06 August, 2026
SC/ST आरक्षण संबंधी जनहित याचिका (PIL)
Fri 07 Aug, 2026
संदर्भ (Context)
अनुसूचित जातियों (SC) और अनुसूचित जनजातियों (ST) पर "क्रीमी लेयर" (Creamy Layer) सिद्धांत लागू करने को लेकर बहस एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय में एक शपथपत्र (Affidavit) दाखिल कर उन जनहित याचिकाओं (PILs) को खारिज करने का अनुरोध किया है, जिनमें SC/ST आरक्षण में आय-आधारित बहिष्करण (Income-based Exclusion) तथा उप-कोटा (Sub-Quota) लागू करने की मांग की गई है।
केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि SC/ST आरक्षण का आधार सदियों से चली आ रही अस्पृश्यता, जातिगत भेदभाव एवं सामाजिक बहिष्कार है, न कि आर्थिक पिछड़ापन। इसलिए केवल आर्थिक उन्नति होने से ऐतिहासिक सामाजिक कलंक समाप्त नहीं हो जाता और न ही इससे संवैधानिक आरक्षण का अधिकार समाप्त किया जा सकता है।
पृष्ठभूमि
- भारत में सकारात्मक भेदभाव (Affirmative Action) अथवा आरक्षण की अवधारणा संविधान में औपचारिक समानता (Formal Equality) के बजाय वास्तविक/सार्थक समानता (Substantive Equality) स्थापित करने के उद्देश्य से शामिल की गई है।
- इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ (1992) के ऐतिहासिक निर्णय के बाद क्रीमी लेयर सिद्धांत अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) पर लागू किया गया, किंतु SC/ST पर इसे लागू करने का प्रश्न लंबे समय से संवैधानिक एवं न्यायिक बहस का विषय बना हुआ है।
- अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय सहित कई याचिकाकर्ताओं ने जनहित याचिकाएँ दायर कर यह मांग की कि आर्थिक रूप से संपन्न SC/ST परिवारों को आरक्षण से बाहर रखा जाए, ताकि लाभ वास्तव में सबसे वंचित वर्गों तक पहुँच सके।
समाचार में क्यों है?
केंद्र सरकार ने हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय में एक शपथपत्र दाखिल कर निम्नलिखित मांगों का विरोध किया—
- SC/ST पर क्रीमी लेयर सिद्धांत लागू करना।
- SC/ST आरक्षण के भीतर आय-आधारित उप-कोटा लागू करना।
- आरक्षण के लिए आर्थिक पात्रता (Income Ceiling) निर्धारित करना।
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि SC/ST आरक्षण का उद्देश्य ऐतिहासिक सामाजिक भेदभाव का निवारण करना है, न कि गरीबी दूर करना। इसलिए आर्थिक उन्नति होने से जातिगत भेदभाव समाप्त नहीं होता और न ही आरक्षण का संवैधानिक आधार समाप्त होता है।
सरकार के प्रमुख तर्क (Government's Major Arguments)
1. आरक्षण का आधार ऐतिहासिक अन्याय है
सरकार ने कहा कि SC एवं ST समुदायों की पहचान ऐतिहासिक उत्पीड़न, अस्पृश्यता, सामाजिक बहिष्कार एवं संरचनात्मक भेदभाव के आधार पर की गई है, न कि केवल आर्थिक गरीबी के आधार पर।
2. आर्थिक उन्नति सामाजिक कलंक समाप्त नहीं करती
शपथपत्र में कहा गया कि आर्थिक रूप से संपन्न होने के बावजूद SC/ST समुदाय के अनेक लोग आज भी जातिगत भेदभाव और सामाजिक पूर्वाग्रह का सामना करते हैं।
3. क्रीमी लेयर केवल OBC के लिए है
सरकार के अनुसार क्रीमी लेयर सिद्धांत न्यायिक व्याख्या के माध्यम से विशेष रूप से अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए विकसित किया गया था तथा इसे संवैधानिक रूप से SC/ST पर लागू करने का कोई प्रावधान नहीं है।
