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Wed 03 Jun, 2026

राष्‍ट्रीय समाचार

'अगस्त्यमलाई पारिस्थितिकी परिदृश्य'

  • सर्वोच्च न्यायालय ने 'अगस्त्यमलाई पारिस्थितिकी परिदृश्य' के संरक्षित क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) ने जुलाई 2025 की अपनी अंतरिम रिपोर्ट में बताया है कि अगस्त्यमलाई पारिस्थितिक परिदृश्य 3,500.36 वर्ग किलोमीटर में फैला है।
  • जिले में आरक्षित वनों में कुल 4,601 अतिक्रमणकारियों ने 5,072.653 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा कर लिया है और अब तक कुल अतिक्रमित वन भूमि का केवल 1.8 प्रतिशत ही पुनः प्राप्त किया जा सका है।
  • अतिक्रमणकारियों के रूप में सूचीबद्ध 118 व्यक्तियों की पहचान सेवारत या सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों के रूप में की गई है।
  • इनमें सेना, पुलिस, सीआरपीएफ, वन विभाग, राजस्व विभाग, बिजली बोर्ड, आंगनवाड़ी, स्कूल शिक्षा, पंचायत, सर्वेक्षण विभाग और अन्य सेवाओं के कर्मी शामिल हैं।

अगस्त्यमलाई पारिस्थितिकी परिदृश्य :

  • विस्तार: दक्षिणी भाग में पश्चिमी घाट के अंतर्गत
  • राज्य: परिदृश्य तमिलनाडु (तिरुनेलवेली, कन्याकुमारी, मेघमलाई) और केरल (तिरुवनंतपुरम, कोल्लम) राज्यों में
  • नामकरण: प्रसिद्ध हिंदू ऋषि अगस्त्य के नाम पर
  • सबसे ऊंची चोटी : अगस्त्यमलाई चोटी (1,868 मीटर)
  • स्वदेशी जनजातियाँ : यह क्षेत्र मुख्य रूप से काणी (Kani) जनजाति का निवास स्थान है।

प्रमुख संरक्षित क्षेत्र :

  • केरल में: नेय्यार, पेप्पारा, और शेन्दुर्नी वन्यजीव अभयारण्य
  • तमिलनाडु में: कलक्कड़-मुंडनथुराई टाइगर रिजर्व (KMTR), पेरियार टाइगर रिजर्व का हिस्सा, श्रीविल्लिपुथुर धारीदार विशाल गिलहरी वन्यजीव अभयारण्य, मेघमलाई वन्यजीव अभयारण्य और तिरुनेलवेली वन्यजीव अभयारण्य।

लद्दाख में 15 CFC का उद्घाटन

  • लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने केंद्र शासित प्रदेश में 15 साझा सुविधा केंद्रों (Common Facility Centres : CFC) का उद्घाटन और लोकार्पण किया।
  • इनका उद्देश्य सूक्ष्म उद्यमों को मजबूत करना, महिलाओं और युवाओं के लिए उनके अपने गांवों में आजीविका के अवसर पैदा करना और पलायन को कम करने में मदद करना है।
  • नए स्थापित केंद्र स्कर्बुचन, वानला, ससपोल, चुचोट, खारू, अनले, कोयुल, कोरज़ोक, चुशुल, फोब्रांग, सातो, पनामिक, डिस्किट, टर्टुक और डिगर में स्थित हैं।

लद्दाख :

