06 August, 2026
रेपो दर (Repo Rate) 5.25% पर अपरिवर्तित
Wed 05 Aug, 2026
संदर्भ
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee-MPC) ने 5 अगस्त 2026 को आयोजित अपनी 62वीं मौद्रिक नीति बैठक में सर्वसम्मति से नीतिगत रेपो दर (Repo Rate) को 5.25% पर यथावत रखने तथा "तटस्थ (Neutral)" मौद्रिक नीति रुख को बनाए रखने का निर्णय लिया। यह निर्णय वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, कच्चे तेल की अस्थिर कीमतों तथा घरेलू व्यापक आर्थिक (Macroeconomic) स्थिरता के बीच आर्थिक विकास एवं मुद्रास्फीति के संतुलन को बनाए रखने के RBI के सतर्क दृष्टिकोण को दर्शाता है।
पृष्ठभूमि
- मौद्रिक नीति समिति (MPC) भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के अंतर्गत गठित एक वैधानिक निकाय (Statutory Body) है, जिसका प्रमुख उद्देश्य मूल्य स्थिरता (Price Stability) बनाए रखते हुए आर्थिक विकास (Economic Growth) को समर्थन देना है।
- समिति में छह सदस्य होते हैं, जो मुद्रास्फीति, GDP वृद्धि, तरलता (Liquidity), वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों तथा वित्तीय स्थिरता का आकलन कर नीतिगत ब्याज दरों का निर्धारण करते हैं।
- अगस्त 2026 की बैठक में समिति ने सर्वसम्मति से रेपो दर को अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया, जो बाहरी चुनौतियों के बावजूद भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति में विश्वास को दर्शाता है।
समाचार में क्यों?
- RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने सर्वसम्मति से रेपो दर को 5.25% पर यथावत रखा तथा तटस्थ (Neutral) नीति रुख को जारी रखा।
- यह निर्णय वैश्विक मुद्रास्फीति दबाव, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की अस्थिर कीमतों तथा एल-नीनो (El Niño) के कारण कृषि एवं ग्रामीण मांग पर पड़ने वाले प्रभाव की पृष्ठभूमि में लिया गया।
- RBI ने बदलती घरेलू एवं वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप नीतिगत लचीलापन बनाए रखने पर बल दिया।
मौद्रिक नीति की प्रमुख विशेषताएँ (Key Highlights of the Monetary Policy)
- रेपो दर (Repo Rate) को 5.25% पर यथावत रखा गया।
- स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) दर 5.00% पर बरकरार रखी गई।
- मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) दर तथा बैंक दर (Bank Rate) 5.50% पर यथावत रखी गई।
- RBI ने तटस्थ (Neutral) मौद्रिक नीति रुख बनाए रखा, जिससे भविष्य में मुद्रास्फीति एवं आर्थिक विकास की स्थिति के अनुसार नीतिगत निर्णय लेने में लचीलापन बना रहेगा।
- MPC ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वास्तविक GDP वृद्धि दर 6.7% रहने का अनुमान व्यक्त किया।
- जून 2026 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित मुद्रास्फीति 4.4% रही, जो RBI के लक्ष्य दायरे के भीतर है, किन्तु सतत निगरानी आवश्यक है।
- नीति में विशेष रूप से कृषि क्षेत्र में आपूर्ति-पक्षीय उपायों (Supply-side Measures) पर बल दिया गया ताकि कमजोर मानसून एवं एल-नीनो से उत्पन्न जोखिमों का सामना किया जा सके।
महत्त्व (Significance)
यह निर्णय व्यापक आर्थिक स्थिरता (Macroeconomic Stability) बनाए रखने तथा सतत आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने की RBI की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
रेपो दर में कोई परिवर्तन न होने से बैंकों, उद्योगों एवं उपभोक्ताओं के लिए उधारी लागत स्थिर रहती है, जिससे निवेश एवं ऋण वृद्धि को प्रोत्साहन मिलता है।
तटस्थ नीति रुख RBI को भविष्य की आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार ब्याज दरों में वृद्धि अथवा कमी करने का लचीलापन प्रदान करता है।
