त्रिपुरा के आदिवासी संगीत वाद्ययंत्र "त्रिपुरा सारिंदा" को GI टैग
 
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त्रिपुरा के आदिवासी संगीत वाद्ययंत्र "त्रिपुरा सारिंदा" को GI टैग

Wed 17 Jun, 2026

संदर्भ :

  • त्रिपुरा के आदिवासी समुदायों द्वारा बजाए जाने वाले पारंपरिक तंत्री वाद्ययंत्र 'सरिंदा' को GI Tag प्रदान किया गया।

मुख्‍य बिन्‍दु :

  • वाद्ययंत्र का प्रकार: यह एक तंतु या तंत्री वाद्य है जिसे गज या धनुष (Bow) की सहायता से बजाया जाता है। भारतीय वाद्ययंत्रों के वर्गीकरण में यह 'अवनद्ध' या 'सुषिर' नहीं, बल्कि 'तत वाद्य' की श्रेणी में आता है।
  • बनावट और शिल्पकारी: इसे लकड़ी के एक एकल टुकड़े को तराश कर बनाया जाता है, जिसमें नीचे एक खोखला प्रतिध्वनि बॉक्स होता है।
  • सांस्कृतिक महत्व: यह त्रिपुरा के देशज आदिवासी समुदायों के लोक संगीत, शादियों, सामाजिक-धार्मिक उत्सवों और कीर्तन (भक्ति गीतों) का एक अनिवार्य हिस्सा है।
  • तुलना: बनावट और मधुर ध्वनि के मामले में यह भारतीय शास्त्रीय वाद्ययंत्र 'सारंगी' से मिलता-जुलता है, लेकिन इसकी अपनी एक अनूठी क्षेत्रीय संरचना और ध्वनि उत्सर्जन क्षमता होती है।
  • संबद्ध समुदाय: यह मुख्य रूप से त्रिपुरा के त्रिपुरी और अन्य स्वदेशी आदिवासी समुदायों की लोक संगीत परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है।
  • उपयोग: इसका प्रयोग पारंपरिक लोक नृत्यों, आदिवासी लोक गीतों और धार्मिक कीर्तनों व उत्सवों के दौरान मुख्य संगत वाद्य के रूप में किया जाता है।

त्रिपुरा के अन्य GI टैग्ड उत्पाद :

  • त्रिपुरा क्वीन अनानास : राज्य का विशेष फल, जो अपने अनूठे स्वाद के लिए प्रसिद्ध है।
  • रिसा : त्रिपुरा के आदिवासी समुदायों का एक पारंपरिक हाथ से बुना हुआ वस्त्र।
  • पचरा / रिग्नई : आदिवासी महिलाओं द्वारा पहना जाने वाला पारंपरिक परिधान।
  • माताबारी पेड़ा : उदयपुर के त्रिपुर सुंदरी मंदिर में चढ़ाया जाने वाला दूध आधारित प्रसिद्ध प्रसाद

भौगोलिक संकेतक (GI Tag) :

  • अधिनियम: वस्तुओं का भौगोलिक संकेतक (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999।
  • लागू वर्ष: यह अधिनियम 15 सितंबर 2003 से प्रभावी हुआ।
  • प्रथम उत्पाद: भारत का पहला GI टैग 'दार्जिलिंग चाय' को वर्ष 2004 में दिया गया था।
  • वैधता अवधि: एक बार प्रदान किए जाने के बाद GI टैग 10 वर्षों के लिए वैध होता है, जिसे बाद में नवीनीकृत (Renew) कराया जा सकता है।
  • मुख्यालय: भारत का GI रजिस्ट्री कार्यालय चेन्नई (तमिलनाडु) में स्थित है।

त्रिपुरा :

  • सीमाएं: त्रिपुरा तीन तरफ से बांग्लादेश से घिरा हुआ है (उत्तर, पश्चिम और दक्षिण)। इसके पूर्व में असम और मिजोरम राज्य स्थित हैं।
  • शून्य रेखा : भारत और बांग्लादेश के बीच त्रिपुरा की सीमा को 'जीरो लाइन' कहा जाता है।
  • क्षेत्रफल: यह भारत का तीसरा सबसे छोटा राज्य है (गोवा और सिक्किम के बाद)
  • स्थापना: 21 जनवरी 1972 (पूर्वोत्तर क्षेत्र पुनर्गठन अधिनियम, 1971 के तहत इसे पूर्ण राज्य का दर्जा मिला)
  • राजधानी: अगरतला
  • संसद सीटें: लोकसभा सीट - 2 | राज्यसभा सीट - 1
  • विधानसभा सीटें: 60 सीट (एकसदनीय )

राजकीय प्रतीक :

  • राजकीय पशु: फेयरे का पत्ता बंदर
  • राजकीय पक्षी: डार्क रम्पड स्लेटी कबूतर / हरा शाही कबूतर
  • राजकीय वृक्ष: अगर
  • राजकीय फूल: नागेश्वर
  • राजकीय फल: क्वीन अनानास - इसे GI टैग भी प्राप्त है।

प्रमुख लोक नृत्य:

  • होजागिरि : रियांग समुदाय द्वारा घड़े पर संतुलन बनाकर किया जाने वाला प्रसिद्ध नृत्य
  • गरिया : फसल बोने के उत्सव पर त्रिपुरी समुदाय द्वारा
  • बिजू : चकमा समुदाय का नववर्ष नृत्य
  • लेबांग बूमानी : बांस के वाद्ययंत्रों के साथ किया जाने वाला नृत्य

प्रमुख त्योहार:

  • खर्ची पूजा : त्रिपुरा का सबसे प्रसिद्ध त्योहार, जिसमें 14 देवताओं की पूजा होती है
  • केर पूजा : खर्ची पूजा के दो सप्ताह बाद होने वाली एक अत्यंत पवित्र और कड़े नियमों वाली आदिवासी पूजा

प्रमुख पर्यटन और ऐतिहासिक स्थल :

  • उज्जयंत पैलेस : अगरतला में स्थित शाही महल, जिसे महाराजा राधा किशोर माणिक्य ने बनवाया था।
  • नीरमहल : रुद्रसागर झील के बीच में स्थित जल-महल (Water Palace), जिसे महाराजा बीर बिक्रम किशोर माणिक्य ने बनवाया था।
  • उनाकोटी : भगवान शिव को समर्पित पहाड़ों को तराशकर बनाई गई विशाल मूर्तियां इसे 'उत्तर-पूर्व का खजुराहो' भी कहा जाता है।
  • त्रिपुर सुंदरी मंदिर: उदयपुर (त्रिपुरा) में स्थित 51 शक्तिपीठों में से एक प्रसिद्ध मंदिर

जनसांख्यिकी (Demographics - 2011 की जनगणना के अनुसार) :

  • साक्षरता दर: 87.22% (उत्तर-पूर्व के शीर्ष साक्षर राज्यों में शामिल)
  • लिंगानुपात : 960 महिलाएं प्रति 1,000 पुरुष
  • आधिकारिक भाषाएं: बंगाली और कोकबोरोक - कोकबोरोक त्रिपुरा के आदिवासियों की मूल भाषा है
  • माणिक्य राजवंश: स्वतंत्रता से पहले त्रिपुरा पर माणिक्य राजवंश का शासन था, जिसकी स्थापना 14वीं शताब्दी में हुई थी।
  • त्रिपुरा का भारत में विलय: 15 अक्टूबर 1949 को त्रिपुरा 'विलय समझौते' के बाद भारत का हिस्सा बना।

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