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भारत का पहला डेंगू टीका – क्यूडेंगा

Mon 27 Jul, 2026

  • केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (Central Drugs Standard Control Organisation-CDSCO) ने क्यूडेंगा (Qdenga) को विपणन (मार्केटिंग) की अनुमति प्रदान की है, जिससे यह भारत का पहला अनुमोदित डेंगू टीका बन गया है।
  • जापानी औषधि कंपनी टाकेदा (Takeda) द्वारा विकसित क्यूडेंगा एक जीवित क्षीणीकृत चतुर्संयोजी (Live-Attenuated Tetravalent) डेंगू टीका है, जिसे डेंगू वायरस के सभी चार सीरोटाइप (DENV-1, DENV-2, DENV-3 एवं DENV-4) से सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।
  • यद्यपि यह स्वीकृति भारत में डेंगू नियंत्रण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, किंतु नैदानिक परीक्षणों (Clinical Trials) के आँकड़ों से संकेत मिलता है कि कुछ विशेष वायरस सीरोटाइपों, विशेषकर उन व्यक्तियों में जिन्हें पहले कभी डेंगू नहीं हुआ है, इसके प्रभाव को लेकर कुछ महत्वपूर्ण चिंताएँ भी हैं।

पृष्ठभूमि (Background)

  • डेंगू भारत की सबसे गंभीर वाहक जनित (Vector-Borne) बीमारियों में से एक है। विश्व में डेंगू के कुल मामलों का लगभग एक-तिहाई भार भारत पर है तथा प्रत्येक वर्ष मौसमी प्रकोपों के कारण हजारों लोग अस्पतालों में भर्ती होते हैं।
  • यह रोग एडीज एजिप्टी (Aedes aegypti) मच्छर द्वारा फैलता है तथा डेंगू वायरस के चार आनुवंशिक रूप से भिन्न सीरोटाइपों (Serotypes) के कारण होता है।
  • किसी एक सीरोटाइप से संक्रमित होने पर व्यक्ति को जीवनभर उसी सीरोटाइप के विरुद्ध प्रतिरक्षा प्राप्त होती है, किंतु अन्य सीरोटाइपों के विरुद्ध नहीं। ऐसी स्थिति में दूसरे सीरोटाइप से संक्रमण होने पर एंटीबॉडी-निर्भर संवर्धन (Antibody-Dependent Enhancement-ADE) के कारण रोग अधिक गंभीर हो सकता है।
  • यही कारण है कि सुरक्षित एवं प्रभावी डेंगू टीके का विकास उष्णकटिबंधीय चिकित्सा (Tropical Medicine) की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक रहा है।

क्यूडेंगा (Qdenga) क्या है?

क्यूडेंगा (TAK-003) की प्रमुख विशेषताएँ

  • यह एक जीवित क्षीणीकृत चतुर्संयोजी (Live-Attenuated Tetravalent) डेंगू टीका है।
  • इसका विकास टाकेदा फार्मास्यूटिकल्स (जापान) द्वारा किया गया है।
  • इसे 40 से अधिक देशों में स्वीकृति प्राप्त है।
  • यह 4 से 60 वर्ष आयु वर्ग के व्यक्तियों के लिए अनुशंसित है।
  • इसे उन व्यक्तियों को भी लगाया जा सकता है जिन्हें पहले कभी डेंगू नहीं हुआ है।

उद्देश्य

  • डेंगू वायरस के सभी चार सीरोटाइपों के विरुद्ध संतुलित प्रतिरक्षा (Balanced Immunity) प्रदान करना।

 

डेंगू के सीरोटाइप (Dengue Serotypes)

डेंगू वायरस के चार सीरोटाइप होते हैं—

  • DENV-1
  • DENV-2
  • DENV-3
  • DENV-4
  • प्रत्येक सीरोटाइप की जैविक विशेषताएँ अलग होती हैं।
  • किसी एक सीरोटाइप से संक्रमित व्यक्ति उसी सीरोटाइप के विरुद्ध प्रतिरक्षित हो जाता है, किंतु शेष तीन सीरोटाइपों के संक्रमण की संभावना बनी रहती है।

 

एंटीबॉडी-निर्भर संवर्धन (ADE): सबसे बड़ी चुनौती

  • डेंगू संक्रमण की सबसे गंभीर विशेषताओं में से एक एंटीबॉडी-निर्भर संवर्धन (Antibody-Dependent Enhancement-ADE) है।

ADE कैसे कार्य करता है?

  1. व्यक्ति पहली बार DENV-1 से संक्रमित होता है।
  2. शरीर DENV-1 के विरुद्ध एंटीबॉडी विकसित करता है।
  3. बाद में वही व्यक्ति DENV-3 से संक्रमित हो जाता है।
  4. इस स्थिति में DENV-1 के विरुद्ध बनी एंटीबॉडी सुरक्षा प्रदान करने के बजाय DENV-3 को प्रतिरक्षा कोशिकाओं में प्रवेश करने में सहायता कर सकती हैं।
  5. परिणामस्वरूप गंभीर डेंगू (Severe Dengue), डेंगू रक्तस्रावी ज्वर (Dengue Hemorrhagic Fever-DHF) अथवा डेंगू शॉक सिंड्रोम (Dengue Shock Syndrome-DSS) का जोखिम बढ़ जाता है।

