26 May, 2026
देश का 100वां रामसर स्थल
Sat 06 Jun, 2026
संदर्भ :
- उत्तर प्रदेश के बलिया स्थित जय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य (सुरहा ताल) को देश का 100वां रामसर स्थल घोषित किया गया।
जय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य (सुरहा ताल) :
- स्थान: यह उत्तर प्रदेश के बलिया जिले (बांसडीह तहसील के पास) में स्थित है।
- नदी बेसिन: यह गंगा नदी बेसिन के मध्य क्षेत्र में आता है।
- उत्पत्ति : यह गंगा नदी के विसर्प के मुख्य धारा से अलग होने के कारण निर्मित मीठे पानी की एक प्राकृतिक, बारहमासी गोखुर झील है।
- जल स्रोत: इसे तीन मुख्य जलीय चैनलों के माध्यम से निरंतर मीठा पानी मिलता रहता है।
- क्षेत्रफल: यह लगभग 3432.93 हेक्टेयर (लगभग 34.32 वर्ग किमी) के क्षेत्र में विस्तृत है।
- स्थापना: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 1991 में इसे पहली बार वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत एक 'पक्षी अभयारण्य' घोषित किया गया था।
- नाम परिवर्तन: वर्ष 2002 में, इसका आधिकारिक नाम बदलकर प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता के नाम पर 'जय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य' कर दिया गया। स्थानीय स्तर पर इसे आज भी सुरहा ताल के नाम से ही जाना जाता है।
- सेंट्रल एशियन फ्लाईवे (CAF): यह आर्द्रभूमि सेंट्रल एशियन फ्लाईवे के अंतर्गत आने वाले विदेशी और स्थानीय प्रवासी पक्षियों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण शीतकालीन आवास और प्रजनन स्थल है। गर्मियों में जब छोटे जलाशय सूख जाते हैं, तब भी यह जलपक्षियों के लिए एक सुरक्षित आश्रय प्रदान करता है
- वनस्पतियां: यहाँ पौधों की लगभग 221 प्रजातियाँ मौजूद हैं। इसके आसपास बाढ़ के मैदान, मौसमी दलदल और धान के खेत हैं।
- पक्षी: यहाँ 'कॉमन पोचार्ड' (Aythya ferina - संकटग्रस्त/Vulnerable) और 'इंडियन रिवर टर्न' (Sterna aurantia) जैसी दुर्लभ पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
- जलीय जीव: मछलियों की 66 प्रजातियाँ हैं, जिनमें प्रमुख रूप से वल्लागो अट्टू और बगारियस बगारियस शामिल हैं।
- अन्य जीव: प्रचुर मात्रा में मछलियों की उपलब्धता के कारण, संकटग्रस्त फिशिंग कैट भी यहाँ भोजन की तलाश में आती है।
रामसर स्थल :
- ऐसी आर्द्रभूमियां (Wetlands) होती हैं, जो अंतर्राष्ट्रीय महत्व रखती हैं और जिन्हें संरक्षण के लिए चिह्नित किया गया है। इनका नाम ईरान के रामसर शहर के नाम पर रखा गया है, जहां रामसर संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे।
रामसर संधि (Ramsar Convention):
- संधि पर हस्ताक्षर : 2 फरवरी, 1971 को ईरान के रामसर शहर में (विश्व आर्द्रभूमि दिवस: हर साल 2 फरवरी को मनाया जाता है)
- लागू हुआ : 1975 में
- रामसर स्थलों की सूची रामसर सम्मेलन के सचिवालय द्वारा रखी जाती है, जो स्विट्जरलैंड के ग्लैंड में स्थित अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) मुख्यालय में स्थित है।
- भारत ने 1982 में इस संधि को अपनाया
- प्रथम भारतीय आर्द्रभूमि स्थल: केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (राजस्थान) और चिल्का झील (ओडिशा) 1981 में।
- तमिलनाडु में सबसे ज़्यादा 20 स्थल हैं, और उसके बाद उत्तर प्रदेश में 13 स्थल हैं।
- भारत में सबसे बड़ा रामसर स्थल: सुंदरबन, पश्चिम बंगाल
- भारत में सबसे छोटा रामसर: रेणुका, हिमाचल प्रदेश
- 99वां रामसर स्थल : शेखा झील पक्षी अभयारण्य, अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश)
- वैश्विक रैंकिंग : भारत अब यूके (176) और मेक्सिको (144) के बाद विश्व में तीसरे और एशिया में पहले स्थान पर है।
- आर्द्रभूमि (Wetlands) क्या है?
