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Tue 19 May, 2026

राष्‍ट्रीय समाचार

किऊल-झाझा तीसरी लाइन परियोजना के लिए ₹962 करोड़ मंज़ूर

  • रेलवे ने 54 किलोमीटर लंबे किऊल-झाझा तीसरी लाइन प्रोजेक्ट को 962 करोड़ रुपये की मंज़ूरी दी।
  • यह मार्ग कोलकाता/हल्दिया बंदरगाहों और रक्सौल/नेपाल के बीच महत्वपूर्ण रूप से संपर्क प्रदान करता है तथा बाढ़ STPP, जवाहर STPP और बीरगंज ICD सहित प्रमुख औद्योगिक प्रतिष्ठानों से जुड़ी भारी माल ढुलाई के लिए मालगाड़ियों के परिवहन को संभालता है।
  • इस रेल खंड को भारतीय रेलवे के अति व्यस्त यातायात वाले नेटवर्क कॉरिडोर के अंतर्गत चिन्हित किया गया है।

भारतीय रेलवे :

  • प्रथम पैसेंजर ट्रेन: 16 अप्रैल 1853 को लॉर्ड डलहौजी के कार्यकाल में भारत की पहली यात्री ट्रेन चली थी।
  • दूरी और मार्ग: यह पहली ट्रेन मुंबई (बोरी बंदर) से ठाणे के बीच 34 किलोमीटर की दूरी के लिए चलाई गई थी, जिसमें 400 यात्रियों ने सफर किया था।
  • राष्ट्रीयकरण: 1951
  • रेलवे बोर्ड की स्थापना: भारतीय रेलवे बोर्ड का गठन वर्ष 1905 में हुआ था।
  • कंप्यूटरीकृत आरक्षण: भारत में पहली कंप्यूटरीकृत आरक्षण सेवा 1986 में नई दिल्ली से शुरू हुई थी।
  • शौचालय की शुरुआत: ट्रेनों में पहली बार शौचालय वर्ष 1909 में शामिल किए गए थे
  • विश्व में स्थान: भारतीय रेलवे दुनिया का चौथा सबसे बड़ा (USA, चीन और रूस के बाद)
  • मुख्यालय: भारतीय रेलवे का मुख्य मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।
  • सबसे पुराना इंजन: 'फेयरी क्वीन' दुनिया का सबसे पुराना चालू भाप इंजन है, जो गिनीज बुक में दर्ज है
  • सबसे लंबा प्लेटफॉर्म: वर्तमान में कर्नाटक का श्री सिद्धारूढ़ स्वामीजी हुबली स्टेशन (1,507 मीटर) दुनिया का सबसे लंबा रेलवे प्लेटफॉर्म है (इससे पहले गोरखपुर जंक्शन था)
  • सबसे ऊंचा रेलवे स्टेशन: पश्चिम बंगाल में स्थित घूम (Ghum) रेलवे स्टेशन भारत का सबसे ऊंचा (2,258 मीटर) रेलवे स्टेशन है।

यूनेस्को विश्व धरोहर (UNESCO World Heritage Sites): भारतीय रेलवे की चार साइट्स यूनेस्को सूची में शामिल हैं:

  1. दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे
  2. नीलगिरि माउंटेन रेलवे
  3. कालका-शिमला रेलवे
  4. छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (मुंबई)
  • रेलवे ज़ोन : 19(19वां- मेट्रो रेलवे, कोलकाता)

तकनीकी और संचालन :

  • वंदे भारत एक्सप्रेस: यह भारत की पहली स्वदेशी रूप से डिज़ाइन की गई सेमी-हाई-स्पीड (Semi-High-Speed) ट्रेन है, जो 'मेक इन इंडिया' का उत्कृष्ट उदाहरण है।
  • कवच (KAVACH): यह भारत की अपनी ट्रेन टक्कर रोधी प्रणाली (Automatic Train Protection System) है। यह एक ही ट्रैक पर दो ट्रेनों के आने पर उन्हें स्वतः रोक देती है, जिससे रेल दुर्घटनाओं को शून्य किया जा सके।
  • डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC): मालगाड़ियों के तेजी से संचालन के लिए विशेष रूप से पूर्वी (EDFC) और पश्चिमी (WDFC) कॉरिडोर बनाए गए हैं, ताकि यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों का ट्रैफिक अलग किया जा सके।

जम्मू-कटरा रेलखंड और अरक्कोनम-चेंगलपट्टू परियोजना को मंजूरी

  • भारतीय रेलवे ने उत्तर रेलवे के जम्मू-श्री माता वैष्णो देवी कटरा खंड की सुरक्षा और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए ₹238 करोड़ की महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी
  • रेलवे ने अरक्कोनम-चेंगलपट्टू दोहरीकरण परियोजना के लिए 993 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। 68 किलोमीटर लंबी यह परियोजना चेन्नई बीच, तांबरम, चेंगलपट्टू और अरक्कोनम को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण चेन्नई उपनगरीय सर्कुलर रेल नेटवर्क का हिस्सा है।
चेनाब नदी पर विश्‍व का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज बनाया गया है, जिसकी ऊंचाई नदी तल से 359 मीटर है

