06 August, 2026
गोबरधन: राष्ट्रीय परिपत्र जैव-ऊर्जा योजना
Thu 06 Aug, 2026
संदर्भ (Context)
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गोबरधन (GOBARdhan): राष्ट्रीय परिपत्र जैव-ऊर्जा योजना को ₹23,731 करोड़ के कुल वित्तीय परिव्यय के साथ 10 वर्षों (वित्त वर्ष 2026–27 से 2035–36) के लिए स्वीकृति प्रदान की है। इस योजना का उद्देश्य भारत में उपलब्ध विशाल जैविक अपशिष्ट (Organic Waste) को स्वच्छ ऊर्जा में परिवर्तित करना, ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ करना, जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करना तथा परिपत्र अर्थव्यवस्था (Circular Economy) को बढ़ावा देना है। यह योजना विभिन्न जैव-ऊर्जा पहलों को एकीकृत कर संपीड़ित जैव गैस (Compressed Biogas - CBG) के उत्पादन को कई गुना बढ़ाने तथा भारत के जलवायु लक्ष्यों, अपशिष्ट प्रबंधन और सतत कृषि को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
पृष्ठभूमि
भारत में प्रतिवर्ष कृषि अवशेष, गोबर, नगरपालिका ठोस अपशिष्ट, खाद्य अपशिष्ट, सीवेज स्लज तथा औद्योगिक जैविक अपशिष्ट की विशाल मात्रा उत्पन्न होती है। इनका अधिकांश भाग या तो अनुपयोगी रह जाता है अथवा खुले में जलाया या फेंका जाता है, जिससे पर्यावरण प्रदूषण तथा ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में वृद्धि होती है।
इन जैविक संसाधनों की आर्थिक क्षमता को ध्यान में रखते हुए सरकार ने गोबरधन (Galvanizing Organic Bio-Agro Resources Dhan) योजना प्रारम्भ की है, जिसका उद्देश्य जैविक अपशिष्ट को स्वच्छ ऊर्जा और जैविक उर्वरक में परिवर्तित करना है। यह पहल "Waste-to-Wealth", ऊर्जा सुरक्षा, परिपत्र अर्थव्यवस्था तथा सतत ग्रामीण विकास की अवधारणा को सशक्त बनाती है।
यह चर्चा में क्यों है?
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में ₹23,731 करोड़ की लागत से राष्ट्रीय परिपत्र जैव-ऊर्जा योजना (GOBARdhan) को मंजूरी दी है।
- इस योजना के अंतर्गत SATAT पहल तथा फर्मेंटेड ऑर्गेनिक मैन्योर (FOM) हेतु मार्केट डेवलपमेंट असिस्टेंस (MDA) जैसी विभिन्न योजनाओं को एकीकृत किया गया है।
- इसमें निश्चित मूल्य व्यवस्था, CBG ब्लेंडिंग दायित्व, वित्तीय सहायता, पाइपलाइन अवसंरचना तथा ऋण गारंटी जैसी व्यवस्थाएँ शामिल हैं, जिससे भारत के CBG पारिस्थितिकी तंत्र का तीव्र विकास होगा।
योजना की प्रमुख विशेषताएँ (Key Features of the Scheme)
इस योजना का क्रियान्वयन पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) द्वारा 10 वर्षों तक किया जाएगा।
मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—
- कुल वित्तीय परिव्यय: ₹23,731 करोड़।
- क्रियान्वयन अवधि: वित्त वर्ष 2026–27 से 2035–36।
- मुख्य उद्देश्य: घरेलू संपीड़ित जैव गैस (CBG) उत्पादन को लगभग 10 गुना बढ़ाना।
- रोजगार सृजन: लगभग 1.5 लाख ग्रामीण रोजगार उत्पन्न होने का अनुमान।
- एकीकृत मंच: संपूर्ण CBG मूल्य श्रृंखला (Value Chain) से संबंधित विभिन्न जैव-ऊर्जा पहलों का एकीकरण।
योजना छह प्रमुख रणनीतिक स्तंभों पर आधारित है—
- प्रशासित मूल्य निर्धारण प्रणाली: CBG के लिए ₹2,110 प्रति MMBTU का निश्चित खरीद मूल्य 10 वर्षों तक।
- अनिवार्य CBG मिश्रण: वित्त वर्ष 2026–27 में 3%, 2027–28 में 4% तथा 2028–29 से 5% मिश्रण अनिवार्य।
