26 May, 2026
राज्य वित्त रिपोर्ट 2024-25 (CAG)
Thu 18 Jun, 2026
संदर्भ
- भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) संजय मूर्ति द्वारा जारी 'राज्य वित्त 2024-25' रिपोर्ट में राज्यों की राजस्व एवं राजकोषीय स्थिति का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
प्रमुख निष्कर्ष :
- राजस्व अधिशेष एवं राजस्व घाटा
- वर्ष 2024-25 में 13 राज्यों ने राजस्व अधिशेष दर्ज किया, जबकि 15 राज्यों में राजस्व घाटा रहा।
- 18 राज्यों ने राजस्व अधिशेष, 3 राज्यों ने राजस्व घाटा तथा 7 राज्यों ने शून्य राजस्व घाटे का लक्ष्य रखा था।
- राजस्व अधिशेष का लक्ष्य रखने वाले 18 राज्यों में से केवल 9 राज्य लक्ष्य प्राप्त कर सके।
- असम, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मिजोरम और तेलंगाना लक्ष्य के बावजूद राजस्व घाटे में रहे।
शून्य राजस्व घाटा लक्ष्य वाले राज्य
- गोवा, झारखंड, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, त्रिपुरा और उत्तर प्रदेश ने शून्य राजस्व घाटे का लक्ष्य रखा था।
- इनमें से गोवा, झारखंड, त्रिपुरा और उत्तर प्रदेश ने राजस्व अधिशेष प्राप्त किया।
- जबकि पंजाब, राजस्थान और तमिलनाडु राजस्व घाटे में रहे।
राजस्व घाटा अनुदान
- राजस्व घाटे वाले राज्यों में हिमाचल प्रदेश, मिजोरम, पंजाब और पश्चिम बंगाल को वित्त आयोग से राजस्व घाटा अनुदान प्राप्त हुआ।
राजकोषीय घाटा
- पंद्रहवें वित्त आयोग द्वारा निर्धारित GSDP के 3% राजकोषीय घाटा लक्ष्य से 18 राज्य ऊपर रहे।
- 2024-25 में सभी 28 राज्यों ने राजकोषीय घाटा दर्ज किया।
- आंध्र प्रदेश, असम, गुजरात, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, ओडिशा, त्रिपुरा और उत्तराखंड में राजकोषीय घाटे में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
राजस्व घाटे की स्थिति
- 15 राजस्व घाटे वाले राज्यों का कुल राजस्व घाटा ₹3,46,385 करोड़ रहा, जो उनके संयुक्त GSDP का 1.5% था।
- 13 राज्यों के राजस्व अधिशेष को समायोजित करने के बाद शुद्ध राजस्व घाटा ₹2,19,041 करोड़ रहा, जो सभी 28 राज्यों के संयुक्त GSDP का 0.68% था।
राज्यों का कर राजस्व
- 2024-25 में राज्यों का कुल राजस्व ₹40.52 लाख करोड़ रहा।
- इसमें राज्यों के अपने कर राजस्व का योगदान लगभग 50% था।
- सभी राज्यों के संयुक्त कर राजस्व में राज्य GST (SGST) की हिस्सेदारी 43% से अधिक रही।
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) :
- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 148 के तहत स्थापित एक स्वतंत्र संवैधानिक प्राधिकरण हैं, जिन्हें देश के "सार्वजनिक धन का रक्षक" कहा जाता है
संवैधानिक प्रावधान (भाग V - अध्याय V) :
- अनुच्छेद 148: इसके तहत सीएजी (CAG) के एक स्वतंत्र कार्यालय का प्रावधान है, जिसमें उनकी नियुक्ति, शपथ और सेवा शर्तों का उल्लेख है.
- अनुच्छेद 149: यह संसद को केंद्र, राज्यों या किसी अन्य प्राधिकरण के खातों के संबंध में सीएजी के कर्तव्यों और शक्तियों को निर्धारित करने का अधिकार देता है.
- अनुच्छेद 150: इसके अनुसार केंद्र और राज्यों के खातों का प्रारूप राष्ट्रपति द्वारा सीएजी की सलाह पर तय किया जाता है.
- अनुच्छेद 151: सीएजी केंद्र के खातों की रिपोर्ट राष्ट्रपति को और राज्य के खातों की रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपते हैं
नियुक्ति, कार्यकाल और पदमुक्ति :
- नियुक्ति: सीएजी की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा उनके हस्ताक्षर और मुहर के तहत जारी वारंट द्वारा की जाती है
- कार्यकाल: इनका कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक (जो भी पहले पूरा हो) होता है.
- पदमुक्ति: इन्हें राष्ट्रपति द्वारा पद से केवल उसी रीति और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जैसे सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है (अर्थात संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत से पारित प्रस्ताव के आधार पर)