  • इसे ऊंचे दर्रों की भूमि कहा जाता है
  • भारत का सबसे उत्तर में स्थित और क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा केंद्र शासित प्रदेशकेंद्र शासित प्रदेश बना : 31 अक्टूबर 2019 को
  • राजधानी: लेह लद्दाख की राजधानी और सबसे बड़ा शहर है।
  • सीमाएं: यह पूर्व में तिब्बत (चीन), दक्षिण में हिमाचल प्रदेश, और पश्चिम में जम्मू-कश्मीर से घिरा है।
  • प्रशासन: यहाँ का प्रशासन उपराज्यपाल (Lieutenant Governor) द्वारा चलाया जाता है। वर्तमान में विनय कुमार सक्सेना यहाँ के उपराज्यपाल हैं।
  • झीलें: पैंगोंग त्सो (Pangong Tso) और त्सो मोरीरी (Tso Moriri) अपनी सुंदरता और बदलते रंगों के लिए जानी जाती हैं।
  • घाटियां: नुब्रा घाटी (Nubra Valley) अपने दो कूबड़ वाले ऊंटों और रेत के टीलों के लिए प्रसिद्ध है。
  • सांस्कृतिक विरासत: लेह पैलेस, शांति स्तूप, और प्रसिद्ध बौद्ध मठ जैसे हेमिस, थिकसे और अलची यहाँ के प्रमुख केंद्र हैं।
  • खगोल विज्ञान: हानले (Hanle) में स्थित डार्क स्काई रिज़र्व खगोलीय अवलोकन के लिए दुनिया के सबसे ऊंचे स्थलों में से एक है।
  • प्रमुख त्योहार: हेमिस त्सेचु (Hemis Tsechu), लोसार (Losar - तिब्बती नव वर्ष), और सिन्धु दर्शन उत्सव यहाँ के मुख्य आकर्षण हैं।
  • स्थानीय व्यंजन: यहाँ थुकपा (Thukpa), मोमोज, और स्थानीय नमकीन चाय जिसे नून चाय या गुड़-गुड़ चाय (बटर टी) कहा जाता है, बहुत लोकप्रिय हैं।
  • भाषा: यहाँ मुख्य रूप से लद्दाखी, भोटी, पुरगी और हिंदी बोली जाती है।
  • प्रथम पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क: 19 अप्रैल 2026 को लेह के सिंधु घाट पर भारत के पहले पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क (Petroglyph Conservation Park) की आधारशिला रखी गई है। इसका उद्देश्य सदियों पुरानी चट्टानों पर की गई नक्काशी को सुरक्षित करना है।
  • शोक सुरंग (Shyok Tunnel): दिसंबर 2025 में दरबुक-शोक-दौलत बेग ओल्डी रोड पर 920 मीटर लंबी शोक सुरंग का उद्घाटन किया गया, जो रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • विश्व की सबसे ऊँची सड़क: लद्दाख में उमलिंग ला (Umling La) दर्रे पर 19,300 फीट की ऊँचाई पर दुनिया की सबसे ऊँची मोटर-गाड़ी चलाने योग्य सड़क स्थित है।
  • पर्वत श्रृंखलाएं: लद्दाख काराकोरम, लद्दाख श्रृंखला, जांस्कर और महान हिमालय पर्वतमालाओं के बीच स्थित है। यहाँ की सबसे ऊँची चोटी साल्टोरो कांगड़ी (7,742 मीटर) है।
  • नदियाँ: सिंधु नदी यहाँ की मुख्य जीवनरेखा है। इसके अलावा शोक, नुब्रा, जांस्कर और सुरु नदियाँ भी प्रमुख हैं

जल शक्ति मंत्रालय और ISRO के बीच समझौता

  • जल शक्ति मंत्रालय और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने देश में जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और निगरानी के लिए उपग्रह प्रौद्योगिकी के उपयोग को मजबूत करने हेतु एक महत्वपूर्ण समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर किया।
  • समझौते के तहत जल संसाधन विभाग और इसरो 24 प्रमुख अनुसंधान क्षेत्रों में संयुक्त रूप से काम करेंगे।
  • इनमें प्रमुख रूप से जलाशय निगरानी, ​​जल-प्रसार आकलन, नदी-प्रवाह विश्लेषण, उपग्रह-आधारित जल गुणवत्ता आकलन और जल निकायों में प्लास्टिक के कचरे के अत्यधिक मात्रा में फैलने पर अध्ययन शामिल है।
  • ISRO और जल संसाधन क्षेत्र के बीच यह तकनीकी सहयोग नया नहीं है, बल्कि दोनों संगठनों के बीच साझेदारी का यह सिलसिला वर्ष 1982 से चला आ रहा है।

जल संचय जन भागीदारी (JSJB) अभियान - चरण 3:

  • केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल द्वारा इस अभियान के तीसरे चरण का शुभारंभ किया गया.
  • लक्ष्य: जून 2026 से मई 2027 के बीच देश भर में दो करोड़ जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण करना सुनिश्चित किया गया है.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO):

  • भारत की राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी है, जो अंतरिक्ष विभाग (Department of Space : DOS) के तहत काम करती है और सीधे प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करती है
  • स्थापना: 15 अगस्त 1969
  • जनक: डॉ. विक्रम साराभाई (इन्हें भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक कहा जाता है)
  • मुख्यालय: बेंगलुरु, कर्नाटक
  • पूर्ववर्ती संस्था: इसरो से पहले 1962 में INCOSPAR (भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति) का गठन हुआ था
  • प्रथम भारतीय उपग्रह: आर्यभट्ट (19 अप्रैल 1975 को सोवियत संघ के रॉकेट द्वारा प्रक्षेपित)
  • भारत की भूमि से छोड़ा गया पहला उपग्रह: रोहिणी (RS-1) (1980 में भारत के पहले स्वदेशी रॉकेट SLV-3 द्वारा लॉन्च)
  • प्रथम भारतीय अंतरिक्ष यात्री: राकेश शर्मा (3 अप्रैल 1984 को सोवियत संघ के 'सोयुज टी-11' मिशन से अंतरिक्ष में गए)

