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16वाँ भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन

Sat 04 Jul, 2026

संदर्भ :

  • 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन का आयोजन नई दिल्ली में किया गया, जिसमें भारत के ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी’ और जापान की प्रधानमंत्री ‘सनाए ताकाइची’ ने भाग लिया।

मुख्‍य बिन्‍दु :

  • आयोजन तिथि व स्थान: 1-3 जुलाई 2026, नई दिल्ली
  • जापानी प्रधानमंत्री की पहली यात्रा: प्रधानमंत्री बनने के बाद सनाए ताकाइची की यह पहली आधिकारिक भारत यात्रा थी
  • साझेदारी का नाम: दोनों देशों ने भारत-जापान "विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी" की समीक्षा की।
  • कुल परिणाम : इस सम्मेलन में कुल 16 प्रमुख परिणाम घोषित किए गए, जिनमें 1 संयुक्त घोषणा, 2 संयुक्त वक्तव्य, 6 सहयोग ज्ञापन (MoC) और 5 समझौता ज्ञापन (MoU) शामिल हैं

16 प्रमुख परिणामों की सूची :

क्रम सं. समझौता/घोषणा मुख्य उद्देश्य
1 आर्थिक सुरक्षा पर भारत-जापान संयुक्त घोषणा सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज, AI, ICT, स्वच्छ ऊर्जा एवं औषधि क्षेत्रों में परियोजना-आधारित सहयोग और आपूर्ति श्रृंखला सुदृढ़ करना।
2 कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर संयुक्त वक्तव्य सुरक्षित, विश्वसनीय एवं मानव-केंद्रित AI के लिए संयुक्त अनुसंधान, विकास और प्रौद्योगिकी सहयोग को बढ़ावा देना।
3 ऊर्जा क्षेत्र में मज़बूती पर संयुक्त वक्तव्य कच्चे तेल एवं पेट्रोलियम उत्पादों के रणनीतिक भंडारण तथा समुद्री ऊर्जा परिवहन में सहयोग बढ़ाना।
4 राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ वर्ष 2027 को "भारत-जापान साझा क्षितिज वर्ष (India-Japan Year of Shared Horizons)" के रूप में मनाने का निर्णय।
5 भारत-जापान CBG (Cooperative Biogas for Growth) पहल भारत में 1,000 बायोगैस एवं जैविक उर्वरक संयंत्र स्थापित करने हेतु सहयोग।
6 बैटरी क्षेत्र में सहयोग बैटरी परियोजनाओं एवं सुरक्षित, टिकाऊ बैटरी आपूर्ति श्रृंखला विकसित करना।
7 औषधि एवं चिकित्सा उपकरण सहयोग API, KSM, निवेश, तकनीकी सहयोग एवं औषधि आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना।
8 भूविज्ञान एवं खनिज अन्वेषण सहयोग महत्वपूर्ण खनिजों के अन्वेषण एवं तकनीकी विशेषज्ञता का आदान-प्रदान।
9 IndiaAI Mission–METI समझौता AI परियोजनाओं, B2B सहयोग, वेबिनार एवं कंप्यूटिंग संसाधनों में साझेदारी।
10 अगली पीढ़ी की गतिशीलता साझेदारी (NGMP) रेल, सड़क, ऑटोमोबाइल, विमानन, जहाज निर्माण, लॉजिस्टिक्स एवं शहरी विकास में सहयोग बढ़ाना तथा "Make in India for the World" को प्रोत्साहन।
11 C-CAMP–RIKEN समझौता स्वास्थ्य, कृषि एवं पर्यावरण क्षेत्र में डीप-टेक, जीवन विज्ञान एवं स्टार्टअप नवाचार को बढ़ावा देना।
12 NCBS-TIFR–RIKEN समझौता मूलभूत जीवविज्ञान एवं तंत्रिका विज्ञान अनुसंधान में सहयोग।
13 IIT बॉम्बे–भारतजेन–NII समझौता उन्नत वैज्ञानिक तर्क क्षमता वाले Large Language Models (LLMs) के विकास हेतु संयुक्त अनुसंधान।
14 Sarvam AI–Preferred Networks समझौता फाउंडेशन मॉडल सहित AI प्रौद्योगिकी स्टैक में सहयोग।
15 NIXI–JPNIC समझौता IPv6, इंटरनेट सुरक्षा, क्षमता विकास, इंटरनेट शासन एवं पेशेवर आदान-प्रदान को बढ़ावा देना।
16 IFSCA–JFSA पत्रों का आदान-प्रदान फिनटेक, रेगटेक, वित्तीय नियमन एवं सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान में सहयोग।

जापान :

  • आधिकारिक नाम: निप्पॉन या निहोन जिसका अर्थ है "सूर्योदय का देश"
  • राजधानी: टोक्यो : यह दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला महानगरीय क्षेत्र है।
  • मुद्रा : येन, इसका प्रतीक ¥ है।
  • संसद का नाम: डाइट, यह द्विसदनीय संसद है
  • राष्ट्रीय खेल: सुमो रेसलिंग (हालाँकि बेसबॉल वहाँ सबसे लोकप्रिय खेल है)

मुख्य द्वीप (उत्तर से दक्षिण के क्रम में :

  • होक्काइडो : सबसे उत्तरी द्वीप
  • होनशू : सबसे बड़ा द्वीप (इसी द्वीप पर राजधानी टोक्यो और माउंट फुजी स्थित हैं)
  • शिकोकू : सबसे छोटा मुख्य द्वीप
  • क्यूशू : सबसे दक्षिणी मुख्य द्वीप
  • सबसे ऊंची चोटी: माउंट फुजी: यह एक सक्रिय ज्वालामुखी है और होनशू द्वीप पर है।
  • रिंग ऑफ फायर : जापान प्रशांत महासागर के 'रिंग ऑफ फायर' पर स्थित है

हिरोशिमा और नागासाकी (द्वितीय विश्व युद्ध):

  • 6 अगस्त 1945 को हिरोशिमा पर "लिटिल बॉय" नामक यूरेनियम बम गिराया गया था
  • 9 अगस्त 1945 को नागासाकी पर "फैट मैन" नामक प्लूटोनियम बम गिराया गया था

भारत-जापान के बीच राजनयिक संबंधों का विकास :

  • 1952: आधिकारिक राजनयिक संबंधों की स्थापना हुई
  • 2000: द्विपक्षीय संबंधों को 'वैश्विक साझेदारी' के स्तर तक बढ़ाया गया
  • 2006: दोनों देशों के बीच 'वार्षिक शिखर सम्मेलन तंत्र' की शुरुआत हुई
  • 2011: व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) पर हस्ताक्षर किए गए
  • 2014: संबंधों को और मजबूत कर 'विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी' में अपग्रेड किया गया
  • 2025 (विजन): 'इंडो-पैसिफिक में शांति एवं समृद्धि के लिए जापान-भारत विज़न 2025' के रूप में साझेदारी का चरम स्वरूप सामने आया

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