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नए मिलीसेकंड पल्सर PSR J0125-5854 की खोज

Tue 30 Jun, 2026

संदर्भ :

  • खगोल वैज्ञानिकों ने दक्षिणी आकाश में संचालित 'स्मार्ट' (SMART) सर्वे के दौरान एक नए मिलीसेकंड पल्सर PSR J0125-5854 की खोज की है।

मुख्‍य बिन्‍दु :

  • इस शोध को 17 जून 2026 को प्रीप्रिंट के रूप में प्रकाशित किया गया तथा बाद में प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका में प्रकाशन के लिए स्वीकार किया गया।
  • यह खोज रेडियो खगोल विज्ञान और न्यूट्रॉन तारों के अध्ययन में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
  • तकनीकी उपकरण: इस खोज में दक्षिण अफ्रीका के MeerKAT रेडियो टेलीस्कोप और ऑस्ट्रेलिया के ATCA (Australia Telescope Compact Array) की संयुक्त क्षमताओं का उपयोग किया गया है।
  • घूर्णन गति : यह पल्सर प्रति सेकंड लगभग 40 बार (यानी इसकी घूर्णन अवधि 24.6 मिलीसेकंड है) अपनी धुरी पर घूम रहा है।
  • बाइनरी सिस्टम : अनुवर्ती (Follow-up) अवलोकनों से पता चला है कि यह एक 'वाइड बाइनरी सिस्टम' का हिस्सा है, जो अपने साथी तारे (संभावित रूप से एक हीलियम व्हाइट ड्वार्फ) की परिक्रमा 833 दिनों में पूरी करता है।
  • दूरी और अवस्थिति: यह पृथ्वी से लगभग 1,600 से 3,200 प्रकाश वर्ष की दूरी पर, मिल्की वे आकाशगंगा के डिस्क से दूर हाई गैलेक्टिक लैटीट्यूड (-57 डिग्री) पर स्थित है।
  • न्यूट्रॉन तारा और पल्सर: जब किसी विशाल तारे (सूर्य के द्रव्यमान से 8-20 गुना अधिक) का जीवन चक्र समाप्त होता है, तो वह सुपरनोवा विस्फोट के बाद एक अत्यंत सघन कोर छोड़ जाता है, जिसे न्यूट्रॉन तारा कहते हैं। जब यह न्यूट्रॉन तारा तीव्र गति से घूमता है और अपने चुंबकीय ध्रुवों से रेडियो तरंगों की बीम उत्सर्जित करता है, तो इसे पल्सर कहा जाता है।
  • मिलीसेकंड पल्सर (MSP) और 'पुनर्चक्रण' : ये सामान्य पल्सरों से भिन्न होते हैं। ये अक्सर एक बाइनरी सिस्टम (द्वि-तारा प्रणाली) का हिस्सा होते हैं। समय के साथ, यह पल्सर अपने साथी तारे के द्रव्यमान को अपनी ओर खींचने लगता है। इस पदार्थ के प्रवाह से पल्सर को कोणीय संवेग प्राप्त होता है, जिससे इसकी घूर्णन गति बढ़कर मिलीसेकंड के स्तर पर पहुंच जाती है। इस प्रक्रिया को "स्पिन-अप" (Spin-up) या पुनर्चक्रण कहा जाता है।
  • इस खोज का वैज्ञानिक एवं रणनीतिक महत्व :
  • गुरुत्वाकर्षण तरंगों का पता लगाना: मिलीसेकंड पल्सर ब्रह्मांड की सबसे सटीक 'प्राकृतिक घड़ियाँ' हैं। इनके घूर्णन की सटीकता परमाणु घड़ियों के बराबर होती है। पल्सर टाइमिंग एरे (PTA) के माध्यम से, इन पल्सरों से आने वाले सिग्नलों में होने वाले नैनोसेकंड के विचलनों का अध्ययन करके अंतरिक्ष-समय में उठने वाली निम्न-आवृत्ति गुरुत्वाकर्षण तरंगों को डिटेक्ट किया जा सकता है।
  • सघन पदार्थ का अध्ययन : न्यूट्रॉन तारों का घनत्व इतना अधिक होता है कि उनके एक चम्मच पदार्थ का वजन पृथ्वी पर कई अरब टन होगा। PSR J0125-5854 जैसी खोजें वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद करती हैं कि अत्यधिक गुरुत्वाकर्षण और उच्च घनत्व की स्थिति में पदार्थ (Nuclear Matter) कैसा व्यवहार करता है, जिसे पृथ्वी की प्रयोगशालाओं में बनाना असंभव है।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और 'बिग डेटा' : SMART सर्वे में प्रयुक्त MeerKAT टेलीस्कोप, भविष्य के SKA (Square Kilometre Array) का एक अग्रदूत (Precursor) है। यह खोज यह प्रदर्शित करती है कि आधुनिक खगोल विज्ञान में रेडियो इंटरफेरोमेट्री और बिग डेटा एनालिटिक्स का समन्वय किस प्रकार ब्रह्मांड के रहस्यों को उजागर कर रहा है।

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