राष्ट्रीय समाचार
भव्य योजना के कार्यान्वयन के लिए दिशानिर्देश जारी

- वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) ने देश में 'प्लग-एंड-प्ले' औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए 'भव्य' (BHAVYA) के कार्यान्वयन हेतु विस्तृत परिचालन दिशानिर्देश जारी किया।
भव्य योजना :
- BHAVYA योजना का पूरा नाम : 'भारत औद्योगिक विकास योजना'/Bharat Industrial Development Scheme
- योजना का प्रकार: यह एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना
- उद्देश्य: देश विश्व स्तरीय, निवेश के लिए तैयार और 'प्लग-एंड-प्ले' (तुरंत परिचालन योग्य) औद्योगिक पार्कों का विकास करना, ताकि वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में भारत की स्थिति मजबूत हो सके
- बजटीय परिव्यय: इस योजना के लिए ₹33,660 करोड़ का कुल वित्तीय आवंटन किया गया है
- समयसीमा: वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2031-32 तक (6 वर्ष की कार्यान्वयन अवधि)
- लक्ष्य: भारत में 100 नए औद्योगिक पार्क/स्मार्ट शहर स्थापित किए जाएंगे, जिसमें से पहले चरण में 'चैलेंज मोड' के जरिए 50 पार्कों का चयन किया जाएगा
- परियोजना प्रबंधन एजेंसी (PMA):राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम ( NICDC)
- कार्यान्वयन मॉडल: प्रत्येक परियोजना के लिए विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) और PPP मॉडल के माध्यम से निजी क्षेत्र की भागीदारी
- निगरानी: DPIIT सचिव की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा ऑडिट
भूमि एवं पात्रता मानदंड :
- ग्रीनफील्ड/ब्राउनफील्ड: दोनों प्रकार की परियोजनाओं हेतु
- क्षेत्रफल की आवश्यकता: सामान्य राज्यों के लिए 100 एकड़ और पर्वतीय/पूर्वोत्तर/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 25 एकड़ की न्यूनतम निरंतर भूमि
- मैक्रो-क्लस्टर: अधिकतम 1,000 एकड़ तक के पार्क
वित्तीय सहायता और सब्सिडी संरचना :
- आंतरिक बुनियादी ढांचा: ₹1 करोड़ प्रति एकड़ तक की सहायता (सड़क, बिजली, अपशिष्ट उपचार)
- कनेक्टिविटी: परियोजना लागत का 25% तक बाहरी बुनियादी ढांचा समर्थन
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14,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर भारत की पहली भूतापीय ऊर्जा परियोजना

- लद्दाख के उपराज्यपाल (LG) विनय कुमार सक्सेना ने पुगा घाटी में 14,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर बन रही भारत की पहली भूतापीय ऊर्जा परियोजना के लिए ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) के साथ हुए समझौता ज्ञापन (MoU) को 5 साल के लिए बढ़ाने की मंजूरी दी।
सम्बन्धित तथ्य :
- त्रिपक्षीय समझौता: यह MoU लद्दाख प्रशासन, लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद (LAHDC), लेह और ONGC के बीच हस्ताक्षरित है। इसका पहला चरण फरवरी 2021 में शुरू हुआ था, जो फरवरी 2026 में समाप्त हो गया।
- पायलट प्लांट: इस परियोजना के तहत ONGC 1 MWe (मेगावाट इलेक्ट्रिक) क्षमता का एक पायलट भूतापीय ऊर्जा संयंत्र स्थापित करेगी
- गहरे कुओं की ड्रिलिंग: परियोजना के अगले चरण में मौजूदा कुओं को 1,000 मीटर की गहराई तक गहरा किया जाएगा और एक नया 1,000 मीटर गहरा भूतापीय कुआं खोदा जाएगा। (हाल ही में ONGC ने 405 मीटर की गहराई पर 240°C से अधिक का उप-सतह तापमान दर्ज किया है, जो बिजली उत्पादन के लिए उत्कृष्ट है)
- समय सीमा: इस पायलट प्रोजेक्ट के वित्तीय वर्ष 2026-27 तक चालू होने की उम्मीद है। इसके बाद बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उपयोग के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जाएगी
- अवस्थिति: पुगा घाटी पूर्वी लद्दाख के चांगथांग क्षेत्र में स्थित है और यह हिमालयन जियोथर्मल बेल्ट का हिस्सा है
- टेक्टोनिक विन्यास: यह क्षेत्र सिंधु सिवनी क्षेत्र (Indus Suture Zone : ISZ) के पास स्थित है, जहां भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के टकराने के कारण अत्यधिक भू-गर्भीय हलचल और पृथ्वी के भीतर की गर्मी सतह के करीब आ जाती है
