27 July, 2026
'भारत औद्योगिक विकास योजना – रसायन (BHAVYA Rasayan)' को मंजूरी
Sat 25 Jul, 2026
संदर्भ :
- प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'भारत औद्योगिक विकास योजना – रसायन (BHAVYA Rasayan)' को मंजूरी दी।
योजना के बारे प्रमुख जानकारी :
- योजना का पूरा नाम : भारत औद्योगिक विकास योजना – रसायन (BHAVYA - Bharat Audyogik Vikas Yojana Rasayan)
- घोषणा : इस योजना की घोषणा केंद्रीय बजट 2026-27 में की गई थी
- कार्यान्वयन अवधि : यह योजना 5 वर्षों (वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31) के लिए लागू रहेगी
- नोडल मंत्रालय: रसायन एवं पेट्रोकेमिकल विभाग, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय
- एक केंद्रीय क्षेत्र औद्योगिक पार्क विकास योजना है
- उद्देश्य : भारत के रासायनिक और पेट्रोकेमिकल विनिर्माण का विस्तार करना
- क्या है?: यह रसायन एवं पेट्रोकेमिकल विनिर्माण के विस्तार के लिए एक केंद्रीय क्षेत्र की औद्योगिक पार्क विकास योजना है
- बजट आवंटन: कुल ₹3,030 करोड़। इसमें से ₹3,000 करोड़ पार्कों के भीतरी बुनियादी ढांचे के लिए और ₹30 करोड़ प्रशासनिक व्यय के लिए हैं
- कार्यान्वयन अवधि: वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 (5 वर्ष)
- मूल अवधारणा: उद्योगों के लिए विश्वस्तरीय "प्लग-एंड-प्ले" साझा पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना
प्रमुख विशेषताएं और वित्तीय ढांचा :
- तीन समर्पित पार्क: इस योजना के तहत देश में तीन विश्वस्तरीय समर्पित रासायनिक पार्क स्थापित किए जाएंगे।
- चैलेंज रूट : पार्कों की स्थापना के लिए राज्यों का चयन एक पारदर्शी और चुनौती-आधारित प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा
- भूमि की आवश्यकता: भाग लेने वाले राज्यों को प्रति पार्क न्यूनतम 8 वर्ग किलोमीटर (लगभग 2,000 एकड़) विवाद-मुक्त और निरंतर भूमि प्रदान करनी होगी।
फंडिंग पैटर्न :
- केंद्र सरकार प्रत्येक पार्क के लिए अधिकतम ₹1,000 करोड़ तक का अनुदान देगी।
- यह अनुदान तभी मिलेगा जब संबंधित राज्य सरकार न्यूनतम ₹500 करोड़ का योगदान करेगी
साझा अवसंरचना घटक :
- साझा अपशिष्ट उपचार संयंत्र (CETP) और खतरनाक अपशिष्ट निपटान सुविधाएं (TSDF)।
- निरंतर जल आपूर्ति, भाप उत्पादन और वितरण नेटवर्क।
- सॉल्वेंट रिकवरी (विलायक पुनर्प्राप्ति) और आसवन (Distillation) सुविधाएं।
- एकीकृत और अंतर्संबंधित औद्योगिक पाइपलाइन नेटवर्क।
- उन्नत लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग (भंडारण) सुविधाएं
रणनीतिक महत्व और लाभ :
[साझा बुनियादी ढांचा (CETP/पाइपलाइन)] ➔ [उत्पादन लागत व लॉजिस्टिक्स में कमी] ➔ [वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि] ➔ [निर्यात प्रोत्साहन व आयात प्रतिस्थापन]
- संपूर्ण मूल्य श्रृंखला का सुदृढ़ीकरण: यह अपस्ट्रीम (कच्चा माल), डाउनस्ट्रीम (अंतिम उत्पाद) और सहायक उद्योगों को एक ही स्थान पर लाकर माल ढुलाई और प्रबंधन लागत को कम करेगा।
- आयात निर्भरता में कमी: भारत वर्तमान में कई उच्च-मूल्य वाले रसायनों के लिए आयात पर निर्भर है। यह योजना घरेलू उत्पादन बढ़ाकर फॉरेक्स की बचत करेगी।
- पर्यावरणीय अनुपालन: केंद्रीकृत अपशिष्ट प्रबंधन से प्रदूषण नियंत्रण नियमों का बेहतर और किफायती अनुपालन सुनिश्चित होगा।
- मल्टी-सेक्टर प्रभाव: रसायन उद्योग टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि (उर्वरक), ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों के लिए आधार है। इसके मजबूत होने से इन सभी क्षेत्रों को लाभ होगा।
- निवेश और रोजगार: यह घरेलू और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को आकर्षित कर बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करेगा।
भारतीय रसायन क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य
वैश्विक और घरेलू स्थिति :
- वैश्विक रैंकिंग: भारत विश्व में रसायनों का छठा सबसे बड़ा उत्पादक और एशिया में तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक है।
- जीडीपी में योगदान: यह उद्योग भारत के विनिर्माण GDP में 7% से अधिक का योगदान देता है।
- कृषि रसायनों में स्थिति: वैश्विक स्तर पर भारत अमेरिका और चीन के बाद कृषि रसायनों का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक है।
- डाई (रंजक पदार्थों) का केंद्र: भारत विश्व के कुल रंजक पदार्थों और डाई इंटरमीडिएट्स के उत्पादन में 16-18% का योगदान देता है।
- विविधता और आकार: भारतीय रसायन क्षेत्र 80,000 से अधिक वाणिज्यिक उत्पादों को कवर करता है। वर्ष 2025-26 तक इसका बाजार आकार लगभग 250 से 300 अरब अमेरिकी डॉलर आंका गया है, जिसके 2040 तक 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँचने की उम्मीद है।









