NPT के पक्षकारों का 11वां समीक्षा सम्मेलन
 
  • Mobile Menu
HOME BUY MAGAZINEnew course icon
LOG IN SIGN UP

Sign-Up IcanDon't Have an Account?


SIGN UP

 

Login Icon

Have an Account?


LOG IN
 

or
By clicking on Register, you are agreeing to our Terms & Conditions.
 
 
 

or
 
 




NPT के पक्षकारों का 11वां समीक्षा सम्मेलन

Tue 26 May, 2026

संदर्भ :

  • ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमरीका, इस्रराएल और ईरान के बीच बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच परमाणु हथियार अप्रसार संधि (NPT) के पक्षकारों का 11वां समीक्षा सम्मेलन बिना किसी सर्वसम्मत परिणामी दस्तावेज़ के समाप्त हुआ।

मुख्‍य बिन्‍दु :

  • 11वें समीक्षा सम्मेलन का आयोजन 27 अप्रैल से 22 मई तक संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में किया गया।
  • सम्मेलन के अध्यक्ष और संयुक्त राष्ट्र में वियतनाम के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत डो हुंग वियत ने इस पर निराशा व्यक्त करते हुए संधि के “भविष्य और प्रभावशीलता” को लेकर चिंता जताई।
  • संयुक्त राष्ट्र (UN) मुख्यालय, न्यूयॉर्क में आयोजित यह बैठक पिछले 16 वर्षों में लगातार तीसरी बार बिना किसी अंतिम समझौते के विफल हुई है (इससे पहले 2015 और 2022 के सम्मेलन भी विफल रहे थे)

11वें समीक्षा सम्मेलन की विफलता के मुख्य कारण :

  • परमाणु शस्त्रागार का आधुनिकीकरण: गैर-परमाणु संपन्न देशों (NNWS) का आरोप है कि P5 देश (अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस) निरस्त्रीकरण के बजाय अपने परमाणु हथियारों के आधुनिकीकरण और विस्तार पर ध्यान दे रहे हैं।
  • भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान टकराव: सम्मेलन के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच तीखी नोकझोंक देखी गई। अमेरिका ने ईरान पर संधि के उल्लंघन का आरोप लगाया, जबकि ईरान ने अमेरिका और इज़रायल द्वारा उसके नागरिक परमाणु ठिकानों पर हमलों की आलोचना की।
  • सैन्य गठबंधन और सुरक्षा नीतियां: ऑस्ट्रेलिया, यूके और यूएस के बीच AUKUS समझौते तथा NATO के परमाणु साझाकरण नीति को लेकर संधि के कई देशों ने कड़ा विरोध जताया।
  • परमाणु परीक्षणों की होड़: रूस द्वारा 'सरमात' (Sarmat) और अमेरिका द्वारा 'मिनटमैन' अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBM) के परीक्षणों ने वार्ता के माहौल में अविश्वास पैदा किया।
  • TPNW का विरोध: P5 देशों ने 'परमाणु हथियारों के निषेध पर संधि' (TPNW) के किसी भी तथ्यात्मक संदर्भ को अंतिम मसौदे में शामिल करने का कड़ा विरोध किया।

परमाणु हथियार अप्रसार संधि (NPT) :

  • हस्ताक्षर के लिए प्रारंभ: 1968
  • लागू होने की तिथि: 5 मार्च 1970 (वर्ष 1995 में इसे अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया गया)
  • कुल सदस्य देश: 191 (यह दुनिया का सबसे व्यापक रूप से अपनाया गया हथियार नियंत्रण समझौता है)
  • निगरानी संस्था: अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) इसके सुरक्षा उपायों की जांच करती है
  • परमाणु संपन्न राष्ट्र (NWS): संधि केवल उन 5 देशों को परमाणु संपन्न मानती है जिन्होंने 1 जनवरी 1967 से पहले परमाणु परीक्षण कर लिया था: अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन (P5 देश)
  • NPT के 3 मुख्य स्तंभ : अप्रसार, निरस्त्रीकरण, शांतिपूर्ण उपयोग
  • सदस्य: वर्तमान में इसके 191 सदस्य देश हैं
  • परमाणु-हथियार संपन्न राष्ट्र (NWS): यह संधि केवल उन 5 देशों (P5) को वैध परमाणु शक्ति मानती है जिन्होंने 1 जनवरी 1967 से पहले परमाणु परीक्षण किया था

भारत का रुख :

  • भारत NPT का सदस्य नहीं है: भारत ने इस संधि पर हस्ताक्षर नहीं किया है
  • कारण: भारत NPT को एक भेदभावपूर्ण संधि मानता है। यह संधि 1 जनवरी 1967 से पहले परमाणु परीक्षण करने वाले देशों (P-5) को तो वैध परमाणु शक्ति मानती है, लेकिन अन्य देशों पर परमाणु हथियार बनाने पर प्रतिबंध लगाती है।
  • अन्य देश जिन्होंने हस्ताक्षर नहीं किए: भारत के अलावा पाकिस्तान, इज़रायल, उत्तर कोरिया और दक्षिण सूडान भी इसके सदस्य नहीं हैं।

Latest Courses