- उच्च क्षमता: यह भारत का सबसे क्षमतावान भूतापीय क्षेत्र माना जाता है, जहां उथली गहराई पर ही गर्म पानी के झरने और उच्च तापमान (200°C से अधिक) वाले भूतापीय जलाशय उपलब्ध हैं
भूतापीय ऊर्जा :
- क्या है? : पृथ्वी के क्रस्ट (भूपर्पटी) के नीचे संचित मैग्मा और चट्टानों की प्राकृतिक गर्मी से उत्पन्न ऊर्जा
- प्रकृति : यह एक नवीकरणीय (Renewable) और सतत ऊर्जा स्रोत है
- लाभ : यह सौर या पवन ऊर्जा की तरह मौसम पर निर्भर नहीं है। यह 24x7 (चौबीसों घंटे) निरंतर बेस-लोड बिजली प्रदान कर सकती है और शून्य-कार्बन उत्सर्जन करती है
- भारत में क्षमता : भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के अनुसार, भारत में लगभग 10,600 मेगावाट (MW) भूतापीय ऊर्जा की क्षमता है
भारत के अन्य प्रमुख भूतापीय क्षेत्र :
- चुमाथांग: लद्दाख
- मणिकरण: हिमाचल प्रदेश
- तत्तापानी: छत्तीसगढ़
- सूरजकुंड: झारखंड
- अनहोनी: मध्य प्रदेश
- पुगा वैली: लद्दाख (भारत का पहला भूतापीय क्षेत्र विकास प्रोजेक्ट)
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आदिवासी समुदाय समान नागरिक संहिता के दायरे से बाहर

- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि सरकार ने सभी आदिवासी समुदायों को समान नागरिक संहिता (UCC) के दायरे से बाहर रखने के लिए विशेष प्रावधान किया है, जिससे उनके अधिकारों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
सम्बन्धित तथ्य :
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छूट देने के मुख्य कारण :
- सांस्कृतिक और प्रथागत अधिकारों का संरक्षण: आदिवासियों की विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और संपत्ति के स्वामित्व से जुड़ी अपनी विशिष्ट रूढ़िवादी परंपराएं (Customary Laws) हैं। जैसे—मेघालय की खासी जनजाति में मातृसत्तात्मक (Matrilineal) व्यवस्था है, जो मुख्यधारा के कानूनों से बिल्कुल भिन्न है
- संविधान की मूल भावना का सम्मान: संविधान निर्माताओं ने आदिवासियों की विशिष्ट पहचान को पहले से मान्यता दे रखी है। UCC थोपने से उनकी स्वशासी व्यवस्था प्रभावित होने का डर था
- असम और उत्तराखंड का हालिया मॉडल: उत्तराखंड द्वारा पारित पहले यूसीसी अधिनियम और हाल ही में असम विधानसभा में पेश किए गए 'द यूनिफॉर्म सिविल कोड, असम, 2026 बिल' में भी अनुसूचित जनजातियों (ST) को स्पष्ट रूप से इसके दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है
- अनुच्छेद 44 (UCC): राज्य के नीति निदेशक तत्वों (DPSP) के तहत यह राज्य को पूरे देश में समान नागरिक संहिता लागू करने का निर्देश देता है। लेकिन यह बाध्यकारी नहीं है और इसे मौलिक अधिकारों की कीमत पर लागू नहीं किया जा सकता
- पांचवीं और छठी अनुसूची: यह क्रमशः अनुसूचित क्षेत्रों और उत्तर-पूर्व के जनजातीय क्षेत्रों (असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम) को प्रशासनिक व विधायी स्वायत्तता देती है। इसके तहत जिला परिषदों को अपने पारंपरिक मामलों पर कानून बनाने का अधिकार है।
- अनुच्छेद 371 (A से J): इसके तहत नागालैंड (371A) और मिजोरम (371G) जैसे राज्यों को विशेष दर्जा प्राप्त है। संसद का कोई भी कानून इनके धार्मिक, सामाजिक और पारंपरिक प्रथागत कानूनों पर तब तक लागू नहीं हो सकता, जब तक वहां की विधानसभा इसकी मंजूरी न दे।
- अनुच्छेद 29: यह नागरिकों के प्रत्येक वर्ग को अपनी विशिष्ट संस्कृति, भाषा और लिपि को संरक्षित करने का मौलिक अधिकार देता है।
भारत में वर्तमान स्थिति :
- उत्तराखंड (पहला राज्य): उत्तराखंड स्वतंत्र भारत का पहला ऐसा राज्य बना जिसने जनवरी 2025 में UCC को पूरी तरह लागू किया। उत्तराखंड के इस कानून में अनुसूचित जनजातियों (ST) को स्पष्ट रूप से छूट दी गई थी, जो अब देश के लिए एक रोल मॉडल बन गया है।
