08 May, 2026
मंगल के संकीर्ण वायुमंडल में ‘ज्वान-वुल्फ प्लाज्मा प्रभाव’ की खोज
Thu 21 May, 2026
संदर्भ :
- नासा के मेवेन (MAVEN) स्पेसक्राफ्ट ने पहली बार मंगल ग्रह के वायुमंडल (आयनमंडल) में दुर्लभ ‘ज्वान-वुल्फ प्रभाव’ की खोज की है।
मुख्य बिन्दु :
- यह रिर्पोट प्रकाशित : नेचर कम्युनिकेशंस में
- खोज : फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका के शोधकर्ताओं ने नासा के मावेन अंतरिक्ष यान का उपयोग करके
- यह खोज महत्वपूर्ण क्यों है : क्योंकि मंगल ग्रह में पृथ्वी की तरह मजबूत, वैश्विक चुंबकीय क्षेत्र नहीं है
- शोधकर्ताओं के अनुसार, मंगल ग्रह पर ज़्वान-वुल्फ प्रभाव संभवतः निरंतर सक्रिय रहता है, लेकिन यह अधिकांश समय इतना कमजोर हो सकता है कि अन्य वैज्ञानिक उपकरणों द्वारा इसका पता न लगाया जा सके।
- MAVEN ने दिसंबर 2023 में इस प्रभाव से संबंधित डेटा रिकॉर्ड किया था, जब मंगल ग्रह पर एक शक्तिशाली सौर तूफान आया था जिसे कोरोनल मास इजेक्शन कहा जाता है।
- इस घटना ने मंगल के चुंबकीय क्षेत्र में तीव्र चुंबकीय संरचनाएं उत्पन्न कीं जो ग्रह के आयनमंडल में नीचे की ओर चली गईं।
- इन संरचनाओं ने आयनमंडल में आवेशित कणों को ग्रह के कम प्रकाश वाले हिस्से की ओर धकेल दिया, जिससे कणों का स्थानीय घनत्व लगभग 50% कम हो गया।
- वायुमंडलीय नुकसान: यह खोज वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद करेगी कि सौर तूफान किस तरह मंगल के वायुमंडल को नष्ट कर रहे हैं और कैसे मंगल एक हरा-भरा/गीला ग्रह से ठंडे रेगिस्तान में बदल गया।
- अन्य ग्रहों का अध्ययन: इस भौतिकी की मदद से अब बिना चुंबकीय क्षेत्र वाले अन्य पिंडों जैसे शुक्र (Venus) और शनि के चंद्रमा टाइटन (Titan) के वायुमंडल का अध्ययन किया जा सकेगा।
ज्वान-वुल्फ प्रभाव (Zwan-Wolf Effect) :
- खोज का इतिहास: इस प्रभाव की खोज वर्ष 1976 में हुई थी
- मूल परिघटना: जब सूर्य से निकलने वाली तीव्र सौर हवाएं या कोरोनल मास इजेक्शन (CME) किसी ग्रह के चुंबकीय क्षेत्र से टकराते हैं, तो चुंबकीय क्षेत्र संकुचित (Compress) हो जाता है।
- दबाव की स्थिति: इस संपीड़न के कारण चुंबकीय संरचनाओं (जिन्हें फ्लक्स ट्यूब कहा जाता है) के भीतर मौजूद आवेशित कण (प्लाज्मा) अत्यधिक दबाव महसूस करते हैं।
- कणों का विस्थापन: जिस प्रकार टूथपेस्ट को दबाने पर वह ट्यूब से बाहर निकलता है, ठीक उसी प्रकार ये आवेशित कण चुंबकीय बल रेखाओं के साथ अत्यधिक गति से दबाए और धकेले जाते हैं, जिससे उस विशेष क्षेत्र में प्लाज्मा का घनत्व अचानक बहुत कम हो जाता है।
- यह खोज क्यों ऐतिहासिक है: पिछले 50 वर्षों से इसे केवल पृथ्वी जैसे मजबूत वैश्विक चुंबकीय क्षेत्र वाले ग्रहों के बाहरी अंतरिक्ष में देखा गया था। इतिहास में पहली बार इसे किसी ग्रह के आंतरिक वायुमंडल (आयनमंडल) के भीतर (200 किमी से कम ऊंचाई पर) देखा गया है।
