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एंटारेस न्यूक्लियर का मार्क-0 रिएक्टर

Mon 08 Jun, 2026

अमेरिका की निजी कंपनी एंटारेस न्यूक्लियर (Antares Nuclear) के मार्क-0 (Mark-0) डेमोंस्ट्रेशन रिएक्टर ने हाल ही में अपनी पहली ज़ीरो-पावर फ्यूल्ड क्रिटिकलिटी (Zero-Power Fueled Criticality) प्राप्त की। इसके साथ ही यह पिछले चार दशकों में अमेरिका का पहला निजी क्षेत्र द्वारा विकसित नॉन-लाइट-वाटर रिएक्टर (Non-Light-Water Reactor) बन गया है जिसने यह महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।

मार्क-0 एक सोडियम हीट-पाइप कूल्ड माइक्रोरिएक्टर है, जिसमें उन्नत TRISO (Tri-structural Isotropic) सिरेमिक ईंधन का उपयोग किया जाता है। यह ईंधन BWX Technologies के सहयोग से विकसित किया गया है।

क्रिटिकलिटी (Criticality) क्या है?

परमाणु रिएक्टर में क्रिटिकलिटी उस अवस्था को कहते हैं जब नाभिकीय श्रृंखला अभिक्रिया (Chain Reaction) स्वतः और नियंत्रित रूप से चलती रहती है।

  • सब-क्रिटिकल (Sub-Critical): श्रृंखला अभिक्रिया धीरे-धीरे समाप्त हो जाती है।
  • क्रिटिकल (Critical): श्रृंखला अभिक्रिया स्थिर एवं स्व-निर्वाहक बन जाती है।
  • सुपर-क्रिटिकल (Super-Critical): अभिक्रिया की दर तेजी से बढ़ती है।

ज़ीरो-पावर क्रिटिकलिटी यह दर्शाती है कि रिएक्टर ने बिना महत्वपूर्ण ऊर्जा उत्पादन के सफलतापूर्वक नियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया प्रारंभ कर दी है।

मार्क-0 रिएक्टर की प्रमुख विशेषताएँ

1. माइक्रोरिएक्टर (Microreactor)

मार्क-0 एक लघु आकार का परमाणु रिएक्टर है।

विशेषताएँ:

  • कॉम्पैक्ट एवं मॉड्यूलर डिजाइन
  • कम निर्माण लागत
  • दूरस्थ क्षेत्रों में स्थापना की क्षमता
  • त्वरित तैनाती

2. नॉन-लाइट-वाटर रिएक्टर (NLWR)

वर्तमान अधिकांश परमाणु संयंत्र साधारण जल (Light Water) का उपयोग करते हैं, जबकि मार्क-0 में:

  • सोडियम हीट-पाइप कूलिंग प्रणाली
  • उन्नत रिएक्टर डिज़ाइन
  • उच्च दक्षता एवं सुरक्षा का उपयोग किया गया है।

3. TRISO ईंधन

TRISO ईंधन में यूरेनियम कणों को कई सुरक्षात्मक सिरेमिक परतों से ढका जाता है।

लाभ:

  • अत्यधिक तापमान सहनशीलता
  • दुर्घटनाओं में बेहतर सुरक्षा
  • रेडियोधर्मी रिसाव की न्यूनतम संभावना
  • उच्च ईंधन दक्षता

इसे विश्व का सबसे सुरक्षित परमाणु ईंधन भी माना जाता है।

इस उपलब्धि का महत्व

तकनीकी महत्व

  • उन्नत परमाणु रिएक्टरों के विकास को नई गति।
  • निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी।
  • चौथी पीढ़ी (Generation-IV) के परमाणु रिएक्टरों की व्यवहार्यता सिद्ध।

जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में

परमाणु ऊर्जा:

  • न्यूनतम कार्बन उत्सर्जन करती है।
  • निरंतर (Baseload) विद्युत उपलब्ध कराती है।
  • सौर एवं पवन ऊर्जा की अस्थिरता की पूर्ति करती है।

इसलिए उन्नत परमाणु रिएक्टर वैश्विक Net Zero लक्ष्यों की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

सामरिक महत्व

  • सीमावर्ती क्षेत्रों में ऊर्जा आपूर्ति
  • रक्षा प्रतिष्ठानों को ऊर्जा
  • ऊर्जा सुरक्षा में वृद्धि
  • जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता में कमी

भारत के लिए प्रभाव एवं अवसर

1. स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) विकास को बढ़ावा

भारत वर्तमान में Small Modular Reactors (SMRs) के विकास पर कार्य कर रहा है।

मार्क-0 की सफलता से:

