वायु गति (Subsidence) का संकेत मिला।
  • इस नीचे की ओर गति के कारण वायुराशि का ऊर्ध्वाधर संपीड़न हुआ, जिसके परिणामस्वरूप स्थानीय क्षेत्र में ओजोन की सांद्रता बढ़ गई।

मुख्य तंत्र

 

मध्य-अक्षांशों की ओजोन-समृद्ध वायु → क्षैतिज अभिवहन → नीचे की ओर गति/अवसादन → वायु का संपीड़न → स्थानीयकृत ओजोन वृद्धि

यह खोज समतापमंडलीय ओजोन को समझने में केवल प्रकाश-रासायनिक प्रक्रियाओं के बजाय वायुमंडलीय गतिशीलता और परिसंचरण की भूमिका को भी रेखांकित करती है।

NetRAD-ASMA अभियान

  • यह अवलोकन Network of ST/MST (Stratosphere-Troposphere/Mesosphere-Stratosphere-Troposphere) Radars and Balloon-borne Measurement Campaigns of the Asian Summer Monsoon Anticyclone (NetRAD-ASMA) के अंतर्गत किया गया।
  • शीतकालीन अभियान 12–16 फरवरी 2024 के दौरान आयोजित किया गया, जिसमें बालासोर, ओडिशा को प्रमुख अवलोकन केंद्र बनाया गया।
  • यह स्थान महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बंगाल की उत्तरी खाड़ी के ऊपर होने वाले तीव्र गहरे संवहन (Deep Convection) वाले क्षेत्र के निकट स्थित है तथा शीतकालीन उपोष्णकटिबंधीय जेट (Subtropical Jet—STJ) से प्रभावित होता है।
  • अध्ययन में ओजोनसॉन्ड, रेडियोसॉन्ड, भूमि-आधारित ST/MST रडार तथा उपग्रह अवलोकनों सहित बहु-मंचीय वैज्ञानिक अवलोकन प्रणाली का प्रयोग किया गया।
  • रडार नेटवर्क में गडंकी, हरिंगहाटा, कोच्चि और नैनीताल स्थित केंद्र शामिल थे।
  • नैनीताल स्थित 206.5 MHz ST Radar, जिसका संचालन आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेज (ARIES) द्वारा किया जाता है, अभियान में प्रयुक्त महत्वपूर्ण स्वदेशी वैज्ञानिक उपकरणों में शामिल था।
  • अवलोकनों के समर्थन और सत्यापन के लिए NASA के Aura Microwave Limb Sounder (MLS) तथा भारत के INSAT-3DR से प्राप्त आँकड़ों का भी उपयोग किया गया।

बंगाल की उत्तरी खाड़ी ही क्यों?

  • बंगाल की उत्तरी खाड़ी वायुमंडलीय दृष्टि से एक गतिशील क्षेत्र है। यहाँ तीव्र गहरा संवहन होता है और यह महत्वपूर्ण वायुमंडलीय परिसंचरण प्रणालियों से प्रभावित रहता है।
  • अध्ययन में उपोष्णकटिबंधीय जेट तथा वायुमंडलीय परिवहन की भूमिका को भारतीय उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्र में ओजोन के क्षैतिज वितरण को नियंत्रित करने वाले महत्वपूर्ण कारकों के रूप में रेखांकित किया गया है।
  • इसलिए यह खोज समतापमंडल–क्षोभमंडल अंतःक्रिया, वायुमंडलीय परिवहन, ओजोन परिवर्तनशीलता और क्षेत्रीय वायुमंडलीय परिसंचरण को समझने के लिए व्यापक महत्व रखती है।

अच्छी ओजोन बनाम खराब ओजोन

विशेषता समतापमंडलीय ओजोन क्षोभमंडलीय ओजोन
स्थान समतापमंडल क्षोभमंडल
प्रकृति “अच्छी ओजोन” “खराब ओजोन”
मुख्य भूमिका हानिकारक UV विकिरण को अवशोषित करती है वायु प्रदूषक और ग्रीनहाउस गैस
निर्माण मुख्यतः ऑक्सीजन से संबंधित प्रकाश-रासायनिक प्रक्रियाओं द्वारा सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में NOx और VOCs की रासायनिक अभिक्रियाओं से द्वितीयक प्रदूषक के रूप में
पर्यावरणीय महत्व जीव-जगत को अत्यधिक UV विकिरण से बचाती है मानव स्वास्थ्य, वनस्पति और पारिस्थितिक तंत्र को नुकसान पहुँचा सकती है

 

