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‘निर्भय चेतना’ पहल का शुभारंभ

Wed 24 Jun, 2026

संदर्भ :

  • पंचायती राज मंत्रालय ने ‘निर्भय चेतना’ पहल का शुभारंभ किया

मुख्‍य बिन्‍दु :

  • प्राथमिक उद्देश्य : ग्रामीण भारत में महिलाओं की सुरक्षा, गरिमा और अधिकारों के प्रति पंचायती राज संस्थाओं (PRI) के निर्वाचित पुरुष प्रतिनिधियों को संवेदनशील बनाना और जमीनी स्तर पर 'लैंगिक रूप से उत्तरदायी शासन' को मजबूत करना
  • मूल अम्ब्रेला योजना: यह मार्च 2026 में शुरू की गई व्यापक ‘निर्भय रहो’ पहल का एक प्रमुख घटक
  • वित्तीय सहायता: यह निर्भया कोष द्वारा वित्त पोषित है, जो पंचायती राज के इतिहास में इस कोष के उपयोग का पहला बड़ा उदाहरण है
  • टारगेट ग्रुप: देश भर के 17.5 लाख से अधिक निर्वाचित पुरुष पंचायत प्रतिनिधि (सरपंच, वार्ड सदस्य आदि)
  • इस प्रायोगिक बैच में असम, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तराखंड के लगभग 40 मास्टर प्रशिक्षक शामिल थे।
  • इस मॉडल को धीरे-धीरे सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विस्तारित किया जाएगा।

कार्यान्वयन रणनीति:

  • राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर 28,500 मास्टर ट्रेनर्स (मुख्य प्रशिक्षक) का एक नेटवर्क तैयार किया जाएगा
  • इसके लिए ‘ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया’ (TRI) के सहयोग से एक समर्पित प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित किया गया है
  • ज्ञान भागीदार के रूप में NLSIU बेंगलुरु सहयोग कर रहा है

निर्भय रहो पहल :

  • भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय द्वारा ग्रामीण भारत में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और कानूनी साक्षरता को मजबूत करने के लिए शुरू किया गया एक व्यापक राष्ट्रव्यापी अभियान है। इसे 11 मार्च 2026 को आधिकारिक तौर पर लॉन्च किया गया था
  • यह पहल मुख्य रूप से निर्भया कोष द्वारा पोषित है और इसे महिला एवं बाल विकास मंत्रालय तथा नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU), बेंगलुरु के सहयोग से क्रियान्वित किया जा रहा है।

'निर्भय रहो' के तीन मुख्य स्तंभ :

  • निर्भय नेत्री : महिला पंचायत प्रतिनिधियों के लिए कानूनी और नेतृत्व प्रशिक्षण
  • निर्भय चेतना : पुरुष पंचायत प्रतिनिधियों का लैंगिक संवेदीकरण
  • निर्भय दृष्टि : ग्रामीण क्षेत्रों के हॉटस्पॉट पर सुरक्षा के लिए सीसीटीवी (CCTV) स्थापना

महत्त्व :

  • जमीनी स्तर पर सामाजिक परिवर्तन: 32 लाख से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों को लक्षित कर पितृसत्तात्मक मान्यताओं को चुनौती देने तथा लैंगिक न्याय को बढ़ावा देने का प्रयास करता है।
  • स्थानीय सहायता तंत्र का सुदृढ़ीकरण: पंचायत प्रतिनिधियों को कानूनी सहायता, साइबर सुरक्षा जागरूकता एवं विभिन्न सहायता तंत्रों तक पहुँच सुनिश्चित करने में सक्षम बनाता है।
  • समावेशी शासन: स्थानीय नियोजन प्रक्रियाओं में लैंगिक दृष्टिकोण को एकीकृत करता है तथा महिला-नेतृत्व वाले विकास के माध्यम से विकसित भारत के लक्ष्य में योगदान देता है।

पंचायती राज

  • पंचायती राज भारत में ग्रामीण स्थानीय स्वशासन (Local Self-Government) की एक प्रणाली है, जिसे 1992 के 73वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम द्वारा संवैधानिक दर्जा दिया गया

त्रिस्तरीय संरचना :

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243B के तहत पंचायती राज संस्थाओं के लिए एक त्रिस्तरीय संरचना (Three-tier Structure) का प्रावधान किया गया है

1. ग्राम स्तर (Gram Panchayat) :

  • इकाई: ग्राम पंचायत
  • प्रमुख: मुखिया/सरपंच/प्रधान (इनका चुनाव राज्य कानून के अनुसार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हो सकता है)
  • सदस्य: ग्राम पंचायत के वार्ड सदस्य, जिनका चुनाव सीधे गाँव के मतदाताओं द्वारा होता है।
  • भूमिका: स्थानीय विकास योजनाओं को लागू करना और बुनियादी सुविधाओं (सफाई, प्रकाश, पानी) का प्रबंधन करना

