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Thu 30 Jul, 2026

राष्‍ट्रीय समाचार

इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2026

  • केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने नई दिल्ली में इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2026 के 10वें संस्करण की थीम 'सीमाओं से परे विस्तार' का शुभारंभ किया।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • कार्यक्रम: इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2026
  • संस्करण: 10वाँ संस्करण
  • आधिकारिक थीम: "Scale Without Boundaries" (सीमाओं से परे विस्तार)
  • शुभारंभकर्ता: ज्योतिरादित्य सिंधिया (केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री)
  • आयोजन स्थल: यशोभूमि (IICC), नई दिल्ली
  • आयोजन तिथि: 7 – 10 अक्टूबर 2026
  • आयोजक संस्थाएं: दूरसंचार विभाग (DoT) और सेल्यूलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (COAI)
  • महत्व: इसे एशिया का सबसे बड़ा डिजिटल प्रौद्योगिकी मंच माना जाता है
  • 5G उपभोक्ता लक्ष्य: भारत सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 100 करोड़ 5G उपयोगकर्ताओं को जोड़ना है
  • पहली टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन (TMZ): भारत की पहली टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन ग्वालियर, मध्य प्रदेश में स्थापित की जाएगी

IMC 2026 के 4 मुख्य स्तंभ :

  • सृष्टि (Srishti): भविष्य का निर्माण
  • संवर्धन (Samvardhan): विकास को गति देना
  • सशक्त (Sashakt): अवसरों का विस्तार
  • सुरक्षा (Suraksha): विश्वास को मजबूत करना

परभणी-मुदखेड़ खंड पर इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन अपग्रेड के लिए 163 करोड़ रुपये की मंजूरी

  • भारतीय रेलवे ने दक्षिण मध्य रेलवे के नांदेड़ डिवीजन में परभनी-मुदखेड़ डबल लाइन खंड पर इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम को अपग्रेड करने के लिए ₹163 करोड़ की परियोजना को मंजूरी दी।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • इस कदम का उद्देश्य नेटवर्क क्षमता को बढ़ाना, माल ढुलाई में वृद्धि करना और वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों के संचालन को सुगम बनाना है।
  • स्वीकृत परियोजना में 164 किलोमीटर के ट्रैक पर मौजूदा 1×25 केवी इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम को अधिक उन्नत 2×25 केवी सिस्टम में अपग्रेड करना शामिल है।
  • परभणी-मुदखेड़ खंड रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण अत्यधिक उपयोग किए जाने वाले नेटवर्क (एचयूएन) रूट-9 का हिस्सा है, जो अजमेर, इंदौर, खंडवा, अकोला, पूर्णा, मुदखेड़, सिकंदराबाद, महबूबनगर और धोणे को जोड़ता है।
  • इस परियोजना से भारतीय रेलवे के 2029-30 तक 3,000 मिलियन टन माल ढुलाई क्षमता हासिल करने के दीर्घकालिक लक्ष्य में भी योगदान मिलने की उम्मीद है

भारतीय रेलवे :

  • प्रथम पैसेंजर ट्रेन: 16 अप्रैल 1853 को लॉर्ड डलहौजी के कार्यकाल में भारत की पहली यात्री ट्रेन चली थी।
  • दूरी और मार्ग: यह पहली ट्रेन मुंबई (बोरी बंदर) से ठाणे के बीच 34 किलोमीटर की दूरी के लिए चलाई गई थी, जिसमें 400 यात्रियों ने सफर किया था।
  • राष्ट्रीयकरण: 1951
  • रेलवे बोर्ड की स्थापना: भारतीय रेलवे बोर्ड का गठन वर्ष 1905 में हुआ था।
  • कंप्यूटरीकृत आरक्षण: भारत में पहली कंप्यूटरीकृत आरक्षण सेवा 1986 में नई दिल्ली से शुरू हुई थी।