4. संसद को विशेष अधिकार प्राप्त है
अनुच्छेद 341(2) एवं 342(2) के अनुसार केवल संसद को अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों की सूची में संशोधन करने का अधिकार है। अतः आरक्षण नीति में परिवर्तन विधायिका का विषय है, न कि न्यायालय का।
5. कल्याणकारी योजनाओं में पहले से आय-आधारित मानदंड लागू हैं
सरकार ने कहा कि यद्यपि आरक्षण में आय सीमा लागू नहीं है, लेकिन SC/ST के लिए संचालित अनेक कल्याणकारी एवं विकास योजनाओं में पहले से आय-आधारित पात्रता (Means Test) लागू है ताकि लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुँचे।
संवैधानिक ढांचा (Constitutional Framework)
भारत की आरक्षण व्यवस्था निम्नलिखित संवैधानिक प्रावधानों पर आधारित है—
- अनुच्छेद 14 – समानता का अधिकार एवं युक्तिसंगत वर्गीकरण।
- अनुच्छेद 15(4) – SC, ST एवं सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों (SEBC) के उत्थान हेतु विशेष प्रावधान।
- अनुच्छेद 15(5) – शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण।
- अनुच्छेद 16(4) – सरकारी सेवाओं में आरक्षण।
- अनुच्छेद 16(4A) – SC/ST के लिए पदोन्नति में आरक्षण।
- अनुच्छेद 16(4B) – रिक्त आरक्षित पदों को आगे ले जाने (Carry Forward) का प्रावधान।
- अनुच्छेद 341 – अनुसूचित जातियों की अधिसूचना।
- अनुच्छेद 342 – अनुसूचित जनजातियों की अधिसूचना।
महत्वपूर्ण सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय
| ऐतिहासिक निर्णय | वर्ष | मुख्य महत्व |
| इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ | 1992 | OBC के लिए क्रीमी लेयर सिद्धांत लागू किया तथा कुल आरक्षण की सीमा 50% निर्धारित की। |
| एम. नागराज बनाम भारत संघ | 2006 | SC/ST के पदोन्नति में आरक्षण को संवैधानिक शर्तों के साथ वैध ठहराया। |
| अशोक कुमार ठाकुर बनाम भारत संघ | 2008 | स्पष्ट किया कि क्रीमी लेयर सिद्धांत SC/ST पर लागू नहीं होता। |
| जर्नैल सिंह बनाम लक्ष्मी नारायण गुप्ता | 2018 | SC/ST पदोन्नति के संदर्भ में क्रीमी लेयर सिद्धांत पर विचार किया ताकि आरक्षण का लाभ सीमित वर्ग तक न सिमटे। |
| पंजाब राज्य बनाम दविंदर सिंह | 2024 | सात-न्यायाधीशीय संविधान पीठ ने राज्यों को SC/ST के भीतर उप-वर्गीकरण (Sub-classification) की अनुमति दी। |
महत्त्व (Significance)
- सरकार का यह रुख संविधान की उस मूल भावना को मजबूत करता है कि आरक्षण सामाजिक न्याय का साधन है, गरीबी उन्मूलन का कार्यक्रम नहीं।
- इसका उद्देश्य आय की परवाह किए बिना उन समुदायों को संरक्षण देना है जो आज भी जातिगत भेदभाव का सामना कर रहे हैं।
- सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि आरक्षण नीति में सुधार संसद द्वारा किया जाना चाहिए, न कि न्यायिक हस्तक्षेप के माध्यम से।
चुनौतियाँ (Challenges)
सरकार के रुख के बावजूद कई महत्वपूर्ण प्रश्न बने हुए हैं—
- आरक्षण का लाभ अपेक्षाकृत समृद्ध SC/ST परिवारों तक सीमित होने की आशंका।
- सबसे अधिक वंचित उप-समूहों तक लाभ पहुँचाने की मांग।
- सामाजिक न्याय एवं आर्थिक समानता के बीच संतुलन।