मेवेन (MAVEN) मिशन:
- पूरा नाम: Mars Atmosphere and Volatile EvolutioN (MAVEN)
- संस्था: नासा (NASA - USA)
- प्रक्षेपण (Launch): 18 नवंबर, 2013
- मंगल की कक्षा में प्रवेश: सितंबर 2014
- मुख्य उद्देश्य: यह अध्ययन करना कि मंगल ग्रह का वायुमंडल और पानी समय के साथ कैसे अंतरिक्ष में विलीन हो गए। यह विशेष रूप से मंगल के ऊपरी वायुमंडल और सौर हवा के साथ उसकी अंतःक्रिया का अध्ययन करता है।
मंगल ग्रह :
- उपनाम: इसे लाल ग्रह कहा जाता है।
- लाल रंग का कारण: इसकी सतह की चट्टानों में आयरन ऑक्साइड (Iron Oxide - लोहे के ऑक्साइड / जंग) की उच्च सांद्रता है।
- स्थिति: यह सूर्य से चौथा ग्रह है और आकार में सौर मंडल का दूसरा सबसे छोटा ग्रह है (बुध के बाद)
- आंतरिक/पार्थिव ग्रह: यह बुध, शुक्र और पृथ्वी की तरह एक आंतरिक ग्रह है, जो चट्टानों से बना है।
घूर्णन और परिक्रमा :
- दिन की अवधि (घूर्णन): मंगल अपने अक्ष पर एक चक्कर 24 घंटे 37 मिनट में पूरा करता है (लगभग पृथ्वी के समान)।
- वर्ष की अवधि (परिक्रमा): सूर्य का एक चक्कर लगाने में इसे 687 पृथ्वी दिन लगते हैं।
उपग्रह :
मंगल ग्रह के केवल दो प्राकृतिक उपग्रह (चंद्रमा) हैं:
- फ़ोबोस (Phobos): यह आकार में बड़ा है।
- डीमॉस (Deimos): यह सौर मंडल का सबसे छोटा उपग्रह है
प्रमुख भौगोलिक विशेषताएं :
- ओलंपस मॉन्स (Olympus Mons): यह सौर मंडल का सबसे बड़ा और सबसे ऊँचा ज्वालामुखी (और पर्वत) है। यह पृथ्वी के माउंट एवरेस्ट से लगभग तीन गुना ऊँचा (लगभग 24-25 किमी) है।
- वैलिस मैरिनेरिस (Vallis Marineris): यह सौर मंडल की सबसे बड़ी घाटियों में से एक है।
वायुमंडल :
- वायुमंडल का घनत्व: इसका वायुमंडल बहुत पतला (Thin) है, जो पृथ्वी के वायुमंडल का लगभग 1% है।
- गैस संरचना: इसके वायुमंडल में सबसे अधिक कार्बन डाइऑक्साइड (लगभग 95%) पाई जाती है, जिसके साथ नाइट्रोजन, आर्गन और बहुत कम मात्रा में ऑक्सीजन मौजूद है।
महत्वपूर्ण अंतरिक्ष मिशन :
- मंगलयान (Mars Orbiter Mission - MOM): भारत के ISRO द्वारा 5 नवंबर 2013 को PSLV-C25 रॉकेट से लॉन्च किया गया था।
- भारत अपने पहले ही प्रयास में मंगल की कक्षा में पहुंचने वाला दुनिया का पहला देश बना था।
- भारत मंगल पर पहुंचने वाली दुनिया की चौथी स्पेस एजेंसी बना (सोवियत संघ, नासा और यूरोपीय स्पेस एजेंसी के बाद)।
- नासा (NASA) के मिशन: क्यूरियोसिटी (Curiosity), परसिवियरेंस (Perseverance) रोवर और इनसाइट (InSight) लैंडर।
- तियानवेन-1 (Tianwen-1): यह चीन का मंगल मिशन है।
- होप मिशन (Hope Mission): यह संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का पहला अंतरग्रहीय मिशन है।









