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डिफेंस, सिक्योरिटी एंड रेजिलिएंस बैंक

Tue 14 Jul, 2026

डिफेंस, सिक्योरिटी एंड रेजिलिएंस बैंक (Defence, Security and Resilience Bank–DSRB) नामक एक नए बहुपक्षीय वित्तीय संस्थान (Multilateral Financial Institution) की स्थापना का प्रस्ताव रखा गया है। इसका उद्देश्य मित्र देशों (Allied Nations) के बीच रक्षा, सुरक्षा तथा सामरिक आपूर्ति शृंखला (Strategic Supply Chain) से संबंधित परियोजनाओं के लिए दीर्घकालिक एवं कम लागत वाला वित्त उपलब्ध कराना है।

 

पृष्ठभूमि (Background)

  • रूस–यूक्रेन युद्ध, बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा, साइबर खतरों, रक्षा आधुनिकीकरण की बढ़ती आवश्यकता तथा आपूर्ति शृंखलाओं में व्यवधान ने वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था को नई चुनौतियों के सामने खड़ा कर दिया है।
  • विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक (ADB) जैसे पारंपरिक बहुपक्षीय विकास बैंक सामान्यतः रक्षा एवं सैन्य परियोजनाओं को वित्तपोषित नहीं करते। इसी कमी को दूर करने के लिए DSRB की परिकल्पना की गई है।

 

डिफेंस, सिक्योरिटी एंड रेजिलिएंस बैंक (DSRB) क्या है?

DSRB एक प्रस्तावित बहुपक्षीय वित्तीय संस्था है, जिसका उद्देश्य सदस्य देशों को निम्न क्षेत्रों में वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है—

  • रक्षा आधुनिकीकरण (Defence Modernisation)
  • सैन्य खरीद (Military Procurement)
  • रक्षा विनिर्माण क्षमता (Defence Industrial Capacity)
  • सामरिक आपूर्ति शृंखलाएँ (Strategic Supply Chains)
  • सुरक्षा अवसंरचना (Security Infrastructure)
  • रक्षा एवं द्वि-उपयोगी (Dual-use) प्रौद्योगिकियों का विकास

यह पारंपरिक विकास बैंकों से भिन्न होगा क्योंकि इसका प्रमुख उद्देश्य केवल रक्षा एवं सुरक्षा क्षेत्र का वित्तपोषण होगा।

प्रमुख विशेषताएँ (Key Features)

बिंदु विवरण
प्रकृति प्रस्तावित बहुपक्षीय वित्तीय संस्थान
प्रस्तावित मुख्यालय कनाडा
यूरोपीय केंद्र लक्ज़मबर्ग
प्रस्तावित कोष लगभग 100 अरब पाउंड (≈ 134 अरब अमेरिकी डॉलर)
उद्देश्य रक्षा, सुरक्षा एवं सामरिक आपूर्ति शृंखला परियोजनाओं का वित्तपोषण
वित्तीय साधन AAA-रेटेड संप्रभु समर्थित बॉण्ड (Sovereign-backed Bonds)

उद्देश्य (Objectives)

DSRB का उद्देश्य—

  • मित्र देशों की सामूहिक रक्षा क्षमता को सुदृढ़ करना।
  • रक्षा उद्योगों की उत्पादन क्षमता बढ़ाना।
  • सामरिक आपूर्ति शृंखलाओं को अधिक सुरक्षित एवं लचीला बनाना।
  • रक्षा क्षेत्र में दीर्घकालिक एवं कम लागत वाला वित्त उपलब्ध कराना।
  • उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों में निवेश को प्रोत्साहित करना।
  • रक्षा क्षेत्र में रणनीतिक आत्मनिर्भरता (Strategic Resilience) को बढ़ावा देना।

 

DSRB कैसे कार्य करेगा?

यह बैंक—

  • सदस्य देशों की उच्च साख (Creditworthiness) के आधार पर AAA-रेटेड बॉण्ड जारी करेगा।
  • अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजार से धन जुटाएगा।
  • सदस्य देशों को कम ब्याज दर पर दीर्घकालिक ऋण उपलब्ध कराएगा।
  • रक्षा खरीद, रक्षा उद्योग तथा सैन्य अवसंरचना परियोजनाओं को वित्त उपलब्ध कराएगा।

 

AAA-रेटेड बॉण्ड क्या हैं?

