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देश के 166 जलाशयों में सिर्फ 28% पानी

Sun 21 Jun, 2026

संदर्भ :

  • केंद्रीय जल आयोग (CWC) की रिपोर्ट के अनुसार देश के 166 प्रमुख जलाशयों में केवल 51.92 बिलियन घन मीटर (BCM) जल उपलब्ध है, जो उनकी कुल लाइव स्टोरेज क्षमता 183.56 BCM का मात्र 28.28% है।

मुख्‍य बिन्‍दु :

  • यह रिर्पोट मानसून आगमन से पहले जलाशयों में जल स्तर का यह आंकड़ा भारत की जल सुरक्षा, कृषि, ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन संबंधी चुनौतियों को उजागर करता है।

रिपोर्ट के प्रमुख सांख्यिकी आंकड़े :

  • कुल लाइव स्टोरेज क्षमता: इन 166 जलाशयों की कुल क्षमता 183.56 BCM है, जो भारत की कुल अनुमानित क्षमता (257.81 BCM) का लगभग 71.2% है।
  • वर्तमान भंडारण: 11 जून 2026 तक केवल 51.92 BCM (28.28%) पानी ही उपलब्ध था।
  • वार्षिक तुलना: यह भंडारण पिछले वर्ष (2025) की समान अवधि की तुलना में 8.17 प्रतिशत कम है।
  • दीर्घकालिक औसत: हालांकि, राहत की बात यह है कि यह वर्तमान स्तर पिछले 10 वर्षों के ऐतिहासिक औसत (Normal Storage) से 15.8% अधिक है

क्षेत्रीय विषमताएं: भौगोलिक विश्लेषण :

क्षेत्र जल भंडारण की स्थिति प्रभावित राज्य/जलाशय
उत्तरी एवं पश्चिमी क्षेत्र स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर और सामान्य है पंजाब, हिमाचल प्रदेश, गुजरात
मध्य क्षेत्र भंडारण सामान्य के करीब बना हुआ है। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश
दक्षिणी क्षेत्र स्थिति खतरनाक रूप से नीचे (लगभग 20.98%) पहुंच गई है कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश
पूर्वी एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र जल स्तर में भारी गिरावट दर्ज की गई है झारखंड (चंदन बांध पूरी तरह सूख चुका है), पश्चिम बंगाल

लगभग खाली जलाशय :

  • चंदन बांध (झारखंड)
  • भीमा-उजनी (महाराष्ट्र)
  • मऊदाहा (उत्तर प्रदेश)
  • नानक सागर (उत्तराखंड)

कम जल स्तर वाले प्रमुख जलाशय :

  • भद्रा (कर्नाटक) – 3.17%
  • वैगई (तमिलनाडु) – 10.88%
  • कबिनी (कर्नाटक) – 17.08%
  • कृष्णराज सागर (कर्नाटक) – 33.47%
  • तुंगभद्रा (कर्नाटक) – 36.53%

सामान्य से अधिक भंडारण वाले बेसिन:

  • गंगा, सिंधु, नर्मदा, ताप्ती, माही, साबरमती, गोदावरी, ब्रह्मपुत्र, पेन्नार, महानदी

सामान्य से कम भंडारण वाले बेसिन:

  • महानदी और पेन्नार के बीच की पूर्ववाहिनी नदियाँ
  • बराक एवं अन्य नदी बेसिन

जलविद्युत परियोजनाएँ :

जल स्तर में गिरावट के मुख्य कारण :

  • दक्षिण-पश्चिम मानसून की सुस्त चाल: वर्ष 2026 में मानसून केरल के तट पर देरी से पहुंचा और जून के मध्य तक इसकी प्रगति काफी कमजोर रही, जिससे देश में लगभग 40% वर्षा की कमी दर्ज की गई।
  • अल नीनो (El Niño) का प्रभाव: प्रशांत महासागर में अल नीनो की सक्रियता के कारण भारतीय मानसून पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
  • तीव्र ग्रीष्मकालीन वाष्पीकरण: मार्च से मई के बीच रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और लू (Heatwaves) के कारण जलाशयों से वाष्पीकरण की दर में अत्यधिक वृद्धि हुई।
  • जलाशयों में गाद जमा होना (Siltation): वनों की कटाई और नदी बेसिनों में खनन के कारण भाखड़ा जैसे बड़े बांधों की वास्तविक भंडारण क्षमता में भारी कमी आई है।

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