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राखीगढ़ी से प्राप्त मानव कंकाल अवशेष

Mon 22 Jun, 2026

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में हरियाणा स्थित राखीगढ़ी पुरातात्विक स्थल से उत्खनित मानव कंकाल अवशेषों को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन हेतु भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण (AnSI) को सौंपा गया है।
  • यह हस्तांतरण दोनों संस्थानों के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के अंतर्गत किया गया। इस पहल से सिंधु-सरस्वती सभ्यता पर बहु-विषयक शोध को नई गति मिलने की उम्मीद है।

राखीगढ़ी के बारे में

  • राखीगढ़ी हरियाणा में स्थित है और लगभग 550 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है।
  • इसे सिंधु-सरस्वती सभ्यता का सबसे बड़ा ज्ञात नगर माना जाता है।
  • यह स्थल प्रारंभिक हड़प्पा काल से परिपक्व हड़प्पा काल तक निरंतर मानव बसावट का प्रमाण देता है।

उत्खनन में प्राप्त प्रमुख साक्ष्य

राखीगढ़ी में उत्खनन से निम्न प्रमाण प्राप्त हुए हैं—

  • सुनियोजित नगरीय बसावट
  • उन्नत जल निकासी प्रणाली
  • शिल्प उत्पादन केंद्र
  • व्यापारिक नेटवर्क
  • दफन स्थल (Burial Grounds)

ये साक्ष्य दर्शाते हैं कि यह एक अत्यंत विकसित नगरीय सभ्यता थी।

हालिया उत्खनन (2025–26)

2025–26 उत्खनन सत्र के दौरान ASI की Excavation Branch-II (Greater Noida) ने Mound No. 7 पर उत्खनन किया, जिसे पहले से कब्रिस्तान क्षेत्र माना गया था।

इस उत्खनन में प्राप्त हुआ—

  • 8 दफन स्थल (Burials)
  • 3 पूर्ण मानव कंकाल
  • अन्य दफन स्थलों से कंकालीय अवशेष

इन अवशेषों को अब कोलकाता स्थित AnSI की प्राचीन मानव कंकाल प्रयोगशाला में भेजा गया है।

यह शोध क्यों महत्वपूर्ण है?

राखीगढ़ी से प्राप्त मानव अवशेष हड़प्पा सभ्यता के लोगों के जैविक इतिहास को समझने का दुर्लभ अवसर प्रदान करते हैं।

वैज्ञानिक निम्न आधुनिक तकनीकों का उपयोग करेंगे:

1. प्राचीन डीएनए (Ancient DNA / aDNA) विश्लेषण

इससे जानकारी मिलेगी—

  • आनुवंशिक वंशावली
  • जनसंख्या की उत्पत्ति
  • प्रवासन पैटर्न

2. Stable Isotope Analysis

यह बताएगा—

  • भोजन की प्रकृति
  • जल स्रोत
  • गतिशीलता
  • आयु
  • लिंग
  • शारीरिक संरचना
  • जैविक विशेषताएँ
  • रोग
  • चोटें
  • पोषण की स्थिति
  • स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ
  • प्राचीन जलवायु
  • पर्यावरणीय परिस्थितियाँ
  • मानव-पर्यावरण संबंध

संस्थागत सहयोग

यह शोध कई प्रतिष्ठित संस्थानों के सहयोग से किया जाएगा:

  • भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI)
  • भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण (AnSI)
  • बिरबल साहनी पालीयोसाइंसेज़ संस्थान (BSIP), लखनऊ
  • यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (UCL)
  • बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU)
  • सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (CCMB), हैदराबाद

यह सहयोग भारत की पैलियोएंथ्रोपोलॉजी एवं पैलियोजीनोमिक्स क्षमताओं को मजबूत करेगा।

शोध का महत्व

यह अध्ययन महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान कर सकता है:

  • हड़प्पावासियों की उत्पत्ति
  • स्वास्थ्य एवं रोग पैटर्न
  • भोजन की आदतें
  • जलवायु अनुकूलन
  • प्रवासन एवं गतिशीलता
  • 3000 BCE से मानव जीनोम का विकास

यह हड़प्पा सभ्यता की जनसंख्या उत्पत्ति से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे प्रश्नों के उत्तर भी दे सकता है।

