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'ULLAS' कार्यक्रम के तहत भारत का छठा पूर्ण साक्षर राज्य

Sun 12 Jul, 2026

संदर्भ :

  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और 'ULLAS' कार्यक्रम के तहत उत्तराखंड को 98.7% वयस्क साक्षरता दर के साथ भारत का छठा पूर्ण साक्षर राज्य घोषित किया गया।

मुख्‍य बिन्‍दु :

  • घोषणा : उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) द्वारा
  • निर्धारित मानदंड: केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के नियमों के अनुसार, यदि किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में वयस्क साक्षरता दर 95% के स्तर को पार कर जाती है, तो उसे 'पूर्ण साक्षर' घोषित किया जा सकता है
  • मानक : शिक्षा मंत्रालय के नियमों के अनुसार, जब किसी राज्य/UT में 15 वर्ष या उससे अधिक आयु वर्ग की वयस्क साक्षरता दर 95% या उससे अधिक हो जाती है, तो उसे 'पूर्ण साक्षर' घोषित किया जाता है। सिक्किम ने इसे बड़े अंतर से पार किया है।
  • दर्जा और क्रम: उत्तराखंड देश का छठा (6th) पूर्ण साक्षर राज्य बना है।
  • उत्तराखंड की छलांग: राज्य की साक्षरता दर जो वर्ष 2023-24 में 83.8% थी, वह मात्र दो वर्षों में बढ़कर 98.7% हो गई
  • इससे पूर्व जून 2026 में इस प्रस्ताव को उत्तराखंड राज्य मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित किया गया था
  • आधिकारिक मान्यता: यह मान्यता केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा निर्धारित साक्षरता मानकों को पूरा करने के बाद प्रदान की गई

अन्य पूर्ण साक्षर राज्य :

राज्य/केन्द्र शासित प्रदेश घोषणा वर्ष साक्षरता दर विशेषताएँ
मिज़ोरम 2025 98.2% सामुदायिक भागीदारी, महिलाओं की शिक्षा पर जोर
गोवा 2025 96% प्रशासनिक दक्षता, उच्च निवेश
त्रिपुरा 2025 95.6% साइबर साक्षरता अभियान, जनजातीय पहुँच
हिमाचल प्रदेश 2025 99.3% स्वतंत्रता के बाद 7% से लगभग सार्वभौमिक साक्षरता
लद्दाख (UT) 2024 97% पहला UT जिसने कार्यात्मक साक्षरता हासिल की
सिक्किम 2026 99.82% दूरस्थ हिमालयी क्षेत्रों तक समावेशी पहुँच
चंडीगढ़ 2026 99.93%  

'उल्लास' (ULLAS) पहल:

  • पूरा नाम: Understanding Lifelong Learning for All in Society (समाज में सभी के लिए आजीवन शिक्षा की समझ) - नव भारत साक्षरता कार्यक्रम।
  • प्रकृति: यह एक केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme) है, जिसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की सिफारिशों के अनुरूप वर्ष 2022 में शुरू किया गया था।
  • नोडल मंत्रालय: केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education)।
  • लक्ष्य समूह: 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के वे गैर-साक्षर नागरिक जो औपचारिक स्कूली शिक्षा का लाभ उठाने से वंचित रह गए।
  • मूल मंत्र (Tagline): "जन-जन साक्षर" (Education for All)।
  • राष्ट्रीय लक्ष्य: वित्तीय वर्ष 2022-2027 के दौरान 5 करोड़ गैर-साक्षर लोगों को कवर करना (प्रति वर्ष लगभग 1 करोड़ का लक्ष्य)।
  • पूर्ण साक्षरता का मानक (Benchmark): शिक्षा मंत्रालय के मानदंडों के अनुसार, यदि किसी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में 15 वर्ष या उससे अधिक आयु वर्ग के वयस्कों की साक्षरता दर 95% या उससे अधिक हो जाती है, तो उसे 'पूर्ण साक्षर' घोषित किया जा सकता है।

'उल्लास' के पांच प्रमुख स्तंभ (Five Key Components):