व्यापक पर्यावरणीय महत्व

  • यह खोज निरंतर वायुमंडलीय निगरानी के महत्व को दर्शाती है।
  • ओजोन के वितरण में होने वाले परिवर्तन विकिरणीय संतुलन, वायुमंडलीय तापमान संरचना और क्षेत्रीय परिसंचरण को प्रभावित कर सकते हैं।
  • हालांकि, इस स्थानीय घटना के सटीक जलवायु प्रभावों को समझने के लिए आगे अधिक अवलोकनों और उच्च-रिजॉल्यूशन संख्यात्मक मॉडलिंग की आवश्यकता होगी।
  • शोधकर्ताओं ने यह निर्धारित करने के लिए अतिरिक्त प्रत्यक्ष स्थल-आधारित अवलोकनों (in-situ observations) और सिमुलेशन की आवश्यकता पर बल दिया है कि ऐसी घटनाएँ कितनी बार होती हैं और बड़े वायुमंडलीय तंत्रों के साथ इनकी क्या अंतःक्रिया होती है।

आगे की राह

  • भारत को भूमि-आधारित रडार, गुब्बारा-आधारित उपकरण, उपग्रह और संख्यात्मक मौसम एवं रसायन विज्ञान मॉडल को एकीकृत करते हुए वायुमंडलीय अवलोकन नेटवर्क को और मजबूत करना चाहिए।
  • दीर्घकालिक निगरानी से यह पता लगाने में सहायता मिलेगी कि बंगाल की खाड़ी के ऊपर इसी प्रकार की ओजोन वृद्धि की घटनाएँ बार-बार होती हैं या नहीं।
  • इससे समतापमंडल–क्षोभमंडल युग्मन (Stratosphere–Troposphere Coupling) तथा क्षेत्रीय वायुमंडलीय प्रक्रियाओं की बेहतर समझ विकसित होगी।
  • यह खोज मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल जैसे अंतरराष्ट्रीय ओजोन संरक्षण ढाँचों के अंतर्गत वैश्विक सहयोग बनाए रखने के महत्व को भी रेखांकित करती है, साथ ही प्राकृतिक वायुमंडलीय परिवर्तनशीलता को समझने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान को आगे बढ़ाने की आवश्यकता बताती है।

निष्कर्ष

  • बंगाल की उत्तरी खाड़ी के ऊपर ओजोन की असामान्य वृद्धि एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अवलोकन है, क्योंकि यह दर्शाता है कि वायुमंडलीय परिवहन और गतिशील प्रक्रियाएँ समतापमंडलीय ओजोन के पुनर्वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
  • 21–22 किमी की ऊँचाई पर लगभग 50 nbar की वृद्धि, 24 घंटे से अधिक समय तक इसकी मौजूदगी तथा मध्य-अक्षांशों से ओजोन-समृद्ध वायु के अभिवहन और निचले समतापमंडल में नीचे की ओर वायु गति के प्रमाण इस घटना को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बनाते हैं।
  • परीक्षा की दृष्टि से, यह विषय ओजोन रसायन, वायुमंडलीय परिसंचरण, समतापमंडल–क्षोभमंडल अंतःक्रिया, बंगाल की खाड़ी की जलवायु, वायुमंडलीय अवलोकन तकनीक तथा भारत की वैज्ञानिक क्षमता से जुड़ा महत्वपूर्ण करंट अफेयर्स टॉपिक है।
  • महत्वपूर्ण: इस घटना को वैश्विक ओजोन परत की पुनर्बहाली नहीं माना जाना चाहिए; यह मुख्यतः स्थानीयकृत एवं गतिशील रूप से प्रेरित ओजोन वृद्धि/पुनर्वितरण की घटना है।

 

ओजोन के बारे में

पैरामीटर तथ्य
रासायनिक सूत्र O₃
प्रकृति ऑक्सीजन का त्रिपरमाणुक अपररूप
कुल ओजोन स्तंभ की माप की इकाई डॉबसन इकाई (Dobson Unit—DU)
समतापमंडलीय ओजोन “अच्छी ओजोन”
क्षोभमंडलीय ओजोन “खराब ओजोन”
समतापमंडल में सामान्य अधिकतम ओजोन क्षेत्र लगभग 25–30 किमी
इस अध्ययन में असामान्य ओजोन परत लगभग 21–23 किमी
ओजोन का प्रमुख सुरक्षात्मक कार्य UV-B विकिरण का अवशोषण
विश्व ओजोन दिवस 16 सितंबर

 

वैश्विक ओजोन संरक्षण समझौते

समझौता/संशोधन वर्ष प्रमुख उद्देश्य
वियना कन्वेंशन 1985 ओजोन परत की सुरक्षा के लिए वैश्विक सहयोग का ढाँचा
मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल 1987 CFCs जैसे ओजोन-क्षयकारी पदार्थों (ODS) को चरणबद्ध समाप्त करना
किगाली संशोधन 2016 HFCs के वैश्विक उपयोग को चरणबद्ध रूप से कम करना; HFCs सीधे ओजोन क्षय नहीं करते, लेकिन शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस हैं

 

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