निष्कर्ष

  • राखीगढ़ी से प्राप्त मानव कंकाल अवशेषों का वैज्ञानिक अध्ययन भारत के प्राचीन इतिहास को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

पुरातत्व, मानवविज्ञान, आनुवंशिकी और पर्यावरण विज्ञान के समन्वय से यह शोध सिंधु-सरस्वती सभ्यता के लोगों की उत्पत्ति, स्वास्थ्य, जीवनशैली और जैविक विकास पर नई रोशनी डालेगा।

सिंधु-सरस्वती सभ्यता

  • सिंधु-सरस्वती सभ्यता, जिसे पारंपरिक रूप से सिंधु घाटी सभ्यता या हड़प्पा सभ्यता के नाम से जाना जाता है, पुरानी दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे एडवांस्ड शहरी संस्कृतियों में से एक थी।
  • काल : यह कांस्य युग (प्राचीन काल) से संबंधित है । इन लोगों को लोहे के बारे में पूरी तरह से पता नहीं था।

भौगोलिक विस्तार : त्रिकोणीय आकार, लगभग 1.3 मिलियन वर्ग किमी में फैला हुआ।

  • सबसे उत्तरी स्थल : मांडा (जम्मू और कश्मीर) या शोर्तुघई (अफ़गानिस्तान)
  • सबसे दक्षिणी स्थल : दैमाबाद (महाराष्ट्र)
  • सबसे पश्चिमी स्थल: सुत्कागन डोर (पाकिस्तान-ईरान सीमा)
  • सबसे पूर्वी स्थल : आलमगीरपुर (उत्तर प्रदेश)

प्रमुख स्थल

स्थल स्थान और नदी प्रमुख खोजें और विशेषताएं
हड़प्पा पंजाब, पाकिस्तान (रावि) पहली खुदाई वाली जगह (1921 में दया राम साहनी ने)। एक लाइन में 6 अनाज के भंडार, लिंगम/योनि का पत्थर का निशान, देवी माँ की मिट्टी की मूर्तियाँ।
मोहन जोदड़ो सिंध, पाकिस्तान (सिंधु ) सचमुच "मौतों का टीला" (1922 में आर.डी. बनर्जी द्वारा)। बड़ा स्नानघर , बड़ा अनाज भंडार, कांसे की नाचती हुई लड़की, पशुपति मुहर, दाढ़ी वाला पुजारी, बुना हुआ कपास।
लोथल गुजरात, भारत ( भोगवा ) IVC का मैनचेस्टर । दुनिया का सबसे पहला आर्टिफिशियल ईंट डॉकयार्ड , डबल बरियल (पुरुष/महिला एक साथ), चावल की भूसी, आग की वेदियां, शतरंज जैसे गेम के टुकड़े।
कालीबंगा राजस्थान, भारत (घग्गर) असल में "काली चूड़ियाँ"। सबसे पहले जुते हुए खेत , लकड़ी की नाली, आग जलाने की जगहें, ऊँट की हड्डियाँ, और दोनों तरह की ईंटें (जली हुई और धूप में सुखाई हुई) के सबूत।
धोलावीरा गुजरात, भारत (कच्छ) UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज साइट । तीन हिस्सों में बंटा हुआ (दो के बजाय)। बड़े तालाबों, एक स्टेडियम और 10 अल्फाबेट वाले साइनबोर्ड वाला अनोखा वॉटर-हार्वेस्टिंग सिस्टम।
चंडूहड़ों सिंध, पाकिस्तान (इंडस) बिना किले वाला इकलौता सिंधु शहर । एक इंडस्ट्रियल हब जो मोती बनाने वाली फैक्ट्रियों , स्याही की बोतलों और बिल्ली का पीछा करते कुत्ते के पैरों के निशानों के लिए मशहूर है।
सुरकोटदा गुजरात, भारत घोड़े की असली हड्डियों के अवशेष देने के लिए मशहूर । बर्तनों में दफ़नाने के लिए भी जाना जाता है।
राखीगढ़ी हरियाणा, भारत (घग्गर) अभी इसे सिंधु-सरस्वती सभ्यता की सबसे बड़ी भौगोलिक जगह माना जाता है।
बनावली हरियाणा, भारत (सरस्वती) हल के टेराकोटा मॉडल के साथ अच्छी क्वालिटी का जौ मिला ।

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