NDPS विशेष अदालत और अतिरिक्त सत्र व सिविल अदालतें स्थापित करने को मंजूरी

  • महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने पुणे में एक नई NDPS विशेष अदालत, पांच जिलों में SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम की विशेष अदालतें, और दो अतिरिक्त सत्र व सिविल अदालतें स्थापित करने की मंजूरी दी।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • निर्णय: महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने राज्य में न्यायिक ढांचे को मजबूत करने के लिए नई विशेष और अतिरिक्त अदालतों की स्थापना को मंजूरी दी।
  • NDPS विशेष अदालत: पुणे में एक नई NDPS (नशीली दवाएं और मनःप्रभावी पदार्थ) विशेष अदालत स्थापित की जाएगी।
  • SC/ST (अत्याचार निवारण) अदालतें: 5 जिलों—अकोला, लातूर, नांदेड़, नंदुरबार और परभणी में SC/ST (Atrocities) अधिनियम के तहत विशेष अदालतें बनेंगी।
  • अतिरिक्त सत्र एवं सिविल अदालतें: 2 नई अदालतें (कोंकण और जलगाँव क्षेत्र के लिए) स्वीकृत की गई हैं।
  • उद्देश्य: NDPS (मादक पदार्थों) तथा SC/ST अत्याचार से संबंधित मामलों की त्वरित सुनवाई करना
  • NDPS अधिनियम (1985): Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act वर्ष 1985 में लागू किया गया था।
  • SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम (1989): यह कानून 11 सितंबर 1989 को संसद द्वारा पारित हुआ और 30 जनवरी 1990 से प्रभावी हुआ।
  • हाई कोर्ट का क्षेत्राधिकार: महाराष्ट्र राज्य का उच्च न्यायालय बॉम्बे हाई कोर्ट है, जिसके अंतर्गत महाराष्ट्र, गोवा, दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव आते हैं।
  • संविधान का अनुच्छेद 233: राज्य में जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा उच्च न्यायालय के परामर्श से की जाती है।
  • न्यायालयों का गठन: भारतीय संविधान के तहत अधीनस्थ न्यायालयों का प्रावधान भाग VI (Part 6) के अनुच्छेद 233 से 237 के बीच है।
  • अनुच्छेद 46 (DPSP): राज्य को SC/ST और अन्य कमजोर वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों को बढ़ावा देने तथा सामाजिक अन्याय से बचाने का निर्देश देता है।
  • अनुच्छेद 21: प्राण और दैहिक स्वतंत्रता के अधिकार के अंतर्गत ही सुप्रीम कोर्ट ने 'त्वरित न्याय' को मौलिक अधिकार माना है।
  • सातवीं अनुसूची (7th Schedule): 'न्याय का प्रशासन' और 'अधीनस्थ न्यायालय' मुख्य रूप से राज्य सूची और कुछ मामलों में समवर्ती सूची का हिस्सा हैं, इसलिए राज्य सरकारें उच्च न्यायालय की सलाह पर नई अदालतें गठित करती हैं

भारत के प्रथम मिलिट्री मेडिसिन विभाग का उद्घाटन

  • रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ स्थित केंद्रीय कमान अस्पताल में देश के पहले विशेष रूप से सैन्य चिकित्सा पर केंद्रित शैक्षणिक और परिचालन विभाग का शुभारंभ किया।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • उद्घाटनकर्ता: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (वर्चुअल माध्यम से)।
  • स्थान: कमांड अस्पताल (सेंट्रल कमांड), लखनऊ, उत्तर प्रदेश।
  • विशेषता: भारत का पहला विशेष रूप से सैन्य चिकित्सा पर केंद्रित शैक्षणिक और परिचालन विभाग।
  • नोडल निकाय: यह विभाग महानिदेशालय सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा (DGMS - Army) के तहत स्थापित किया गया है।

मुख्य उद्देश्य:

  • युद्धक्षेत्र चिकित्सा तत्परता को मजबूत करना।
  • स्वदेशी चिकित्सा सिद्धांतों और तकनीकों का विकास करना।
  • ट्रॉमा केयर, कॉम्बैट सर्जरी, और आपातकालीन चिकित्सा में अनुसंधान एवं प्रशिक्षण प्रदान करना
  • प्रमुख फोकस क्षेत्र: कॉम्बैट साइकेट्री, CBRNe (रसायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल, परमाणु और विस्फोटक) खतरों से बचाव, टेलीमेडिसिन, और आपदा प्रबंधन (HADR)
  • AFMS का पूर्ण रूप: Armed Forces Medical Services (सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाएँ)।
  • CBRNe का पूर्ण रूप: Chemical, Biological, Radiological, Nuclear and Explosive।
  • सेंट्रल कमांड (भारतीय सेना): इसका मुख्यालय लखनऊ, उत्तर प्रदेश में स्थित है।
  • वन हेल्थ कॉन्सेप्ट (One Health Concept): यह एक ऐसी एकीकृत अवधारणा है जो मानव, पशु और पर्यावरण के स्वास्थ्य को एक साथ जोड़कर काम करती है

जनजातीय कार्य मंत्रालय और CSIR-राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान के बीच समझौता

  • जनजातीय कार्य मंत्रालय ने लखनऊ के CSIR-राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • समझौता (MoU): जनजातीय कार्य मंत्रालय और CSIR-राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (NBRI), लखनऊ के बीच।
  • मुख्यालय/स्थान: CSIR-NBRI, लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
  • मुख्य उद्देश्य: जनजातीय क्षेत्रों में पादप-आधारित संसाधनों, औषधीय पौधों और लघु वन उपज (MFP) के विकास द्वारा आजीविका बढ़ाना

प्रमुख फोकस क्षेत्र:

  • जनजातीय समुदायों को औषधीय और संगंध पौधों की खेती का प्रशिक्षण देना
  • पारंपरिक जनजातीय ज्ञान का संरक्षण और वैज्ञानिक सत्यापन करना
  • 'ट्रायफेड' (TRIFED) के माध्यम से जनजातीय उत्पादों को बाजार से जोड़ना और मूल्य संवर्धन करना
  • CSIR का पूर्ण रूप: Council of Scientific and Industrial Research (वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद)
  • CSIR-NBRI का स्थान: लखनऊ, उत्तर प्रदेश
  • TRIFED की स्थापना: 1987 में (Tribal Cooperative Marketing Development Federation of India)
  • संविधान का अनुच्छेद 338A: राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) की व्यवस्था करता है (89वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 द्वारा जोड़ा गया)

ग्रामीण विकास मंत्रालय और प्रोजेक्ट कंसर्न इंटरनेशनल इंडिया के बीच समझौता

  • ग्रामीण विकास मंत्रालय ने दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से प्रोजेक्ट कंसर्न इंटरनेशनल इंडिया के साथ एक गैर-वित्तीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • साझेदारी करने वाले निकाय: ग्रामीण विकास मंत्रालय और प्रोजेक्ट कंसर्न इंटरनेशनल इंडिया
  • योजना का नाम: दीनदयाल अंत्योदय योजना - राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM)
  • समझौता का प्रकार: गैर-वित्तीय समझौता ज्ञापन
  • मुख्य उद्देश्य: ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, आजीविका के नए अवसरों को बढ़ावा देना और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की संस्थागत क्षमताओं को मजबूत करना।
  • फोकस क्षेत्र: कृषि, पोषण, स्वास्थ्य और ग्रामीण उद्यमिता से जुड़ी पहलों को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करना।
  • DAY-NRLM की शुरुआत: इस योजना की शुरुआत जून 2011 में 'आजीविका' नाम से की गई थी, जिसे नवंबर 2015 में पुनर्गठित कर 'दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन' नाम दिया गया।
  • नोडल मंत्रालय: ग्रामीण विकास मंत्रालय (Ministry of Rural Development, Government of India)।
  • स्वयं सहायता समूह (SHG) आंदोलन: ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों (विशेषकर महिलाओं) को संगठित कर वित्तीय समावेश और स्वरोजगार से जोड़ने की एक क्रांतिकारी पहल है।
  • NABARD की भूमिका: भारत में सूक्ष्म वित्त (Microfinance) और ग्रामीण विकास के वित्तपोषण में नाबार्ड (राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक) की मुख्य भूमिका है (स्थापना: 12 जुलाई 1982)

लोक परीक्षा-अनुचित साधन रोकथाम संशोधन विधेयक, 2026

  • लोकसभा ने लोक परीक्षा-अनुचित साधन रोकथाम संशोधन विधेयक, 2026 पारित किया।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • पारित करने वाली संस्था: लोकसभा
  • विधेयक का नाम: लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026
  • मूल अधिनियम: यह विधेयक 'लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024' में संशोधन करता है।
  • मुख्य उद्देश्य: सरकारी भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, अनुचित साधनों के उपयोग, और संगठित अपराधों पर लगाम लगाना

प्रस्तावित कड़े प्रावधान:

  • संगठित पेपर लीक गिरोहों के लिए 5 से 10 वर्ष तक की जेल और ₹1 करोड़ तक का जुर्माना।
  • परीक्षा कराने वाली सेवा प्रदाता कंपनियों पर गड़बड़ी साबित होने पर ₹1 करोड़ तक का जुर्माना और 4 वर्ष के लिए बैन।
  • अपराधों को गैर-जमानती और संज्ञेय श्रेणी में रखा गया है
  • विधेयक से कानून बनने की प्रक्रिया: जब कोई विधेयक संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) द्वारा पारित हो जाता है और उस पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर (अनुच्छेद 111) हो जाते हैं, तब वह अधिनियम/कानून बनता है।
  • UPSC संवैधानिक निकाय: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) का प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 315 से 323 (भाग XIV) में है।
  • कर्मचारी चयन आयोग (SSC): SSC एक गैर-संवैधानिक और कार्यकारी निकाय (Executive Body) है, जिसकी स्थापना 1975 (अधीनस्थ सेवा आयोग) में हुई थी और 1977 में इसका नाम SSC रखा गया था

राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026

  • राज्यसभा ने राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा के लिए राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • पारित करने वाली संस्था: राज्यसभा
  • विधेयक का नाम: राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026
  • मूल अधिनियम: यह विधेयक 'राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971' में संशोधन करता है।
  • मुख्य उद्देश्य: भारतीय राष्ट्रध्वज, राष्ट्रगान, भारत का मानचित्र और संविधान के प्रति असम्मान या अपमान की घटनाओं पर कड़ी सजा तय करना।
  • डिजिटल मीडिया का समावेश: इस संशोधन के तहत सोशल मीडिया या इंटरनेट प्लेटफ़ॉर्म पर राष्ट्रीय प्रतीकों के जानबूझकर किए गए अपमान या विकृति को भी कठोर दंड के दायरे में लाया गया है।
  • सजा के कड़े प्रावधान: बार-बार अपराध दोहराने पर जेल की अवधि तथा जुर्माने की राशि को और अधिक सख्त बनाया गया है।
  • मूल कानून (1971): राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971 में पारित हुआ था।
  • मौलिक कर्तव्य (Article 51A): संविधान के अनुच्छेद 51A(a) के अनुसार, "संविधान का पालन करना और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का आदर करना" प्रत्येक भारतीय नागरिक का पहला मौलिक कर्तव्य है।
  • भारतीय राष्ट्रध्वज का प्रारूप: राष्ट्रध्वज को 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा द्वारा अपनाया गया था। इसके निर्माण का श्रेय पिंगली वेंकैया को दिया जाता है।
  • राष्ट्रगान: 'जन गण मन' को 24 जनवरी 1950 को भारत के राष्ट्रगान के रूप में अपनाया गया था। इसे गाने का निर्धारित समय 52 सेकंड है।

नागरिक भागीदारी पहल ‘दानवीर’ का शुभारंभ

  • पंचायती राज मंत्रालय ने नई दिल्ली में देश भर की ग्राम पंचायतों के डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से नागरिक भागीदारी पहल ‘दानवीर’ का शुभारंभ किया।
  • इस पहल का शुभारंभ पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज ने किया।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • शुभारंभकर्ता: पंचायती राज मंत्रालय
  • स्थान: नई दिल्ली।
  • पहल का नाम: 'दानवीर' नागरिक भागीदारी पहल
  • मुख्य उद्देश्य: देशभर की ग्राम पंचायतों के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर (डिजिटल बुनियादी ढांचे) को मजबूत बनाना।
  • कार्यप्रणाली: इसके तहत नागरिकों, कॉर्पोरेट्स (CSR), एनजीओ और पूर्व निवासियों से ग्राम पंचायतों को डिजिटल उपकरण (जैसे- कंप्यूटर, टैबलेट, इंटरनेट कनेक्टिविटी) दान/सहयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
  • 73वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1992: पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया।
  • भाग और अनुसूची: पंचायती राज को संविधान के भाग IX और 11वीं अनुसूची (जिसमें 29 कार्यात्मक विषय हैं) में जोड़ा गया।
  • अनुच्छेद 40 (DPSP): राज्य के नीति निदेशक तत्वों के तहत ग्राम पंचायतों के गठन का निर्देश देता है।
  • राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस: भारत में प्रतिवर्ष 24 अप्रैल को मनाया जाता है (क्योंकि 24 अप्रैल 1993 को 73वाँ संशोधन लागू हुआ था)।
  • त्रि-स्तरीय ढांचा: बलवंत राय मेहता समिति (1957) की सिफारिश पर ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद की व्यवस्था लागू की गई।

अर्थव्‍यवस्‍था तथा बैंकिंग

चालू वित्त वर्ष में भारत का माल निर्यात

  • वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में अब तक भारत के माल निर्यात में 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • आंकड़ा/वृद्धि: चालू वित्त वर्ष में भारत के माल निर्यात में 15 प्रतिशत (15%) की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है।
  • घोषणाकर्ता: केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल।
  • वैश्विक चुनौतियाँ: यह वृद्धि लाल सागर संकट भू-राजनीतिक तनावों और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद हासिल हुई है।
  • निर्यात लक्ष्य (FY27 Target): भारत सरकार ने इस वित्त वर्ष में 1 ट्रिलियन डॉलर के कुल निर्यात (माल + सेवाएं) का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
  • रणनीतिक लक्ष्य: चालू वित्त वर्ष में माल निर्यात में 16-17% वृद्धि ($530 बिलियन) और सेवा निर्यात में 11% वृद्धि ($470 बिलियन) का लक्ष्य है
  • व्यापार घाटा : जब किसी देश का कुल आयात (Imports), उसके कुल निर्यात (Exports) से अधिक होता है, तो उसे 'व्यापार घाटा' कहा जाता है।
  • DGFT (विदेश व्यापार महानिदेशालय): यह वाणिज्य मंत्रालय के तहत एक संलग्न कार्यालय है, जो भारत की विदेश व्यापार नीति (FTP) का निर्माण और क्रियान्वयन करता है।
  • लाल सागर संकट का व्यापार पर प्रभाव: लाल सागर और स्वेज नहर मार्ग बाधित होने के कारण जहाजों को अफ्रीका के 'केप ऑफ गुड होप' से होकर जाना पड़ रहा है, जिससे माल ढुलाई और समय बढ़ गया है

रक्षा समाचार

CSL द्वारा निर्मित पनडुब्बी रोधी 7वें जलपोत का जलावतरण

  • कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) द्वारा भारतीय नौसेना के लिए निर्मित आठ पनडुब्बी रोधी जलपोतों (ASW) में से सातवें जलपोत, मछलीपटनम का जलावतरण किया गया।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • प्रतियोगिता/घटना: भारतीय नौसेना के लिए आठ एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW SWC) श्रृंखला के सातवें पोत 'मछलीपटनम' (BY 529) का जलावतरण।
  • निर्माता: कोचिन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL), कोच्चि (केरल)।
  • नामकरण: आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में स्थित ऐतिहासिक बंदरगाह शहर 'मछलीपटनम' के नाम पर रखा गया है।
  • स्वदेशी सामग्री: इस पोत में 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है (आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत)

मुख्य क्षमताएं:

  • तटीय जल में पनडुब्बी रोधी अभियान
  • जलमग्न निगरानी
  • कम तीव्रता वाले समुद्री संचालन
  • माइन बिछाने की क्षमता

भारतीय नौसेना के 3 परिचालन कमान हैं:

  • पश्चिमी नौसेना कमान (मुंबई)
  • पूर्वी नौसेना कमान (विशाखापट्टनम)
  • दक्षिणी नौसेना कमान (कोच्चि)

पर्यावरण समाचार

फफूंद की नई प्रजाति माइक्रोपोरेलस कोल्हापुरेंसिस की खोज

  • महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के भुदरगड तालुका में फफूंद (कवक) की एक नई प्रजाति माइक्रोपोरेलस कोल्हापुरेंसिस की खोज की गई है।
  • यह खोज जुलाई 2026 में सामने आई, जिसे राजेशाराम कॉलेज के शोधकर्ताओं ने सड़ी हुई लकड़ी पर ढूंढ निकाला है।