- आर्द्रभूमि वे क्षेत्र हैं जो स्थायी या मौसमी रूप से जल से भरे रहते हैं। इनमें नदियां, झीलें, दलदल, समुद्री तटीय क्षेत्र आदि शामिल हैं।
प्रकार:
- मीठे पानी की आर्द्रभूमि (Freshwater Wetlands)
- खारे पानी की आर्द्रभूमि (Saltwater Wetlands)
- मानव निर्मित आर्द्रभूमि (Artificial Wetlands)
महत्व:
- जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण।
- बाढ़ नियंत्रण और तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा।
- जैव विविधता को बनाए रखना।
- स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका का स्रोत।
राष्ट्रीय पहल :
- आर्द्रभूमि (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017
- जलीय पारिस्थितिकी प्रणालियों के संरक्षण के लिये राष्ट्रीय योजना (NPCA)
- अमृत धरोहर क्षमता निर्माण योजना : शुरुआत : जून 2023
- राष्ट्रीय आर्द्रभूमि संरक्षण कार्यक्रम (NWCP):1985
भारत में रामसर स्थलों की सूची :
- गोकुल जलाशय – बिहार – सितंबर 2025 – 4.48 वर्ग किमी
- उदयपुर झील – बिहार – सितंबर 2025 – 3.19 वर्ग किमी
- खीचन – राजस्थान – जून 2025 – 2.92 वर्ग किमी
- मेनार – राजस्थान – जून 2025 – 2828 वर्ग किमी
- सक्कराकोट्टई पक्षी अभयारण्य – तमिलनाडु – फरवरी 2025 – 2.3949 वर्ग किमी
- थेरथांगल पक्षी अभयारण्य (TBS) – तमिलनाडु – फरवरी 2025 – 0.293 वर्ग किमी
- खेचेओपालरी झील – सिक्किम – फरवरी 2025 – 0.0379 वर्ग किमी
- उधवा झील – झारखंड – फरवरी 2025 – 5.65 वर्ग किमी
- तवा जलाशय – मध्य प्रदेश – अगस्त 2024 – 200.5 वर्ग किमी
- काझुवेली पक्षी अभयारण्य – तमिलनाडु – अगस्त 2024 – 51.51 वर्ग किमी
- नंजरायन पक्षी अभयारण्य – तमिलनाडु – अगस्त 2024 – 1.25 वर्ग किमी
- नक्ती पक्षी अभयारण्य – बिहार – जून 2024 – 3.326 वर्ग किमी
- नागी पक्षी अभयारण्य – बिहार – जून 2024 – 2.1 वर्ग किमी
- कारावेट्टी पक्षी अभयारण्य – तमिलनाडु – जनवरी 2024 – 4.53 वर्ग किमी
- लॉन्गवुड शोला आरक्षित वन – तमिलनाडु – जनवरी 2024 – 1.16 वर्ग किमी
- मगाडी केरे संरक्षण अभ्यारण्य – कर्नाटक – जनवरी 2024 – 0.5 वर्ग किमी
- अंकसमुद्र पक्षी संरक्षण रिजर्व – कर्नाटक – जनवरी 2024 – 0.99 वर्ग किमी
- अघनाशिनी मुहाना – कर्नाटक – जनवरी 2024 – 48.01 वर्ग किमी
- ताम्पारा झील – ओडिशा – अगस्त 2022 – 3 वर्ग किमी
- हीराकुड जलाशय – ओडिशा – अगस्त 2022 – 654 वर्ग किमी
- अनसुपा झील – ओडिशा – अगस्त 2022 – 2.31 वर्ग किमी
- यशवंत सागर – मध्य प्रदेश – अगस्त 2022 – 8.229 वर्ग किमी
- चित्रांगुडी पक्षी अभयारण्य – तमिलनाडु – अगस्त 2022 – 2.6047 वर्ग किमी
- सुचिंद्रम थेरूर आर्द्रभूमि परिसर – तमिलनाडु – अगस्त 2022 – 0.9423 वर्ग किमी
- वडुवुर पक्षी अभयारण्य – तमिलनाडु – अगस्त 2022 – 1.1264 वर्ग किमी
- कंजीरंकुलम पक्षी अभयारण्य – तमिलनाडु – अगस्त 2022 – 0.9689 वर्ग किमी
- थाने क्रीक – महाराष्ट्र – अगस्त 2022 – 65.2108 वर्ग किमी
