26 May, 2026
झारखंड के 11 पारंपरिक उत्पादों को GI टैग
Mon 15 Jun, 2026
हाल ही में झारखंड के 11 पारंपरिक उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्रदान किया गया, जो राज्य की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, हस्तशिल्प परंपरा और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय एवं वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह उपलब्धि न केवल राज्य की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करेगी, बल्कि स्थानीय कारीगरों, बुनकरों और उत्पादकों के आर्थिक सशक्तिकरण में भी सहायक होगी।
प्रमुख उत्पाद
- GI टैग प्राप्त उत्पादों में भोया साड़ी एवं फैब्रिक, कुचाई सिल्क साड़ी, केसरिया कलाकंद, डोकरा शिल्प, तुमका चादर, बरोनी पेंटिंग्स, मुंडा आभूषण, झारखंड बांस शिल्प, तसर सिल्क एवं साड़ियाँ, जादोपटिया पेंटिंग तथा पांचो साड़ी एवं फैब्रिक शामिल हैं। ये उत्पाद झारखंड की विविध सांस्कृतिक पहचान को दर्शाते हैं।
- डोकरा शिल्प (Dokra Craft) झारखंड की सबसे प्रसिद्ध जनजातीय कलाओं में से एक है। यह प्राचीन लॉस्ट-वैक्स मेटल कास्टिंग तकनीक पर आधारित है, जिसका उपयोग धातु की मूर्तियाँ, सजावटी वस्तुएँ और पारंपरिक धार्मिक सामग्री बनाने में किया जाता है। यह कला जनजातीय समुदायों की तकनीकी दक्षता और रचनात्मकता का प्रतीक है।
- जादोपटिया पेंटिंग मुख्यतः संथाल जनजाति से जुड़ी एक पारंपरिक चित्रकला शैली है। इसमें स्क्रॉल-आधारित चित्रों के माध्यम से लोककथाएँ, पौराणिक कथानक और सामाजिक संदेश प्रस्तुत किए जाते हैं। यह कला झारखंड की मौखिक परंपराओं को दृश्य रूप में संरक्षित करती है।
- झारखंड की वस्त्र परंपरा को भोया साड़ी, कुचाई सिल्क साड़ी, पांचो साड़ी, तुमका चादर और तसर सिल्क जैसे उत्पाद वैश्विक पहचान दिलाते हैं। विशेष रूप से तसर सिल्क झारखंड की पहचान बन चुका है। राज्य की जलवायु और वन क्षेत्र तसर रेशम उत्पादन के लिए अत्यंत अनुकूल हैं, जिससे हजारों ग्रामीण परिवारों, विशेषकर महिलाओं, की आजीविका जुड़ी हुई है।
- मुंडा ज्वेलरी राज्य की मुंडा जनजाति की पारंपरिक आभूषण कला को दर्शाती है। ये आभूषण केवल सौंदर्य का माध्यम नहीं, बल्कि जनजातीय सामाजिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक भी हैं। इसी प्रकार झारखंड बांस शिल्प वन-आधारित सतत आजीविका का उत्कृष्ट उदाहरण है।
- खाद्य श्रेणी में केसरिया कलाकंद का GI टैग प्राप्त करना झारखंड की स्थानीय खाद्य परंपराओं के लिए बड़ी उपलब्धि है। इसकी विशिष्ट स्वाद, निर्माण विधि और स्थानीय पहचान इसे अन्य मिठाइयों से अलग बनाती है।
- इन GI टैग्स का प्रभाव केवल सांस्कृतिक संरक्षण तक सीमित नहीं है। यह ब्रांड वैल्यू, बाज़ार विस्तार, निर्यात वृद्धि, ग्रामीण रोजगार और पर्यटन को भी बढ़ावा देगा। GI टैग नकली उत्पादों पर रोक लगाकर यह सुनिश्चित करता है कि वास्तविक लाभ मूल उत्पादक समुदायों तक पहुँचे।
महत्व
- झारखंड के लिए यह उपलब्धि विशेष महत्व रखती है क्योंकि राज्य की अर्थव्यवस्था में जनजातीय हस्तशिल्प, वन-आधारित उत्पाद और ग्रामीण उद्योग का बड़ा योगदान है। ऐसे में GI टैग राज्य को आर्थिक विकास और सांस्कृतिक संरक्षण—दोनों क्षेत्रों में नई दिशा प्रदान कर सकता है।
- संक्षेप में, झारखंड के 11 GI टैग केवल उत्पादों की पहचान नहीं, बल्कि राज्य की जनजातीय विरासत, पारंपरिक ज्ञान और सांस्कृतिक अस्मिता की वैश्विक मान्यता हैं।
भौगोलिक संकेतक (GI Tag)
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झारखंड
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