- गुजरात: गुजरात विधानसभा ने भी मार्च 2026 में अपने राज्य के लिए UCC विधेयक को मंजूरी दे दी है, जिसमें आदिवासी सुरक्षा के कड़े प्रावधान शामिल हैं।
- असम (ताजा घटनाक्रम - मई 2026): असम कैबिनेट ने हाल ही में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में UCC के मसौदे को मंजूरी दी और 26 मई 2026 को असम विधानसभा में UCC बिल पेश किया गया है। इस बिल में भी असम की जनजातीय आबादी और उनकी पारंपरिक रीतियों को पूरी तरह बाहर (Exempted) रखा गया है।
- गोवा: गोवा में पुर्तगाली औपनिवेशिक काल (1867 के पुर्तगाली नागरिक संहिता) के समय से ही एक प्रकार का सामान्य नागरिक कानून लागू है।
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अंतरराष्ट्रीय समाचार
रूस द्वारा यूक्रेन पर ओरेश्निक हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल का उपयोग

- रूस द्वारा यूक्रेन पर किए गए बड़े पैमाने के ड्रोन और मिसाइल हमले के दौरान 'ओरेश्निक' हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल का उपयोग किया गया।
ओरेश्निक मिसाइल:
- नाम का अर्थ: रूसी भाषा में 'ओरेश्निक' का अर्थ "हेज़ल वृक्ष" या "हेज़लनट वृक्ष" होता है
- प्रकार : यह एक मध्यम-दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM - Intermediate-Range Ballistic Missile) है, जो सड़क-गतिशील (Road-Mobile) लॉन्चर से दागी जाती है
- विकासात्मक इतिहास: रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह पूरी तरह से नई मिसाइल नहीं है, बल्कि इसे रूस के पूर्ववर्ती RS-26 रूबेज़ (Rubezh) इंटरकॉन्टिनेंट बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) कार्यक्रम में बदलाव करके विकसित किया गया है
- गति : इसकी गति मैक 10 (Mach 10) यानी ध्वनि की गति से 10 गुना अधिक (लगभग 12,300 किमी/घंटा) है
- मारक क्षमता : इसकी अनुमानित मारक सीमा 3,500 किमी से 5,500 किमी के बीच है, जो पूरे यूरोप को कवर कर सकती है।
- वारहेड क्षमता : यह पारंपरिक उच्च-विस्फोटक और परमाणु दोनों प्रकार के वारहेड ले जाने में सक्षम है
- प्रौद्योगिकी : यह MIRV (Multiple Independently Targetable Reentry Vehicle) तकनीक से लैस है, जिससे एक ही मिसाइल कई अलग-अलग लक्ष्यों पर सटीक निशाना लगा सकती है।
- हाइपरसोनिक गति : जब कोई मिसाइल मैक 5 (Mach 5 - ध्वनि की गति से पांच गुना) या उससे अधिक की गति से यात्रा करती है, तो उसे हाइपरसोनिक कहा जाता है
- MIRV तकनीक का महत्व : टर्मिनल चरण में, इस मिसाइल का मुख्य पेलोड सेक्शन (Bus) अलग हो जाता है और 6 अलग-अलग वारहेड्स छोड़ता है
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NPT के पक्षकारों का 11वां समीक्षा सम्मेलन

- परमाणु हथियार अप्रसार संधि (NPT) के पक्षकारों का 11वां समीक्षा सम्मेलन बिना किसी सर्वसम्मत परिणामी दस्तावेज़ के समाप्त हुआ।
- यह सम्मेलन ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमरीका, इस्रराएल और ईरान के बीच बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच आयोजित हुआ।
सम्बन्धित तथ्य :
- 11वें समीक्षा सम्मेलन का आयोजन 27 अप्रैल से 22 मई तक संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में किया गया।
- सम्मेलन के अध्यक्ष और संयुक्त राष्ट्र में वियतनाम के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत डो हुंग वियत ने इस पर निराशा व्यक्त करते हुए संधि के “भविष्य और प्रभावशीलता” को लेकर चिंता जताई।
- संयुक्त राष्ट्र (UN) मुख्यालय, न्यूयॉर्क में आयोजित यह बैठक पिछले 16 वर्षों में लगातार तीसरी बार बिना किसी अंतिम समझौते के विफल हुई है (इससे पहले 2015 और 2022 के सम्मेलन भी विफल रहे थे)
11वें समीक्षा सम्मेलन की विफलता के मुख्य कारण :
- परमाणु शस्त्रागार का आधुनिकीकरण: गैर-परमाणु संपन्न देशों (NNWS) का आरोप है कि P5 देश (अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस) निरस्त्रीकरण के बजाय अपने परमाणु हथियारों के आधुनिकीकरण और विस्तार पर ध्यान दे रहे हैं।
- भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान टकराव: सम्मेलन के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच तीखी नोकझोंक देखी गई। अमेरिका ने ईरान पर संधि के उल्लंघन का आरोप लगाया, जबकि ईरान ने अमेरिका और इज़रायल द्वारा उसके नागरिक परमाणु ठिकानों पर हमलों की आलोचना की।
- सैन्य गठबंधन और सुरक्षा नीतियां: ऑस्ट्रेलिया, यूके और यूएस के बीच AUKUS समझौते तथा NATO के परमाणु साझाकरण नीति को लेकर संधि के कई देशों ने कड़ा विरोध जताया।
- परमाणु परीक्षणों की होड़: रूस द्वारा 'सरमात' (Sarmat) और अमेरिका द्वारा 'मिनटमैन' अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBM) के परीक्षणों ने वार्ता के माहौल में अविश्वास पैदा किया।
- TPNW का विरोध: P5 देशों ने 'परमाणु हथियारों के निषेध पर संधि' (TPNW) के किसी भी तथ्यात्मक संदर्भ को अंतिम मसौदे में शामिल करने का कड़ा विरोध किया।
परमाणु हथियार अप्रसार संधि (NPT) :
- हस्ताक्षर के लिए प्रारंभ: 1968
- लागू होने की तिथि: 5 मार्च 1970 (वर्ष 1995 में इसे अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया गया)
- कुल सदस्य देश: 191 (यह दुनिया का सबसे व्यापक रूप से अपनाया गया हथियार नियंत्रण समझौता है)
- निगरानी संस्था: अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) इसके सुरक्षा उपायों की जांच करती है
- परमाणु संपन्न राष्ट्र (NWS): संधि केवल उन 5 देशों को परमाणु संपन्न मानती है जिन्होंने 1 जनवरी 1967 से पहले परमाणु परीक्षण कर लिया था: अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन (P5 देश)
- NPT के 3 मुख्य स्तंभ : अप्रसार, निरस्त्रीकरण, शांतिपूर्ण उपयोग
- सदस्य: वर्तमान में इसके 191 सदस्य देश हैं
- परमाणु-हथियार संपन्न राष्ट्र (NWS): यह संधि केवल उन 5 देशों (P5) को वैध परमाणु शक्ति मानती है जिन्होंने 1 जनवरी 1967 से पहले परमाणु परीक्षण किया था
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प्रतास द्वीप समूह के पास चीनी तटरक्षक जहाज की घुसपैठ

- दक्षिण चीन सागर के उत्तरी भाग में स्थित ताइवान-नियंत्रित प्रतास द्वीप समूह के पास चीनी तटरक्षक जहाज की घुसपैठ के बाद दोनों देशों के बीच दो दिनों तक गंभीर समुद्री गतिरोध बना रहा।
- हाल ही में चीनी पोत के पीछे हटने से यह गतिरोध थमा है, लेकिन इसने भू-राजनीतिक तनाव को एक बार फिर बढ़ा दिया है।
सम्बन्धित तथ्य :
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प्रतास द्वीप समूह :
- भौगोलिक स्थिति: यह दक्षिण चीन सागर के शीर्ष (उत्तरी भाग) में स्थित एक कोरल एटोल (मूंगा द्वीपवलय) है। यह भू-राजनीतिक रूप से हांगकांग और दक्षिणी ताइवान के बीच स्थित है।
- स्थानीय नाम: इसे डोंगशा द्वीप के रूप में भी जाना जाता है
- संरचना: इस गोलाकार एटोल संरचना में 'डोंगशा द्वीप' ही समुद्र की सतह से ऊपर एकमात्र दृश्यमान द्वीप है, जबकि अन्य दो संरचनाएं (नॉर्थ वेरेकर बैंक और साउथ वेरेकर बैंक) जलमग्न हैं
- प्रशासनिक नियंत्रण: यह द्वीप पूरी तरह से ताइवान (Republic of China : ROC) द्वारा शासित है और इसे ताइवान के एक राष्ट्रीय उद्यान के रूप में प्रबंधित किया जाता है। हालांकि, मुख्य भूमि चीन (PRC) भी इस पर अपनी संप्रभुता का दावा करता है
दक्षिण चीन सागर :
- पश्चिमी प्रशांत महासागर का एक महत्वपूर्ण सीमांत समुद्र है
- अवस्थिति: यह दक्षिण-पूर्व एशिया में चीन के दक्षिण, वियतनाम के पूर्व और दक्षिण, फिलीपींस के पश्चिम और बोर्नियो द्वीप के उत्तर में स्थित है
- सीमावर्ती देश: इसकी सीमाएँ चीन, ताइवान, फिलीपींस, मलेशिया, ब्रुनेई, इंडोनेशिया, वियतनाम और सिंगापुर से लगती हैं
प्रमुख जलडमरूमध्य (Straits):
- ताइवान जलडमरूमध्य: इसे उत्तर में पूर्वी चीन सागर से जोड़ता है।
- लूज़ॉन जलडमरूमध्य: इसे पूर्व में फिलीपीन सागर (प्रशांत महासागर) से जोड़ता है।
- मलक्का जलडमरूमध्य: इसे दक्षिण-पश्चिम में हिंद महासागर (अंडमान सागर) से जोड़ता है।
विवादित क्षेत्र :