- पूंजीगत सहायता: प्रति टन प्रतिदिन (TPD) क्षमता पर अधिकतम ₹2 करोड़ तक वित्तीय सहायता।
- पाइपलाइन अवसंरचना: ग्रामीण बायोगैस संयंत्रों को गैस वितरण नेटवर्क से जोड़ने हेतु सहायता।
- क्रेडिट गारंटी तंत्र: MSMEs एवं ग्रामीण उद्यमियों के लिए ऋण जोखिम में कमी।
- इकोसिस्टम चैलेंज फंड: जिला स्तरीय योजना निर्माण, क्षमता विकास तथा परियोजना प्रोत्साहन।
फीडस्टॉक एवं जैव-ऊर्जा उत्पादन (Feedstock and Bioenergy Production)
योजना के अंतर्गत निम्न जैविक संसाधनों का उपयोग किया जाएगा—
- कृषि अवशेष
- गोबर
- नगरपालिका जैविक अपशिष्ट
- चीनी मिलों का प्रेसमड
- सीवेज स्लज
- खाद्य अपशिष्ट
इन जैविक पदार्थों से संपीड़ित जैव गैस (CBG) का उत्पादन किया जाएगा, जिसमें 90% से अधिक मीथेन होती है तथा यह CNG का स्वच्छ विकल्प है।
इस प्रक्रिया से फर्मेंटेड ऑर्गेनिक मैन्योर (FOM) भी प्राप्त होगा, जो मृदा उर्वरता बढ़ाने तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में सहायक होगा।
महत्त्व
गोबरधन योजना भारत को परिपत्र जैव-अर्थव्यवस्था (Circular Bioeconomy) की दिशा में आगे बढ़ाने वाली एक महत्वपूर्ण पहल है।
इसके प्रमुख लाभ—
- आयातित जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता में कमी।
- जैविक अपशिष्ट का वैज्ञानिक प्रबंधन।
- पराली जलाने तथा मीथेन उत्सर्जन में कमी।
- नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा।
- किसानों की आय में अतिरिक्त वृद्धि।
- ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार एवं उद्यमिता को प्रोत्साहन।
- जैविक उर्वरकों के माध्यम से सतत कृषि को बढ़ावा।
- पेरिस समझौते के अंतर्गत भारत की राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs) की प्राप्ति में सहायता।
यह योजना ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में भी सहायक होगी।
चुनौतियाँ (Challenges)
योजना के सफल क्रियान्वयन में कुछ प्रमुख चुनौतियाँ हैं—
- जैव-ऊर्जा संयंत्रों हेतु उच्च पूंजी निवेश।
- बायोमास का कुशल संग्रहण एवं परिवहन।
- नियमित फीडस्टॉक की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
- CBG संयंत्रों का तकनीकी रख-रखाव।
- पर्याप्त गैस पाइपलाइन अवसंरचना का विकास।
- किसानों एवं ग्रामीण उद्यमियों में जागरूकता बढ़ाना।
- फर्मेंटेड ऑर्गेनिक मैन्योर के लिए स्थायी बाजार विकसित करना।
इन चुनौतियों के समाधान हेतु संस्थागत समन्वय एवं क्षमता निर्माण अत्यंत आवश्यक होगा।
आगे की राह (Way Forward)
- सरकार को विकेन्द्रीकृत अपशिष्ट संग्रहण प्रणाली को सुदृढ़ करना, गैस पाइपलाइन अवसंरचना का विस्तार करना, निजी निवेश को प्रोत्साहित करना तथा जैव-ऊर्जा संबंधी तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा देना चाहिए।
- वित्तीय सहायता, सरल ऋण सुविधा तथा केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, शहरी निकायों एवं किसानों के बीच प्रभावी समन्वय के माध्यम से देशभर में जैव-ऊर्जा उत्पादन का विस्तार किया जा सकता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
- गोबरधन: राष्ट्रीय परिपत्र जैव-ऊर्जा योजना भारत की अपशिष्ट प्रबंधन एवं नवीकरणीय ऊर्जा नीति में एक महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी पहल है।