‘मिशन स्नेहजोरी’ का शुभारंभ

  • पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने असम के मूगा रेशम के लिए ‘मिशन स्नेहजोरी’ का शुभारंभ किया।
  • यह पहल असम के विशिष्ट मूगा रेशम उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और उच्च मूल्य वाले वस्त्र क्षेत्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से शुरू की गई है।

मूगा रेशम :

  • मुख्य रूप से भारत के असम राज्य में उत्पादित होने वाला दुनिया का सबसे दुर्लभ और कीमती जंगली रेशम
  • वर्ष 2007 में असम राज्य के लिए भौगोलिक संकेतक का दर्जा दिया गया
  • असम का एकाधिकार: विश्व के कुल मूगा रेशम उत्पादन का 90-95% से अधिक हिस्सा अकेले असम की ब्रह्मपुत्र घाटी में उत्पादित होता है
  • खाद्य पौधे: मूगा रेशम के कीड़े मुख्य रूप से सोम (Som) और सोआलू (Soalu) पौधों की सुगंधित पत्तियों को खाते हैं

भारत में रेशम की अन्य किस्में :

  • मलबरी / शहतूत : भारत के कुल रेशम उत्पादन का लगभग 70-80% हिस्सा; 'बॉम्बेक्स मोरी' कीट द्वारा उत्पादित.
  • मुख्य उत्पादक राज्य : कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल.
  • उष्णकटिबंधीय टसर : 'एंथेरिया माइलिट्टा' कीट द्वारा; अर्जुन और आसन के पेड़ों पर पाला जाता है.
  • मुख्य उत्पादक राज्य : झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा.
  • ओक टसर : उप-हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाने वाला जंगली रेशम.
  • मुख्य उत्पादक राज्य : मणिपुर, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर.
  • एरी (Eri) : इसे 'अहिंसा रेशम' भी कहते हैं क्योंकि इसमें धागा निकालने के लिए प्यूपा को मारा नहीं जाता. यह अरंडी (Castor) की पत्तियां खाता है.
  • असम, मेघालय (पूर्वोत्तर भारत)
  • मूगा :प्राकृतिक सुनहरा-पीला रंग; विशेष रूप से भारत (असम) के लिए विशिष्ट.
  • असम (एकमात्र प्रमुख उत्पादक).

'भूल जाने के अधिकार'

  • दिल्ली हाईकोर्ट ने जून 2026 में एक ऐतिहासिक फैसले के तहत 'भूल जाने के अधिकार' (Right to be Forgotten - RTBF) को संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत निजता के अधिकार (Right to Privacy) का एक अभिन्न हिस्सा माना।
  • न्यायालय ने स्पष्ट किया कि निरंतर डिजिटल मौजूदगी से किसी व्यक्ति की गरिमा और प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति पहुँच सकती है।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • संवैधानिक मान्यता: अदालत ने कहा कि 'भूल जाने का अधिकार' मूल रूप से अनुच्छेद 21 के तहत मिलने वाली 'सूचनात्मक निजता' से ही उपजा है।
  • डी-इंडेक्सिंग बनाम विलोपन : कोर्ट ने इंटरनेट से डेटा को पूरी तरह हटाने और सर्च इंजन के खोज परिणामों से लिंक हटाने के बीच अंतर स्पष्ट किया

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और न्यायिक विकास :

  • आर. राजगोपाल बनाम तमिलनाडु राज्य (1994): सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि नागरिकों को अपने निजी जीवन को अनुचित सार्वजनिक प्रकटीकरण से बचाने का अधिकार है।
  • के. एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ (2017): 9 न्यायाधीशों की पीठ ने निजता के अधिकार को अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार घोषित किया। इसी फैसले में जस्टिस संजय किशन कौल ने डिजिटल डेटा को हटाने या सिस्टम से गायब करने के अधिकार (सूचनात्मक स्वायत्तता) का समर्थन किया था।
  • जोरावर सिंह मुंडी बनाम भारत संघ (2021): दिल्ली हाईकोर्ट ने एक बरी हो चुके व्यक्ति के अदालती आदेश को Google से डी-इंडेक्स करने की अनुमति दी थी।

