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ग्लोबल पीस इंडेक्स (GPI) 2026

Tue 09 Jun, 2026

इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस (IEP) द्वारा 9 जून 2026 को जारी ग्लोबल पीस इंडेक्स (Global Peace Index-GPI) 2026 के अनुसार वैश्विक शांति का स्तर अपने इतिहास के सबसे निचले स्तर पर पहुँच गया है। रिपोर्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक संघर्षों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित युद्ध प्रणालियों, ड्रोन हमलों तथा हिंसा की बढ़ती आर्थिक लागत को इसके प्रमुख कारणों के रूप में रेखांकित किया गया है।

इस रिपोर्ट में भारत को 163 देशों में 115वाँ स्थान प्राप्त हुआ है, जबकि आइसलैंड लगातार 19वें वर्ष विश्व का सबसे शांतिपूर्ण देश बना हुआ है।

ग्लोबल पीस इंडेक्स (GPI) क्या है?

ग्लोबल पीस इंडेक्स विश्व में शांति की स्थिति को मापने वाला सबसे व्यापक सूचकांक है।

प्रकाशक

Institute for Economics & Peace (IEP), ऑस्ट्रेलिया

कवरेज

  • 163 देश एवं क्षेत्र
  • विश्व की लगभग 99% जनसंख्या का प्रतिनिधित्व

मूल्यांकन के आधार

यह सूचकांक 23 गुणात्मक एवं मात्रात्मक संकेतकों पर आधारित है, जिन्हें तीन प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है—

  1. सामाजिक सुरक्षा एवं संरक्षा (Societal Safety and Security)
  2. घरेलू एवं अंतर्राष्ट्रीय संघर्ष (Ongoing Domestic and International Conflict)
  3. सैन्यीकरण का स्तर (Degree of Militarisation)

नोट: कम स्कोर बेहतर शांति स्तर को दर्शाता है।

GPI 2026 की प्रमुख विशेषताएँ

1. वैश्विक शांति में ऐतिहासिक गिरावट

रिपोर्ट के अनुसार विश्व में शांति का स्तर लगातार गिर रहा है तथा वर्तमान स्थिति सूचकांक के इतिहास में सबसे खराब है।

इसके पीछे प्रमुख कारण हैं—

  • बढ़ते अंतर्राष्ट्रीय संघर्ष
  • राजनीतिक अस्थिरता
  • सैन्य प्रतिस्पर्धा
  • नई युद्ध तकनीकों का विस्तार

2. बाह्य संघर्षों में वृद्धि

वर्ष 2008 में जहाँ 59 देश किसी न किसी बाह्य संघर्ष में शामिल थे, वहीं 2026 में यह संख्या बढ़कर 103 हो गई है।

मुख्य कारण:

  • रूस-यूक्रेन युद्ध
  • पश्चिम एशिया संकट
  • अफ्रीकी गृहयुद्ध
  • हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा

3. एआई आधारित युद्ध का उदय

GPI 2026 की सबसे महत्वपूर्ण टिप्पणियों में से एक युद्ध के स्वरूप में आया तकनीकी परिवर्तन है।

प्रमुख तथ्य

  • 2018 से 2025 के बीच ड्रोन हमलों में 11,500% से अधिक वृद्धि।
  • AI आधारित लक्ष्य पहचान प्रणालियों ने निर्णय लेने का समय एक दिन से घटाकर कुछ सेकंड कर दिया।
  • स्वायत्त (Autonomous) एवं अर्ध-स्वायत्त हथियारों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।

यह संकेत देता है कि भविष्य के युद्ध सैनिकों की संख्या नहीं बल्कि तकनीकी क्षमता से तय होंगे।

4. हिंसा की बढ़ती आर्थिक लागत

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2026 में हिंसा की वैश्विक आर्थिक लागत बढ़कर 21.81 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर हो गई।