- स्प्रैटली द्वीप समूह : चीन, ताइवान, वियतनाम, फिलीपींस, मलेशिया और ब्रुनेई के बीच विवादित
- पार्सल द्वीप समूह : चीन, ताइवान और वियतनाम के बीच विवादित
- स्कारबोरो शोल : चीन, ताइवान और फिलीपींस के बीच मुख्य विवाद का केंद्र
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79वीं विश्व स्वास्थ्य सभा

- विश्व स्वास्थ्य सम्मेलन की 79वीं बैठक का आयोजन स्विट्जरलैंड के जिनेवा में किया गया।
सम्बन्धित तथ्य :
- विषय : "वैश्विक स्वास्थ्य को फिर से आकार देना: एक साझा जिम्मेदारी" /Reshaping global health: a shared responsibility
- भारतीय प्रतिनिधित्व: भारत की ओर से केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने इस सभा में भाग लिया और विभिन्न द्विपक्षीय बैठकों को संबोधित किया
- अध्यक्षता: इस सभा की अध्यक्षता डोमिनिकन गणराज्य के स्वास्थ्य मंत्री विक्टर अताला राजम ने की
- पारित प्रस्ताव: छह दिवसीय इस सम्मेलन में सदस्य देशों ने मानव स्वास्थ्य की रक्षा के लिए बहुपक्षीय सहयोग बढ़ाते हुए 20 से अधिक निर्णय और 13 प्रस्ताव पारित किया इनमें मुख्य रूप से स्ट्रोक, तपेदिक (TB), आपातकालीन देखभाल, हीमोफिलिया और सटीक चिकित्सा जैसे विषय शामिल थे
प्रमुख नीतिगत निर्णय :
- रोगाणुरोधी प्रतिरोध (Antimicrobial Resistance : AMR): बैठक में वर्ष 2026-2036 के लिए 'ग्लोबल एक्शन प्लान ऑन एएमआर' (GAP-AMR) के दूसरे संस्करण को अपनाया गया। इसका लक्ष्य संयुक्त राष्ट्र महासभा के लक्ष्य के अनुरूप 2030 तक बैक्टीरिया-जनित AMR से होने वाली मौतों में 10% की कमी लाना है।
- विकिरण और स्वास्थ्य : राष्ट्रीय प्रणालियों को मजबूत करने के लिए आयनकारी और गैर-आयनकारी विकिरण सुरक्षा पर पहला वैश्विक प्रस्ताव अपनाया गया
- सभी के लिए स्वास्थ्य का अर्थशास्त्र : 2026-2030 के लिए एक नई रणनीति तैयार की गई, जिसके तहत स्वास्थ्य को आर्थिक, वित्तीय और औद्योगिक नीतियों के साथ एकीकृत किया जाएगा
- विश्व स्वास्थ्य सभा (World Health Assembly : WHA) : यह विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का निर्णय लेने वाला सर्वोच्च शासी निकाय है, जिसमें सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) :
- प्रकृति: यह संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक विशेष एजेंसी है जो अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए जिम्मेदार है
- मुख्यालय: जिनेवा, स्विट्जरलैंड
- सदस्य: वर्तमान में 194 सदस्य देश हैं
- कार्य: वैश्विक स्वास्थ्य मामलों पर नेतृत्व प्रदान करना, स्वास्थ्य अनुसंधान के एजेंडे तय करना, मानक निर्धारित करना और साक्ष्य-आधारित नीति विकल्प प्रदान करना
- भारत और WHO: भारत WHO के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र का सदस्य है और इसका क्षेत्रीय मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है
- विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस प्रत्येक वर्ष 10 अक्तूबर को मनाया जाता है
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'इन्फॉर्मेशन एजेंट्स' का अनावरण

- गूगल ने 'इन्फॉर्मेशन एजेंट्स' का अनावरण किया, जो वेब की निगरानी के लिए सर्च में निर्मित एक फीचर है।
- गूगल के अलावा माइक्रोसॉफ्ट (आउटलुक और टीम्स में) और मेटा (व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम में) भी इसी प्रकार के 'एम्बिएंट एआई' (Ambient AI) एजेंट विकसित कर रहे हैं।
गूगल :
- स्थापना: 4 सितंबर, 1998 को स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के पीएचडी छात्र लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन द्वारा
- मूल नाम: शुरुआत में इसका नाम 'बैकराब' रखा गया था, जिसे बाद में गणितीय शब्द 'Googol' (1 के बाद 100 शून्य) से प्रेरित होकर 'Google' कर दिया गया
- मूल कंपनी : अल्फाबेट इंक (Alphabet Inc.), जिसकी स्थापना 2015 में पुनर्गठन के दौरान की गई थी
- वर्तमान मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO): भारतीय मूल के सुंदर पिचाई (Alphabet और Google दोनों के CEO
