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'QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027'

Fri 19 Jun, 2026

संदर्भ :

  • वैश्विक उच्च शिक्षा विश्लेषण फर्म क्वाक्वेरेली साइमंड्स (QS) 'QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027' जारी किया है।

मुख्‍य बिन्‍दु :

  • जारीकर्ता: यह रैंकिंग वैश्विक उच्च शिक्षा विश्लेषक क्वाक्वेरेली साइमंड्स (Quacquarelli Symonds : QS) द्वारा प्रतिवर्ष जारी की जाती है

मूल्यांकन के आधार (9 प्रमुख संकेतक और उनका भार):

  • अकादमिक प्रतिष्ठा (Academic Reputation) – 30%
  • नियोक्ता प्रतिष्ठा (Employer Reputation) – 15%
  • संकाय-छात्र अनुपात (Faculty-Student Ratio) – 10%
  • प्रति संकाय उद्धरण (Citations per Faculty – Research Impact) – 20%
  • अंतरराष्ट्रीय संकाय अनुपात (International Faculty Ratio) – 5%
  • अंतरराष्ट्रीय छात्र अनुपात (International Student Ratio) – 5%
  • अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान नेटवर्क (International Research Network) – 5%
  • रोजगार परिणाम (Employment Outcomes) – 5%
  • सतत विकास (Sustainability) – 5%

वैश्विक परिदृश्य:

  • शीर्ष स्थान: अमेरिका का मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) लगातार 15वें वर्ष दुनिया का सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय बना हुआ है।

शीर्ष 5 वैश्विक संस्थान:

  • मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) - अमेरिका
  • इम्पीरियल कॉलेज लंदन - यूके (संयुक्त द्वितीय)
  • स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी - अमेरिका (संयुक्त द्वितीय)
  • ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी - यूके
  • हार्वर्ड यूनिवर्सिटी - अमेरिका

भारतीय संस्थानों का प्रदर्शन:

  • रैंकिंग 2027 में भारत ने अब तक का अपना सबसे मजबूत प्रतिनिधित्व दर्ज कराया है। इस बार भारत के कुल 52 विश्वविद्यालयों को इस सूची में स्थान मिला है।

शीर्ष भारतीय संस्थान:

राष्ट्रीय रैंक वैश्विक रैंक 2027 वैश्विक रैंक 2026 संस्थान प्रकृति
1 118 123 IIT दिल्ली सरकारी (Public)
2 134 129 IIT बॉम्बे सरकारी (Public)
3 170 180 IIT मद्रास सरकारी (Public)
5 221 219 IISc बेंगलुरु सरकारी (Public)
6 222 222 IIT कानपुर सरकारी (Public)
7 323 328 दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) सरकारी (Public)
8 335 339 IIT रुड़की सरकारी (Public)
9 350 334 IIT गुवाहाटी सरकारी (Public)
10 454 503 शूलिनी यूनिवर्सिटी निजी (Private)

 

भारत के लिए मुख्य सकारात्मक उपलब्धियां:

  • IIT दिल्ली का ऐतिहासिक प्रदर्शन: IIT दिल्ली 5 पायदान चढ़कर 118वें स्थान पर पहुंच गया है, जो किसी भी भारतीय संस्थान द्वारा हासिल की गई अब तक की सबसे सर्वश्रेष्ठ रैंक की बराबरी है (इससे पहले IIT बॉम्बे ने 2025 में 118वीं रैंक हासिल की थी)।
  • शीर्ष 200 में प्रतिनिधित्व: भारत के केवल 3 संस्थान (IIT दिल्ली, IIT बॉम्बे, IIT मद्रास) शीर्ष 200 में शामिल हैं।
  • निजी विश्वविद्यालयों का उदय: शूलिनी यूनिवर्सिटी (454वीं रैंक) भारत का शीर्ष निजी विश्वविद्यालय बना हुआ है। इसके अलावा चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी (526), बिट्स पिलानी (575) और वीआईटी वेल्लोर (599) ने लंबी छलांग लगाई है।
  • अनुसंधान प्रभाव : अनुसंधान प्रभाव संकेतक में भारतीय संस्थान मजबूत हैं। IISc बेंगलुरु इस क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर 21वें स्थान पर है।

