28 July, 2026
राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित
Thu 30 Jul, 2026
संदर्भ :
- राज्यसभा ने राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा के लिए राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया।
मुख्य बिन्दु :
- मुख्य उद्देश्य : राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को राष्ट्रगान 'जन गण मन' के समान वैधानिक संरक्षण प्रदान करना
- संशोधन : 'राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971' में
- अपराध होगा यदि : राष्ट्र गीत के गायन को जानबूझकर रोकना अथवा उसके गायन में संलग्न सभा में व्यवधान उत्पन्न करना
- इसमें 24 जनवरी, 1950 को आयोजित संविधान सभा की बैठक का उल्लेख किया गया है
- बैठक में तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में वंदे मातरम् की ऐतिहासिक भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा था कि इसे जन गण मन के समान ही सम्मान दिया जाना चाहिए और समान दर्जा प्राप्त होना चाहिए
- राष्ट्र गीत को ऐसा ही संरक्षण प्रदान करने वाला कोई विशिष्ट वैधानिक प्रावधान नहीं था
- इसके अंतर्गत वंदे मातरम् को 1971 के अधिनियम की धारा 3 के दायरे में शामिल करने का प्रस्ताव किया गया है।
- मौलिक कर्तव्य (Article 51A): संविधान के अनुच्छेद 51A(a) के अनुसार, "संविधान का पालन करना और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का आदर करना" प्रत्येक भारतीय नागरिक का पहला मौलिक कर्तव्य है।
विधेयक, 2026 के प्रमुख प्रावधान :
- धारा 3 में संशोधन: खंड 2 के माध्यम से धारा 3 के वर्तमान प्रावधान के स्थान पर ऐसा प्रावधान प्रतिस्थापित किया गया है, जिसके अंतर्गत राष्ट्र गान (जन गण मन) के साथ-साथ राष्ट्र गीत (वंदे मातरम्) को भी शामिल किया गया है।
- शामिल आचरण: प्रतिस्थापित धारा 3 उन स्थितियों पर लागू होगी, जहाँ कोई व्यक्ति जानबूझकर—
- राष्ट्र गान अथवा राष्ट्र गीत के गायन को रोकता है
- ऐसा गायन करती किसी सभा में व्यवधान उत्पन्न करता है।
- संक्षिप्त शीर्षक: खंड 1 में उपबंध किया गया है कि इस कानून को राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2026 कहा जाएगा।
| विषय | मूल कानून (1971) | 2026 का नया संशोधन |
| संरक्षण का दायरा | केवल 'राष्ट्रगान' (जन गण मन) शामिल | 'राष्ट्रगान' एवं 'राष्ट्र गीत' (वंदे मातरम) दोनों शामिल |
| अपराध की परिभाषा | गायन रोकना या सभा में बाधा डालना | राष्ट्रगान या राष्ट्र गीत के गायन को रोकना या बाधा पहुँचाना |
| दंड का प्रावधान | 3 वर्ष तक की कैद, या जुर्माना, या दोनों | 3 वर्ष तक की कैद, या जुर्माना, या दोनों |
| पुनरावृत्ति पर दंड | दूसरी/उत्तरवर्ती बार में न्यूनतम 1 वर्ष | दूसरी/उत्तरवर्ती बार सिद्ध होने पर न्यूनतम 1 वर्ष का कारावास |
वंदे मातरम् :
- वंदे मातरम का : अर्थ है “माँ, मैं आपको नमन करता हूँ”
- मूल धुन: इसकी शुरुआती धुन यदुनाथ भट्टाचार्य द्वारा तैयार की गई थी।
- आधुनिक धुन: वर्तमान में सुनाई देने वाली प्रसिद्ध राग-आधारित धुन पंडित विष्णु दिगंबर पलुस्कर और बाद में ऑल इंडिया रेडियो के लिए पंडित रविशंकर द्वारा भी तैयार की गई थी
- मूल रचना (1875): बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने इसकी रचना 7 नवंबर 1875 को की थी। ब्रिटिश प्रशासन द्वारा थोपे गए 'गॉड सेव द क्वीन' के विरोध में यह एक सशक्त भारतीय प्रतिक्रिया थी।
- आनंदमठ में शामिल (1882): यह गीत पहली बार साहित्यिक पत्रिका बंगदर्शन में छपा और बाद में बंकिम चंद्र के प्रसिद्ध उपन्यास 'आनंदमठ' (1882) में शामिल किया गया। यह उपन्यास संन्यासी विद्रोह (1770 के दशक) और बंगाल के अकाल की पृष्ठभूमि पर आधारित है।
- भाषा: इसके पहले दो पद मुख्य रूप से संस्कृत में हैं और बाकी के पद बंगाली भाषा में हैं
