BHAVYA योजना के लिए परिचालन दिशानिर्देश जारी
 
  • Mobile Menu
HOME BUY MAGAZINEnew course icon
LOG IN SIGN UP

Sign-Up IcanDon't Have an Account?


SIGN UP

 

Login Icon

Have an Account?


LOG IN
 

or
By clicking on Register, you are agreeing to our Terms & Conditions.
 
 
 

or
 
 




BHAVYA योजना के लिए परिचालन दिशानिर्देश जारी

Wed 27 May, 2026

संदर्भ :

  • वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) ने देश में 'प्लग-एंड-प्ले' औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए 'भव्य' (BHAVYA) के कार्यान्वयन हेतु विस्तृत परिचालन दिशानिर्देश जारी किया।

मुख्‍य बिन्‍दु :

  • BHAVYA योजना का पूरा नाम : 'भारत औद्योगिक विकास योजना'/Bharat Industrial Development Scheme
  • योजना का प्रकार: यह एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना
  • उद्देश्य: देश विश्व स्तरीय, निवेश के लिए तैयार और 'प्लग-एंड-प्ले' (तुरंत परिचालन योग्य) औद्योगिक पार्कों का विकास करना, ताकि वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में भारत की स्थिति मजबूत हो सके
  • बजटीय परिव्यय: इस योजना के लिए ₹33,660 करोड़ का कुल वित्तीय आवंटन किया गया है
  • समयसीमा: वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2031-32 तक (6 वर्ष की कार्यान्वयन अवधि)
  • लक्ष्य: भारत में 100 नए औद्योगिक पार्क/स्मार्ट शहर स्थापित किए जाएंगे, जिसमें से पहले चरण में 'चैलेंज मोड' के जरिए 50 पार्कों का चयन किया जाएगा
  • परियोजना प्रबंधन एजेंसी (PMA):राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम ( NICDC)
  • कार्यान्वयन मॉडल: प्रत्येक परियोजना के लिए विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) और PPP मॉडल के माध्यम से निजी क्षेत्र की भागीदारी
  • निगरानी: DPIIT सचिव की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा ऑडिट

भूमि एवं पात्रता मानदंड :

  • ग्रीनफील्ड/ब्राउनफील्ड: दोनों प्रकार की परियोजनाओं हेतु
  • क्षेत्रफल की आवश्यकता: सामान्य राज्यों के लिए 100 एकड़ और पर्वतीय/पूर्वोत्तर/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 25 एकड़ की न्यूनतम निरंतर भूमि
  • मैक्रो-क्लस्टर: अधिकतम 1,000 एकड़ तक के पार्क

वित्तीय सहायता और सब्सिडी संरचना :

  • आंतरिक बुनियादी ढांचा: ₹1 करोड़ प्रति एकड़ तक की सहायता (सड़क, बिजली, अपशिष्ट उपचार)
  • कनेक्टिविटी: परियोजना लागत का 25% तक बाहरी बुनियादी ढांचा समर्थन

वित्तीय सहायता मॉडल :

  • आंतरिक बुनियादी ढांचा: मुख्य (Core), मूल्यवर्धित (Value-added), और सामाजिक अवसंरचना के विकास के लिए प्रति एकड़ ₹1 करोड़ तक की केंद्रीय सहायता दी जाएगी।
  • बाहरी कनेक्टिविटी: पार्क को बाहरी राजमार्गों, रेलवे, बंदरगाहों आदि से जोड़ने के लिए कुल परियोजना लागत का 25% तक वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
  • मोड: वित्तीय सहायता विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) में इक्विटी योगदान के रूप में दी जाएगी, जो भूमि हस्तांतरण और परियोजना के मील के पत्थरों (Milestones) से जुड़ी होगी

कार्यान्वयन और निगरानी संस्थाएं :

  • कार्यान्वयन मॉडल: परियोजनाओं का प्रबंधन कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत विशेष प्रयोजन वाहनों (SPV) के माध्यम से किया जाएगा, जिसमें निजी डेवलपर्स भी भाग ले सकते हैं।
  • परियोजना प्रबंधन एजेंसी (PMA): राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास निगम (NICDC) को क्रियान्वयन और निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
  • शीर्ष निरीक्षण: DPIIT सचिव की अध्यक्षता में एक राष्ट्रीय स्तर की संचालन समिति इसकी देखरेख करेगी।
  • तकनीकी निगरानी: पारदर्शिता के लिए GIS-आधारित डिजिटल प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग और उपग्रह ट्रैकिंग का उपयोग होगा

Latest Courses