भारत के पक्ष में सकारात्मक कारक :

  • अनुसंधान की गुणवत्ता: भारतीय संकायों के शोध पत्रों के उद्धरण (Citations) की दर बहुत अधिक है। IISc बेंगलुरु, अन्ना यूनिवर्सिटी और IIT रुड़की विश्व स्तरीय शोध प्रस्तुत कर रहे हैं।
  • उद्योग जगत में स्वीकार्यता : भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) के स्नातकों की वैश्विक उद्योगों में भारी मांग है। नियोक्ता प्रतिष्ठा में IIT बॉम्बे वैश्विक स्तर पर 32वें और IIT दिल्ली 39वें स्थान पर हैं।
  • सरकारी नीतियों का प्रभाव: 'इंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंस' (IoE) योजना और एनईपी (NEP) 2020 के तहत स्वायत्तता देने से संस्थानों के प्रदर्शन में सुधार देखा जा रहा है।
  • सस्टेनेबिलिटी पर ध्यान: IIT दिल्ली जैसी संस्थाओं ने अपने पाठ्यक्रम और बुनियादी ढांचे में सतत विकास को एकीकृत किया है, जिससे उनके स्कोर में सुधार हुआ है।

भारत के समक्ष मौजूद चुनौतियां :

  • अंतरराष्ट्रीयकरण की कमी :भारतीय विश्वविद्यालयों में विदेशी छात्रों और विदेशी संकायों (Faculty) का अनुपात बहुत ही कम है। वीजा नीतियां, अपेक्षाकृत कम वेतन संरचना और बुनियादी ढांचा इसके लिए जिम्मेदार हैं।
  • संकाय-छात्र अनुपात :भारतीय विश्वविद्यालयों में छात्रों की संख्या की तुलना में शिक्षकों की भारी कमी है। रिक्त पदों का न भरा जाना और संविदात्मक नियुक्तियों पर निर्भरता शैक्षणिक गुणवत्ता को प्रभावित करती है।
  • वित्तपोषण (Funding) की कमी: भारत अपनी GDP का केवल 0.6%–0.7% ही अनुसंधान एवं विकास (R&D) पर खर्च करता है, जबकि अमेरिका 3% से अधिक और चीन लगभग 2.4% निवेश करता है।
  • विषय-गत असंतुलन : भारत के केवल तकनीकी संस्थान (IITs) और विज्ञान संस्थान ही रैंकिंग में ऊपर हैं। सामाजिक विज्ञान, मानविकी और कला केंद्रित विश्वविद्यालय (जैसे JNU, DU, जामिया) वैश्विक स्तर पर बहुत पीछे छूट रहे हैं।
  • वैश्विक सुधारों की धीमी गति: QS के उपाध्यक्ष बेन सॉटर के अनुसार, भारतीय संस्थान सुधार तो कर रहे हैं, लेकिन वैश्विक प्रतिस्पर्धियों की तुलना में हमारे सुधारों की गति धीमी है।

महत्वपूर्ण सरकारी पहलें :

  • NEP 2020: इसका पूर्ण रूप National Education Policy है। इसका लक्ष्य 2030 तक स्कूली शिक्षा में 100% GER (Gross Enrolment Ratio) हासिल करना है। यह 1986 की शिक्षा नीति के स्थान पर आई है।
  • ANRF Act: इसका पूर्ण रूप Anusandhan National Research Foundation है। इसका मुख्य उद्देश्य देश में अनुसंधान और विकास (R&D) के लिए फंड देना है। इसके शासी बोर्ड (Governing Board) के अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं।
  • IoE Scheme: इसका पूर्ण रूप Institutions of Eminence है। इसके तहत चुने गए उत्कृष्ट संस्थानों को वैश्विक टॉप 100 रैंकिंग में लाने के लिए वित्तीय और प्रशासनिक स्वायत्तता दी जाती है।
  • NIRF: इसका पूर्ण रूप National Institutional Ranking Framework है। यह शिक्षा मंत्रालय द्वारा भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों को रैंक देने के लिए जारी की जाने वाली घरेलू रैंकिंग प्रणाली है।
  • SPARC: इसका पूर्ण रूप Scheme for Promotion of Academic and Research Collaboration है। यह विदेशी संस्थानों के

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