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SMILE मिशन

Wed 20 May, 2026

संदर्भ :

  • चीनी और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसियाँ सूर्य से आने वाले आवेशित कणों और पृथ्वी के चुंबकीय आवरण के बीच की अंतःक्रिया का अध्ययन करने के लिए SMILE मिशन प्रक्षेपित किया।

मुख्‍य बिन्‍दु :

  • SMILE का पूर्ण नाम : सोलर विंड मैग्नेटोस्फीयर आयनोस्फीयर लिंक एक्सप्लोरर/Solar wind Magnetosphere Ionosphere Link Explorer
  • प्रक्षेपण : वेगा-सी (Vega-C) रॉकेट के माध्‍यम से
  • यह मिशन चीनी विज्ञान अकादमी (CAS) और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) का पहला पूर्ण संयुक्त अंतरिक्ष विज्ञान मिशन है
  • मुख्य उद्देश्य : सूर्य से निकलने वाली निरंतर आवेशित कणों की बौछार—सौर पवन और पृथ्वी के रक्षा कवच यानी चुंबकमंडल के बीच होने वाली वैश्विक अंतःक्रिया का लाइव और व्यापक अध्ययन करना
  • दृश्यता : इतिहास में पहली बार पृथ्वी के अदृश्य चुंबकीय आवरण की एक्स-रे और अल्ट्रावायलेट तस्वीरें वास्तविक समय में ली जाएंगी
  • परिवर्तनशीलता को समझना: यह देखना कि सौर तूफान या कोरोनल मास इजेक्शन (CME) के दौरान पृथ्वी का चुंबकमंडल किस तरह विकृत होता है और खुद को पुनः कैसे ठीक करता है
  • कक्षीय स्थिति: चुंबकीय मंडल के व्यापक अवलोकन के लिए यह अंतरिक्ष यान पृथ्वी के उत्तरी ध्रुव से लगभग 1.21 लाख किलोमीटर ऊपर कार्य करेगा।
  • मिशन की अवधि: इसका अपेक्षित परिचालन जीवनकाल लगभग तीन वर्ष है
  • SMILE का वजन : लगभग 2,600 किलोग्राम है

SMILE मिशन के चारों वैज्ञानिक पेलोड :

  • सॉफ्ट एक्स-रे इमेजर (SXI)
  • विकासकर्ता: यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA)
  • मुख्य कार्य: यह दुनिया का पहला अंतरिक्ष-आधारित सॉफ्ट एक्स-रे इमेजर है। यह सौर पवन के आयनों और पृथ्वी के वायुमंडल के बीच टकराव से उत्पन्न होने वाली धीमी एक्स-रे किरणों को कैप्चर करेगा। इसका मुख्य काम चुंबकमंडल (Magnetosphere) की वास्तविक सीमाओं का नक्शा बनाना है

अल्ट्रावायलेट ऑरोरा इमेजर (UVI) :

  • विकासकर्ता: चीनी विज्ञान अकादमी (CAS / China)
  • मुख्य कार्य: यह पृथ्वी के ध्रुवीय क्षेत्रों (Polar Regions) पर बनने वाले ऑरोरा (नॉर्दर्न और सदर्न लाइट्स) की पराबैंगनी तरंगदैर्ध्य (UV Wavelength) पर अत्यधिक उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाली तस्वीरें लेगा।

लाइट आयन एनालाइज़र (LIA) :

  • विकासकर्ता: चीनी विज्ञान अकादमी (CAS / China)
  • मुख्य कार्य: यह उपग्रह के पास से सीधे गुजरने वाले सौर पवन के कणों (मुख्यतः आयनों) के वेग (Velocity), घनत्व (Density) और तापमान का इन-सिटू (In-situ या यथास्थान) प्रत्यक्ष मापन करेगा

मैग्नेटोमीटर (MAG) :

  • विकासकर्ता: चीनी विज्ञान अकादमी (CAS / China)
  • मुख्य कार्य: यह अंतरिक्ष में उपग्रह के आसपास के स्थानीय चुंबकीय क्षेत्र (Local Magnetic Field) की ताकत और उसकी दिशा में होने वाले वास्तविक समय (Real-time) के बदलावों को सटीक रूप से मापेगा।

उपग्रह की अनूठी कक्षा (Unique Orbit) :

  • SMILE को एक अत्यधिक अण्डाकार और झुकी हुई ध्रुवीय कक्षा (Highly Elliptical Northern Polar Orbit) में स्थापित किया जा रहा है:
  • शीर्ष बिंदु (Apogee): पृथ्वी के उत्तरी ध्रुव के ऊपर यह अधिकतम 1,21,000 किलोमीटर की ऊंचाई (पृथ्वी और चंद्रमा की दूरी का लगभग एक-तिहाई हिस्सा) पर पहुंचेगा। इस बेजोड़ ऊंचाई के कारण यह बिना किसी बाधा के लगातार 40 से 45 घंटों तक पृथ्वी के चुंबकीय कवच और ऑरोरा पर नजर रख सकेगा।
  • निम्न बिंदु (Perigee): दक्षिणी ध्रुव के ऊपर इसकी न्यूनतम ऊंचाई लगभग 5,000 किलोमीटर होगी, जहां से यह अंटार्कटिका और अन्य ग्राउंड स्टेशनों को तेजी से अपना डेटा ट्रांसफर करेगा।

