26 May, 2026
सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत की रणनीतिक रूपरेखा
Sat 30 May, 2026
हाल ही में नीति आयोग (NITI Aayog) ने “Future of India’s Semiconductor Industry” शीर्षक से एक व्यापक 10-वर्षीय रोडमैप रिपोर्ट जारी की, जिसका उद्देश्य भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र (Semiconductor Ecosystem) में एक प्रमुख शक्ति के रूप में स्थापित करना है। इस रोडमैप का विमोचन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण तथा केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा किया गया। इसका लक्ष्य वर्ष 2035 तक 120–150 अरब अमेरिकी डॉलर की घरेलू सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखला (Value Chain) विकसित करना है।
यह रोडमैप हाल ही में प्रारम्भ इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 का विस्तार है, जिसके अंतर्गत 2-नैनोमीटर (2nm) तक की उन्नत तकनीक, पूर्ण भारतीय बौद्धिक संपदा (IP) तथा एंड-टू-एंड सेमीकंडक्टर विनिर्माण क्षमता विकसित करने को प्राथमिकता दी गई है।
पृष्ठभूमि (Background)
- सेमीकंडक्टर आधुनिक प्रौद्योगिकी की “मस्तिष्क शक्ति” (Brains of Modern Technology) माने जाते हैं। स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक वाहन (EVs), रक्षा उपकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), दूरसंचार नेटवर्क, नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियाँ तथा औद्योगिक स्वचालन (Industrial Automation) इन पर निर्भर हैं।
- कोविड-19 महामारी के दौरान वैश्विक आपूर्ति शृंखला (Supply Chain) में व्यवधान तथा अमेरिका-चीन तकनीकी प्रतिस्पर्धा ने यह स्पष्ट किया कि सेमीकंडक्टर उत्पादन कुछ सीमित देशों—जैसे ताइवान, दक्षिण कोरिया, अमेरिका, जापान एवं चीन—पर अत्यधिक निर्भर है। इससे तकनीकी आत्मनिर्भरता (Technological Sovereignty) एवं राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए घरेलू विनिर्माण की आवश्यकता बढ़ी।
- भारत, विश्वस्तरीय चिप डिज़ाइन प्रतिभा होने के बावजूद, अब भी सेमीकंडक्टर आयात पर अत्यधिक निर्भर है। इसलिए यह रोडमैप भारत को केवल उपभोक्ता राष्ट्र से वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखला का अनिवार्य (Indispensable) भागीदार बनाने का प्रयास करता है।
रोडमैप की प्रमुख विशेषताएँ (Key Highlights of the Roadmap)
1. महत्वाकांक्षी आर्थिक लक्ष्य
रोडमैप ने वर्ष 2035 तक निम्नलिखित प्रमुख लक्ष्य निर्धारित किए हैं—
- 120–150 अरब अमेरिकी डॉलर का घरेलू सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना।
- वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार में 10–13% हिस्सेदारी प्राप्त करना।
- घरेलू चिप मांग में 35–50% आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करना।
2. निवेश संरचना एवं वित्तीय मॉडल
रिपोर्ट के अनुसार अगले दशक में सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र के विस्तार हेतु लगभग 135–180 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की आवश्यकता होगी।
इसके लिए एक “सेमीकंडक्टर सपोर्ट फंड” स्थापित करने का प्रस्ताव दिया गया है, जिसमें केंद्र सरकार 45–60 अरब अमेरिकी डॉलर की एंकर पूंजी (Anchor Capital) निवेश करेगी। इसका उद्देश्य दीर्घकालिक परियोजनाओं में जोखिम कम करना तथा निजी निवेशकों का विश्वास बढ़ाना है।
3. तकनीकी प्राथमिकताएँ (Technology Focus Areas)
(क) उन्नत पैकेजिंग एवं परीक्षण (Advanced Packaging & Testing)
भारत Outsourced Semiconductor Assembly and Testing (OSAT) तथा उन्नत पैकेजिंग प्रौद्योगिकी में वैश्विक नेतृत्व स्थापित करने का लक्ष्य रखता है।
(ख) कंपाउंड सेमीकंडक्टर एवं वाइड-बैंडगैप सामग्री