यह निर्णय वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच वित्तीय बाजारों में विश्वास एवं स्थिरता बनाए रखने में भी सहायक है।
चुनौतियाँ (Challenges)
मजबूत घरेलू आर्थिक स्थिति के बावजूद निम्नलिखित चुनौतियाँ बनी हुई हैं—
- पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता।
- एल-नीनो के कारण कमजोर मानसून, जिससे कृषि उत्पादन एवं ग्रामीण मांग प्रभावित हो सकती है।
- मुद्रास्फीति में पुनः वृद्धि तथा द्वितीयक मुद्रास्फीति (Second-round Inflation) का जोखिम।
- विकसित अर्थव्यवस्थाओं की मौद्रिक नीतियों में परिवर्तन से वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता।
- आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में व्यवधान, जिससे उत्पादन लागत एवं निर्यात प्रभावित हो सकते हैं।
आगे की राह (Way Forward)
- RBI ने वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम एवं कच्चे तेल की कीमतों की सतत निगरानी पर बल दिया है।
- कृषि क्षेत्र में फसल विविधीकरण, जल संरक्षण एवं जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।
- मुद्रास्फीति की प्रभावी निगरानी, निर्यात विविधीकरण, आधारभूत संरचना में निवेश तथा ग्रामीण मांग को प्रोत्साहित करने वाले उपाय आर्थिक मजबूती बनाए रखने में सहायक होंगे।
- बदलती घरेलू एवं वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप लचीली मौद्रिक नीति (Flexible Monetary Policy Framework) अपनाना आवश्यक होगा।
निष्कर्ष (Conclusion)
- अगस्त 2026 की मौद्रिक नीति RBI के उस संतुलित दृष्टिकोण को प्रदर्शित करती है जिसमें आर्थिक विकास और मूल्य स्थिरता दोनों को समान महत्व दिया गया है।
- रेपो दर को 5.25% पर बनाए रखने तथा तटस्थ नीति रुख जारी रखने से वित्तीय बाजारों को स्थिरता मिली है तथा भविष्य की आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक लचीलापन भी बना हुआ है।
- दीर्घकालिक आर्थिक विकास सुनिश्चित करने के लिए मौद्रिक नीति, राजकोषीय नीति एवं संरचनात्मक सुधारों के बीच प्रभावी समन्वय आवश्यक होगा।
RBI की नीतिगत दरें (अगस्त 2026)
| नीतिगत दर / साधन | दर | उद्देश्य / महत्त्व |
| रेपो दर (Repo Rate) | 5.25% | वह दर जिस पर RBI सरकारी प्रतिभूतियों के बदले वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक ऋण प्रदान करता है। |
| स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) दर | 5.00% | वह दर जिस पर बैंक बिना किसी प्रतिभूति के अपनी अतिरिक्त नकदी RBI के पास जमा करते हैं। |
| मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) दर | 5.50% | आपातकालीन स्थिति में बैंक अपनी SLR प्रतिभूतियों के विरुद्ध RBI से एक रात के लिए ऋण प्राप्त करते हैं। |
| बैंक दर (Bank Rate) | 5.50% | वह दीर्घकालिक दर जिस पर RBI बिना पुनर्खरीद (Repurchase Agreement) के वाणिज्यिक बैंकों को ऋण देता है। |
| मौद्रिक नीति रुख (Monetary Policy Stance) | तटस्थ (Neutral) | RBI आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार भविष्य में ब्याज दरों में वृद्धि अथवा कमी करने का लचीलापन बनाए रखता है। |
भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India - RBI)
मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee - MPC)
संवैधानिक एवं कानूनी ढाँचा (Constitutional & Legal Framework)
MPC की संरचना (Composition of MPC)
कार्यकाल (Tenure)
बैठकें (Meetings)
मतदान प्रक्रिया (Voting Procedure)
MPC के उद्देश्य (Objectives of MPC) मौद्रिक नीति समिति का उद्देश्य—
मुद्रास्फीति लक्ष्य (Inflation Target)
RBI की जवाबदेही (Accountability of RBI) यदि लगातार तीन तिमाहियों तक औसत CPI मुद्रास्फीति 2%–6% की निर्धारित सीमा से बाहर रहती है, तो RBI को—
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