27 July, 2026
“सारनाथ का प्राचीन बौद्ध स्थल” यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल
Sun 26 Jul, 2026
संदर्भ :
- दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र में वाराणसी स्थित “सारनाथ के प्राचीन बौद्ध स्थल” को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया।
मुख्य बिन्दु :
- भारत का स्थान: सारनाथ भारत का 45वां यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल बन गया है।
- उत्तर प्रदेश की स्थिति: सारनाथ के शामिल होने से अब उत्तर प्रदेश में कुल 4 विश्व धरोहर स्थल हो गए हैं (ताजमहल, आगरा किला, फतेहपुर सीकरी और सारनाथ)
- प्रतीक्षा अवधि: सारनाथ को करीब 28 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद यह दर्जा मिला है (इसे 1998 में यूनेस्को की अस्थायी यानी टेंटेटिव सूची में शामिल किया गया था)
- आयोजन सत्र: यह घोषणा दक्षिण कोरिया के बुसान शहर में आयोजित यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र के दौरान की गई।
- नामांकन चक्र: सारनाथ को वर्ष 2025-26 चक्र के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टि के रूप में भेजा गया था
नामांकन मानदंड :
- मानदंड (iii) [Criteria iii]: यह किसी जीवित या विलुप्त सांस्कृतिक परंपरा या सभ्यता के लिए एक अनूठा या असाधारण साक्ष्य प्रस्तुत करता है। सारनाथ छठी शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर आज तक बौद्ध भिक्षुत्व, दर्शन और संघ परंपरा का सजीव साक्ष्य है।
- मानदंड (vi) [Criteria vi]: यह प्रत्यक्ष या मूर्त रूप से उन घटनाओं, जीवित परंपराओं, विचारों, विश्वासों या कलात्मक व साहित्यिक कार्यों से जुड़ा है जो असाधारण वैश्विक महत्व के हैं। सारनाथ सीधे तौर पर बुद्ध के प्रथम उपदेश (धर्मचक्रप्रवर्तन), आर्य अष्टांगिक मार्ग और बौद्ध संघ की स्थापना जैसी वैश्विक घटनाओं से जुड़ा है।
भौगोलिक संरचना: दो भागों का वर्गीकरण :
- चौखंडी स्तूप: यह बुद्ध और उनके प्रथम पाँच शिष्यों के पुनर्मिलन का प्रतीक है। इसकी वास्तुकला अनूठी है क्योंकि यह मौर्य-गुप्त काल के टीले पर बनी मुगलकालीन अष्टकोणीय मीनार (हुमायूं की यात्रा की स्मृति में) का सम्मिश्रण प्रदर्शित करती है, जो भारत की मिश्रित संस्कृति का उदाहरण है।
- सारनाथ के पुरातात्विक अवशेष: इसमें धमेक स्तूप (मुख्य बेलनाकार संरचना), धर्मराजिका स्तूप (अशोक द्वारा निर्मित), मूलगंधकुटी विहार (जहाँ बुद्ध वर्षावास के दौरान ध्यान लगाते थे) और अशोक स्तंभ शामिल हैं। यह संपूर्ण परिसर मौर्य, शुंग, कुषाण और गुप्त राजवंशों के कालानुक्रमिक विकास को दर्शाता है।
प्राचीन नामकरण और सांस्कृतिक भूगोल :
- ऋषिपत्तन / इषिपत्तन: वह स्थान जहाँ ऋषि या सिद्ध पुरुष अवतरित होते थे या निवास करते थे।
- मृगदाव (Deer Park): राजाओं द्वारा हिरणों के लिए आरक्षित अभयारण्य। यह दर्शाता है कि प्राचीन भारत में पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण की संस्कृति कितनी गहरी थी।
वैश्विक बौद्ध विरासत का तुलनात्मक मानचित्रण :
बुद्ध के जीवन से जुड़े 4 महातीर्थ :
- लुंबिनी (नेपाल) – जन्म, विश्व धरोहर
- 2. बोधगया (बिहार) – ज्ञान, विश्व धरोहर
- 3. सारनाथ (उत्तर प्रदेश) - प्रथम उपदेश, विश्व धरोहर
- 4. कुशीनगर (उत्तर प्रदेश) – महापरिनिर्वाण, (संभावित सूची में शामिल/प्रयास जारी)
भारतीय उपमहाद्वीप के अन्य प्रमुख बौद्ध धरोहर स्थल :
- भारत: सांची (मध्य प्रदेश), नालंदा (बिहार), अजंता (महाराष्ट्र)
- श्रीलंका: अनुराधापुर
- बांग्लादेश: पहाड़पुर (सोमपुर महाविहार)
- पाकिस्तान: तक्षशिला और तख्त-ए-बाही
भारत की सांस्कृतिक कूटनीति का कालक्रम (2021-2026) :
- 2021-2025: भारत यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति (World Heritage Committee) का निर्वाचित सदस्य रहा, जिससे भारत को वैश्विक स्तर पर सांस्कृतिक निर्णयों को प्रभावित करने का नीतिगत मंच मिला।
- जुलाई 2024: नई दिल्ली में भारत ने पहली बार यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति की मेजबानी की, जिसने भारत की विरासत प्रबंधन क्षमता को साबित किया।
- 25 जुलाई 2026: बुसान (दक्षिण कोरिया) सत्र में, 1998 (लगभग 28 वर्ष) से संभावित सूची (Tentative List) में शामिल सारनाथ को अंततः स्थायी सूची में जगह मिली। यह दीर्घकालिक सांस्कृतिक कूटनीति (Long-term Cultural Diplomacy) की एक बड़ी जीत है।
यूनेस्को सामान्य जानकारी
- पूरा नाम: संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन
- अंग्रेज़ी नाम: United Nations Educational, Scientific and Cultural Organization (UNESCO)
- स्थापना: 1945
- मुख्यालय: पेरिस, फ्रांस
- प्रमुख उद्देश्य: शिक्षा, विज्ञान, संस्कृति और संचार के माध्यम से शांति और सतत विकास को बढ़ावा देना
- विश्व धरोहर सम्मेलन 1972 में यूनेस्को द्वारा बनाया गया एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है
- अक्टूबर 2024 तक, 196 देशों में 1,223 विश्व धरोहर स्थल हैं (952 सांस्कृतिक, 231 प्राकृतिक, 40 मिश्रित)
- भारत में 45 विश्व धरोहर स्थल हैं, इनमें 37 सांस्कृतिक, 7 प्राकृतिक और 1 मिश्रित स्थल शामिल हैं।
- नवीनतम जोड़ असम का मोइदम (अहोम राजवंश की टीला-दफन प्रणाली) है, जिसे जुलाई 2024 में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया।
- प्रतिवर्ष 18 अप्रैल को विश्व विरासत दिवस मनाया जाता है(इस वर्ष (2025) का विषय : "आपदाओं और संघर्षों से खतरे में विरासत: ICOMOS की 60 वर्षों की कार्रवाइयों से तैयारी और सीख")
- भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने के लिए सरकार की पहल