- मुख्यालय: माउंटेन व्यू, कैलिफोर्निया, USA
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विज्ञान और प्रौद्योगिकी
AI-संचालित स्वास्थ्य टूल 'कार्डियोमिकस्कोर' विकसित

- यूनिवर्सिटी ऑफ हॉन्ग कॉन्ग के शोधकर्ताओं ने 'कार्डियोमिकस्कोर' नामक एक AI-संचालित स्वास्थ्य टूल विकसित किया है, जो रक्त परीक्षण के माध्यम से किसी व्यक्ति में लक्षण दिखाई देने से 15 वर्ष पूर्व ही हृदय रोगों के जोखिम का सटीक पता लगा सकता है।
- इस टूल के नतीजे नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित किया गया था।
सम्बन्धित तथ्य :
- AI संचालित स्वास्थ्य टूल का नाम: कार्डियोमिकस्कोर (CardiomicScore)
- संस्थान: यूनिवर्सिटी ऑफ हॉन्ग कॉन्ग (HKU) के शोधकर्ता
- तकनीक: यह एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग आधारित एल्गोरिदम है।
- कार्यप्रणाली: यह टूल केवल एक साधारण ब्लड टेस्ट (रक्त जांच) के विश्लेषण से काम करता है।
- विशेषता: यह पारंपरिक तरीकों की तुलना में 15 वर्ष पहले ही कार्डियोवैस्कुलर (हृदय संबंधी) रोगों के जोखिम का सटीक अनुमान लगा सकता है।
- यह ब्लड सैंपल में लगभग 2,920 प्रोटीनों और 168 मेटाबोलाइट्स को ट्रैक करता है। यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम दिल का दौरा (Heart Attack), स्ट्रोक, और हार्ट फेलियर जैसी 6 प्रमुख कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों के खतरे का अनुमान लक्षण दिखने से 15 साल पहले ही लगा लेता है।
- इसमें कोरोनरी आर्टरी डिजीज, स्ट्रोक, हार्ट फेलियर, एट्रियल फिब्रिलेशन, पेरिफेरल आर्टरी डिजीज और वेनस थ्रोम्बोएम्बोलिज्म शामिल है।
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गुजरात और तमिलनाडु में साझा तकनीकी सुविधाएं

- भारतीय अंतरिक्ष विभाग (DoS) ने देश के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र को बढ़ावा देने और मजबूत करने के लिए गुजरात और तमिलनाडु में साझा तकनीकी सुविधाएं (Common Technical Facilities : CTF) स्थापित करने की ऐतिहासिक मंजूरी दी।
- यह परियोजना भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) के सहयोग से चलाई जा रही है, जो समर्पित अंतरिक्ष विनिर्माण समूहों के भीतर स्थित होगी।
सम्बन्धित तथ्य :
- गुजरात (अहमदाबाद के पास खोराज): इसका फोकस अंतरिक्ष यान (Spacecraft) और उपग्रह पेलोड सिस्टम के निर्माण, असेंबली और सत्यापन पर है।
- तमिलनाडु (थूथुकुडी): रणनीतिक रूप से, यह कुलशेखरपटनम में नए छोटे उपग्रह प्रक्षेपण परिसर के पास स्थित है, और इसका फोकस लॉन्च व्हीकल (रॉकेट) के निर्माण, संरचनात्मक परीक्षण और प्रणोदन सत्यापन पर है।
- PPP/सहयोगात्मक ढांचा: राज्य सरकारें भूमि और बुनियादी ढांचा प्रदान करेंगी, जबकि IN-SPACe उच्च-स्तरीय तकनीकी उपकरण स्थापित करेगा।
- प्लग-एंड-प्ले: निजी स्टार्टअप और MSMEs को बिना भारी पूंजी निवेश के, सीधे इन सुविधाओं का उपयोग करके परीक्षण और सत्यापन करने की सुविधा मिलेगी।
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नियुक्तियां
राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा

- राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को राज्यसभा की याचिका समिति का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
- यह नियुक्ति राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन द्वारा समिति के पुनर्गठन के बाद 20 मई 2026 से प्रभावी की गई है।
याचिका समिति (Committee on Petitions) :
- भारतीय संसद की एक महत्वपूर्ण स्थायी संसदीय समिति है, जो जनता और संसद के बीच एक सेतु का कार्य करती है।
- उत्पत्ति: ब्रिटिश काल में 15 सितंबर, 1921 को 'काउंसिल ऑफ स्टेट' में पारित एक प्रस्ताव के तहत "लोक याचिका समिति" के रूप में हुई थी।
- इस समिति का नाम “याचिका समिति” किया गया : 1933
- पहली बार गठन :1952 में एक अध्यक्ष और चार अन्य सदस्यों के साथ किया गया था
