चांदीपुरा वायरस
 
  • Mobile Menu
HOME BUY MAGAZINEnew course icon
LOG IN SIGN UP

Sign-Up IcanDon't Have an Account?


SIGN UP

 

Login Icon

Have an Account?


LOG IN
 

or
By clicking on Register, you are agreeing to our Terms & Conditions.
 
 
 

or
 
 




चांदीपुरा वायरस

Tue 04 Aug, 2026

संदर्भ

चांदीपुरा वायरस (CHPV) वर्ष 2026 के मानसून के दौरान गुजरात में तीव्र मस्तिष्कशोथ सिंड्रोम (Acute Encephalitis Syndrome-AES) के अनेक मामलों के सामने आने के बाद पुनः एक गंभीर जनस्वास्थ्य चुनौती के रूप में उभरा है। गुजरात स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 22 बच्चों की मृत्यु हो चुकी है, जबकि 184 संदिग्ध मामलों में से 35 बच्चों में संक्रमण की पुष्टि हुई है तथा कुछ नमूनों की जाँच अभी भी जारी है। इस प्रकोप ने एक बार फिर मानसून के दौरान फैलने वाले वेक्टर जनित (Vector-borne) वायरल रोगों, विशेषकर बच्चों में इनके बढ़ते खतरे को उजागर किया है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी, अस्पतालों की तैयारी, वेक्टर नियंत्रण तथा जन-जागरूकता अभियानों को तेज कर दिया है।

 

चांदीपुरा वायरस (CHPV) क्या है?

  • चांदीपुरा वायरस (CHPV) एक वेक्टर जनित (Vector-borne) आर्बोवायरस (Arbovirus) है, जो Rhabdoviridae कुल तथा Vesiculovirus वंश से संबंधित है। यह एकल-सूत्रीय (Single-stranded), ऋणात्मक-सेंस (Negative-sense) RNA वायरस है, जो मुख्य रूप से केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System-CNS) को प्रभावित करता है तथा तीव्र मस्तिष्कशोथ सिंड्रोम (Acute Encephalitis Syndrome-AES) अर्थात् मस्तिष्क की गंभीर सूजन उत्पन्न करता है।
  • इस वायरस का नाम महाराष्ट्र के चांदीपुरा गाँव के नाम पर रखा गया है, जहाँ इसे वर्ष 1965 में आईसीएमआर-राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (ICMR–National Institute of Virology-NIV), पुणे के वैज्ञानिकों द्वारा पहली बार पृथक किया गया था। इसके बाद से पश्चिमी एवं मध्य भारत के विभिन्न राज्यों में, विशेषकर मानसून ऋतु के दौरान, इसके छिटपुट प्रकोप दर्ज किए जाते रहे हैं।

 

संक्रमण एवं नैदानिक विशेषताएँ (Transmission and Clinical Features)

  • अन्य अनेक संक्रामक रोगों के विपरीत, चांदीपुरा वायरस प्रत्यक्ष मानव-से-मानव संपर्क से नहीं फैलता, बल्कि मुख्यतः संक्रमित मादा सैंडफ्लाई (Phlebotomine Sandflies) विशेषकर Phlebotomus papatasi एवं Phlebotomus argentipes के काटने से फैलता है।
  • कुछ मच्छर प्रजातियों तथा किलनियों (Ticks) को भी संभावित द्वितीयक वाहक माना गया है, किंतु भारत में सैंडफ्लाई ही इसका प्रमुख वाहक है। अब तक मानव-से-मानव संक्रमण का कोई प्रमाण नहीं मिला है, इसलिए मनुष्य को इस रोग का आकस्मिक (Accidental) अथवा Dead-end Host माना जाता है।
  • यह रोग मुख्यतः 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों, विशेषकर 9 माह से 14 वर्ष तक के बच्चों को प्रभावित करता है, क्योंकि उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली पूर्ण रूप से विकसित नहीं होती।
  • संक्रमण के बाद रोगियों में तेज़ बुखार, उल्टी, तीव्र सिरदर्द, चेतना में कमी, दौरे (Convulsions), मानसिक भ्रम तथा तीव्र न्यूरोलॉजिकल जटिलताएँ विकसित होती हैं।
  • गंभीर मामलों में यह संक्रमण मस्तिष्क की सूजन, बहु-अंग विफलता (Multiple Organ Failure), कोमा तथा मृत्यु का कारण बन सकता है। इस रोग की सबसे चिंताजनक विशेषता इसकी अत्यंत तीव्र प्रगति है, जिसमें लक्षण प्रारम्भ होने के 24–48 घंटों के भीतर मृत्यु भी हो सकती है। इसकी मृत्यु दर (Case Fatality Rate) लगभग 55% से 75% के बीच पाई गई है, जिससे यह भारत के सबसे घातक वायरल मस्तिष्कशोथ रोगों में से एक माना जाता है।

 

निदान, उपचार एवं रोकथाम (Diagnosis, Treatment and Prevention)