2. मध्यवर्ती स्तर (Block/Mandal Level) :

  • इकाई: पंचायत समिति (विभिन्न राज्यों में इसे जनपद पंचायत या मंडल परिषद भी कहा जाता है)
  • प्रमुख: अध्यक्ष/प्रधान (इनका चुनाव निर्वाचित सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से किया जाता है)
  • सदस्य: इस क्षेत्र से सीधे चुने गए सदस्य, साथ ही क्षेत्र के विधायक और सांसद भी इसके सदस्य हो सकते हैं।
  • भूमिका: यह ग्राम पंचायतों और जिला परिषद के बीच एक कड़ी के रूप में कार्य करती है और ब्लॉक स्तर पर विकास योजनाओं का समन्वय करती है।

3. जिला स्तर (District Level) :

  • इकाई: जिला परिषद
  • प्रमुख: अध्यक्ष/चेयरमैन (इनका चुनाव भी निर्वाचित सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से होता है)
  • सदस्य: जिले से सीधे निर्वाचित सदस्य, सभी पंचायत समितियों के अध्यक्ष, और जिले के सांसद व विधायक
  • भूमिका: यह जिले की सभी पंचायत समितियों की गतिविधियों का निरीक्षण करती है, बजट को मंजूरी देती है और राज्य सरकार को सलाह देती है।

महत्वपूर्ण समितियाँ :

  • बलवंत राय मेहता समिति (1957): इसने त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था का सुझाव दिया था
  • अशोक मेहता समिति (1977): इसने द्विस्तरीय (Two-tier) संरचना की सिफारिश की थी
  • एल.एम. सिंघवी समिति (1986): इसने पंचायतों को संवैधानिक दर्जा देने की पुरजोर सिफारिश की थी

संवैधानिक प्रावधान :

  • संविधान का भाग: इसे संविधान के भाग IX (अनुच्छेद 243 से 243O) में शामिल किया गया है
  • अनुच्छेद 243 (परिभाषाएँ): इसमें 'ग्राम सभा', 'पंचायत' और 'पंचायत क्षेत्र' जैसी महत्वपूर्ण शब्दावलियों को परिभाषित किया गया है।
  • अनुच्छेद 243A (ग्राम सभा): यह पंचायती राज की बुनियादी इकाई है। इसमें गाँव के सभी पंजीकृत मतदाता शामिल होते हैं। इसकी शक्तियाँ राज्य विधानमंडल द्वारा निर्धारित की जाती हैं।
  • अनुच्छेद 243B (पंचायतों का गठन): त्रि-स्तरीय प्रणाली का प्रावधान (ग्राम, मध्यवर्ती और जिला स्तर)। अपवाद: 20 लाख से कम जनसंख्या वाले राज्यों में मध्यवर्ती स्तर (Block Level) अनिवार्य नहीं है।
  • अनुच्छेद 243C (पंचायतों की संरचना): सभी सीटों पर चुनाव प्रत्यक्ष मतदान द्वारा होगा। अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया राज्य विधानमंडल तय करेगा।

अनुच्छेद 243D (स्थानों का आरक्षण):

  • SC/ST के लिए उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण।
  • महिलाओं के लिए कम से कम 1/3 (33%) सीटें आरक्षित (अध्यक्ष पद सहित)।
  • अनुच्छेद 243E (पंचायतों की अवधि): कार्यकाल 5 वर्ष। यदि पंचायत भंग होती है, तो 6 महीने के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य है।
  • अनुच्छेद 243F (सदस्यता के लिए अयोग्यता): किसी भी व्यक्ति को 21 वर्ष की आयु पूरी करने पर अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता (जबकि विधानमंडल के लिए 25 वर्ष है)।
  • अनुच्छेद 243G (शक्तियाँ, प्राधिकार और उत्तरदायित्व): पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएँ बनाने की शक्ति। इसमें 11वीं अनुसूची के 29 विषय शामिल हैं।
  • अनुच्छेद 243H (कर लगाने की शक्ति): पंचायतों को कर, शुल्क और टोल लगाने तथा सरकारी निधि से सहायता अनुदान प्राप्त करने का अधिकार।
  • अनुच्छेद 243I (राज्य वित्त आयोग): राज्यपाल द्वारा हर 5 वर्ष में गठन, जो पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करता है।
  • अनुच्छेद 243K (राज्य निर्वाचन आयोग): पंचायतों के चुनावों के संचालन, निर्देशन और नियंत्रण के लिए एक स्वतंत्र निकाय।
  • अनुच्छेद 243O (न्यायालयों के हस्तक्षेप पर रोक): निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन या सीटों के आवंटन से संबंधित मामलों में न्यायालय हस्तक्षेप नहीं कर सकते।

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