इस अधिकार को यूरोपीय संघ के न्यायालय (CJEU) द्वारा वर्ष 2014 के 'गूगल स्पेन' मामले में मान्यता प्रदान की

अर्थव्‍यवस्‍था तथा बैंकिंग

‘प्रोजेक्ट शिखर’

  • ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म मीशो और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) ने मिलकर ‘प्रोजेक्ट शिखर’ नामक नई पहल की शुरुआत की है।
  • यह प्रोजेक्ट सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) और ई-कॉमर्स विक्रेताओं को बीएसई के SME प्लेटफॉर्म पर सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध (लिस्ट) होने में मदद करेगा।

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) :

  • स्थापना: जुलाई 1875
  • नाम : 'द नेटिव शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स एसोसिएशन' (शुरुआती नाम)
  • स्थान : मुंबई (मुंबई का दलाल स्ट्रीट)
  • एशिया का सबसे पुराना : यह एशिया का सबसे पहला और दुनिया का 10वां सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज है
  • इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग : BSE ने 1995 में ओपन आउटक्राई सिस्टम को बंद करके पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग सिस्टम (BSE On-line Trading System - BOLT) अपनाया
  • आधार वर्ष और मूल्य: इसका आधार वर्ष 1978-79 है और इसका आधार मूल्य (Base Value) 100 है
  • नियामक (Regulator): BSE, भारत में अन्य सभी स्टॉक एक्सचेंजों की तरह, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के नियमों और नियंत्रण के तहत काम करता है

थोक मूल्य सूचकांक की जगह PPI प्रणाली

  • केन्‍द्र सरकार ने अगले 5 वर्षों में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने और उसके स्थान पर अधिक व्यापक उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) प्रणाली लागू करने का बड़ा निर्णय लिया है।
  • यह निर्णय देश के मुद्रास्फीति और मूल्य निर्धारण डेटा संरचना को आधुनिक बनाने और इसे वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप बनाने के लिए लिया गया है।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • नया आधार वर्ष (Base Year Revision): वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा 15 जून से WPI का आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया जाएगा और इसी आधार वर्ष पर नया PPI ढांचा भी पेश किया जाएगा
  • वस्तुओं की टोकरी का विस्तार: नए WPI बास्केट में मदों (Items) की संख्या 697 से बढ़ाकर 957 कर दी गई है। इसमें सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और परमाणु बिजली जैसे नए उभरते क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है।

अंतर्राष्‍ट्रीय समाचार

भारतीय नागरिकों के लिए ट्रांजिट वीजा की आवश्यकता समाप्त : जर्मनी

  • जर्मनी ने 3 जून 2026 से भारतीय नागरिकों के लिए 'एयरपोर्ट ट्रांजिट वीजा' की अनिवार्यता को पूरी तरह समाप्त किया।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • यह निर्णय जर्मनी के आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशन के बाद प्रभावी हुआ है, जिसके तहत अब भारतीय पासपोर्ट धारक किसी तीसरे (गैर-शेंगेन) देश की यात्रा के दौरान जर्मन हवाई अड्डों पर बिना ट्रांजिट वीजा के कनेक्टिंग फ्लाइट्स ले सकते हैं।
  • इससे पहले, यदि कोई भारतीय नागरिक जर्मनी (जैसे फ्रैंकफर्ट या म्यूनिख) के रास्ते अमेरिका, कनाडा या किसी अन्य गैर-शेंगेन देश जा रहा था, तो उसे जर्मन हवाई अड्डे के अंतर्राष्ट्रीय ट्रांजिट क्षेत्र में रहने के लिए भी एयरपोर्ट ट्रांजिट वीजा (ATV) की आवश्यकता होती थी। केवल उन भारतीयों को छूट थी जिनके पास पहले से अमेरिका, कनाडा या यूरोपीय संघ का वैध वीजा/निवास परमिट था।
  • इस ऐतिहासिक छूट की नींव जनवरी 2026 में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की भारत यात्रा के दौरान रखी गई थी, जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय चर्चा में इस पर सहमति बनी थी।

जर्मनी :

  • राजधानी: बर्लिन
  • भूगोलोकीय स्थिति: यह मध्य यूरोप में स्थित है। इसके उत्तर में उत्तर सागर (North Sea), डेनमार्क और बाल्टिक सागर हैं; पूर्व में पोलैंड और चेक गणराज्य; दक्षिण में ऑस्ट्रिया और स्विट्जरलैंड; और पश्चिम में फ्रांस, लक्ज़मबर्ग, बेल्जियम और नीदरलैंड स्थित हैं। जर्मनी कुल 9 देशों के साथ अपनी सीमाएं साझा करता है।
  • प्रमुख नदियां: राइन, डैन्यूब, और एल्बे
  • मुद्रा: यूरो