यह विश्व GDP का लगभग 10.5% है।

इस लागत में शामिल हैं—

  • सैन्य व्यय
  • आंतरिक सुरक्षा खर्च
  • अवसंरचना का विनाश
  • शरणार्थी संकट
  • उत्पादकता में कमी

यदि यही संसाधन शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सतत विकास पर खर्च किए जाएँ तो वैश्विक विकास को नई गति मिल सकती है।

शीर्ष एवं निम्न प्रदर्शन करने वाले देश

सर्वाधिक शांतिपूर्ण देश

रैंक देश
1 आइसलैंड
2 न्यूज़ीलैंड
3 स्विट्ज़रलैंड
4 स्लोवेनिया
5 आयरलैंड

आइसलैंड ने लगातार 19वें वर्ष पहला स्थान बनाए रखा है।

सबसे कम शांतिपूर्ण देश

रैंक देश
159 इज़राइल
160 यूक्रेन
161 कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य
162 सूडान
163 रूस

पहली बार रूस सूचकांक में अंतिम स्थान पर पहुँचा है।

भारत का प्रदर्शन

  • रैंक: 115वाँ स्थान
  • स्कोर: 2.229

भारत की स्थिति को प्रभावित करने वाले कारक

सकारात्मक पक्ष

  • स्थिर लोकतांत्रिक व्यवस्था
  • बेहतर कानून-व्यवस्था
  • आतंकवाद-रोधी क्षमताओं में वृद्धि
  • मजबूत आर्थिक विकास

चुनौतियाँ

  • सीमा सुरक्षा संबंधी मुद्दे
  • क्षेत्रीय भू-राजनीतिक तनाव
  • कुछ क्षेत्रों में आंतरिक सुरक्षा चुनौतियाँ
  • बढ़ता रक्षा व्यय

दक्षिण एशिया की स्थिति

GPI 2026 के अनुसार दक्षिण एशिया में शांति स्तर में विश्व की सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई।

इसके प्रमुख कारण हैं—

  • राजनीतिक अस्थिरता
  • सामाजिक अशांति
  • सीमा विवाद
  • पड़ोसी देशों में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियाँ

 

भारत के लिए निहितार्थ

1. सामरिक महत्व

  • भारत को निम्न क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता है—
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)
  • रक्षा प्रौद्योगिकी
  • ड्रोन एवं एंटी-ड्रोन प्रणाली
  • साइबर सुरक्षा
  • अंतरिक्ष आधारित निगरानी प्रणाली

2. आर्थिक महत्व

शांति और आर्थिक विकास के बीच प्रत्यक्ष संबंध है।

शांतिपूर्ण वातावरण से—

  • विदेशी निवेश बढ़ता है।
  • पर्यटन को बढ़ावा मिलता है।
  • व्यापार एवं उद्योग का विस्तार होता है।
  • रोजगार सृजन में वृद्धि होती है।

3. कूटनीतिक महत्व

भारत की पहलें—

  • वसुधैव कुटुम्बकम्
  • पड़ोसी प्रथम नीति
  • बहुपक्षवाद
  • वैश्विक दक्षिण नेतृत्व

क्षेत्रीय एवं वैश्विक शांति को मजबूत करने में सहायक हो सकती हैं।

निष्कर्ष

  • ग्लोबल पीस इंडेक्स 2026 स्पष्ट करता है कि विश्व बढ़ते संघर्षों, सैन्यीकरण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित युद्धों के नए दौर में प्रवेश कर चुका है।
  • भारत का 115वाँ स्थान यह दर्शाता है कि देश ने कई क्षेत्रों में प्रगति की है, किंतु आंतरिक सुरक्षा, सीमा प्रबंधन तथा उभरती सैन्य तकनीकों के क्षेत्र में और अधिक प्रयासों की आवश्यकता है।
  • भविष्य में शांति, सुरक्षा और विकास के संतुलन को बनाए रखना भारत सहित सभी देशों के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।

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