28 July, 2026
प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (PM-SSY) को मंजूरी
Sat 01 Aug, 2026
संदर्भ :
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 31 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (PM-SSY) को मंजूरी प्रदान की।
मुख्य बिन्दु :
- योजना का नाम: प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (PM-SSY)
- उद्देश्य : देश के जलाशयों और अंतर्देशीय जल निकायों पर 5,000 मेगावाट (MW) क्षमता की फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक (FSPV) परियोजनाओं का विकास करना
- कुल वित्तीय परिव्यय : ₹5,070 करोड़
- लक्ष्य क्षमता: 5,000 MW (5 GW) फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक (FSPV) क्षमता
- एनर्जी स्टोरेज: न्यूनतम 2 घंटे की न्यूनतम भंडारण क्षमता वाले को-लोकेटेड एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (ESS) — कुल 10,000 MWh
- कार्यान्वयन अवधि: FY 2026-27 से FY 2030-31 (वित्तीय सहायता वितरण FY 2032-33 तक जारी रहेगा)
- कार्यान्वयन एजेंसी: नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) और भारतीय सौर ऊर्जा निगम (SECI)
योजना की प्रमुख विशेषताएं :
- प्रोजेक्ट कमीशनिंग सहायता: परियोजना के सफलतापूर्वक चालू (Commission) होने के बाद योग्य FSPV परियोजनाओं के लिए ₹1 करोड़ प्रति MW की CFA सहायता।
- संभाव्यता अध्ययन सहायता : बाथिमेट्री, हाइड्रोग्राफी और पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) हेतु प्रति परियोजना ₹50 लाख तक का अनुदान
तकनीकी एवं ढांचागत :
- फ्लोटिंग टेक्नोलॉजी: जलाशयों, बांधों, झीलों और औद्योगिक तालाबों के जल स्तर पर सौर पैनल स्थापित करना।
- ऊर्जा भंडारण : प्रत्येक परियोजना में कम से कम 2 घंटे का बैटरी स्टोरेज अनिवार्य किया गया है ताकि ग्रिड में बिजली की निर्बाध और स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित हो सके।
- राष्ट्रीय क्षमता विस्तार: वर्तमान में भारत में फ्लोटिंग सोलर की क्षमता लगभग 700 MW है, जिसे इस योजना से बढ़ाकर 5,700 MW तक पहुँचाने का लक्ष्य है
योजना की आवश्यकता एवं पृष्ठभूमि :
- अपार क्षमता : राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान (NISE) के मूल्यांकन के अनुसार, भारत में जलाशयों और अंतर्देशीय जल निकायों पर लगभग 102.18 GWp फ्लोटिंग सोलर की संभावित क्षमता मौजूद है।
- भूमि अधिग्रहण की समस्या: भारत में भूमि की कमी और भूमि अधिग्रहण में होने वाले विवाद/देरी को देखते हुए जल निकायों का उपयोग एक आदर्श विकल्प प्रदान करता है
- जलवायु प्रतिबद्धताएं (COP-26 & NDCs): वर्ष 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता प्राप्त करने और 2070 तक 'नेट-जीरो' उत्सर्जन हासिल करने के भारत के लक्ष्य को गति देना
महत्व एवं सम्भावित लाभ :
┌──► भूमि संरक्षण (Zero Land Friction)
├──► जल वाष्पीकरण में कमी (Water Conservation)
PM-SSY के लाभ ──────┼──► दक्षता में वृद्धि (Cooling Effect -> High Efficiency)
├──► ग्रिड स्थिरता (Energy Storage System)
└──► पर्यावरण व रोजगार (10M tonnes CO2 Cut | 17k Jobs)
