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सामुदायिक बीज बैंकों के लिए भारत का प्रथम मानक

Tue 16 Jun, 2026

संदर्भ :

  • भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने 'IS 20201:2026' जारी किया, जो सामुदायिक बीज बैंकों (CSB) के लिए भारत का पहला मानक है।

मुख्‍य बिन्‍दु :

  • उद्देश्य : स्वदेशी बीज किस्मों का संरक्षण करना, कृषि जैव विविधता की रक्षा करना और जलवायु-लचीली कृषि को मजबूत करना
  • नोडल निकाय: इसे उपभोक्ता मामले मंत्रालय के तहत कार्यरत भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के पर्यावरण और पारिस्थितिकी विभाग की जैव विविधता अनुभागीय समिति (EED 06) द्वारा विकसित किया गया है।
  • तकनीकी सहयोग: इसका मसौदा ICAR-राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (NBPGR) की अगुवाई में राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) और पादप किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण (PPV&FR) प्राधिकरण के सहयोग से तैयार किया गया है।

मानक की मुख्य विशेषताएँ :

  • स्वैच्छिक और निःशुल्क: यह एक स्वैच्छिक रूप से प्रमाणन योग्य प्रबंधन प्रणाली मानक है, जो BIS के आधिकारिक पोर्टल पर हितधारकों के लिए निःशुल्क उपलब्ध कराया गया है।
  • संपूर्ण जीवनचक्र का प्रबंधन: यह बीजों के संग्रह, अधिग्रहण, प्रसंस्करण, भंडारण प्रणालियों, अंकुरण/जीवंतता परीक्षण और उनके पुनरुत्पादन के लिए समान दिशा-निर्देश तय करता है।
  • ट्रेसेबिलिटी और प्रलेखन: इसके तहत बीज बैंकों के उचित दस्तावेजीकरण, जोखिम प्रबंधन और विनिमय तंत्र की पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया गया है।
  • वैश्विक लक्ष्य: यह मानक संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य-2 (SDG 2: Zero Hunger) के तहत खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करता है

महत्त्व :

  • यह सूखा प्रतिरोधी और स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल फसल किस्मों को संरक्षित करता है।
  • जलवायु परिवर्तन के प्रति प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।
  • सतत कृषि का समर्थन करता है।

भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) :

  • भारत का राष्ट्रीय मानक निकाय है
  • यह भारत सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अधीन काम करता है
  • मुख्य उद्देश्य : देश में वस्तुओं के मानकीकरण, गुणवत्ता प्रमाणन और उत्पादों की सुरक्षा सुनिश्चित करना
  • मुख्यालय: नई दिल्ली
  • स्थापना: इसकी शुरुआत 1947 में भारतीय मानक संस्थान (ISI) के रूप में हुई थी। बाद में BIS अधिनियम 2016 के तहत 12 अक्टूबर 2017 को इसे 'भारतीय मानक ब्यूरो (BIS)' के रूप में नया वैधानिक रूप दिया गया

सामुदायिक बीज बैंक (CSB) :

  • स्थानीय किसानों का एक ऐसा समूह या संगठन है, जो देशी, पारंपरिक और दुर्लभ बीजों का स्थानीय स्तर पर संग्रह, संरक्षण और आदान-प्रदान करता है
  • मुख्य उद्देश्य : किसानों को बुवाई के समय अच्छी गुणवत्ता वाले बीज बिना किसी लागत या बहुत कम लागत पर उपलब्ध कराना

मुख्य उद्देश्य और महत्व :

  • जैव विविधता का संरक्षण: हाइब्रिड (संकर) बीजों के आने से गायब हो रही स्थानीय और पारंपरिक फसल किस्मों को बचाना।
  • जलवायु लचीलापन : स्वदेशी बीज स्थानीय जलवायु (जैसे सूखा, बाढ़, या कीटों) के प्रति अधिक प्रतिरोधी होते हैं।
  • लागत में कमी: किसानों को बाजार से महंगे और रासायनिक रूप से उपचारित बीज खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे खेती की लागत घटती है।
  • खाद्य सुरक्षा और संप्रभुता: संकट के समय (जैसे अकाल या फसल खराब होने पर) स्थानीय स्तर पर बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करना

संरचना और रखरखाव :

  • भंडारण : बीजों को नमी और कीड़ों से बचाने के लिए पारंपरिक मिट्टी के बर्तनों, बांस की टोकरियों या आधुनिक वायुरोधी बक्सों में रखा जाता है।
  • प्राकृतिक उपचार: बीजों को सुरक्षित रखने के लिए नीम के पत्ते, राख और हल्दी जैसी प्राकृतिक चीजों का उपयोग किया जाता है।
  • दस्तावेजीकरण : हर बीज की किस्म, उसके पकने की अवधि, पानी की आवश्यकता और औषधीय गुणों का रिकॉर्ड रखा जाता है।
  • भारत में 'महानदी रीवर बेसिन' (ओडिशा), दक्कन विकास संवर्धन (तेलंगाना) और उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में कई सफल सामुदायिक बीज बैंक काम कर रहे हैं।

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