- कृषि एवं शहरी जैविक अपशिष्ट को स्वच्छ ईंधन तथा जैविक उर्वरक में परिवर्तित कर यह योजना सतत विकास, ग्रामीण समृद्धि, ऊर्जा सुरक्षा तथा पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देती है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन से भारत की स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण प्रक्रिया को गति मिलेगी तथा रोजगार सृजन, प्रदूषण नियंत्रण एवं परिपत्र अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाया जा सकेगा।
राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति (National Policy on Biofuels)
| नीति का नाम | राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति (National Policy on Biofuels) |
| प्रारंभ | 2018 |
| संशोधन | 2022 |
| नोडल मंत्रालय | पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) |
| मुख्य उद्देश्य | जैव ईंधनों को बढ़ावा देना, कच्चे तेल के आयात में कमी, ऊर्जा सुरक्षा तथा उत्सर्जन में कमी |
| मुख्य जैव ईंधन | बायोएथेनॉल, बायोडीज़ल, संपीड़ित जैव गैस (CBG), सतत विमानन ईंधन (SAF), उन्नत जैव ईंधन |
| जैव ईंधन की पीढ़ियाँ | 1G (गन्ना एवं खाद्यान्न), 2G (कृषि अवशेष), 3G (शैवाल), 4G (आनुवंशिक रूप से संशोधित फीडस्टॉक) |
| एथेनॉल मिश्रण लक्ष्य | पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिश्रण (EBP) |
| स्वीकृत फीडस्टॉक | गन्ने का रस, बी-हैवी एवं सी-हैवी शीरा, क्षतिग्रस्त खाद्यान्न, मक्का, अधिशेष चावल, कृषि अवशेष, बाँस, नगरपालिका अपशिष्ट आदि |
| मुख्य उद्देश्य | ऊर्जा सुरक्षा, किसानों की आय में वृद्धि, Waste-to-Wealth, रोजगार सृजन, जलवायु परिवर्तन का शमन |
| समर्थक मिशन | SATAT, GOBARdhan, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम |
जैव ईंधन एवं जैव-ऊर्जा से संबंधित प्रमुख सरकारी पहलें
| पहल | प्रारंभ वर्ष | नोडल मंत्रालय/एजेंसी |
| राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति | 2018 | पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय |
| राष्ट्रीय जैव-ऊर्जा कार्यक्रम | 2022 | नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) |
| SATAT (सस्टेनेबल अल्टरनेटिव टुवर्ड्स अफोर्डेबल ट्रांसपोर्टेशन) | 2018 | पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय |
| गोबरधन योजना | 2018 | पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, जल शक्ति मंत्रालय |
| गोबरधन: राष्ट्रीय परिपत्र जैव-ऊर्जा योजना | 2026 | पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय |
| एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम | 2003 | पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय |
| प्रधानमंत्री जी-वन (JI-VAN) योजना | 2019 | पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय |
| अपशिष्ट से ऊर्जा (Waste-to-Energy) कार्यक्रम | 2022 | नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) |
| राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन | 2023 | नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय |
| फर्मेंटेड ऑर्गेनिक मैन्योर (FOM) हेतु मार्केट डेवलपमेंट असिस्टेंस (MDA) | 2023 | पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय |









