28 July, 2026
दुर्लभ ब्लू स्ट्रैगलर तारे की खोज
Tue 28 Jul, 2026
संदर्भ :
- भारतीय खगोलविदों ने निर्माण की प्रक्रिया में एक दुर्लभ ब्लू स्ट्रैगलर तारे (BSS) की खोज की है, जो द्रव्यमान स्थानांतरण का प्रत्यक्ष प्रमाण देता है।
मुख्य विशेषताएं :
- तारा समूह का नाम: यह खोज पृथ्वी से लगभग 9,500 प्रकाश वर्ष दूर स्थित पुराने खुले तारा समूह कोलिंडर 261 में की गई है।
- द्विआधारी प्रणाली : इस प्रणाली का नाम TIC 327546480 है। यह एक 'अर्ध-पृथक' प्रणाली है।
- द्रव्यमान का विवरण: इस नव-निर्मित BSS का द्रव्यमान सूर्य से 1.67 गुना है, और यह अपने 0.32 सौर द्रव्यमान वाले छोटे साथी तारे से लगातार पदार्थ खींच रहा है।
- रोश लोब ओवरफ्लो : साथी तारा अपनी गुरुत्वाकर्षण सीमा (जिसे रोश लोब कहा जाता है) से बाहर फैल चुका है, जिससे उसकी गैसें BSS में स्थानांतरित हो रही हैं।
- घूर्णन गति और आवर्तकाल: द्रव्यमान मिलने के कारण यह BSS 69.55 किमी/सेकंड की अत्यधिक तीव्र गति से घूम रहा है, और दोनों तारे 2.11 दिनों में एक-दूसरे की परिक्रमा पूरी करते हैं।
- एक्स-रे उत्सर्जन : इस प्रणाली से तेज एक्स-रे किरणें निकल रही हैं, जो द्रव्यमान स्थानांतरण के जारी होने की पुष्टि करती हैं।
- आयु विश्लेषण: यह तारा समूह लगभग 7 अरब वर्ष पुराना है, जबकि द्रव्यमान स्थानांतरण की यह प्रक्रिया 5.46 अरब वर्ष पहले शुरू हुई थी और आज भी जारी है
उपयोग किए गए प्रमुख उपकरण और संस्थान :
- IIA (Indian Institute of Astrophysics): बेंगलुरु स्थित विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) का एक स्वायत्त संस्थान।
- NASA का TESS मिशन: इस खोज में NASA के 'ट्रांजिटिंग एक्सोप्लैनेट सर्वे सैटेलाइट' (TESS) के हाई-प्रिसिजन लाइट कर्व्स का उपयोग किया गया।
- Very Large Telescope (VLT): चिली में यूरोपीय दक्षिणी वेधशाला (ESO) द्वारा संचालित इस विशाल टेलीस्कोप से रेडियल वेग मापा गया।
- शोध पत्रिका: यह महत्वपूर्ण अध्ययन 'द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स' में प्रकाशित हुआ है
ब्लू स्ट्रैगलर स्टार (BSS) :
- विशेष परिभाषा: ये तारा समूहों में पाए जाने वाले ऐसे असामान्य तारे हैं जो अपने साथी तारों की तुलना में अधिक गर्म, अधिक चमकीले और अधिक विशाल दिखाई देते हैं।
- ब्रह्मांडीय अपवाद: सामान्य तारों के विकास के नियम के अनुसार, अधिक द्रव्यमान वाले तारों को जल्दी बूढ़ा होकर समाप्त हो जाना चाहिए। लेकिन ये तारे वृद्ध तारा समूहों में भी युवा और नीले दिखाई देते हैं, इसलिए इन्हें 'स्ट्रैगलर' (पीछे छूटे हुए) कहा जाता है।
- खोज का इतिहास: इन्हें सबसे पहले 1953 में एलन सैंडेज द्वारा गोलाकार तारा समूह M3 में खोजा गया था।