सम्‍बन्धित त‍थ्‍य :

  • प्रजाति का नाम: माइक्रोपोरेलस कोल्हापुरेंसिस (Microporellus kolhapurensis)
  • प्रकार: पॉलीपोर या ब्रैकेट कवक (Polypore / Bracket Fungus)
  • खोज स्थान: बेदिव क्षेत्र, भुदरगड तालुका, कोल्हापुर जिला (महाराष्ट्र)
  • शोधकर्ता: राजाराम कॉलेज की वनस्पति विज्ञान प्रमुख डॉ. अंजलि पाटिल और शोधार्थी योगेश पाटिल
  • प्रकाशन: भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (Botanical Survey of India - BSI) की शोध पत्रिका Nelumbo
  • फलन काल : यह कवक मुख्य रूप से मानसून के दौरान जुलाई से सितंबर के बीच फलता-फूलता है और आमतौर पर अकेले उगता है
  • पश्चिमी घाट की जैव विविधता: यह खोज वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण पश्चिमी घाट पारिस्थितिकी तंत्र की समृद्ध जैव विविधता को और मजबूत करती है।

कवक की विशेषताएं और पारिस्थितिक महत्व:

  • आवास: यह सड़ती हुई लकड़ी पर उगने वाली मृतोपजीवी प्रजाति है।
  • आकार व रंग: इसका फलने वाला भाग छाते के आकार का होता है, जिसका रंग पीला-नारंगी से लेकर धूसर-भूरा होता है।
  • पारिस्थितिक भूमिका: यह जंगलों में सूखी/सड़ी लकड़ी को गलाकर पर्यावरण में पोषक तत्वों के चक्रण में मदद करता है।
  • विश्व स्तर पर Microporellus वंश (Genus) की लगभग 36 मान्य प्रजातियां दर्ज हैं।

पश्चिमी घाट के लिए ESA का नया मसौदा जारी

  • केंद्र सरकार ने पश्चिमी घाट के लिए पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ESA) का सातवां मसौदा जारी किया, जिसमें छह राज्यों के 56,825.7 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को शामिल किया गया है।

पश्चिमी घाट ESA मसौदा :

  • जारीकर्ता: केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC)
  • अधिसूचना: पश्चिमी घाट के लिए पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (Ecologically Sensitive Area - ESA) का 7वाँ मसौदा जारी।
  • कुल प्रस्तावित क्षेत्रफल: 56,825.7 वर्ग किलोमीटर।
  • शामिल राज्यों की संख्या: 6 राज्य (गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु)।
  • प्रतिबंधित गतिविधियां: इस क्षेत्र में खनन, तापीय विद्युत संयंत्र, बड़े निर्माण कार्य और प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा

राज्यवार ESA क्षेत्रफल का विवरण :

  • कर्नाटक: 20,668 वर्ग किमी (सर्वाधिक)
  • महाराष्ट्र: 17,340 वर्ग किमी
  • केरल: 9,993.7 वर्ग किमी
  • तमिलनाडु: 6,914 वर्ग किमी
  • गोवा: 1,461 वर्ग किमी
  • गुजरात: 449 वर्ग किमी
  • पर्यावरण संरक्षण अधिनियम: भारत में ESA की घोषणा पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 (Environment Protection Act, 1986) के तहत की जाती है
  • माधव गाडगिल समिति (2011): इसने पूरे पश्चिमी घाट (लगभग 1.29 लाख वर्ग किमी) को ESA घोषित करने और पर्यावरण संरक्षण में ग्राम सभाओं को सर्वोच्च अधिकार देने की सिफारिश की थी। राज्यों ने इसे "विकास विरोधी" मानकर खारिज कर दिया
  • के. कस्तूरीरंगन समिति (2013): इसने गाडगिल रिपोर्ट को व्यावहारिक बनाते हुए केवल 37% क्षेत्र (यानी लगभग 56,825.7 वर्ग किमी) को ही ESA के अंतर्गत लाने का सुझाव दिया, जिसे वर्तमान मसौदे का आधार बनाया गया है
  • यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल: पश्चिमी घाट को वर्ष 2012 में UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित किया गया था।
  • जैव विविधता हॉटस्पॉट: यह दुनिया के 36 प्राथमिक 'जैव विविधता हॉटस्पॉट' में से एक है

पश्चिमी घाट :

  • विस्तार: गुजरात से तमिलनाडु/केरल तक, लगभग 1,490 किमी
  • स्थिति: 7° उ. अक्षांश से 21° उ. अक्षांश के मध्य
  • कुल क्षेत्रफल: लगभग 1,40,000 वर्ग किमी
  • 6 राज्य: गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु
  • आयु: हिमालय से भी प्राचीन
  • काल: उत्तर जुरासिक से प्रारंभिक क्रिटेशियस काल
  • प्रक्रिया: गोंडवाना महाद्वीप के टूटने पर दक्कन पठार के भ्रंशित किनारों से निर्मित

संरचनात्मक विभाजन (3 प्रमुख दर्रे) :