  • कम लागत वाले परमाणु संयंत्रों की संभावना बढ़ेगी।
  • निर्माण समय में कमी आएगी।
  • विकेंद्रीकृत ऊर्जा उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा।

2. नेट-ज़ीरो लक्ष्य की प्राप्ति

भारत ने वर्ष 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है।

उन्नत परमाणु तकनीक:

  • स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराएगी।
  • कोयले पर निर्भरता कम करेगी।
  • नवीकरणीय ऊर्जा का पूरक बनेगी।

3. दूरस्थ क्षेत्रों में ऊर्जा उपलब्धता

माइक्रोरिएक्टरों का उपयोग:

  • हिमालयी क्षेत्रों
  • अंडमान-निकोबार
  • सीमावर्ती इलाकों
  • दूरस्थ औद्योगिक क्षेत्रों

में किया जा सकता है।

4. आत्मनिर्भर भारत को बल

यह उपलब्धि भारत को प्रेरित कर सकती है कि वह:

  • स्वदेशी माइक्रोरिएक्टर विकसित करे।
  • उन्नत ईंधन अनुसंधान बढ़ाए।
  • निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करे।

5. ग्रीन हाइड्रोजन मिशन

भविष्य में माइक्रोरिएक्टर:

  • ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन
  • समुद्री जल विलवणीकरण
  • औद्योगिक ऊष्मा उत्पादन में योगदान दे सकते हैं।

भारत का तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम

भारत के परमाणु कार्यक्रम की परिकल्पना डॉ. होमी जे. भाभा ने की थी।

प्रथम चरण

  • प्रेसराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर (PHWR)
  • प्राकृतिक यूरेनियम आधारित

द्वितीय चरण

  • फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBR)
  • अधिक विखंडनीय पदार्थ का उत्पादन

तृतीय चरण

  • थोरियम आधारित रिएक्टर
  • भारत के विशाल थोरियम भंडार का उपयोग

भारत के प्रमुख परमाणु ऊर्जा संयंत्र

परमाणु ऊर्जा संयंत्र राज्य
तारापुर परमाणु ऊर्जा स्टेशन महाराष्ट्र
कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना तमिलनाडु
मद्रास परमाणु ऊर्जा स्टेशन (कलपक्कम) तमिलनाडु
नरोरा परमाणु ऊर्जा स्टेशन उत्तर प्रदेश
काकरापार परमाणु ऊर्जा स्टेशन गुजरात
राजस्थान परमाणु ऊर्जा स्टेशन राजस्थान
कैगा जनरेटिंग स्टेशन कर्नाटक
गोरखपुर हरियाणा अणु विद्युत परियोजना हरियाणा
जैतापुर परमाणु ऊर्जा परियोजना (प्रस्तावित) महाराष्ट्र
कोव्वाडा परमाणु ऊर्जा परियोजना (प्रस्तावित) आंध्र प्रदेश

भारत में परमाणु अनुसंधान

भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC)

भारत का प्रमुख परमाणु अनुसंधान संस्थान, जो कार्य करता है:

  • रिएक्टर डिजाइन
  • परमाणु ईंधन विकास
  • संलयन (Fusion) अनुसंधान
  • उन्नत सामग्री विज्ञान

प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR)

  • स्थान: कलपक्कम, तमिलनाडु
  • क्षमता: 500 मेगावाट
  • संचालन: भाविनी (BHAVINI)

थोरियम अनुसंधान

भारत निम्न परियोजनाओं पर कार्य कर रहा है:

  • एडवांस्ड हेवी वाटर रिएक्टर (AHWR)
  • थोरियम ईंधन चक्र
  • दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा कार्यक्रम

ITER परियोजना

भारत फ्रांस में स्थापित ITER (International Thermonuclear Experimental Reactor) परियोजना का साझेदार है, जो नियंत्रित नाभिकीय संलयन (Fusion Energy) पर विश्व की सबसे बड़ी अनुसंधान परियोजना है।

निष्कर्ष

  • एंटारेस न्यूक्लियर के मार्क-0 रिएक्टर की सफलता परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि है। यह माइक्रोरिएक्टर, उन्नत ईंधन तकनीक तथा चौथी पीढ़ी के परमाणु रिएक्टरों की क्षमता को प्रदर्शित करता है।
  • भारत के लिए यह विकास स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा, आत्मनिर्भरता तथा 2070 के नेट-ज़ीरो लक्ष्य की दिशा में नए अवसर प्रस्तुत करता है। भविष्य में SMRs, थोरियम आधारित रिएक्टर तथा उन्नत परमाणु तकनीकें भारत की ऊर्जा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती हैं।

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