  1. बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता (Foundational Literacy & Numeracy - FLN): बुनियादी पढ़ना, लिखना और अंकगणित।
  2. महत्वपूर्ण जीवन कौशल (Critical Life Skills): वित्तीय साक्षरता, डिजिटल साक्षरता, कानूनी साक्षरता, चुनावी साक्षरता, पर्यावरण साक्षरता और स्वास्थ्य जागरूकता।
  3. व्यावसायिक कौशल विकास (Vocational Skills Development): स्थानीय रोजगार और आजीविका के अवसरों के लिए कौशल प्रशिक्षण।
  4. बुनियादी शिक्षा (Basic Education): प्रारंभिक, मध्य और माध्यमिक स्तर की समकक्षता प्रदान करना।
  5. सतत शिक्षा (Continuing Education): कला, विज्ञान, संस्कृति, प्रौद्योगिकी और मनोरंजन में उन्नत जीवनपर्यंत सीखने के अवसर।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (National Education Policy 2020) :

परिचय :

  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) भारत सरकार द्वारा 29 जुलाई 2020 को घोषित की गई थी।
  • यह नीति 1986 में जारी हुई पिछली शिक्षा नीति के बाद पहली बार व्यापक बदलाव लेकर आई है।
  • नीति का उद्देश्य भारत को एक वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनाना और शिक्षा को समावेशी, समग्र, लचीला तथा 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना है।

मुख्य उद्देश्य :

  • 2030 तक 100% सकल नामांकन अनुपात (Gross Enrolment Ratio) प्राप्त करना।
  • शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 6% तक सार्वजनिक व्यय सुनिश्चित करना।
  • गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और समान शिक्षा सबके लिए उपलब्ध कराना।
  • छात्रों के सर्वांगीण विकास (शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, नैतिक) पर बल देना।
  • तकनीकी, व्यावसायिक और कौशल-आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना।

प्रमुख विशेषताएँ :

क्षेत्र विशेषताएँ
स्कूली शिक्षा
  • 5+3+3+4 संरचना (3-18 वर्ष की आयु के लिए)
  • कक्षा 5 तक मातृभाषा/स्थानीय भाषा में शिक्षा पर बल
  • प्रारंभिक बचपन देखभाल और शिक्षा (ECCE) पर ज़ोर
  • ड्रॉपआउट दर कम करना और सार्वभौमिक शिक्षा तक पहुँच सुनिश्चित करना
उच्च शिक्षा
  • मल्टीपल एंट्री-एग्जिट सिस्टम
  • स्नातक कोर्स 3 या 4 वर्ष के, बीच में छोड़ने पर सर्टिफिकेट/डिप्लोमा
  • भारतीय उच्च शिक्षा परिषद (HECI) के तहत एकल नियामक निकाय
  • रिसर्च और नवाचार को बढ़ावा
भाषा नीति
  • तीन-भाषा फॉर्मूला
  • कम-से-कम दो भारतीय भाषाएँ अनिवार्य
  • मातृभाषा को प्राथमिकता
शिक्षक प्रशिक्षण
  • शिक्षकों के लिए बेहतर प्रशिक्षण और मूल्यांकन व्यवस्था
  • शिक्षकों की योग्यता और क्षमता विकास पर ज़ोर
अन्य पहलें
  • डिजिटल शिक्षा, वर्चुअल लैब्स, टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन
  • व्यावसायिक शिक्षा का स्कूली स्तर से समावेश
  • समावेशी और समान शिक्षा के लिए विशेष प्रावधान

संरचना (5+3+3+4) :

  • 5 वर्ष: फाउंडेशनल स्टेज (3 साल प्री-प्राइमरी + कक्षा 1-2)
  • 3 वर्ष: प्रिपरेटरी स्टेज (कक्षा 3-5)
  • 3 वर्ष: मिडिल स्टेज (कक्षा 6-8)
  • 4 वर्ष: सेकेंडरी स्टेज (कक्षा 9-12)

भारत में 2011 की जनगणना के अनुसार साक्षरता दर :

  • कुल साक्षरता दर : 74.04%
  • पुरुषों की साक्षरता दर : 82.14%
  • महिलाओं की साक्षरता दर : 65.46%
  • सबसे अधिक साक्षरता दर वाला राज्‍य : केरल, लगभग 93.91%(मिजोरम की 91.58%)
  • केंद्र शासित प्रदेशों में सबसे अधिक साक्षरता दर : लक्षद्वीप, लगभग 92.28%
  • सबसे कम साक्षरता दर वाला राज्‍य : बिहार, 63.82%
  • पुरुष साक्षरता सबसे अधिक : केरल, 96.11% (लक्षद्वीप, 95.56%)
  • महिला साक्षरता सबसे अधिक : केरल, 91.98%(मिजोरम में 89.40%)

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