संसद : जर्मनी की विधायिका द्विसदनीय है:

  • बुंडेस्टाग : निचला सदन (इसके सदस्य सीधे जनता द्वारा चुने जाते हैं)
  • बुंडेसरात: उच्च सदन (इसमें राज्यों की सरकारों के प्रतिनिधि होते हैं)

रिर्पोट एवं सूचकांक

'भारतीय तटीय क्षेत्र: जलवायु पूर्वानुमान 2021-2040'

  • अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय द्वारा जारी 'भारतीय तटीय क्षेत्र: जलवायु पूर्वानुमान 2021-2040' नामक हालिया रिपोर्ट में भारत की 11,000 किलोमीटर लंबी तटरेखा (द्वीप क्षेत्रों सहित) पर गंभीर, अति-स्थानीय (Hyper-local) जलवायु संकट की चेतावनी दी गई है।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • वर्ष 2040 तक, गुजरात और महाराष्ट्र के तटीय जिलों में दक्षिण-पश्चिम मानसून (SWM) के मौसम (जून से सितंबर) में ऐतिहासिक स्तरों की तुलना में काफी अधिक औसत वर्षा होगी।
  • गुजरात के विशाल खारे दलदली रेगिस्तान कच्छ में, 2040 तक खारे दलदली मौसम में औसत वर्षा में 31 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है
  • पूर्वी भारत के तटीय क्षेत्रों, जिनमें सुंदरबन भी शामिल है, में दक्षिण-पश्चिमी मानसून के मौसम में औसत वर्षा में कमी आने का अनुमान है
  • तटीय तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश, जहां आमतौर पर उत्तर-पूर्वी मानसून के मौसम (अक्टूबर से दिसंबर) में अधिक वर्षा होती है, वहां दक्षिण-पश्चिमी मानसून के मौसम में अतिरिक्त वर्षा होने की संभावना है।
  • केरल के एर्नाकुलम जिले में गर्मियों के औसत तापमान में सबसे अधिक 1.3 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होने का अनुमान है
  • पूर्वी तट पर, तमिलनाडु में तिरुनेलवेली और ओडिशा में खुर्दा में गर्मियों के अधिकतम (औसत) तापमान में 1.1 डिग्री सेल्सियस की अधिकतम वृद्धि होने का अनुमान है

रक्षा समाचार

'रुद्रम-2' मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण

  • रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और भारतीय वायुसेना (IAF) ने स्वदेश निर्मित हवा से जमीन पर मार करने वाली 'रुद्रम-2' (Rudram-II) मिसाइल का सफलतापूर्वक उड़ान परीक्षण किया ।
  • इस मिसाइल को ओडिशा के तट पर स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम रेंज से सुखोई-30 एमकेआई (Su-30 MKI) लड़ाकू विमान से दागा गया था।

रुद्रम-II मिसाइल:

 

 

  • मिसाइल का प्रकार: यह भारत की अगली पीढ़ी की एंटी-रेडिएशन मिसाइल और हवा से सतह पर मार करने वाली गाइडेड मिसाइल है
  • विकासकर्ता: इसे मुख्य रूप से अनुसंधान केंद्र इमारत (RCI), हैदराबाद (नोडल डीआरडीओ प्रयोगशाला) द्वारा अन्य सहयोगी प्रयोगशालाओं और रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों (जैसे HAL) के साथ मिलकर विकसित किया गया है.
  • मारक क्षमता : यह मिसाइल लगभग 300 किलोमीटर की दूरी तक दुश्मन के ठिकानों को तबाह कर सकती है.
  • अधिकतम गति: यह एक हाइपरसोनिक/सुपरसोनिक श्रेणी की मिसाइल है, जो मैक 5.5 (Mach 5.5) की शीर्ष गति प्राप्त कर सकती है.
  • पेलोड क्षमता: यह अपने साथ लगभग 200 किलोग्राम तक का वॉरहेड (हथियार) ले जाने में सक्षम है.
  • लॉन्च प्लेटफॉर्म: इसे सुखोई जैसे लड़ाकू विमानों से 3 से 15 किलोमीटर की ऊंचाई से दागा जा सकता है.
  • नेविगेशन प्रणाली: इसमें एक हाइब्रिड नेविगेशन सिस्टम का उपयोग किया गया है, जिसमें इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (INS), जीपीएस (GPS) और एक अत्याधुनिक पैसिव होमिंग हेड (PHH) शामिल है.

 

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