  • उत्तरी, मध्य और दक्षिणी विभाजन: गोवा, पालघाट और सेनकोट्टा दर्रों द्वारा
  • 7 उप-समूह: सह्याद्रि, कुद्रेमुख, तलाकावेरी, नीलगिरि, अन्नामलाई, पेरियार, अगस्त्यमलाई

राजस्थान में बाघों की संख्‍या में बढोत्‍तरी

  • राजस्थान के पांचों टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़कर 149 पहुंच गई है, जो पिछले वर्ष 135 थी।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • वर्तमान कुल संख्या: 149 बाघ (वर्ष 2025-26)
  • पिछली संख्या: 135 बाघ (वर्ष 2024)
  • कुल वृद्धि: 14 बाघों की शुद्ध वृद्धि
  • टाइगर रिजर्व की कुल संख्या: राजस्थान में कुल 5 टाइगर रिजर्व हैं
  • सर्वाधिक बाघों वाला रिजर्व: रणथंभौर टाइगर रिजर्व
  • पांचों टाइगर रिजर्व में 54 बाघिनों ने 53 शावकों को जन्म दिया है

राजस्थान के 5 टाइगर रिजर्व :

  • रणथंभौर टाइगर रिजर्व : सवाई माधोपुर (राजस्थान का पहला टाइगर रिजर्व - 1973/74), 72 बाघ, बाघिन और शावक मौजूद
  • सरिस्का टाइगर रिजर्व : अलवर, यहां बाघों की संख्या बढ़कर 56 हो गई है। इस वर्ष सबसे अधिक 28 शावकों का जन्म इसी रिजर्व में दर्ज किया गया
  • मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व : कोटा/झालावाड़/बूंदी
  • रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व : बूंदी (भारत का 52वाँ टाइगर रिजर्व)
  • धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व : धौलपुर और करौली (राजस्थान का 5वाँ और भारत का 54वाँ टाइगर रिजर्व)
  • वहन क्षमता (Carrying Capacity) का संकट: रणथंभौर टाइगर रिजर्व की अनुमानित वहन क्षमता 40 से 50 बाघों की है, लेकिन वर्तमान में वहां 72 बाघ रह रहे हैं। क्षमता से अधिक आबादी होने के कारण बाघ नए क्षेत्रों (Dispersal) की तलाश में बाहर निकल रहे हैं
  • प्रोजेक्ट टाइगर (Project Tiger): इसकी शुरुआत 1973 में बंगाल टाइगर के संरक्षण के लिए की गई थी, जिसे अब 'राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण' (NTCA) द्वारा प्रबंधित किया जाता है।
  • बाघ गणना : भारत में प्रत्येक 4 वर्ष में राष्ट्रीय स्तर पर बाघों की गणना की जाती है।
  • अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस: प्रतिवर्ष 29 जुलाई को दुनिया भर में बाघ संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है

विज्ञान और प्रौद्योगिकी

विश्‍व के सबसे बड़े सुपरकंडक्टिंग फ्यूजन मैग्नेट का सफल निर्माण और परीक्षण

  • चीन ने अपने 'आर्टिफिशियल सन' (कृत्रिम सूर्य) कार्यक्रम के तहत 582 टन वजन वाले विश्‍व के सबसे बड़े सुपरकंडक्टिंग फ्यूजन मैग्नेट का सफल निर्माण और परीक्षण पूरा किया।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • घटना: विश्व के सबसे बड़े सुपरकंडक्टिंग फ्यूजन मैग्नेट का निर्माण और परीक्षण।
  • वजन व आकार: 582 टन वजन तथा 21 मीटर लंबाई।
  • चुंबक का प्रकार: टोरोइडल-फील्ड सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट।
  • विकासकर्ता संस्था: चीनी विज्ञान अकादमी (CAS) के तहत प्लाज्मा भौतिकी संस्थान (ASIPP), हेफेई।
  • संबद्ध प्रोजेक्ट/रिएक्टर: BEST (Burning Plasma Experimental Superconducting Tokamak) (यह EAST यानी Experimental Advanced Superconducting Tokamak का अगला संस्करण है)।
  • उद्देश्य: 100 मिलियन डिग्री सेल्सियस (सूर्य के केंद्र से 6 गुना अधिक गर्म) से अधिक तापमान वाले प्लाज्मा को नियंत्रित/सीमित रखना।
  • लक्ष्य: वर्ष 2030 तक नियंत्रित नाभिकीय संलयन से बिजली उत्पादन का प्रदर्शन करना।
  • आकार और आकार: यह अंग्रेजी के 'D' अक्षर के आकार का एक टोरॉइडल-फील्ड चुंबक है, जिसकी लंबाई 21 मीटर और चौड़ाई 12 मीटर है
  • कार्यप्रणाली: यह लगभग -269°C (परम शून्य के करीब) के अत्यधिक निम्न तापमान पर 60 वर्षों तक काम करने और 100,000 एम्पीयर से अधिक विद्युत धारा प्रवाहित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है
  • नाभिकीय संलयन : सूर्य और तारों में ऊर्जा उत्पन्न करने वाली प्रक्रिया, जिसमें हल्के हाइड्रोजन परमाणु मिलकर भारी हीलियम परमाणु बनाते हैं।
  • टोकामाक : एक डोनट के आकार का उपकरण, जो चुंबकीय क्षेत्र का उपयोग करके प्लाज्मा को नियंत्रित करता है।
  • अतिचालकता : अत्यंत कम तापमान पर शून्य विद्युत प्रतिरोध की स्थिति, जिससे बिना ऊर्जा हानि के विशाल धारा प्रवाहित की जा सकती है।
  • ITER: फ्रांस में स्थित 'इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर' (भारत भी इसका सदस्य देश है)

