26 May, 2026
'ग्लोबल लिवेबिलिटी इंडेक्स 2026' रिपोर्ट : EIU
Fri 10 Jul, 2026
संदर्भ :
- इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट (EIU) ने 'ग्लोबल लिवेबिलिटी इंडेक्स 2026' रिपोर्ट जारी की है।
मुख्य बिन्दु :
- संस्था: इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट (EIU), द इकोनॉमिस्ट ग्रुप का हिस्सा
- व्याप्ति: 173 शहरों का मूल्यांकन
- मूल्यांकन: स्थिरता, स्वास्थ्य, संस्कृति, शिक्षा और बुनियादी ढांचे जैसे 5 मापदंडों पर आधारित।
मूल्यांकन के 5 मुख्य स्तंभ :
- यह सूचकांक 30 से अधिक गुणात्मक और मात्रात्मक संकेतकों के आधार पर शहरों को 1 से 100 के पैमाने पर मापता है, जिन्हें पांच श्रेणियों में विभाजित किया गया है:
- स्थिरता (25% भार): अपराध की दर, नागरिक अशांति, आतंकवाद का खतरा और सैन्य संघर्ष।
- स्वास्थ्य सेवा (20% भार): निजी और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता, उपलब्धता तथा दवाएं
- संस्कृति और पर्यावरण (25% भार): जलवायु परिस्थितियों, भ्रष्टाचार के स्तर, सामाजिक-सांस्कृतिक प्रतिबंधों और मनोरंजक गतिविधियों की उपलब्धता।
- शिक्षा (10% भार): निजी और सार्वजनिक शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच।
- अवसंरचना (20% भार): सार्वजनिक परिवहन, सड़क नेटवर्क, ऊर्जा, पानी, दूरसंचार और आवास की गुणवत्ता।
वैश्विक परिदृश्य 2026:
- औसत वैश्विक स्कोर: इस वर्ष औसत वैश्विक लिवेबिलिटी स्कोर 76.1/100 पर स्थिर रहा (पिछले वर्ष के समान)
- विपरीत प्रवृत्तियाँ : वैश्विक स्थिरता स्कोर में गिरावट आई है (मुख्य रूप से मध्य पूर्व में संघर्षों के कारण), लेकिन एशिया (विशेषकर चीन और जापान) में स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा प्रणालियों में सुधार ने इस गिरावट की भरपाई की है।
- पश्चिम यूरोप का दबदबा: पश्चिमी यूरोप वैश्विक स्तर पर रहने के लिए सबसे अनुकूल क्षेत्र बना हुआ है (औसत स्कोर 91.7), हालांकि इसके औसत स्कोर में मामूली गिरावट आई है।
- एशिया का उदय: एशिया के औसत स्कोर में 0.3 अंकों की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे वैश्विक शीर्ष-20 शहरों में अब एशिया के 9 शहर शामिल हो गए हैं।
शीर्ष 10 सबसे रहने योग्य शहर :
- कोपेनहेगन (डेनमार्क): लगातार दूसरे वर्ष प्रथम स्थान पर (कुल स्कोर: 98; स्थिरता, शिक्षा और बुनियादी ढांचे में पूर्ण 100/100 अंक)।
- वियना (ऑस्ट्रिया)
- मेलबर्न (ऑस्ट्रेलिया)
- सिडनी (ऑस्ट्रेलिया)
- ज्यूरिख (स्विट्जरलैंड)
- जिनेवा (स्विट्जरलैंड)
- ओसाका (जापान)
- एडीलेड (ऑस्ट्रेलिया)
- वैंकूवर (कनाडा)
- टोक्यो (जापान)
विश्व के 5 सबसे खराब रहने योग्य शहर :
- दमिश्क (सीरिया) – सूची में सबसे निचले स्थान पर
- त्रिपोली (लीबिया)
- ढाका (बांग्लादेश)
- कराची (पाकिस्तान) – वैश्विक स्तर पर 170वें (चौथा सबसे खराब) स्थान पर
- अल्जीयर्स (अल्जीरिया)
भारतीय शहरों का प्रदर्शन :
| शहर | वैश्विक रैंकिंग (2026) | मुख्य ताकत | मुख्य कमजोरियां |
| नई दिल्ली | 120वां स्थान (स्कोर: 48.1) | शिक्षा (66.7 अंक) और अवसंरचना (58.9) | स्वास्थ्य सेवा (41.7) और संस्कृति एवं पर्यावरण (35.4) |
| मुंबई | 121वां स्थान | आर्थिक अवसर और शिक्षा | यातायात जाम और बुनियादी नागरिक सेवाओं पर दबाव |
| चेन्नई | 123वां स्थान | स्थिर सामाजिक ढांचा | स्वास्थ्य अवसंरचना का अभाव |
| बेंगलुरु | 127वां स्थान | आईटी और आर्थिक विकास | पानी का संकट, अनियोजित शहरीकरण और बुनियादी ढांचा |
भारतीय शहरों के पिछड़ने के मुख्य कारण :
संस्कृति और पर्यावरण का अत्यंत कम स्कोर (33-35):
- वायु प्रदूषण और पर्यावरण क्षरण: दिल्ली-एनसीआर में पीएम 2.5 और पीएम 10 का खतरनाक स्तर फेफड़ों से संबंधित बीमारियों का कारण बनता है।
- अपशिष्ट प्रबंधन: कचरे के पहाड़ों (लैंडफिल) और अनुपचारित सीवेज का सीधे नदियों में गिरना पर्यावरणीय संकट खड़ा कर रहा है।
स्वास्थ्य सेवा प्रणाली पर भारी दबाव (स्कोर: 41.7):
- सरकारी अस्पतालों में बुनियादी ढांचे की कमी और अत्यधिक भीड़।
- तृतीयक स्वास्थ्य सेवा का अत्यधिक महंगा होना, जिससे जेब से होने वाला खर्च बढ़ता है।
शहरीकरण और अवसंरचनात्मक कमियाँ:
- मानसून के समय जलभराव जैसे कि मुंबई और दिल्ली में सामान्य बारिश के बाद भी बाढ़ जैसे हालात बनना।
- सार्वजनिक परिवहन का सीमित दायरा और निजी वाहनों की संख्या बढ़ने से अत्यधिक ट्रैफिक जाम।
- किफायती आवास की अनुपलब्धता के कारण मलिन बस्तियों का तीव्र विकास।









