26 May, 2026
तृष्णा (TRISHNA) उपग्रह
Sat 20 Jun, 2026
संदर्भ :
- भारत और फ्रांस अगले वर्ष 2027 में संयुक्त रूप से तृष्णा उपग्रह का प्रक्षेपण करेंगे, जो वैश्विक जल और खाद्य सुरक्षा में योगदान देने के लिए बनाया गया है।
मुख्य बिन्दु :
- पूरा नाम: Thermal InfraRed Imaging Satellite for High-resolution Natural resource Assessment /उच्च-संकल्प प्राकृतिक संसाधन मूल्यांकन के लिए थर्मल इन्फ्रारेड इमेजिंग उपग्रह
- सहयोगी एजेंसियां: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और फ्रांस की राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (CNES)
- प्राथमिक उद्देश्य: वैश्विक स्तर पर भूमि की सतह के तापमान (Land Surface Temperature : LST), वाष्पोत्सर्जन (Evapotranspiration : ET) और जल चक्र का उच्च स्थानिक और कालिक रिज़ॉल्यूशन के साथ मानचित्रण करना
- वैश्विक महत्व: यह मिशन सीधे तौर पर संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) विशेष रूप से SDG 2 (शून्य भूख), SDG 6 (स्वच्छ जल और स्वच्छता) और SDG 13 (जलवायु कार्रवाई) में योगदान देगा।
मुख्य तकनीकी विशेषताएं :
- कक्षा (Orbit): यह उपग्रह पृथ्वी से लगभग 761 किमी की ऊंचाई पर एक सूर्य-तुल्यकालिक कक्षा में स्थापित किया जाएगा।
- स्थानीय समय : भूमध्य रेखा को पार करने का स्थानीय समय दोपहर 12:30 बजे निर्धारित किया गया है, जो अधिकतम तापीय गतिविधिको रिकॉर्ड करने के लिए आदर्श माना जाता है।
- दो प्रमुख पेलोड :
- थर्मल इन्फ्रारेड (TIR) पेलोड: इसे फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी (CNES) द्वारा विकसित किया जा रहा है। इसमें चार-चैनल लॉन्ग-वेव इन्फ्रारेड इमेजिंग सेंसर है जो उच्च रिज़ॉल्यूशन पर सतह के तापमान और उत्सर्जन का मानचित्रण करेगा।
- विज़िबल और नियर इन्फ्रारेड / शॉर्ट वेव इन्फ्रारेड (VNIR/SWIR) पेलोड: इसे इसरो (ISRO) द्वारा विकसित किया जा रहा है। यह वनस्पति सूचकांकों, मिट्टी की नमी, एल्बीडो और वायुमंडलीय सुधारों के लिए डेटा प्रदान करेगा।
वैश्विक जल और खाद्य सुरक्षा में त्रिशना की भूमिका :
सटीक कृषि और फसल स्वास्थ्य :
- वाष्पोत्सर्जन का मापन: त्रिशना पौधों और मिट्टी द्वारा हवा में छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा को सटीक रूप से मापेगा। इससे वास्तविक समय में फसल के जल तनाव का आकलन किया जा सकेगा।
- सिंचाई योजना: किसान और कृषि नीति निर्माता फसल की जरूरत के अनुसार सिंचाई का निर्धारण कर सकेंगे, जिससे पानी की बर्बादी रुकेगी।
- फसल उपज का पूर्वानुमान: प्रारंभिक स्तर पर फसल की बीमारी या सूखे के लक्षणों की पहचान करके खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।
जल संसाधनों का कुशल प्रबंधन :
- सतही जल का आकलन: यह उपग्रह झीलों, नदियों, आर्द्रभूमियों (Wetlands) और जलाशयों के जल स्तर और उनकी गुणवत्ता (विशेष रूप से तटीय क्षेत्रों में) की निगरानी करेगा।
- भूजल पुनर्भरण संकेत: मिट्टी की नमी और वाष्पोत्सर्जन के आंकड़ों का विश्लेषण कर भूजल भंडारों की स्थिति का अनुमान लगाया जा सकेगा
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO)
- भारत की राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी है
- गठन : 1969
- शुरुआत :1962
- मुख्यालय :कर्नाटक, बेंगलुरु(भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति (INCOSPAR) के रूप में, डॉ. विक्रम साराभाई द्वारा)
उद्देश्य:
- भारत के लिए स्वदेशी उपग्रह व प्रक्षेपण यान तकनीक का विकास
- अंतरिक्ष तकनीक का उपयोग सामाजिक व आर्थिक विकास में करना
- दूरसंचार, मौसम, टेलीमेडिसिन, संसाधन सर्वेक्षण में सहायता देना
प्रमुख उपलब्धियाँ:
- भारत का पहला उपग्रह आर्यभट्ट (1975)