- न्यायिक निर्णयों एवं संवैधानिक मूल भावना के बीच सामंजस्य स्थापित करना।
- प्रतिनिधित्व एवं सामाजिक वंचना पर अद्यतन आँकड़ों की आवश्यकता।
आगे की राह (Way Forward)
- इस बहस से स्पष्ट होता है कि भविष्य की नीतियाँ तथ्य-आधारित (Evidence-based) होनी चाहिए।
- समय-समय पर सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण कर वास्तविक लाभार्थियों की पहचान की जानी चाहिए।
- कल्याणकारी योजनाओं को अधिक लक्षित बनाया जाए तथा शिक्षा एवं रोजगार के अवसरों का विस्तार किया जाए।
- किसी भी सुधार को व्यापक संसदीय विमर्श के बाद लागू किया जाए, ताकि सामाजिक न्याय की मूल भावना अक्षुण्ण रहे।
निष्कर्ष (Conclusion)
- केंद्र सरकार के शपथपत्र ने पुनः स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण का उद्देश्य आर्थिक गरीबी नहीं, बल्कि सदियों पुराने जातिगत भेदभाव और सामाजिक अन्याय का निवारण करना है।
- SC/ST पर क्रीमी लेयर सिद्धांत लागू करने का विरोध कर सरकार ने सार्थक समानता (Substantive Equality) एवं सामाजिक न्याय की संवैधानिक अवधारणा का समर्थन किया है।
- आरक्षण के लाभों के समान वितरण पर बहस जारी है, और यह विषय भारतीय संविधान, शासन व्यवस्था तथा सामाजिक न्याय से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण समकालीन मुद्दों में से एक बना हुआ है।
आरक्षण से संबंधित प्रमुख संवैधानिक प्रावधान
| अनुच्छेद | प्रावधान |
| अनुच्छेद 14 | समानता का अधिकार |
| अनुच्छेद 15(4) | SC, ST एवं SEBC के लिए विशेष प्रावधान |
| अनुच्छेद 15(5) | शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण |
| अनुच्छेद 15(6) | आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 10% आरक्षण |
| अनुच्छेद 16(4) | सरकारी सेवाओं में आरक्षण |
| अनुच्छेद 16(4A) | SC/ST के लिए पदोन्नति में आरक्षण |
| अनुच्छेद 16(4B) | रिक्त आरक्षित पदों को आगे ले जाने का प्रावधान |
| अनुच्छेद 16(6) | सरकारी नौकरियों में EWS आरक्षण |
| अनुच्छेद 341 | अनुसूचित जातियों की अधिसूचना |
| अनुच्छेद 342 | अनुसूचित जनजातियों की अधिसूचना |
| अनुच्छेद 330 | लोकसभा में SC/ST के लिए आरक्षण |
| अनुच्छेद 332 | राज्य विधानसभाओं में SC/ST के लिए आरक्षण |
| अनुच्छेद 335 | लोक सेवाओं में SC/ST के दावों पर विचार |
भारत में आरक्षण के प्रकार
| प्रकार | अर्थ | उदाहरण |
| ऊर्ध्वाधर (Vertical) आरक्षण | विशिष्ट सामाजिक वर्गों के लिए आरक्षण | SC, ST, OBC, EWS |
| क्षैतिज (Horizontal) आरक्षण | सभी ऊर्ध्वाधर वर्गों के भीतर लागू आरक्षण | महिलाएँ, दिव्यांगजन (PwBD), भूतपूर्व सैनिक |
महत्वपूर्ण तथ्य
| विषय | विवरण |
| SC/OBC के लिए नोडल मंत्रालय | सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय |
| ST के लिए नोडल मंत्रालय | जनजातीय कार्य मंत्रालय |
| क्रीमी लेयर लागू | मुख्यतः OBC पर |
| वर्तमान OBC क्रीमी लेयर आय सीमा | ₹8 लाख प्रति वर्ष |
| EWS आय सीमा | ₹8 लाख प्रति वर्ष |
| आरक्षण का उद्देश्य | सामाजिक न्याय एवं सार्थक समानता |
| संवैधानिक दर्शन | सकारात्मक भेदभाव (Affirmative Action) |
| वर्तमान मुद्दा | सरकार ने SC/ST पर क्रीमी लेयर एवं आय-आधारित सीमा लागू करने का विरोध किया |