भारत का पहला 'एकीकृत सटीक ऑन्कोलॉजी पारिस्थितिकी तंत्र'

  • आंध्र प्रदेश सरकार ने दवा क्षेत्र की वैश्विक दिग्गज कंपनी एस्ट्राजेनेका इंडिया के साथ मिलकर अमरावती में भारत का पहला 'एकीकृत सटीक ऑन्कोलॉजी पारिस्थितिकी तंत्र' और जीनोमिक सॉल्यूशंस सेंटर स्थापित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किया।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • सहयोग/साझेदारी: आंध्र प्रदेश सरकार और बहुराष्ट्रीय फार्मास्युटिकल कंपनी एस्ट्राजेनेका के बीच
  • परियोजना का नाम: जीनोमिक सॉल्यूशंस सेंटर
  • स्थापना का स्थान: अमरावती, आंध्र प्रदेश।
  • प्राथमिक उद्देश्य: कैंसर का शुरुआती चरण में पता लगाना, जीनोमिक अनुक्रमण और व्यक्तिगत उपचार
  • फोकस क्षेत्र: बायोमार्कर टेस्टिंग और एआई-संचालित कैंसर स्क्रीनिंग तकनीक
  • लक्षित कैंसर: यह केंद्र शुरुआती चरण में विशेष रूप से फेफड़ों के कैंसर और स्तन कैंसर की पहचान और बायोमार्कर परीक्षण पर ध्यान केंद्रित करेगा।
  • जीनोमिक्स : जीव के डीएनए (DNA) और आनुवंशिक संरचना के अध्ययन को 'जीनोमिक्स' कहा जाता है।
  • कैंसर का अध्ययन: कैंसर के लक्षण, निदान और उपचार के वैज्ञानिक अध्ययन को ऑन्कोलॉजी (Oncology) कहा जाता है।
  • एस्ट्राजेनेका : यह एक ब्रिटिश-स्वीडिश (British-Swedish) बहुराष्ट्रीय बायोपर्मास्युटिकल कंपनी है, जिसका मुख्यालय कैम्ब्रिज, यूके (UK) में स्थित है

खेल समाचार

'6वीं एलजी कप हॉर्स पोलो चैंपियनशिप'

  • लद्दाख में आयोजित '6वीं एलजी कप हॉर्स पोलो चैंपियनशिप' में लद्दाख स्काउट्स रेजिमेंटल सेंटर ने एनिमल हसबैंड्री डिपार्टमेंट (लेह) को हराकर खिताब जीता।

6वीं एलजी कप हॉर्स पोलो चैंपियनशिप :

  • प्रतियोगिता: 6वीं एलजी कप हॉर्स पोलो चैंपियनशिप (6th LG Cup Horse Polo Championship)।
  • आयोजन स्थल: गोशान पोलो ग्राउंड, डॉस, कारगिल, लद्दाख।
  • विजेता (Winner): लद्दाख स्काउट्स रेजिमेंटल सेंटर (Ladakh Scouts Regimental Centre - LSRC)।
  • उपविजेता (Runner-up): एनिमल हसबैंड्री डिपार्टमेंट, लेह।
  • आयोजक: पर्यटन विभाग और खेल एवं युवा सेवा विभाग, लद्दाख प्रशासन (लद्दाख पोलो प्रमोशन कमेटी के सहयोग से)।
  • सांस्कृतिक महत्व: पोलो लद्दाख का एक पारंपरिक और लोकप्रिय खेल है। इस तरह की प्रतियोगिताएं क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और खेल पर्यटन को बढ़ावा देती हैं
  • 2026 के लिए विजेता राशि: ₹50,000 से बढ़ाकर ₹1 लाख की गई (उपविजेता को ₹50,000)।
  • आगामी सत्र (2027) से राशि: विजेता को ₹2 लाख तथा उपविजेता को ₹1 लाख दिए जाएंगे।
  • प्रतिभागी टीमें: इस एक सप्ताह तक चलने वाले टूर्नामेंट में लद्दाख के विभिन्न हिस्सों से 18 पुरुष टीमों और 4 महिला टीमों (जिसमें विजेता 'सेकमोल' यानी SECMOL रही) ने हिस्सा लिया।
  • लद्दाख स्काउट्स: इसे 'स्नो वॉरियर्स' भी कहा जाता है। यह भारतीय सेना की एक इन्फेंट्री रेजिमेंट है जो उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में गश्त और सुरक्षा के लिए जानी जाती है।
  • पोलो खेल की उत्पत्ति: आधुनिक पोलो खेल की जड़ें भारत के मणिपुर राज्य और लद्दाख/गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में प्राचीन काल से जुड़ी मानी जाती हैं

