08 May, 2026
'सबसे कम अवधि वाले द्विआधारी तंत्र' की खोज
Tue 19 May, 2026
संदर्भ :
- भारतीय शोधकर्ताओं ने अब तक के सबसे कम कक्षीय काल वाले तारकीय द्विआधारी तंत्रों में से एक की खोज की है।
मुख्य बिन्दु :
- विशेषता: इस प्रणाली की कक्षीय अवधि मात्र 5.6 घंटे है, जो इसे अब तक की सबसे कम अवधि वाली प्रणालियों में से एक बनाती है।
- स्थान: यह खोज 'ओपन स्टार क्लस्टर्स' के अध्ययन के दौरान की गई।
मुख्य वैज्ञानिक बिंदु और विशेषताएं :
- अत्यंत लघु कक्षीय काल: यह दोनों पिंड मिलकर महज 5.6 घंटे (0.234 दिन) में एक-दूसरे की परिक्रमा पूरी कर लेते हैं, जो ब्रह्मांड में ज्ञात सबसे सघन प्रणालियों में से एक है।
- सबसे हल्का साथी पिंड: इस ब्लू स्ट्रैगलर तारे के चारों ओर चक्कर लगा रहा ब्राउन ड्वार्फ अब तक खोजा गया सबसे हल्का साथी पिंड है, जिसका द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान का केवल 0.056 गुना है। यह हाइड्रोजन संलयन (Hydrogen-burning limit) की न्यूनतम सीमा से बहुत नीचे है।
- 'ब्राउन ड्वार्फ डेजर्ट' में खोज: यह प्रणाली तथाकथित ब्राउन ड्वार्फ डेजर्ट (Brown Dwarf Desert) क्षेत्र के भीतर खोजी गई है। यह अंतरिक्ष का वह क्षेत्र है जहां मुख्य तारों के इतने नजदीक ऐसे उप-तारकीय पिंडों का पाया जाना अत्यंत दुर्लभ माना जाता है।
शामिल मुख्य खगोलीय पिंड :
- ब्लू स्ट्रैगलर स्टार (BSS) : ये तारा समूहों (Star Clusters) में पाए जाने वाले ऐसे तारे हैं जो मानक तारकीय विकास सिद्धांतों को चुनौती देते हैं। ये अपने समूह के अन्य तारों की तुलना में अधिक चमकीले, गर्म और युवा (नीले) दिखाई देते हैं, जबकि पूरे समूह के तारों की आयु समान होनी चाहिए।
- ब्राउन ड्वार्फ (BD): इन्हें अक्सर 'असफल तारे' (Failed Stars) कहा जाता है। इनका द्रव्यमान किसी बड़े ग्रह से अधिक होता है लेकिन इतना कम होता है कि ये अपने कोर में सामान्य तारों की तरह हाइड्रोजन संलयन की प्रक्रिया शुरू नहीं कर पाते।
महत्वपूर्ण शब्दावली :
- ब्लू स्ट्रैगलर: ये ऐसे तारे हैं जो अपने समूह (Cluster) के अन्य तारों की तुलना में अधिक गर्म, नीले और युवा दिखाई देते हैं। ये मानक तारकीय विकास के सिद्धांतों को चुनौती देते हैं क्योंकि ये अपनी उम्र से "ज्यादा युवा" दिखते हैं। इनका निर्माण अक्सर दो तारों के विलय (Merger) या द्रव्यमान हस्तांतरण से होता है।
- ब्राउन ड्वार्फ: इन्हें 'विफल तारे' भी कहा जाता है। ये ग्रह से बड़े होते हैं लेकिन इतने बड़े नहीं होते कि इनके केंद्र में हाइड्रोजन संलयन (Nuclear Fusion) शुरू हो सके। इनका द्रव्यमान हाइड्रोजन-जलने की सीमा (सूर्य के द्रव्यमान का ~0.08 गुना) से कम होता है।
- ब्राउन ड्वार्फ डेजर्ट: यह अंतरिक्ष का वह क्षेत्र या स्थिति है जहाँ किसी तारे के बहुत करीब भूरे बौने तारों का पाया जाना अत्यंत दुर्लभ होता है।
यह खोज महत्वपूर्ण क्यों है? :
- तारकीय विकास (Stellar Evolution): यह वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद करता है कि तारे आपस में कैसे क्रिया करते हैं और चरम वातावरण में कैसे जीवित रहते हैं।
- कोज़ाई-लिडव दोलन: इस मॉडल के माध्यम से बताया गया है कि कैसे एक 'त्रि-तारा प्रणाली' अंततः एक सघन द्विआधारी प्रणाली में बदल जाती है।
- अभिलेखीय डेटा : यह खोज साबित करती है कि पुराने डेटा के विश्लेषण से भी बिना महंगे नए उपकरणों के बड़ी खोजें की जा सकती हैं।
शोध दल और संस्थान :
- गुवाहाटी विश्वविद्यालय (प्रमुख भूमिका: अली हसन शेख और प्रो. बिमान जे. मेधी)
- भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA), बैंगलोर (DST के तहत)
- आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (ARIES), नैनीताल (DST के तहत)
- INAF-कैटानिया खगोल भौतिकी वेधशाला, इटली
संभावित अभ्यास प्रश्न :
प्रश्न 1: हाल ही में भारतीय वैज्ञानिकों ने 'ब्लू स्ट्रैगलर' तारे के साथ किस प्रकार के साथी तारे की खोज की है?
(A) रेड जायंट
(B) व्हाइट ड्वार्फ
(C) ब्राउन ड्वार्फ
(D) न्यूट्रॉन स्टार
उत्तर: (C)
प्रश्न 2: हालिया खोज के अनुसार, खोजी गई सघन द्विआधारी प्रणाली की कक्षीय अवधि कितनी है?
(A) 24 घंटे
(B) 12.5 घंटे
(C) 5.6 घंटे
(D) 48 घंटे
उत्तर: (C)
प्रश्न 3: 'ब्लू स्ट्रैगलर' तारे सामान्य तारों की तुलना में कैसे दिखाई देते हैं?
(A) अधिक लाल और ठंडे
(B) अधिक नीले और गर्म
(C) बहुत धुंधले
(D) वे तारे जो अब चमकते नहीं हैं
उत्तर: (B)









