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चीन का 'कृत्रिम सूर्य' एवं 582 टन सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट

Fri 31 Jul, 2026

संदर्भ :

  • चीन ने अपने 'आर्टिफिशियल सन' (कृत्रिम सूर्य) कार्यक्रम के तहत 582 टन वजन वाले विश्‍व के सबसे बड़े सुपरकंडक्टिंग फ्यूजन मैग्नेट का सफल निर्माण और परीक्षण पूरा किया।

मुख्‍य बिन्‍दु :

  • घटना: विश्व के सबसे बड़े सुपरकंडक्टिंग फ्यूजन मैग्नेट का निर्माण और परीक्षण।
  • वजन व आकार: 582 टन वजन तथा 21 मीटर लंबाई।
  • चुंबक का प्रकार: टोरोइडल-फील्ड सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट।
  • विकासकर्ता संस्था: चीनी विज्ञान अकादमी (CAS) के तहत प्लाज्मा भौतिकी संस्थान (ASIPP), हेफेई।
  • संबद्ध प्रोजेक्ट/रिएक्टर: BEST (Burning Plasma Experimental Superconducting Tokamak) (यह EAST यानी Experimental Advanced Superconducting Tokamak का अगला संस्करण है)।
  • उद्देश्य: 100 मिलियन डिग्री सेल्सियस (सूर्य के केंद्र से 6 गुना अधिक गर्म) से अधिक तापमान वाले प्लाज्मा को नियंत्रित/सीमित रखना।
  • लक्ष्य: वर्ष 2030 तक नियंत्रित नाभिकीय संलयन से बिजली उत्पादन का प्रदर्शन करना।
  • आकार और आकार: यह अंग्रेजी के 'D' अक्षर के आकार का एक टोरॉइडल-फील्ड चुंबक है, जिसकी लंबाई 21 मीटर और चौड़ाई 12 मीटर है। यह अंतरराष्ट्रीय फ्यूजन रिएक्टर (ITER) के लिए बने चुंबकों की तुलना में आयतन में 13% बड़ा है।
  • ITER: फ्रांस में स्थित 'इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर' (भारत भी इसका सदस्य देश है)
  • कार्यप्रणाली: यह लगभग -269°C (परम शून्य के करीब) के अत्यधिक निम्न तापमान पर 60 वर्षों तक काम करने और 100,000 एम्पीयर से अधिक विद्युत धारा प्रवाहित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है
  • नाभिकीय संलयन : सूर्य और तारों में ऊर्जा उत्पन्न करने वाली प्रक्रिया, जिसमें हल्के हाइड्रोजन परमाणु मिलकर भारी हीलियम परमाणु बनाते हैं।
  • टोकामाक : एक डोनट के आकार का उपकरण, जो चुंबकीय क्षेत्र का उपयोग करके प्लाज्मा को नियंत्रित करता है।
  • अतिचालकता : अत्यंत कम तापमान पर शून्य विद्युत प्रतिरोध की स्थिति, जिससे बिना ऊर्जा हानि के विशाल धारा प्रवाहित की जा सकती है।

नाभिकीय संलयन :

  • परिभाषा: जब दो या दो से अधिक हल्के नाभिक अत्यधिक उच्च ताप और दाब पर आपस में मिलकर एक भारी नाभिक का निर्माण करते हैं, तो उसे नाभिकीय संलयन कहते हैं।
  • ऊर्जा: इस प्रक्रिया में नाभिकीय विखंडन की तुलना में कई गुना अधिक ऊर्जा उत्सर्जित होती है।
  • समीकरण (उदाहरण): ²H (ड्यूटेरियम) + ³H (ट्रिटियम) → ⁴He (हीलियम) + ¹n (न्यूट्रॉन) + ऊर्जा

ब्रह्मांड में ऊर्जा का स्रोत :

  • सूर्य और तारे: सूर्य और ब्रह्मांड के अन्य तारों में ऊर्जा का मुख्य स्रोत नाभिकीय संलयन ही है।
  • प्रक्रिया: सूर्य के केंद्र में लगातार हाइड्रोजन के नाभिक आपस में संलयित होकर हीलियम बनाते रहते हैं, जिससे असीमित प्रकाश और ऊष्मा निकलती है।

हाइड्रोजन बम :

  • सिद्धांत: हाइड्रोजन बम पूरी तरह से अनियंत्रित नाभिकीय संलयन (Uncontrolled Nuclear Fusion) के सिद्धांत पर काम करता है।
  • खोज: हाइड्रोजन बम का आविष्कार 1952 में एडवर्ड टेलर ने किया था।
  • घातकता: यह परमाणु बम से हजारों गुना अधिक शक्तिशाली और विनाशकारी होता है।
  • विशेष नोट: संलयन अभिक्रिया शुरू करने के लिए लगभग 10⁷ K (केल्विन) के बहुत उच्च तापमान की आवश्यकता होती है। इसलिए, हाइड्रोजन बम के भीतर विस्फोट की शुरुआत करने के लिए पहले एक छोटा परमाणु बम (विखंडन आधारित) फोड़ा जाता है