- भूमि की बचत : कृषि या वाणिज्यिक भूमि का अधिग्रहण किए बिना विशाल सौर ऊर्जा क्षमता का विकास
- जल संरक्षण : जलाशयों के जल स्तर पर लगे सोलर पैनल पानी के सीधी धूप के संपर्क को कम करते हैं, जिससे जल वाष्पीकरण में भारी कमी आती है।
- उच्च पैनल दक्षता : पानी के प्राकृतिक शीतलन प्रभाव के कारण सौर पैनलों का तापमान नियंत्रित रहता है, जिससे उनकी बिजली उत्पादन दक्षता 5-10% तक बढ़ जाती है।
- ग्रिड स्थिरता एवं डिस्पैचेबिलिटी: ESS (ऊर्जा भंडारण) के जुड़ाव से पिक-अवर्स के दौरान भी बिजली की आपूर्ति की जा सकती है, जिससे ग्रिड फ्रीक्वेंसी संतुलित रहती है।
पर्यावरणीय एवं सामाजिक-आर्थिक प्रभाव:
- वार्षिक रूप से लगभग 10 मिलियन टन (1 करोड़ टन) CO₂ उत्सर्जन में कमी
- पूरे वैल्यू चेन में 16,000 से 17,000 प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार का सृजन
चुनौतियां एवं चिंताएं :
- उच्च प्रारंभिक लागत : फ्लोटिंग स्ट्रक्चर, एंकरिंग सिस्टम और एंटी-कोरोसिव सामग्रियों के कारण FSPV की स्थापना लागत ग्राउंड-माउंटेड सोलर प्लांट की तुलना में 20–30% अधिक होती है।
- जलीय पारिस्थितिकी पर प्रभाव: जल निकाय की सतह को ढकने से धूप और ऑक्सीजन का जल के भीतर प्रवेश सीमित हो सकता है, जिससे जलीय जीवन (मछलियां, प्लावक) प्रभावित हो सकते हैं।
- संचालन एवं रखरखाव (O&M) संबंधी जटिलताएं: जल स्तर के उतार-चढ़ाव, तूफान, क्षरण और बायो-फाउलिंग से पैनलों और एंकरिंग ग्रिड को नुकसान का जोखिम रहता है।
- पॉवर इवेक्यूएशन एवं ग्रिड कनेक्टिविटी: कई दूरस्थ जलाशयों के पास उच्च क्षमता वाली ट्रांसमिशन लाइनें उपलब्ध नहीं हैं, जिससे बुनियादी ढांचे पर अतिरिक्त खर्च होगा।
भारत में फ्लोटिंग सोलर की वर्तमान स्थिति और क्षमता :
- कुल क्षमता: वर्तमान (2026) में भारत की स्थापित फ्लोटिंग सौर ऊर्जा क्षमता मात्र ~700 मेगावाट (MW) या 0.7 गीगावाट (GW) है
- विकास की स्थिति: भारत के कुल स्थापित सौर ऊर्जा ग्रिड (जो ~100 GW के करीब है) की तुलना में यह हिस्सा बहुत छोटा है, जिसे बढ़ाने के लिए ही सरकार ने 'प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना' शुरू की है.
सर्वाधिक क्षमता वाले शीर्ष राज्य :
- महाराष्ट्र: 16.28 गीगावाट (GW)
- मध्य प्रदेश: 14.89 गीगावाट (GW)
- कर्नाटक: 13.69 गीगावाट (GW)
- ओडिशा: 12.81 गीगावाट (GW)
- तेलंगाना: 10.72 गीगावाट (GW)
भारत के प्रमुख फ्लोटिंग सोलर प्लांट :
| प्रोजेक्ट (Project Name) | राज्य (State) | क्षमता (Capacity) | मुख्य बिंदु (Key Facts) |
| ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर पार्क
|
मध्य प्रदेश (खंडवा जिला)
|
600 MW (कुल)
278 MW चालू
|
नर्मदा नदी के जलाशय पर स्थित यह भारत का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट है. |
| रामागुंडम FSPV | तेलंगाना | 100 MW | NTPC द्वारा थर्मल पावर प्लांट के जलाशय पर विकसित. |
| कायमकुलम FSPV | केरल | 92 MW | NTPC द्वारा निर्मित एक और प्रमुख चालू परियोजना. |
| सिम्हाद्रि FSPV | आंध्र प्रदेश | 25 MW | यह भी NTPC के जलाशय पर आधारित है. |