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026

  • ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की पैरा एथलेटिक्स 100 मीटर (T-47) स्पर्धा में भारत के दिलीप महादु गावित ने गोल्ड और मोहम्मद बासिल ने सिल्वर जीत कर इतिहास रच दिया।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • प्रतियोगिता: 2026 ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल (23वें कॉमनवेल्थ गेम्स)
  • स्पर्धा: पैरा एथलेटिक्स - पुरुषों की 100 मीटर (T-47 श्रेणी)
  • स्वर्ण पदक (Gold Medal): दिलीप महादु गावित (भारत)
  • रजत पदक (Silver Medal): मोहम्मद बासिल (भारत)।
  • विशेष उपलब्धि: राष्ट्रमंडल खेलों की इस स्पर्धा में भारत ने गोल्ड और सिल्वर दोनों जीतकर नया इतिहास रचा।
  • आयोजन स्थल: ग्लासगो, स्कॉटलैंड (यूके)
  • T-47 वर्ग: यह पैरा एथलेटिक्स में उन एथलीटों की श्रेणी है जिनकी कोहनी या कलाई के नीचे की एक हाथ की बनावट प्रभावित होती है।
  • दिलीप महादु गावित: महाराष्ट्र के रहने वाले भारतीय पैरा एथलीट हैं, जिन्होंने इससे पहले एशियाई पैरा खेलों (2022) में पुरुषों की 400 मीटर (T-47) में भी स्वर्ण पदक जीता था।
  • राष्ट्रमंडल खेलों (CWG) का पहला संस्करण: 1930 में हैमिल्टन, कनाडा में आयोजित हुआ था।
  • भारत द्वारा पहली बार भाग लेना: भारत ने पहली बार 1934 में लंदन में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में भाग लिया था।

चर्चित व्‍यक्ति

गुंथर वॉन हेगेंस का निधन

  • प्लास्टिनेशन तकनीक के आविष्कारक और प्रसिद्ध 'बॉडी वर्ल्ड्स' प्रदर्शनी के निर्माता गुंथर वॉन हेगेंस का 81 वर्ष की आयु में निधन हो गया।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • तकनीक का आविष्कार: डॉ. गुंथर वॉन हेगेंस ने 1977 में जर्मनी के हीडलबर्ग विश्वविद्यालय में इस तकनीक को विकसित किया था। इसका मुख्य उद्देश्य चिकित्सा के छात्रों को मानव शरीर की संरचना आसानी से समझाना था।
  • बॉडी वर्ल्ड्स : इस तकनीक से तैयार इंसानी शवों की पहली सार्वजनिक प्रदर्शनी 1995 में जापान में आयोजित की गई थी। इस वैश्विक प्रदर्शनी को दुनिया भर में 5 करोड़ से अधिक लोगों ने देखा।
  • प्लास्टिनारियम : हेगेंस ने वर्ष 2006 में जर्मनी के गुबेन में 'प्लास्टिनारियम' नामक प्रयोगशाला की स्थापना की, जो शवों को संरक्षित करने का मुख्य केंद्र है।
  • उपनाम: चिकित्सा विज्ञान में उनके अनूठे और अक्सर विवादित कार्यों के कारण उन्हें "डॉक्टर डेथ" भी कहा जाता था।
  • इच्छा: उनकी अंतिम इच्छा के अनुसार, मृत्यु के बाद उनके अपने शरीर को भी इसी प्लास्टिनेशन तकनीक से संरक्षित किया जाएगा।
  • प्लास्टिनेशन (Plastination): यह जैविक ऊतकों (Biological Tissues / मानव शरीर के अंगों) को हमेशा के लिए सुरक्षित रखने की एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है। इसमें शरीर के पानी और वसा को निकालकर उनकी जगह तरल प्लास्टिक भर दिया जाता है, जिससे शरीर सड़ता नहीं है।

पावेल दुरोव पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप

  • रूस की संघीय सुरक्षा सेवा (FSB) ने टेलीग्राम के संस्थापक पावेल दुरोव पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का गंभीर आरोप लगाया है।
  • उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया है और अंतरराष्ट्रीय अरेस्ट वारंट जारी कर दिया है।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • घटना: रूस की सुरक्षा एजेंसी FSB ने टेलीग्राम संस्थापक पावेल दुरोव पर गंभीर आरोप लगाए।
  • मुख्य आरोप: आतंकवाद को बढ़ावा देने और राज्य-विरोधी गतिविधियों में सहायता करना।
  • मुख्य कारण: टेलीग्राम प्लेटफॉर्म द्वारा उन चैनलों और चैट को न हटाना जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर आतंकवादी हमलों और तोड़फोड़ की साजिश के लिए किया गया।
  • कार्रवाई: रूस ने पावेल दुरोव के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट जारी किया।
  • पावेल दुरोव का परिचय: टेलीग्राम के संस्थापक व सीईओ तथा 'VKontakte' (VK) सोशल मीडिया के निर्माता।
  • टेलीग्राम का मुख्यालय: दुबई (संयुक्त अरब अमीरात)
  • FSB का पूर्ण रूप: Federal Security Service (रूस की प्राथमिक आंतरिक सुरक्षा एजेंसी, जो पूर्व KGB का उत्तराधिकारी निकाय है)।
  • VKontakte (VK): रूस का सबसे लोकप्रिय सोशल मीडिया नेटवर्क।
  • एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन: ऐसी सुरक्षा तकनीक जिसमें संदेश केवल प्रेषक और प्राप्तकर्ता ही पढ़ सकते हैं।

 

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