नाभिकीय विखंडन :

  • परिभाषा: जब एक भारी नाभिक पर न्यूट्रॉन की बौछार की जाती है, तो वह दो या दो से अधिक हल्के नाभिकों में टूट जाता है।
  • ऊर्जा: इस प्रक्रिया में अत्यधिक मात्रा में ऊर्जा और कुछ नए न्यूट्रॉन उत्सर्जित होते हैं।
  • खोज: इसकी खोज 1938 में ऑटो हान और फ्रिट्ज स्ट्रॉसमैन

मुख्य ईंधन :

  • यूरेनियम-235 (²³⁵U): यह सबसे मुख्य और प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला विखंडनीय ईंधन है।
  • प्लूटोनियम-239 (²³⁹Pu): यह एक कृत्रिम ईंधन है जो रिएक्टरों में तैयार होता है।

श्रृंखला अभिक्रिया :

  • विखंडन के बाद निकलने वाले न्यूट्रॉन अन्य नाभिकों को तोड़ते हैं, जिससे एक 'चेन' बन जाती है।

यह दो प्रकार की होती है:

  • नियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया :इसमें न्यूट्रॉनों की गति और संख्या को नियंत्रित किया जाता है, जिससे ऊर्जा नियंत्रित रूप से उत्पन्न होती है। इस प्रकार की अभिक्रिया का उपयोग परमाणु रिएक्टर में सुरक्षित रूप से बिजली उत्पादन के लिए किया जाता है।
  • अनियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया: में न्यूट्रॉनों की संख्या और गति पर नियंत्रण नहीं रहता, जिससे अभिक्रिया अत्यंत तीव्र गति से फैलती है और भारी मात्रा में ऊर्जा के साथ प्रचंड विस्फोट होता है। इस प्रकार की अभिक्रिया का उपयोग परमाणु बम में किया जाता है।

परमाणु रिएक्टर के मुख्य घटक :

  • परमाणु रिएक्टर के मुख्य घटकों में ईंधन (Fuel), मंदक (Moderator), नियंत्रक छड़ें (Control Rods) और शीतलक (Coolant) शामिल होते हैं।
  • ईंधन के रूप में सामान्यतः यूरेनियम-235 (²³⁵U) या प्लूटोनियम-239 (²³⁹Pu) का उपयोग किया जाता है।
  • मंदक न्यूट्रॉनों की गति को धीमा करके श्रृंखला अभिक्रिया को बनाए रखता है, जिसके लिए भारी जल (D₂O) तथा ग्रेफाइट का प्रयोग किया जाता है।
  • नियंत्रक छड़ें अतिरिक्त न्यूट्रॉनों को अवशोषित कर अभिक्रिया को नियंत्रित रखती हैं; ये सामान्यतः कैडमियम या बोरॉन से बनी होती हैं।
  • शीतलक उत्पन्न ऊष्मा को अवशोषित कर टरबाइन तक पहुँचाता है, जिसके लिए साधारण जल, भारी जल या द्रवित सोडियम का उपयोग किया जाता है।
  • पहला परमाणु रिएक्टर: 1942 में एनरिको फर्मी के नेतृत्व में शिकागो में बनाया गया था।
  • परमाणु बम का सिद्धांत: यह पूर्णतः अनियंत्रित नाभिकीय विखंडन पर आधारित है।
  • प्रथम परमाणु बम: 'मैनहट्टन प्रोजेक्ट' के तहत बनाया गया था, जिसके जनक जे. रॉबर्ट ओपेनहाइमर थे।
  • ऊर्जा का स्रोत: विखंडन में द्रव्यमान क्षति के कारण ऊर्जा निकलती है, जो आइंस्टीन के समीकरण E = mc² का पालन करती है।
  • भारत का पहला परमाणु रिएक्टर: अप्सरा (Apsara), जो 1956 में ट्रॉम्बे (मुंबई) में स्थापित हुआ था।

नाभिकीय विखंडन बनाम नाभिकीय संलयन :

विशेषता नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion)
प्रक्रिया भारी नाभिक का  दो छोटे नाभिकों में टूटना दो हल्के नाभिकों का जुड़कर बड़ा नाभिक बनाना
कच्चा माल यूरेनियम, प्लूटोनियम जैसे भारी तत्व हाइड्रोजन के आइसोटोप (ड्यूटेरियम और ट्रिटियम)
कचरा अत्यधिक मात्रा में लंबे समय तक रहने वाला रेडियोधर्मी कचरा बेहद कम और सीमित समय का रेडियोधर्मी कचरा
सुरक्षा श्रृंखला अभिक्रिया अनियंत्रित होने का खतरा अत्यधिक सुरक्षित, क्योंकि ईंधन की आपूर्ति रुकते ही प्रक्रिया बंद हो जाती है।
वर्तमान स्थिति वर्तमान परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में उपयोग किया जाता है अभी प्रायोगिक चरण में है (चीन का कृत्रिम सूर्य इसका उदाहरण है)

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