इसलिए—

  • आदर्श डेंगू टीका ऐसा होना चाहिए जो सभी चार सीरोटाइपों के विरुद्ध समान स्तर की सुरक्षा प्रदान करे।
  • यदि टीका किसी एक सीरोटाइप के विरुद्ध भी पर्याप्त सुरक्षा नहीं देता, तो भविष्य में गंभीर डेंगू का खतरा बढ़ सकता है।

मुख्य चिंता: DENV-3 के विरुद्ध सीमित सुरक्षा

  • जब शोधकर्ताओं ने प्रत्येक सीरोटाइप के विरुद्ध टीके की प्रभावशीलता का विश्लेषण किया, तब निम्नलिखित परिणाम सामने आए—

उच्च सुरक्षा

✔ DENV-1

✔ DENV-2

सीमित सुरक्षा

❌ DENV-3

  • जिन बच्चों को पहले कभी डेंगू नहीं हुआ था (Seronegative Children), उनमें क्यूडेंगा लगाने के बाद DENV-3 संक्रमण का जोखिम बिना टीकाकरण वाले बच्चों की तुलना में लगभग 25% अधिक पाया गया।
  • इससे यह आशंका उत्पन्न होती है कि कुछ परिस्थितियों में यह टीका एंटीबॉडी-निर्भर संवर्धन (ADE) की संभावना को बढ़ा सकता है।

टीकाकरण से पूर्व स्क्रीनिंग क्यों आवश्यक है?

  • इम्पीरियल कॉलेज लंदन (Imperial College London) के शोधकर्ताओं ने हाल ही में क्यूडेंगा के सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रभावों का मॉडल आधारित अध्ययन किया।
  • अध्ययन के अनुसार—
  • विशेष रूप से ऐसे बच्चों एवं अन्य व्यक्तियों, जिन्हें पहले कभी डेंगू नहीं हुआ है, का टीकाकरण से पूर्व डेंगू संक्रमण की जाँच (Screening) किया जाना चाहिए।
  • इससे ADE से जुड़े संभावित जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

 

आगे की राह (Way Forward)

भारत को निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए—

  • क्यूडेंगा के उपयोग के बाद निरंतर पोस्ट-मार्केटिंग निगरानी (Post-Marketing Surveillance) सुनिश्चित करना।
  • देशव्यापी वैक्सीन सुरक्षा निगरानी प्रणाली (Vaccine Safety Monitoring) विकसित करना।
  • कम लागत वाली डेंगू एंटीबॉडी स्क्रीनिंग जाँच विकसित करना।
  • मच्छर नियंत्रण (Vector Control) कार्यक्रमों को और अधिक सुदृढ़ करना।
  • स्वदेशी डेंगू टीका अनुसंधान को प्रोत्साहित करना।
  • मच्छरों से बचाव एवं डेंगू रोकथाम के संबंध में जन-जागरूकता अभियान को व्यापक बनाना।

निष्कर्ष (Conclusion)

  • क्यूडेंगा की स्वीकृति भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है तथा यह देश में डेंगू नियंत्रण की दिशा में नई आशा प्रदान करती है।
  • हालांकि उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण यह दर्शाते हैं कि यह टीका सभी डेंगू सीरोटाइपों के विरुद्ध समान स्तर की सुरक्षा प्रदान नहीं करता।
  • विशेष रूप से DENV-3 के विरुद्ध Seronegative व्यक्तियों में देखे गए सुरक्षा संकेत इस बात की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं कि टीके का उपयोग सावधानीपूर्वक, वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर तथा निरंतर निगरानी के साथ किया जाए।
  • टीकाकरण, पूर्व स्क्रीनिंग, मच्छर नियंत्रण तथा जन-जागरूकता का समन्वित दृष्टिकोण ही भारत में डेंगू के बोझ को प्रभावी रूप से कम करने में सहायक होगा।

डेंगू

रोग का प्रकार विषाणु जनित (Viral Disease)
कारक जीव डेंगू वायरस (फ्लैविवायरस - Flavivirus)
वायरस के सीरोटाइप DENV-1, DENV-2, DENV-3, DENV-4
वाहक (Vector) मादा एडीज एजिप्टी (Aedes aegypti) मच्छर (मुख्य), एडीज एल्बोपिक्टस (Aedes albopictus)
ऊष्मायन अवधि (Incubation Period) 4–10 दिन
मच्छर के काटने का प्रमुख समय प्रातःकाल एवं सूर्यास्त से पूर्व
संक्रमण का माध्यम संक्रमित मच्छर के काटने से (प्रत्यक्ष व्यक्ति-से-व्यक्ति नहीं)
प्रमुख लक्षण तेज बुखार, तीव्र सिरदर्द, आँखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों एवं जोड़ों में दर्द, त्वचा पर चकत्ते, मतली एवं उल्टी
गंभीर रूप डेंगू रक्तस्रावी ज्वर (DHF), डेंगू शॉक सिंड्रोम (DSS)
निदान NS1 एंटीजन टेस्ट, RT-PCR, IgM/IgG ELISA
उपचार कोई विशिष्ट एंटीवायरल दवा उपलब्ध नहीं; तरल पदार्थ, बुखार नियंत्रण एवं सहायक उपचार
रोकथाम मच्छर नियंत्रण, जलभराव समाप्त करना, सुरक्षात्मक वस्त्र, मच्छररोधी पदार्थ एवं उपयुक्त परिस्थितियों में टीकाकरण

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