- वर्ष 1964 में इसकी सदस्य संख्या बढ़ाकर दस कर दी गई
संरचना और कार्यकाल :
- सदस्य संख्या: राज्यसभा की याचिका समिति में कुल 10 सदस्य होते हैं। (नोट: लोकसभा की याचिका समिति में 15 सदस्य होते हैं)
- नामांकन: समिति के सभी सदस्यों को राज्यसभा के सभापति (उपराष्ट्रपति) द्वारा मनोनीत किया जाता है
- अध्यक्ष की नियुक्ति: समिति के अध्यक्ष की नियुक्ति भी राज्यसभा के सभापति द्वारा की जाती है।
- कार्यकाल: समिति का पुनर्गठन सामान्यतः प्रतिवर्ष (1 वर्ष के लिए) किया जाता है।
- गणपूर्ति (कोरम): समिति की बैठक के लिए न्यूनतम 5 सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य है
- जनहित के मामले: वर्ष 1964 के संशोधनों के बाद, यह समिति न केवल विधेयकों बल्कि सामान्य जनहित के विषयों पर भी नागरिकों की याचिकाएं स्वीकार करती है
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नीलम मीणा

- भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने 1998 बैच की वरिष्ठ IAS अधिकारी नीलम मीणा को पश्चिम बंगाल का नया मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नियुक्त किया।
- वह पश्चिम बंगाल की पहली महिला मुख्य निर्वाचन अधिकारी बनी हैं।
सम्बन्धित तथ्य :
- स्थान: नीलम मीणा ने मनोज कुमार अग्रवाल (IAS) का स्थान लिया है, जिन्हें हाल ही में राज्य का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया गया
- चयन प्रक्रिया: पश्चिम बंगाल सरकार ने तीन वरिष्ठ IAS अधिकारियों (नीलम मीणा, तन्मय चक्रबर्ती और मौमिता गोदारा बसु) का एक पैनल भेजा था, जिसमें से चुनाव आयोग ने मीणा के नाम को मंजूरी दी
- पूर्व पद: इस नियुक्ति से पहले वह उपभोक्ता मामलों के विभाग में प्रधान सचिव के रूप में कार्यरत थीं
- शर्तें: पदभार ग्रहण करने के बाद वह राज्य सरकार के अधीन कोई अन्य अतिरिक्त प्रभार नहीं संभालेंगी ताकि चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता बनी रहे
मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) :
- संवैधानिक/विधिक प्रावधान: मुख्य निर्वाचन अधिकारी का पद लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 13A के तहत वैधानिक रूप से परिभाषित है
- नियुक्ति कौन करता है? : भारत निर्वाचन आयोग (ECI) संबंधित राज्य सरकार के परामर्श से किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) को नामित या नियुक्त करता है
- कार्य: CEO राज्य स्तर पर निर्वाचन आयोग के कामकाज की निगरानी करता है। वह राज्य में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, संसद और राज्य विधानसभा के चुनावों के संचालन और मतदाता सूचियों के संशोधन का समन्वय करता है
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) :
- स्थापना: 25 जनवरी 1950 (इसीलिए 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाता है)
- संविधान का भाग: भाग XV (Part 15)
- महत्वपूर्ण अनुच्छेद: अनुच्छेद 324 से अनुच्छेद 329 तक
- अनुच्छेद 324: चुनाव आयोग की स्थापना, संरचना और शक्तियों का उल्लेख करता है
- मुख्यालय: नई दिल्ली
- सदस्य संख्या: वर्तमान में यह एक तीन-सदस्यीय निकाय है (1 मुख्य चुनाव आयुक्त और 2 अन्य चुनाव आयुक्त)
- शुरुआत: मूल रूप से आयोग में केवल एक आयुक्त था, लेकिन 1993 से इसे स्थाई रूप से बहु-सदस्यीय बना दिया गया
- नियुक्ति: भारत के राष्ट्रपति द्वारा
- कार्यकाल: 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक (जो भी पहले पूरा हो)
- दर्जा: इन्हें भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के समान दर्जा और वेतन मिलता है
- प्रथम मुख्य चुनाव आयुक्त (First CEC): भारत के पहले मुख्य चुनाव आयुक्त सुकुमार सेन थे
- वर्तमान CEC (2026): वर्तमान में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार हैं
- अधीनस्थ अधिकारी: जिला स्तर पर CEO के नीचे जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) होते हैं, जो आमतौर पर उस जिले के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (DM/Collector) होते हैं