रोडमैप में सिलिकॉन कार्बाइड (SiC) एवं गैलियम नाइट्राइड (GaN) जैसे पदार्थों पर विशेष बल दिया गया है, जो निम्न क्षेत्रों के लिए महत्त्वपूर्ण हैं—
- इलेक्ट्रिक वाहन (EV)
- नवीकरणीय ऊर्जा
- पावर इलेक्ट्रॉनिक्स
- 5G एवं 6G संचार तकनीक
(ग) AI-आधारित चिप डिज़ाइन
घरेलू चिप डिज़ाइन कंपनियों को प्रोत्साहित कर स्वदेशी बौद्धिक संपदा (IP) विकसित करने पर बल दिया गया है। साथ ही, AI-संचालित Electronic Design Automation (EDA) उपकरणों के उपयोग को बढ़ावा देने की अनुशंसा की गई है।
4. मानव संसाधन विकास
रोडमैप एक मानकीकृत सेमीकंडक्टर कौशल ढाँचे की वकालत करता है, जिसमें—
- क्लीनरूम तकनीशियन प्रशिक्षण
- चिप डिज़ाइन इंजीनियरिंग शिक्षा
- उन्नत अनुसंधान एवं विकास (R&D)
- राष्ट्रीय फैब अकादमी (National Fab Academy) की स्थापना शामिल है।
5. रणनीतिक वैश्विक साझेदारी
भारत को अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया एवं यूरोपीय संघ (EU) जैसे विश्वसनीय साझेदारों के साथ तकनीकी सहयोग बढ़ाने की सलाह दी गई है, जिससे आपूर्ति शृंखला लचीलापन एवं तकनीकी हस्तांतरण सुनिश्चित हो सके।
महत्त्व (Significance)
1. तकनीकी संप्रभुता (Technological Sovereignty)
सेमीकंडक्टर राष्ट्रीय सुरक्षा, साइबर अवसंरचना एवं डिजिटल शासन का आधार बन चुके हैं। घरेलू उत्पादन आयात निर्भरता कम करेगा।
2. आर्थिक विकास एवं रोजगार
यह पारिस्थितिकी तंत्र उच्च-कौशल आधारित रोजगार सृजन करेगा, जैसे—
- चिप डिज़ाइन इंजीनियरिंग
- विनिर्माण एवं अनुसंधान
- AI एवं इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र
3. आत्मनिर्भर भारत एवं मेक इन इंडिया को बल
यह रोडमैप डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) तथा विकसित भारत 2047 जैसी पहलों को सुदृढ़ करता है।
4. वैश्विक आपूर्ति शृंखला विविधीकरण
भारत China+1 Strategy के अंतर्गत एक विश्वसनीय विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर सकता है।
चुनौतियाँ (Challenges)
- उच्च पूंजी लागत: सेमीकंडक्टर उद्योग अत्यधिक निवेश-आधारित है।
- अवसंरचनात्मक सीमाएँ: निरंतर बिजली, शुद्ध जल, लॉजिस्टिक्स एवं क्लीनरूम सुविधाओं की कमी।
- तकनीकी निर्भरता: उन्नत मशीनरी एवं पेटेंट कुछ देशों तक सीमित।
- कौशल अंतराल: विशेषज्ञ इंजीनियरों एवं तकनीकी मानव संसाधन की कमी।
- वैश्विक प्रतिस्पर्धा: ताइवान, दक्षिण कोरिया एवं चीन पहले से अग्रणी स्थिति में हैं।
सरकारी पहलें (Government Initiatives)
- India Semiconductor Mission (ISM) 2.0
- Production Linked Incentive (PLI) Scheme
- Design Linked Incentive (DLI) Scheme
- गुजरात एवं ओडिशा जैसे राज्यों में सेमीकंडक्टर एवं पैकेजिंग परियोजनाओं को स्वीकृति।
आगे की राह (Way Forward)
भारत को अत्यधिक महँगी उन्नत फैब्रिकेशन प्रतिस्पर्धा में अंधाधुंध प्रवेश करने के बजाय रणनीतिक विशिष्ट क्षेत्रों (Strategic Niches) में नेतृत्व विकसित करना चाहिए। इसके लिए—
- राष्ट्रीय सेमीकंडक्टर क्षेत्र (National Semiconductor Zones) की स्थापना
- उद्योग–शिक्षा संस्थान सहयोग को मजबूत करना
- घरेलू अनुसंधान एवं विकास (R&D) को प्रोत्साहन
- रक्षा, रेलवे एवं दूरसंचार क्षेत्रों में घरेलू खरीद (Domestic Procurement) बढ़ाना
- मानव संसाधन विकास हेतु कौशल प्रशिक्षण को बढ़ावा देना आवश्यक है।
निष्कर्ष (Conclusion)
- “Future of India’s Semiconductor Industry” रोडमैप भारत को सेमीकंडक्टर निर्भरता से सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता की ओर ले जाने वाली एक रणनीतिक पहल है। उन्नत पैकेजिंग, कंपाउंड सेमीकंडक्टर, AI-आधारित चिप डिज़ाइन तथा वैश्विक साझेदारियों पर बल देकर भारत न केवल वैश्विक चिप आपूर्ति शृंखला में अपनी उपस्थिति मजबूत कर सकता है, बल्कि तकनीकी संप्रभुता, आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता तथा राष्ट्रीय सुरक्षा को भी सुदृढ़ कर सकता है।