- चंद्रयान-1 (2008), मंगलयान (2013), चंद्रयान-2 (2019) जैसे प्रमुख मिशन
- 2017 में PSLV-C37 मिशन के तहत एक बार में 104 उपग्रह प्रक्षेपित कर विश्व रिकॉर्ड
- आदित्य-L1, गगनयान, मंगलयान-2 जैसे आगामी मिशन
- ISRO ने ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV) और भू-स्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान (GSLV) विकसित किए हैं
प्रमुख केंद्र:
- विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC), तिरुवनंतपुरम – रॉकेट विकास
- यू.आर. राव अंतरिक्ष केंद्र (URSC), बेंगलुरु – उपग्रह डिजाइन एवं विकास
- सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC), श्रीहरिकोटा – उपग्रह एवं रॉकेट प्रक्षेपण
- द्रव नोडन प्रणाली केंद्र (LPSC), वलियमाला और बेंगलुरु – क्रायोजेनिक इंजन विकास
- राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC), हैदराबाद – सुदूर संवेदन डेटा प्रबंधन
- अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (SAC), अहमदाबाद – संचार और सुदूर संवेदन अनुप्रयोग
नेतृत्व:
- ISRO का अध्यक्ष अंतरिक्ष विभाग के सचिव भी होते हैं
- जनवरी 2025 से डॉ. वी. नारायणन ISRO के अध्यक्ष हैं, जिन्होंने श्री एस. सोमनाथ का स्थान ग्रहण किया
वाणिज्यिक शाखा:
- एंट्रिक्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड (Antrix Corporation Limited) ISRO की वाणिज्यिक शाखा है, जो अंतरिक्ष उत्पादों और सेवाओं का विपणन करती है और तकनीकी हस्तांतरण को सुविधाजनक बनाती है।
| प्रक्षेपण यान का नाम | विवरण |
| SLV (Satellite Launch Vehicle) | ISRO का पहला प्रक्षेपण यान, 1980 के दशक में विकसित, छोटा भार (लगभग 40 किग्रा) प्रक्षेपित करता था |
| ASLV (Augmented Satellite Launch Vehicle) | SLV का उन्नत संस्करण, 150 किग्रा तक उपग्रह प्रक्षेपित कर सकता था |
| PSLV (Polar Satellite Launch Vehicle) | ISRO का सबसे विश्वसनीय और बहुप्रचलित प्रक्षेपण यान, 500-1500 किग्रा तक उपग्रह प्रक्षेपित करता है। चंद्रयान-1 और मंगलयान मिशन में उपयोग |
| GSLV (Geosynchronous Satellite Launch Vehicle) | भूस्थिर कक्षा के लिए उपयुक्त, 2-4 टन तक उपग्रह प्रक्षेपित करता है, क्रायोजेनिक इंजन वाला रॉकेट |
| GSLV Mk III (LVM-3) | ISRO का सबसे भारी प्रक्षेपण यान, 8 टन तक पृथ्वी की निचली कक्षा में और 4 टन तक भूस्थिर कक्षा में उपग्रह प्रक्षेपित कर सकता है। मानव अंतरिक्ष मिशन के लिए विकसित। |
| SSLV (Small Satellite Launch Vehicle) | छोटे उपग्रहों (10 से 500 किग्रा) के लिए नवीनतम प्रक्षेपण यान, कम लागत, तेज़ प्रक्षेपण, और लचीला |
ऐतिहासिक मिशन
चंद्रयान-1 (2008):
- भारत का पहला चंद्र मिशन
- चंद्रमा की कक्षा में सफलतापूर्वक पहुंचा और वैज्ञानिक डेटा संग्रह किया
- इसमें ‘मून इम्पैक्ट प्रोब’ ने चंद्रमा की सतह पर हार्ड लैंडिंग की
मंगलयान / मंगल ऑर्बिटर मिशन (2013):
- भारत का पहला मंगल मिशन
- पहला सफल प्रयास में मंगल कक्षा में पहुंचा
- विश्व में ऐसा करने वाला पहला एशियाई देश बना
चंद्रयान-2 (2019) :
- चंद्रमा का ऑर्बिटर अब भी सक्रिय है।
- लैंडर ‘विक्रम’ लैंडिंग के दौरान क्रैश हो गया।
- मिशन का ऑर्बिटर चंद्रमा की सतह का अध्ययन कर रहा है।
आदित्य-L1 (2023) :
- सूर्य के अध्ययन के लिए मिशन।
- सूर्य-पृथ्वी L1 बिंदु पर स्थित है।
चंद्रयान-3 (2023) :
- भारत का तीसरा चंद्र मिशन।
- 14 जुलाई 2023 को लॉन्च हुआ।
- 23 अगस्त 2023 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सफल सॉफ्ट लैंडिंग की।
- भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग करने वाला पहला देश बना।
- इसमें लैंडर और रोवर शामिल हैं, लेकिन ऑर्बिटर नहीं।