  • शीघ्र निदान मृत्यु दर को कम करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्रयोगशाला में इसकी पुष्टि मुख्यतः रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पॉलीमरेज़ चेन रिएक्शन (RT-PCR) तथा ELISA आधारित सीरोलॉजिकल परीक्षणों द्वारा की जाती है।
  • वर्तमान में चांदीपुरा वायरस के विरुद्ध कोई स्वीकृत वैक्सीन अथवा विशिष्ट एंटीवायरल दवा उपलब्ध नहीं है। इसलिए उपचार पूर्णतः सहायक (Supportive) होता है, जिसमें गहन चिकित्सा, दौरे नियंत्रित करना, शरीर में जल संतुलन बनाए रखना, श्वसन सहायता तथा मस्तिष्क की सूजन को नियंत्रित करना शामिल है।
  • चूँकि यह एक वेक्टर जनित रोग है, इसलिए इसकी रोकथाम मुख्यतः सैंडफ्लाई नियंत्रण पर निर्भर करती है। इंडोर रेजिडुअल स्प्रेइंग (Indoor Residual Spraying-IRS), सिंथेटिक पाइरेथ्रॉइड कीटनाशकों का उपयोग, पर्यावरणीय स्वच्छता, सैंडफ्लाई के प्रजनन स्थलों का उन्मूलन तथा बेहतर आवासीय परिस्थितियाँ संक्रमण को कम करने में प्रभावी हैं।
  • गुजरात में प्रकोप के दौरान राज्य सरकार ने पशुपालन क्षेत्रों में कीटनाशक छिड़काव, प्रभावित जिलों में निगरानी बढ़ाने तथा प्रमुख सिविल अस्पतालों में विशेष उपचार सुविधाएँ उपलब्ध कराने जैसे कदम उठाए।

 

वायरल रोगों की रोकथाम हेतु भारत सरकार की प्रमुख पहलें

भारत सरकार ने वायरल रोगों की रोकथाम, निगरानी एवं त्वरित नियंत्रण के लिए अनेक राष्ट्रीय कार्यक्रम संचालित किए हैं।

पहल क्रियान्वयन एजेंसी/मंत्रालय उद्देश्य
एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP) स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय महामारी संभावित रोगों की शीघ्र पहचान, निगरानी एवं त्वरित प्रतिक्रिया
राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय रोग निगरानी, प्रयोगशाला सहायता एवं महामारी जाँच
राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NVBDCP)* स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम एवं नियंत्रण
सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय टीके से रोके जा सकने वाले प्रमुख वायरल रोगों के विरुद्ध टीकाकरण
सघन मिशन इंद्रधनुष (IMI) स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं का पूर्ण टीकाकरण सुनिश्चित करना
एकीकृत स्वास्थ्य सूचना मंच (IHIP) राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) वास्तविक समय (Real-Time) डिजिटल रोग निगरानी एवं रिपोर्टिंग
वन हेल्थ (One Health) दृष्टिकोण विभिन्न मंत्रालय मानव, पशु एवं पर्यावरणीय स्वास्थ्य का समन्वित प्रबंधन

निष्कर्ष (Conclusion)

  • यद्यपि चांदीपुरा वायरस का भौगोलिक प्रसार अन्य अनेक वायरल रोगों की तुलना में सीमित है, फिर भी इसकी अत्यधिक मृत्यु दर तथा तेज़ न्यूरोलॉजिकल क्षति इसे एक गंभीर जनस्वास्थ्य चुनौती बनाती है।
  • वैक्सीन तथा विशिष्ट एंटीवायरल उपचार के अभाव में शीघ्र निदान, सहायक उपचार, वेक्टर नियंत्रण, पर्यावरणीय स्वच्छता एवं सतत रोग निगरानी ही इसके प्रभावी नियंत्रण के प्रमुख उपाय हैं। भविष्य में इस प्रकार के प्रकोपों को रोकने तथा बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत को रोग निगरानी तंत्र, प्रयोगशाला सुविधाओं तथा सामुदायिक जागरूकता को और अधिक सुदृढ़ करना होगा।

 

वायरस जनित प्रमुख रोग (Major Diseases Caused by Viruses)

रोग कारक वायरस
COVID-19 SARS-CoV-2
डेंगू डेंगू वायरस (DENV)
चिकनगुनिया चिकनगुनिया वायरस (CHIKV)
जापानी इंसेफेलाइटिस जापानी इंसेफेलाइटिस वायरस (JEV)
चांदीपुरा रोग चांदीपुरा वायरस (CHPV)
रेबीज़ रेबीज़ वायरस
खसरा (Measles) मीजल्स वायरस
गलसुआ (Mumps) मम्प्स वायरस
रुबेला रुबेला वायरस
चिकनपॉक्स वैरिसेला-जोस्टर वायरस (VZV)
पोलियो पोलियो वायरस
इन्फ्लुएंजा (फ्लू) इन्फ्लुएंजा वायरस
हेपेटाइटिस-A हेपेटाइटिस-A वायरस (HAV)
हेपेटाइटिस-B हेपेटाइटिस-B वायरस (HBV)
हेपेटाइटिस-C हेपेटाइटिस-C वायरस (HCV)
हेपेटाइटिस-E हे पेटाइटिस-E वायरस (HEV)

Latest Courses