- हाइगम आर्द्रभूमि संरक्षण रिजर्व – जम्मू और कश्मीर – अगस्त 2022 – 8.0182 वर्ग किमी
- शेलबग आर्द्रभूमि संरक्षण रिजर्व – जम्मू और कश्मीर – अगस्त 2022 – 16.75 वर्ग किमी
- नंदा झील – गोवा – जून 2022 – 0.42 वर्ग किमी
- करिकिली पक्षी अभयारण्य – तमिलनाडु – अप्रैल 2022 – 0.58 वर्ग किमी
- पल्लीकरनई मार्श रिजर्व वन – तमिलनाडु – अप्रैल 2022 – 12.48 वर्ग किमी
- पिचावरम मैंग्रोव वन – तमिलनाडु – अप्रैल 2022 – 14.79 वर्ग किमी
- मन्नार की खाड़ी समुद्री जीवमंडल अभ्यारण्य – तमिलनाडु – अप्रैल 2022 – 527 वर्ग किमी
- वेम्बनूर आर्द्रभूमि परिसर – तमिलनाडु – अप्रैल 2022 – 0.2 वर्ग किमी
- वेलोड पक्षी अभयारण्य – तमिलनाडु – अप्रैल 2022 – 0.77 वर्ग किमी
- उदयमार्थण्डपुरम पक्षी अभयारण्य – तमिलनाडु – अप्रैल 2022 – 0.44 वर्ग किमी
- वेदान्थंगल पक्षी अभयारण्य – तमिलनाडु – अप्रैल 2022 – 0.4 वर्ग किमी
- रंगनाथिट्टू पक्षी अभयारण्य – कर्नाटक – फरवरी 2022 – 5.18 वर्ग किमी
- साख्य सागर – मध्य प्रदेश – जनवरी 2022 – 2.48 वर्ग किमी
- सिरपुर आर्द्रभूमि – मध्य प्रदेश – जनवरी 2022 – 1.61 वर्ग किमी
- कूनथंकुलम पक्षी अभयारण्य – तमिलनाडु – नवंबर 2021 – 0.72 वर्ग किमी
- सतकोसिया घाटी – ओडिशा – अक्टूबर 2021 – 982 वर्ग किमी
- पाला आर्द्रभूमि – मिजोरम – अगस्त 2021 – 18.5 वर्ग किमी
- बखीरा अभयारण्य – उत्तर प्रदेश – जून 2021 – 28.94 वर्ग किमी
- भिंडावास वन्यजीव अभ्यारण्य – हरियाणा – 25 मई 2021 – 4.11 वर्ग किमी
- सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान – हरियाणा – 25 मई 2021 – 1.43 वर्ग किमी
- हैदरपुर आर्द्रभूमि – उत्तर प्रदेश – अप्रैल 2021 – 69.08 वर्ग किमी
- वधवाना आर्द्रभूमि – गुजरात – अप्रैल 2021 – 6.3 वर्ग किमी
- थोल झील – गुजरात – अप्रैल 2021 – 6.99 वर्ग किमी
- खिजड़िया वन्यजीव अभयारण्य – गुजरात – अप्रैल 2021 – 5.12 वर्ग किमी
- त्सो कार आर्द्रभूमि परिसर – लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश – नवंबर 2020 – 95.77 वर्ग किमी
- सुर सरोवर – उत्तर प्रदेश – अगस्त 2020 – 4.31 वर्ग किमी
- आसन संरक्षण आरक्षित क्षेत्र – उत्तराखंड – जुलाई 2020 – 4.44 वर्ग किमी
- कबरताल आर्द्रभूमि – बिहार – जुलाई 2020 – 26.2 वर्ग किमी
- लोनार झील – महाराष्ट्र – जुलाई 2020 – 4.27 वर्ग किमी
- समन पक्षी अभयारण्य – उत्तर प्रदेश – दिसंबर 2019 – 52.63 वर्ग किमी
- पार्वती अर्गा पक्षी अभयारण्य – उत्तर प्रदेश – दिसंबर 2019 – 7.22 वर्ग किमी
- समसपुर पक्षी अभयारण्य – उत्तर प्रदेश – अक्टूबर 2019 – 79.94 वर्ग किमी
- ब्यास संरक्षण आरक्षित – पंजाब – सितंबर 2019 – 64.289 वर्ग किमी
- केशोपुर-मियानी सामुदायिक रिजर्व – पंजाब – सितंबर 2019 – 3.439 वर्ग किमी
- नांगल वन्यजीव अभयारण्य – पंजाब – सितंबर 2019 – 1.16 वर्ग किमी
- नवाबगंज पक्षी अभयारण्य – उत्तर प्रदेश – सितंबर 2019 – 2.246 वर्ग किमी
