26 May, 2026
द्वितीय पैक्स सिलिका शिखर सम्मेलन
Fri 26 Jun, 2026
संदर्भ :
- द्वितीय पैक्स सिलिका शिखर सम्मेलन (2nd Pax Silica Summit) का आयोजन अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डी.सी. में किया गया।
पैक्स सिलिका पहल :
- अमेरिका के नेतृत्व वाला एक प्रमुख वैश्विक गठबंधन और रणनीतिक पहल है
- मुख्य उद्देश्य : कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों के लिए एक सुरक्षित, विश्वसनीय और लचीली वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का निर्माण करना
- अर्थ और नाम: "पैक्स सिलिका" नाम सिलिकॉन-आधारित कंप्यूटिंग (सिलिका) पर केंद्रित एक नियम-आधारित तकनीकी व्यवस्था (पैक्स) को दर्शाता है
- आयोजक: इस रणनीतिक पहल का नेतृत्व और आयोजन अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा किया जाता है
- भारत की भागीदारी: भारत फरवरी 2026 में नई दिल्ली में आयोजित 'एआई इम्पैक्ट समिट' के दौरान इस पहल में शामिल हुआ था
प्रथम शिखर सम्मेलन :
- इसका उद्घाटन 12 दिसंबर 2025 को अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डी.सी. में हुआ था।
- शुरुआत में इसमें केवल 8-10 संस्थापक देश शामिल थे (जैसे- अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, यूके, ऑस्ट्रेलिया, यूएई आदि) और उस समय भारत इसका हिस्सा नहीं था।
पैक्स सिलिका घोषणापत्र पर हस्ताक्षर :
- इस सम्मेलन का सबसे मुख्य आकर्षण सदस्य देशों द्वारा 'पैक्स सिलिका डिक्लेरेशन' को स्वीकार करना और उस पर हस्ताक्षर करना था।
- इस घोषणापत्र के माध्यम से सदस्य देशों ने कच्चे माल (खनिजों) से लेकर उन्नत एआई प्रणालियों तक, पूरी वैल्यू चेन में गहरा आर्थिक और तकनीकी सहयोग विकसित करने का संकल्प लिया।
'सप्लाई चेन' के 6 प्रमुख स्तंभों की पहचान :
- शिखर सम्मेलन के दौरान उभरती प्रौद्योगिकियों की सुरक्षा के लिए सहयोग के 6 रणनीतिक क्षेत्रों को चिह्नित किया गया:
- कनेक्टिविटी और डेटा इन्फ्रास्ट्रक्चर (डेटा सेंटर्स और क्लाउड नेटवर्क)
- कंप्यूट और सेमीकंडक्टर (चिप डिजाइनिंग और मैन्युफैक्चरिंग)
- एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग (प्रौद्योगिकी का आधुनिक उत्पादन)
- लॉजिस्टिक्स (सामान की सुरक्षित और त्वरित आवाजाही)
- खनिज रिफाइनिंग और प्रोसेसिंग (दुर्लभ खनिज, गैलियम और जर्मेनियम जैसे एआई के लिए जरूरी तत्व)
- ऊर्जा बुनियादी ढांचा (एआई और कंप्यूटिंग सेंटर्स को बिजली देने के लिए मजबूत एनर्जी ग्रिड)
दूसरा शिखर सम्मेलन (25-26 जून 2026):
- यह सम्मेलन हाल ही में वाशिंगटन डी.सी. में आयोजित किया गया है। इस सम्मेलन में भारत ने एक पूर्ण सदस्य के रूप में हिस्सा लिया।
- कुल देश: वर्तमान में भारत समेत दुनिया के 35 देश इस गठबंधन का हिस्सा बन चुके हैं
शिखर सम्मेलन के मुख्य बिंदु और परिणाम :
- वाशिंगटन डी.सी. में आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन की अध्यक्षता अमेरिकी आर्थिक मामलों के अवर विदेश मंत्री जैकब हेलबर्ग ने की
'एआई अवसर संबंधी संयुक्त घोषणा-पत्र' :
- भारत सहित 35 देशों (जिनमें अर्जेंटीना, जर्मनी, नीदरलैंड, चिली, कोस्टा रिका, यूनान, कजाखस्तान, पनामा और यूरोपीय संघ शामिल हैं) ने इस पर हस्ताक्षर किया
- दर्शन: यह घोषणा-पत्र एआई को प्रतिबंधों के बजाय 'नवाचार और अवसर' के दृष्टिकोण से देखने की वकालत करता है। इसका मानना है कि अत्यधिक नियमन के स्थान पर क्षमता निर्माण और निजी निवेश को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
पैक्सपास (PaxPass) का शुभारंभ :
- यह एक अभिनव और महत्वाकांक्षी व्यापार मंच है।
- कार्यप्रणाली: यह कार्गो सत्यापन, एआई-संचालित जोखिम मूल्यांकन और भरोसेमंद शिपमेंट के लिए पूर्व-अनुमोदित त्वरित प्रसंस्करण को जोड़कर एआई अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण वस्तुओं के संचलन को सुगम बनाएगा।
- वित्तपोषण: अमेरिका ने पैक्सपास के विकास और क्रियान्वयन के लिए 50 मिलियन डॉलर की विदेशी सहायता निधि देने की घोषणा की है।
फाउंड्री स्कूल :
- उन्नत विनिर्माण के क्षेत्र में कार्यबल विकसित करने के लिए स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के सहयोग से इसकी शुरुआत की गई है।
- इसका उद्देश्य पैक्स सिलिका सदस्य देशों के उद्यमियों, इंजीनियरों और विनिर्माण क्षेत्र के नेताओं को प्रशिक्षण प्रदान करना है।
नवाचार संप्रभुता :
- शिखर सम्मेलन में 'डिजिटल संप्रभुता' के स्थान पर 'नवाचार संप्रभुता' की अवधारणा पर बल दिया गया।
- इसका अर्थ केवल वर्तमान तकनीकों की नकल करना नहीं, बल्कि भविष्य के तकनीकी नवाचारों में योगदान देने की क्षमता विकसित करना है।
- भारत का प्रतिनिधित्व: सम्मेलन में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस. कृष्णन और विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव नागराज नायडू ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया।









