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'वर्ल्ड सिटीज रिपोर्ट 2026'

Sat 23 May, 2026

संदर्भ :

  • संयुक्त राष्ट्र मानव बस्ती कार्यक्रम (UN-Habitat) ने अज़रबैजान के बाकू में आयोजित 13वें 'विश्व शहरी मंच' (WUF13) के दौरान 'वर्ल्ड सिटीज रिपोर्ट 2026' जारी की है।

मुख्‍य बिन्‍दु :

  • जारीकर्ता संस्था: यूनाइटेड नेशन्स ह्यूमन सेटलमेंट प्रोग्राम (UN-Habitat)
  • रिपोर्ट की प्रकृति: यह एक द्विवार्षिक (biennial - हर दो साल में एक बार) जारी होने वाली रिपोर्ट है।
  • लॉन्च स्थान: इसे अज़रबैजान की राजधानी बाकू में आयोजित 13वें विश्व शहरी मंच (WUF13) के दौरान जारी किया गया
  • WUF13 की थीम: "Housing the world: Safe and resilient cities and communities"
  • रिपोर्ट 2026 का मुख्य शीर्षक (Theme): "द ग्लोबल हाउसिंग क्राइसिस: पाथवेज़ टू एक्शन" (The Global Housing Crisis: Pathways to Action)

रिपोर्ट के प्रमुख वैश्विक निष्कर्ष :

  • 40% वैश्विक आबादी प्रभावित: दुनिया की लगभग 40% आबादी (करीब 3.4 अरब लोग) अपर्याप्त आवास और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रही है।
  • मलीन बस्तियों (Slums) की स्थिति: रिकॉर्ड स्तर पर 1.1 अरब से अधिक लोग अनौपचारिक बस्तियों और झुग्गी-झोपड़ियों में रह रहे हैं।
  • प्राइस-टू-इनकम रेशियो (Price-to-Income Ratio): वैश्विक स्तर पर औसत मकान की कीमत और आय का अनुपात वर्ष 2010 के 9.5 से बढ़कर 2023 में 11.7 हो गया है, जो घटती सामर्थ्य को दर्शाता है।
  • किराए का बोझ (Rental Burden): वैश्विक स्तर पर 44% परिवार अपनी आय का 30% से अधिक हिस्सा केवल आवास (किराए) पर खर्च कर रहे हैं।
  • जलवायु परिवर्तन का खतरा: अनुमान है कि जलवायु खतरों और प्राकृतिक आपदाओं के कारण वर्ष 2040 तक 16.7 करोड़ (167 मिलियन) घर नष्ट हो सकते हैं।

वैश्विक आवासहीनता दर :

  • चीन: प्रति 10,000 लोगों पर 21
  • भारत: प्रति 10,000 लोगों पर 13
  • संयुक्त राज्य अमेरिका: प्रति 10,000 लोगों पर 20
  • ब्राजील: प्रति 10,000 लोगों पर 11

भारत के संदर्भ में मुख्य आंकड़े व स्थिति:

  • महानगरों में गंभीर संकट: भारत के प्रमुख शहरों में 'प्राइस-टू-इनकम' अनुपात चिंताजनक स्तर पर है। मुंबई में यह 14.3 और दिल्ली में 10.1 दर्ज किया गया है।
  • सस्ते आवासों की कमी: भारत के 8 सबसे बड़े शहरों में नए प्रोजेक्ट्स में किफायती/सस्ते आवास (Affordable Housing) की हिस्सेदारी 2018 के 52% से घटकर 2025 में केवल 17% रह गई है क्योंकि डेवलपर्स लग्जरी सेगमेंट को प्राथमिकता दे रहे हैं।
  • क्षेत्रीय तनाव: भारत सहित मध्य और दक्षिण एशिया में प्राइस-टू-इनकम रेशियो 16.8 के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है

प्रमुख शहरों की स्थिति:

  • मुंबई: आवास मूल्य-से-आय अनुपात 14.3 है
  • दिल्ली: यह अनुपात 10.1 है।
  • बेघरता: भारत में प्रति 10,000 व्यक्तियों पर 13 लोग बेघर हैं। (तुलनात्मक रूप से: चीन में 21, अमेरिका में 20)
  • योजनाओं का प्रभाव: रिपोर्ट में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) की सराहना की गई है। इसके माध्यम से रियायती आवास का दायरा 2010 में 0.3% से बढ़कर 2023 में 7% हो गया है।
  • अहमदाबाद मॉडल: अहमदाबाद के 'स्लम नेटवर्किंग प्रोजेक्ट' को मांग-पक्ष के एक प्रभावी उपाय के रूप में सराहा गया है।

शहरीकरण और चुनौतियां :

  • निर्माण लागत: भारत और चीन में 'इकोनॉमी ऑफ स्केल' के कारण प्रति वर्ग मीटर निर्माण लागत अफ्रीकी देशों (जैसे चाड या जाम्बिया) की तुलना में कम है।
  • आयोजन और निवेश: शहरों को जलवायु-लचीला बनाने के लिए प्रति वर्ष $4.5 से $5.4 ट्रिलियन के निवेश की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान निवेश केवल $831 बिलियन है।

भारत सरकार की संबंधित योजनाएं :

  • प्रधानमंत्री आवास योजना - शहरी (PMAY-U) 2.0: इसे वर्ष 2024 में 'हाउसिंग फॉर ऑल' मिशन के तहत अगले 5 वर्षों में शहरी क्षेत्रों में 1 करोड़ अतिरिक्त लाभार्थियों को सहायता देने के लिए शुरू किया गया है।
  • अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग कॉम्प्लेक्स (ARHCs): यह PMAY-U के तहत प्रवासी श्रमिकों और शहरी गरीबों को कार्यस्थल के पास किफायती किराए के मकान देने की योजना है।
  • स्मार्ट सिटीज मिशन (2015): टिकाऊ शहरी नियोजन और बेहतर बुनियादी ढांचे के लिए 100 शहरों का विकास करना।
  • अमृत योजना (AMRUT - 2015): शहरों में जलापूर्ति, सीवरेज नेटवर्क और नागरिक सुविधाएं सुधारने पर केंद्रित।

UN-Habitat :

  • स्थापना वर्ष: 1978 (1976 के वैंकूवर सम्मेलन के बाद)।
  • मुख्यालय: नैरोबी, केन्या।
  • उद्देश्य: सभी के लिए पर्याप्त आवास सुनिश्चित करना और सामाजिक व पर्यावरणीय रूप से सतत शहरों को बढ़ावा देना।
  • भारत और UN-Habitat: भारत इसके संस्थापक सदस्यों में रहा है और इसने वर्ष 2017-19 के दौरान इसकी गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया था

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