- सैंडी पक्षी अभयारण्य – उत्तर प्रदेश – सितंबर 2019 – 30.85 वर्ग किमी
- सरसाई नवार झील – उत्तर प्रदेश – सितंबर 2019 – 16.13 वर्ग किमी
- नंदुर मधमेश्वर – महाराष्ट्र – जून 2019 – 14.37 वर्ग किमी
- सुंदरबन आर्द्रभूमि – पश्चिम बंगाल – जनवरी 2019 – 4230 वर्ग किमी
- नलसरोवर पक्षी अभयारण्य – गुजरात – सितंबर 2012 – 120 वर्ग किमी
- ऊपरी गंगा नदी – उत्तर प्रदेश – नवंबर 2005 – 265.9 वर्ग किमी
- चंदरताल आर्द्रभूमि – हिमाचल प्रदेश – नवंबर 2005 – 0.49 वर्ग किमी
- होकेरा आर्द्रभूमि – जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश – नवंबर 2005 – 13.75 वर्ग किमी
- रेणुका आर्द्रभूमि – हिमाचल प्रदेश – नवंबर 2005 – 0.2 वर्ग किमी
- रुद्रसागर झील – त्रिपुरा – नवंबर 2005 – 2.4 वर्ग किमी
- सुरिंसर-मानसर झीलें – जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश – नवंबर 2005 – 3.5 वर्ग किमी
- अष्टामुडी आर्द्रभूमि – केरल – अगस्त 2002 – 614 वर्ग किमी
- भीतर्कनिका मैंग्रोव – ओडिशा – अगस्त 2002 – 650 वर्ग किमी
- भोज आर्द्रभूमि – मध्य प्रदेश – अगस्त 2002 – 32.01 वर्ग किमी
- दीपोर बील – असम – अगस्त 2002 – 40 वर्ग किमी
- पूर्वी कोलकाता आर्द्रभूमि – पश्चिम बंगाल – अगस्त 2002 – 125 वर्ग किमी
- कंजली आर्द्रभूमि – पंजाब – जनवरी 2002 – 1.83 वर्ग किमी
- कोल्लेरू झील – आंध्र प्रदेश – अगस्त 2002 – 901 वर्ग किमी
- प्वाइंट कैलिमेरे वन्यजीव और पक्षी अभयारण्य – तमिलनाडु – अगस्त 2002 – 385 वर्ग किमी
- पोंग बांध झील – हिमाचल प्रदेश – अगस्त 2002 – 156.62 वर्ग किमी
- रोपड़ आर्द्रभूमि – पंजाब – जनवरी 2002 – 13.65 वर्ग किमी
- त्सोमोरिरि – लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश – अगस्त 2002 – 120 वर्ग किमी
- वेम्बनाड-कोल आर्द्रभूमि – केरल – अगस्त 2002 – 1512.5 वर्ग किमी
- सस्थमकोट्टा झील – केरल – अगस्त 2002 – 3.73 वर्ग किमी
- वुलर झील – जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश – मार्च 1990 – 189 वर्ग किमी
- हरिके आर्द्रभूमि – पंजाब – मार्च 1990 – 41 वर्ग किमी
- लोकटक झील – मणिपुर – मार्च 1990 – 266 वर्ग किमी
- सांभर झील – राजस्थान – मार्च 1990 – 240 वर्ग किमी
- चिलिका झील – ओडिशा – अक्टूबर 1981 – 1165 वर्ग किमी
- केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान – राजस्थान – अक्टूबर 1981 – 28.73 वर्ग किमी
- गोगबील झील – बिहार (कटिहार क्षेत्र) – नवंबर 2025 – 0.8663 वर्ग किमी
- सिलिसरह झील – अलवर, राजस्थान – दिसंबर 2025 – 7 वर्ग किमी
- कोपरा जलाशय – बिलासपुर, छत्तीसगढ़ – दिसंबर 2025 – 7 वर्ग किमी
- पटना पक्षी अभयारण्य – उत्तर प्रदेश (एटा जिला) – फरवरी 2026 – 1.09 वर्ग किमी
- छारी-ढांड – गुजरात (कच्छ जिला) – फरवरी 2026 – 227 वर्ग किमी
- 'शेखा झील पक्षी अभ्यारण्य' – अप्रैल 2026