- 61वां संविधान संशोधन (1989): इसके तहत मतदान की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष की गई थी
- EVM का प्रयोग: पहली बार पूर्ण रूप से 2004 के लोकसभा चुनाव में पूरे देश में EVM का इस्तेमाल हुआ था
- प्रथम महिला मुख्य चुनाव आयुक्त: वी. एस. रमादेवी
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पुस्तकें और लेखक
'अपनापन: नरेंद्र मोदी संग मेरे अनुभव'

- पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने नई दिल्ली के पूसा परिसर में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा लिखित पुस्तक 'अपनापन' का विमोचन किया।
सम्बन्धित तथ्य :
- पुस्तक का पूरा नाम: 'अपनापन: नरेंद्र मोदी संग मेरे अनुभव'
- लेखक: शिवराज सिंह चौहान (वर्तमान केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री)
- मुख्य विषयवस्तु: यह पुस्तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ लेखक के 35 वर्षों से अधिक के लंबे जुड़ाव, व्यक्तिगत अनुभवों और राजनीतिक यात्रा का एक आत्मीय वृत्तांत है
- समय-सीमा : इस पुस्तक में वर्ष 1991 की 'एकता यात्रा' (मुरली मनोहर जोशी के नेतृत्व में, जिसमें नरेंद्र मोदी संगठनात्मक प्रभारी थे) से लेकर वर्तमान समय तक के साढ़े तीन दशकों के सार्वजनिक जीवन को शामिल किया गया है
शिवराज सिंह चौहान :
- शिवराज सिंह चौहान का जन्म 5 मार्च, 1959 को मध्य प्रदेश के सीहोर जिले की बुधनी तहसील के जैत गांव में हुआ था।
- उन्होंने 15 वर्ष की आयु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में प्रवेश किया, जहां उन्होंने अनुशासन, देशभक्ति और सेवा के मूल्यों को आत्मसात किया।
- 1975 में वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में सक्रिय हुए और बाद में भारतीय जनता युवा मोर्चा में प्रदेश अध्यक्ष, राष्ट्रीय महासचिव और राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर आसीन हुए
- उनकी चुनावी यात्रा 1990 में शुरू हुई जब वे बुधनी से विधायक चुने गए।
- एक साल बाद, 1991 में, वे विदिशा से लोकसभा के लिए चुने गए
- नवंबर 2005 में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।
- 2005 से 2018 और फिर 2020 से 2023 तक चार कार्यकालों तक सेवा करते हुए, वे राज्य के इतिहास में सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री बन गए।
- 2024 में, वे विदिशा से एक बार फिर लोकसभा के लिए चुने गए और वर्तमान में भारत सरकार में कृषि एवं किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री के रूप में कार्यरत हैं
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पुरस्कार और सम्मान
प्रथम नागरिक अलंकरण समारोह 2026

- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रथम नागरिक अलंकरण समारोह में 66 हस्तियों को पद्म पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया, जिनमें 02 पद्म विभूषण, 06 पद्म भूषण और 58 पद्मश्री शामिल हैं।
सम्बन्धित तथ्य :
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पद्म विभूषण :
धर्मेंद्र सिंह देओल (मरणोपरांत) :
- क्षेत्र: कला (सिनेमा)
- विशेष: भारतीय सिनेमा में छह दशकों से अधिक के अद्वितीय योगदान के लिए
डॉ. एन. राजम :
- क्षेत्र: संगीत (वायलिन वादक)
- विशेष: वायलिन पर 'गायकी अंग' शैली को विकसित करने और शास्त्रीय संगीत को समृद्ध करने के लिए।
पद्म भूषण :
- शतावधानी डॉ. आर. गणेश : कला (साहित्य और अवधानम कला)
- भगत सिंह कोश्यारी : सार्वजनिक मामले (Public Affairs)
- उदय सुरेश कुमार कोटक : व्यापार और उद्योग (बैंकिंग क्षेत्र)
- प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा (मरणोपरांत) : सार्वजनिक मामले और खेल प्रशासन
- डॉ. कल्लीपट्टी रामासामी पलानीस्वामी : चिकित्सा (Medicine)
- पीयूष पांडे (मरणोपरांत) : कला (विज्ञापन और रचनात्मकता जगत)
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