- प्रथम सार्वजनिक गायन (1896): रवींद्रनाथ टैगोर ने वर्ष 1896 के भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में पहली बार इस गीत को स्वरबद्ध करके गाया था।
- स्वदेशी आंदोलन (1905): बंगाल विभाजन के विरोध में शुरू हुए स्वदेशी आंदोलन के दौरान 'वंदे मातरम्' ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ नागरिक प्रतिरोध का मुख्य नारा और राष्ट्रवादियों का मंत्र बन गया।
- अंतरराष्ट्रीय मंच (1907): मैडम भीकाजी कामा ने 1907 में स्टटगार्ट (जर्मनी) में जो भारत का पहला तिरंगा झंडा फहराया था, उसके मध्य में देवनागरी लिपि में 'वंदे मातरम्' अंकित था।
- समाचार पत्र (1906): बिपिन चंद्र पाल और अरबिंदो घोष ने इस गीत से प्रेरित होकर अंग्रेजी दैनिक समाचार पत्र 'बंदे मातरम्' का संपादन किया था।
- आधिकारिक स्वीकृति (1937): कांग्रेस कार्य समिति (CWC) ने अक्टूबर 1937 में इस गीत के केवल पहले दो पदों को राष्ट्रीय गीत के रूप में आधिकारिक रूप से अपनाया था
- संवैधानिक स्थिति :
- 24 जनवरी 1950: संविधान सभा के अंतिम दिन, तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने घोषणा की कि 'जन-गण-मन' भारत का राष्ट्रीय गान होगा और 'वंदे मातरम्' को ऐतिहासिक महत्व के कारण समान दर्जा और सम्मान दिया जाएगा।
- संविधान में उल्लेख: भारतीय संविधान में 'राष्ट्रीय गीत' शब्द का कोई स्पष्ट वैधानिक उल्लेख नहीं है। हालांकि, अनुच्छेद 51A(a) के तहत 'मूल कर्तव्यों' में केवल राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रीय गान का सम्मान करने की बात कही गई है
राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 :
- लागू: 23 दिसंबर 1971
- उद्देश्य: राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान का सम्मान व संरक्षण
- संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 51A(a) (मौलिक कर्तव्य)
- धारा 2: राष्ट्रीय ध्वज या संविधान के अपमान पर 3 वर्ष तक की सजा, जुर्माना या दोनों।
- धारा 3: राष्ट्रगान में बाधा या व्यवधान पर 3 वर्ष तक की सजा, जुर्माना या दोनों।
- धारा 3A (2003): दोबारा दोषसिद्धि पर कम-से-कम 1 वर्ष का अनिवार्य कारावास
राष्ट्रगान 'जन गण मन' :
- मूल रूप से गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा बंगाली में रचित 'भारतो भाग्यो बिधाता' कविता का पहला छंद है, जिसे संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को इसके हिंदी संस्करण में राष्ट्रगान के रूप में अपनाया था
- प्रथम गायन: इसे सबसे पहले 27 दिसंबर 1911 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के कलकत्ता अधिवेशन में गाया गया था।
- मूल रचना: यह मूलतः बंगाली भाषा में लिखित है, जिसमें संस्कृतनिष्ठ शब्दों की प्रधानता है। संपूर्ण गीत में 5 पद हैं, लेकिन राष्ट्रगान के रूप में केवल पहले पद को ही मान्यता प्राप्त है।
- संविधान सभा का निर्णय: संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को इसे राष्ट्रगान घोषित किया। इसी दिन 'वंदे मातरम' को राष्ट्रीय गीत का दर्जा मिला था।
- सुभाष चंद्र बोस का योगदान: वर्ष 1941 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के निर्देश पर कैप्टन आबिद अली ने इसका एक अनुवाद (सैनिक संस्करण) तैयार किया था, जिसे 'शुभ सुख चैन' कहा गया
- पूर्ण संस्करण : राष्ट्रगान के पूर्ण संस्करण को गाने या बजाने की आधिकारिक अवधि लगभग 52 सेकंड निर्धारित है।
- बिजोय इमैनुएल बनाम केरल राज्य (1986): इस प्रसिद्ध वाद में सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया था कि यदि कोई व्यक्ति धार्मिक विश्वासों (जैसे यहोवा के साक्षी/Jehovah's Witnesses) के कारण राष्ट्रगान नहीं गाता, लेकिन उसके सम्मान में चुपचाप खड़ा रहता है, तो उसे अपमान नहीं माना जाएगा। यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19) के अंतर्गत रक्षित है









