26 May, 2026
कच्चे तेल तथा प्राकृतिक गैस की खोज और उत्पादन के लिए त्रिपक्षीय समझौता
Sun 14 Jun, 2026
संदर्भ :
- केंद्र सरकार ने असम और नागालैंड सरकार के साथ कच्चे तेल तथा प्राकृतिक गैस की खोज और उत्पादन के लिए त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया।
मुख्य बिन्दु :
- हस्ताक्षरकर्ता : भारत सरकार (पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय), असम सरकार और नागालैंड सरकार
- प्रमुख उपस्थिति: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो
- प्रभावित क्षेत्र: यह समझौता असम-नागालैंड सीमा पर 1,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक के क्षेत्र और 6 चिन्हित विवादित तेल क्षेत्रों को कवर करता है
- राजस्व साझाकरण : दोनों राज्यों के बीच तेल और गैस से प्राप्त राजस्व को 50:50 के अनुपात में साझा किया जाएगा
- उत्पादन क्षमता: वर्तमान में इस क्षेत्र से 1,000–1,500 बैरल प्रति दिन कच्चे तेल का उत्पादन होता है, जिसके 10 गुना से अधिक बढ़ने की संभावना है। अकेले एक क्षेत्र से ही ₹15,000 करोड़ से अधिक की रिकवरी की उम्मीद है
पृष्ठभूमि :
- तीन दशकों का गतिरोध: असम और नागालैंड के बीच 434 किमी लंबी सीमा पर क्षेत्राधिकार और प्रशासनिक दावों के कारण 1990 के दशक के मध्य से विवादित क्षेत्र बेल्ट (Disputed Area Belt : DAB) में तेल की खोज पूरी तरह से रुकी हुई थी।
- नागालैंड का विशेष दर्जा (Article 371A): भारतीय संविधान का अनुच्छेद 371A नागालैंड को भूमि और संसाधनों पर विशेष अधिकार देता है। नागालैंड सरकार का तर्क था कि केंद्र या बाहरी कंपनियों को उसके संसाधनों पर सीधा नियंत्रण नहीं मिलना चाहिए, जिससे कानूनी और प्रशासनिक गतिरोध पैदा हो गया था
भारत में कच्चे तेल का भंडार और वितरण :
- शीर्ष भंडार वाले क्षेत्र: भारत का सर्वाधिक कच्चा तेल भंडार पश्चिमी अपतटीय क्षेत्रों (जैसे: मुंबई हाई) में लगभग 31% है
- शीर्ष राज्य: राज्यों के मामले में असम सबसे आगे (लगभग 21.5% - 22% भंडार) है, इसके बाद राजस्थान और गुजरात का स्थान आता है।
असम के प्रमुख तेल क्षेत्र :
- डिगबोई (Digboi): यह एशिया और भारत का सबसे पहला और सबसे पुराना संचालित तेल क्षेत्र एवं रिफाइनरी (रिफाइनरी की स्थापना 1901 में) है। इसे असम की 'ऑयल सिटी' भी कहा जाता है।
- अन्य क्षेत्र: नाहरकटिया, रुद्रसागर, लकवा, मोरन-हुगरीजान और लखमानी
- नागालैंड की क्षमता: नागालैंड का 'नागा-शुपेन बेल्ट', जो असम-अराकान बेसिन का हिस्सा है, हाइड्रोकार्बन के मामले में अत्यधिक समृद्ध है। यहाँ 31 वर्षों के बाद पुनः तेल उत्पादन शुरू होने जा रहा है।
वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति :
- भारत कच्चे तेल का विश्व में तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है।
- भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा आयातक है
- भारत तेल शोधन के मामले में दुनिया का चौथा सबसे बड़ा देश है।
महत्वपूर्ण परीक्षा उपयोगी तथ्य :
- डिगबोई (1889): भारत और एशिया का पहला तेल कुआँ
- डिगबोई रिफाइनरी (1901): एशिया की सबसे पुरानी चालू रिफाइनरी
- असम: भारत के प्रमुख कच्चे तेल एवं प्राकृतिक गैस उत्पादक राज्यों में से एक
- नागा-शुप्पेन बेल्ट: नागालैंड का प्रमुख हाइड्रोकार्बन (तेल-गैस) क्षेत्र
- असम की 4 प्रमुख रिफाइनरियाँ: डिगबोई, नूनमती (गुवाहाटी), बोंगाईगांव और नुमालीगढ़