अंतरिक्ष मौसम (Space Weather) और पृथ्वी के लिए इसका महत्व :

  • भू-चुंबकीय तूफान : तीव्र सौर हवाएं जब पृथ्वी के चुंबकमंडल से टकराती हैं, तो व्यापक चुंबकीय गड़बड़ी पैदा करती हैं।
  • अवसंरचनात्मक क्षति: सौर तूफानों के कारण पृथ्वी के पावर ग्रिड फेल हो सकते हैं, वैश्विक कम्युनिकेशन नेटवर्क व मोबाइल सिग्नल ठप हो सकते हैं, और GPS प्रणालियां बाधित हो सकती हैं (जैसा कि इतिहास में 1859 के कैरिंगटन इवेंट के दौरान हुआ था)।
  • अंतरिक्ष संपत्तियों की सुरक्षा: अंतरिक्ष में तैर रहे अरबों डॉलर के उपग्रहों को नष्ट होने से बचाना और अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) में मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों को घातक विकिरण से सुरक्षित रखने के लिए सटीक भविष्यवाणियां करना।

वैश्विक भू-राजनीति और अंतरिक्ष कूटनीति (Space Diplomacy) पर प्रभाव :

चीन-यूरोप का रणनीतिक सहयोग: वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में जहां अमेरिका और चीन के बीच अंतरिक्ष क्षेत्र (जैसे आर्टेमिस बनाम चीनी चंद्र मिशन) में प्रतिद्वंद्विता चरम पर है, वहीं ESA और चीन (CAS) का यह साझा मिशन यह दर्शाता है कि वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए भू-राजनीतिक दूरियों को पाटा जा सकता है।

डेटा का लोकतंत्रीकरण: इस मिशन से प्राप्त डेटा को वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय के साथ साझा किया जाएगा, जिससे वैश्विक स्तर पर अंतरिक्ष मौसम की मॉडलिंग को अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी।

चुंबकीय मंडल (मैग्नेटोस्फीयर)

  • पृथ्वी या किसी अन्य खगोलीय पिंड के चारों ओर का वह विशाल अदृश्य क्षेत्र है, जहां उसका अपना चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) हावी रहता है

यह कैसे बनता है? :

  • आंतरिक स्रोत: पृथ्वी के कोर (Core) में पिघले हुए लोहे और निकेल की गतियों के कारण एक शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र पैदा होता है (जिसे जियोडायनामो प्रभाव कहते हैं)।
  • बाहरी टकराव: जब सूर्य से आने वाली अत्यधिक ऊर्जावान और आवेशित कणों की धारा—सौर पवन (Solar Wind)—पृथ्वी के इस चुंबकीय क्षेत्र से टकराती है, तो यह चुंबकीय क्षेत्र अंतरिक्ष में एक सुरक्षात्मक कवच का आकार ले लेता है। इसी क्षेत्र को चुंबकमंडल कहते हैं।

इसकी अनूठी संरचना और आकार (Structure & Shape) :

  • बॉ शॉक (Bow Shock): यह चुंबकमंडल की सबसे बाहरी सीमा है, जहाँ सौर पवन पहली बार पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराकर धीमी हो जाती है।
  • मैग्नेटोपॉज़ (Magnetopause): यह वह वास्तविक सीमा है जहाँ सौर पवन का दबाव और पृथ्वी का चुंबकीय दबाव एक दूसरे को संतुलित करते हैं।
  • मैग्नेटोटेल (Magnetotail): सूर्य की विपरीत दिशा में (रात वाले भाग की ओर), पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र एक लंबी पूंछ की तरह लाखों किलोमीटर दूर अंतरिक्ष में खिंच जाता है।

पृथ्वी के लिए इसका महत्व (Significance) :

  • जीवन रक्षक कवच: यह सूर्य से आने वाले घातक कॉस्मिक विकिरण (Cosmic Radiation) और अत्यधिक आवेशित कणों को पृथ्वी के धरातल तक पहुंचने से रोकता है। यदि यह न हो, तो सौर पवनें हमारे वायुमंडल को नष्ट कर सकती हैं (जैसा कि मंगल ग्रह के साथ हुआ)।
  • ऑरोरा का निर्माण (Aurora Formation): जब सौर पवन के कुछ कण चुंबकीय रेखाओं के सहारे पृथ्वी के ध्रुवों (उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव) के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं, तो वे गैसों से टकराकर हरे और लाल रंग की अद्भुत रोशनी पैदा करते हैं, जिन्हें ऑरोरा (Auroras) या ध्रुवीय ज्योति कहते हैं।

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