26 May, 2026
उप-कक्षीय प्रक्षेपण यान (SOLVE) का पहला ग्राउंड परीक्षण
Mon 06 Jul, 2026
संदर्भ
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 3 जुलाई 2026 को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (Satish Dhawan Space Centre–SDSC) की स्थैतिक परीक्षण सुविधा (Static Test Facility) में प्रयोगों हेतु उप-कक्षीय प्रक्षेपण यान (Sub-Orbital Launch Vehicle for Experiments–SOLVE) के ठोस मोटर (Solid Motor) का पहला स्थैतिक ग्राउंड परीक्षण सफलतापूर्वक सम्पन्न किया।
यह उपलब्धि भारत के गगनयान मानव अंतरिक्ष मिशन के लिए विकसित क्रू सुरक्षा प्रणाली (Crew Safety System) के सत्यापन की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
SOLVE क्या है?
- SOLVE (Sub-Orbital Launch Vehicle for Experiments) एक समर्पित, कम लागत वाला उप-कक्षीय परीक्षण प्रक्षेपण यान है, जिसे विशेष रूप से गगनयान मिशन के एकीकृत पैराशूट परीक्षण (Integrated Parachute Test–IPT) के लिए विकसित किया गया है।
- इसका मुख्य उद्देश्य गगनयान क्रू मॉड्यूल की पैराशूट-आधारित मंदन (Deceleration) एवं पुनर्प्राप्ति (Recovery) प्रणाली का विभिन्न उच्च-ऊँचाई वाले वायुमंडलीय परिस्थितियों में परीक्षण एवं सत्यापन करना है।
SOLVE की प्रमुख विशेषताएँ
1. समर्पित परीक्षण प्रक्षेपण यान
- इसे विशेष रूप से एकीकृत पैराशूट परीक्षण (IPT) के लिए विकसित किया गया है।
- यह गगनयान मिशन की सुरक्षा प्रणालियों के परीक्षण हेतु वास्तविक उड़ान परिस्थितियाँ उपलब्ध कराता है।
2. PSLV आधारित ठोस मोटर
- इसका ठोस रॉकेट मोटर ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV) के स्ट्रैप-ऑन बूस्टर से विकसित किया गया है।
- इसे गगनयान मिशन की आवश्यकताओं के अनुरूप संशोधित किया गया है।
3. स्वदेशी तकनीकी नवाचार
- गगनयान मिशन के लिए इसरो ने इसमें अनेक महत्वपूर्ण तकनीकी सुधार किए हैं, जैसे—
- कम दहन-दर (Slow Burn Rate) वाला ठोस प्रणोदक
- सीधा नोज़ल (Straight Nozzle)
- सेकेंडरी इंजेक्शन थ्रस्ट वेक्टर कंट्रोल (Secondary Injection Thrust Vector Control–SITVC) प्रणाली
4. उड़ान प्रोफ़ाइल
- आगामी परीक्षण उड़ानों में SOLVE, गगनयान क्रू मॉड्यूल को 10 से 17 किलोमीटर की ऊँचाई तक ले जाएगा।
5. पैराशूट पुनर्प्राप्ति प्रणाली
निर्धारित ऊँचाई प्राप्त करने के बाद—
- क्रू मॉड्यूल प्रक्षेपण यान से अलग हो जाएगा।
- इसके बाद क्रमबद्ध रूप से 10 पैराशूट खुलेंगे।
- पैराशूट मॉड्यूल की गति को सुरक्षित स्तर तक कम करेंगे।
- अंततः क्रू मॉड्यूल समुद्र में नियंत्रित स्प्लैशडाउन (Splashdown) करेगा।
गगनयान मिशन के लिए SOLVE का महत्व
मानव अंतरिक्ष उड़ान में अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी सबसे जटिल एवं जोखिमपूर्ण चरण माना जाता है।
इससे पहले इसरो ने—
- एकीकृत एयर ड्रॉप परीक्षण (Integrated Air Drop Test–IADT) के माध्यम से लगभग 3 किलोमीटर की ऊँचाई से हेलीकॉप्टर द्वारा डमी क्रू मॉड्यूल गिराकर पैराशूट प्रणाली का परीक्षण किया था।
किन्तु SOLVE के माध्यम से—
- 10–17 किलोमीटर की अधिक ऊँचाई पर परीक्षण संभव होगा।
- उप-कक्षीय (Sub-Orbital) उच्च वेग वाली परिस्थितियों में सुरक्षा प्रणाली का परीक्षण किया जा सकेगा।
- संपूर्ण 10-पैराशूट रिकवरी प्रणाली का व्यापक सत्यापन किया जाएगा।
इस प्रकार SOLVE, गगनयान मिशन की सुरक्षा एवं विश्वसनीयता को और अधिक सुदृढ़ बनाएगा।
ग्राउंड परीक्षण का परिणाम
इसरो के अनुसार—
- ठोस मोटर के सभी प्रदर्शन मानक (Performance Parameters) अपेक्षित मानकों के अनुरूप रहे।
- परीक्षण पूर्णतः सफल रहा।
- इसके साथ ही गगनयान मिशन से पूर्व प्रस्तावित मानवरहित प्रदर्शन (Uncrewed Demonstration) उड़ानों का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
गगनयान मिशन : एक परिचय
- कार्यान्वयन एजेंसी: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO)
- उद्देश्य: भारत की मानव को निम्न पृथ्वी कक्षा (Low Earth Orbit–LEO) में भेजने तथा सुरक्षित वापस लाने की क्षमता का प्रदर्शन करना।
- प्रकृति: भारत का पहला स्वदेशी मानव अंतरिक्ष मिशन।
- अंतरिक्ष यात्री: 3
- कक्षा: लगभग 400 किलोमीटर की निम्न पृथ्वी कक्षा।
- मिशन अवधि: लगभग 3 दिन
- प्रक्षेपण यान: मानव-रेटेड LVM-3
- लैंडिंग: बंगाल की खाड़ी में बहु-स्तरीय पैराशूट प्रणाली के माध्यम से नियंत्रित स्प्लैशडाउन।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO)
- स्थापना: 15 अगस्त 1969
- संस्थापक: डॉ. विक्रम साराभाई
- मुख्यालय: बेंगलुरु, कर्नाटक
- अध्यक्ष: डॉ. वी. नारायणन
प्रमुख मिशन
- आर्यभट्ट (1975)
- रोहिणी (1980)
- चंद्रयान-1 (2008)
- मंगलयान (2013)
- चंद्रयान-2 (2019)
- चंद्रयान-3 (2023)
- आदित्य-L1 (2023)
तथ्य (Facts)
| SOLVE का पूर्ण रूप | Sub-Orbital Launch Vehicle for Experiments (प्रयोगों हेतु उप-कक्षीय प्रक्षेपण यान) |
| उद्देश्य | गगनयान हेतु एकीकृत पैराशूट परीक्षण (IPT) |
| प्रथम ग्राउंड परीक्षण | 3 जुलाई 2026 |
| परीक्षण स्थल | सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC), श्रीहरिकोटा |
| प्रस्तावित परीक्षण ऊँचाई | 10–17 किमी |
| रिकवरी प्रणाली | 10-पैराशूट आधारित प्रणाली |
| लैंडिंग | समुद्र में नियंत्रित स्प्लैशडाउन |
| विकसित | PSLV स्ट्रैप-ऑन ठोस मोटर पर आधारित |
| संबंधित मिशन | गगनयान मानव अंतरिक्ष मिशन |