AAA-रेटेड बॉण्ड वे ऋण-पत्र होते हैं जिन्हें अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियाँ सर्वोच्च क्रेडिट रेटिंग प्रदान करती हैं।

विशेषताएँ

  • अत्यंत कम जोखिम।
  • न्यूनतम डिफॉल्ट संभावना।
  • कम ब्याज दर पर पूंजी जुटाने की सुविधा।
  • वैश्विक निवेशकों का उच्च विश्वास।

 

संस्थापक सदस्य (Founding Members)

प्रस्तावित सदस्य देश—

  • अल्बानिया
  • बेल्जियम
  • कनाडा
  • ग्रीस
  • लातविया
  • लक्ज़मबर्ग
  • रोमानिया
  • तुर्किये
  • यूक्रेन

 

उद्भव (Origin)

  • इस पहल का प्रस्ताव वर्ष 2024 में रॉब मरे (Rob Murray) द्वारा दिया गया था।
  • रॉब मरे इससे पहले नाटो (NATO) की Defence Innovation Accelerator for the North Atlantic (DIANA) के प्रमुख रह चुके हैं।

DIANA (Defence Innovation Accelerator for the North Atlantic)

बिंदु विवरण
संगठन NATO
उद्देश्य रक्षा एवं द्वि-उपयोगी (Dual-use) प्रौद्योगिकियों में नवाचार को बढ़ावा देना
प्रमुख क्षेत्र कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), क्वांटम प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा, स्वायत्त प्रणालियाँ, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी

DIANA नाटो का प्रमुख नवाचार मंच है, जो उभरती रक्षा प्रौद्योगिकियों के विकास एवं उनके सैन्य उपयोग को बढ़ावा देता है।

 

महत्त्व (Significance)

1. रक्षा वित्तपोषण का नया वैश्विक मॉडल

DSRB विश्व का पहला ऐसा बहुपक्षीय वित्तीय संस्थान बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जो विशेष रूप से रक्षा एवं सुरक्षा क्षेत्र के लिए समर्पित होगा।

2. सामूहिक सुरक्षा को सुदृढ़ करना

यह सदस्य देशों के बीच—

  • सैन्य आधुनिकीकरण,
  • संयुक्त रक्षा उत्पादन,
  • रक्षा सहयोग,
  • सामरिक क्षमता निर्माण को गति देगा।

3. सामरिक आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत करना

यह बैंक—

  • रक्षा विनिर्माण,
  • सेमीकंडक्टर,
  • महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals),
  • रक्षा लॉजिस्टिक्स

जैसे क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देगा।

4. रक्षा नवाचार को प्रोत्साहन

यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, क्वांटम कंप्यूटिंग, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी तथा स्वायत्त हथियार प्रणालियों में निवेश बढ़ाने में सहायक होगा।

5. NATO की दीर्घकालिक रणनीति को समर्थन

DSRB, NATO की सामूहिक सुरक्षा रणनीति एवं रक्षा क्षमताओं के विकास हेतु एक स्थायी वित्तीय तंत्र उपलब्ध करा सकता है।

 

चुनौतियाँ (Challenges)

  • सदस्य देशों के बीच सहमति स्थापित करना।
  • AAA क्रेडिट रेटिंग बनाए रखना।
  • रक्षा व्यय एवं राजकोषीय अनुशासन के बीच संतुलन।
  • पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करना।
  • वैश्विक सैन्य गुटबंदी (Bloc Politics) को बढ़ावा मिलने की आशंका।
  • मौजूदा राष्ट्रीय रक्षा वित्तपोषण व्यवस्थाओं के साथ समन्वय।

 

भारत के लिए महत्त्व (Relevance for India)

यद्यपि भारत इस प्रस्तावित बैंक का सदस्य नहीं है, फिर भी इसके कई रणनीतिक निहितार्थ हैं—

सकारात्मक पक्ष

  • रक्षा वित्तपोषण के नए वैश्विक मॉडल का उदाहरण।
  • सामरिक आपूर्ति शृंखलाओं की बढ़ती महत्ता को रेखांकित करता है।
  • भारत की 'आत्मनिर्भर भारत' एवं 'मेक इन इंडिया' आधारित रक्षा विनिर्माण नीति के लिए उपयोगी संदर्भ।
  • रक्षा क्षेत्र में दीर्घकालिक वित्तीय तंत्र विकसित करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

चिंताएँ

  • वैश्विक वित्तीय संस्थानों का सैन्यीकरण।
  • गुट-आधारित सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ावा।
  • वैश्विक शक्ति संतुलन पर प्रभाव।

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