केंद्रीय क्षेत्रीय परिषद की उच्च-स्तरीय बैठक का आयोजन

  • केंद्रीय क्षेत्रीय परिषद की 26वीं उच्च-स्तरीय बैठक का आयोजन छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में शुरू किया गया।
  • बस्तर के इतिहास में यह पहली बार है जब इतनी उच्च-स्तरीय क्षेत्रीय परिषद बैठक का आयोजन नक्सल प्रभावित रहे जगदलपुर क्षेत्र में किया गया, जो इस क्षेत्र में बेहतर होती सुरक्षा स्थिति और विकास को दर्शाता है।
  • बैठक में मध्य क्षेत्रीय परिषद के अंतर्गत आने वाले चार राज्यों—छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों तथा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी हिस्‍सा ले रहें हैं।
  • इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा किया जा रहा है।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

क्षेत्रीय परिषदें (Zonal Councils) :

  • राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के तहत स्थापित वैधानिक निकाय हैं
  • सलाहकार निकाय: ये परिषदें केवल विचार-विमर्श और सलाहकारी (Advisory) संस्थाएं हैं, इनके निर्णय सरकारों पर बाध्यकारी नहीं होते
  • मुख्य उद्देश्य: राज्यों के बीच सहयोग, राष्ट्रीय एकीकरण को बढ़ावा देना और अंतर-राज्यीय विवादों (जैसे सीमा या नदी विवाद) को सुलझाना
  • मूल विचार: इनका विचार भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 1956 में दिया था।
  • संगठनात्मक संरचना :
  • अध्यक्ष: केंद्र सरकार के केंद्रीय गृह मंत्री सभी क्षेत्रीय परिषदों के साझा अध्यक्ष होते हैं।
  • उपाध्यक्ष: संबंधित क्षेत्र के राज्यों के मुख्यमंत्री रोटेशन (बारी-बारी से) के आधार पर 1 वर्ष के लिए इसके उपाध्यक्ष बनते हैं।

परिषदों का वर्गीकरण :

  • उत्तरी क्षेत्रीय परिषद : जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, दिल्ली और चंडीगढ़ शामिल हैं। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है।
  • दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद : आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी शामिल हैं। इसका मुख्यालय चेन्नई में है।
  • पूर्वी क्षेत्रीय परिषद : बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा शामिल हैं। इसका मुख्यालय कोलकाता में है।
  • पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद : गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव शामिल हैं। इसका मुख्यालय मुंबई में है।
  • मध्य क्षेत्रीय परिषद : छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड शामिल हैं। इसका मुख्यालय प्रयागराज (इलाहाबाद) में है।

नोट (पूर्वोत्तर परिषद): पूर्वोत्तर राज्यों (असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, त्रिपुरा, मिजोरम, मेघालय, नागालैंड और सिक्किम) के लिए इस अधिनियम के तहत कोई परिषद नहीं है। इनके लिए पूर्वोत्तर परिषद अधिनियम, 1971 के तहत एक अलग 'पूर्वोत्तर परिषद' (North Eastern Council) का गठन किया गया है।

छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले जनसेवा केंद्र का उद्घाटन

  • गृह मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के नेतानार गांव में एक जनसेवा केंद्र का उद्घाटन किया।
  • इस केंद्र का नाम आदिवासी नेता और स्वतंत्रता सेनानी वीर गुंडाधुर के नाम पर रखा गया है।
  • यह जनसेवा केंद्र केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) के सुरक्षा शिविर परिसर में स्थापित किया गया है।

जनसेवा केंद्र :

  • भारत सरकार की डिजिटल इंडिया योजना के तहत ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में ई-सेवाएं पहुंचाने का एक मुख्य माध्‍यम है
  • CSC का पूर्ण रूप Common Service Centre (सामान्य सेवा केंद्र / जनसेवा केंद्र)
  • नोडल मंत्रालय : यह इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत काम करता है
  • राष्ट्रीय ई-शासन योजना (NeGP): यह केंद्र सरकार के राष्ट्रीय ई-शासन योजना का एक मुख्य हिस्सा है
  • डिजिटल साक्षरता: CSC के तहत PMGDISHA (प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान) चलाया जाता है, जिसका लक्ष्य ग्रामीण नागरिकों को डिजिटल रूप से साक्षर बनाना है

"कॉफीज़ ऑफ़ नागालैंड" मिशन का शुभारंभ

  • केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने "कॉफीज़ ऑफ़ नागालैंड" मिशन का शुभारंभ किया।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • कुल वित्तीय परिव्यय: इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए ₹175 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है.
  • नोडल मंत्रालय: यह केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (MDoNER) की एक प्रमुख पहल है.
  • दृष्टिकोण: इसे 'संपूर्ण-सरकार दृष्टिकोण' (Whole of Government Approach) के तहत डिजाइन किया गया है. यह सरकारों, किसानों, उद्यमियों, निर्यातकों और कॉफी बोर्ड ऑफ इंडिया को एक साझा मंच पर लाता है

क्लस्टर-आधारित मॉडल :

  • इस मिशन के तहत नागालैंड में कॉफी उत्पादन और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए दो प्रायोगिक (Pilot) कॉफी क्लस्टरों की पहचान की गई है
  • तुओफेमा गाँव (कोहिमा ज़िला): इसे 'अरेबिका' (Arabica) कॉफी के विकास के लिए चुना गया है
  • घोटोवी गाँव (नीवलैंड ज़िला): इसे 'रोबस्टा' (Robusta) कॉफी के विकास के लिए चुना गया है

काफी बोर्ड :

  • गठन और अधिनियम: कॉफी अधिनियम, 1942 के तहत स्थापित एक वैधानिक संगठन
  • नोडल मंत्रालय: केन्‍द्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय
  • मुख्यालय: बेंगलुरु, कर्नाटक
  • प्रमुख कार्य: कॉफी के उत्पादन, अनुसंधान, विपणन (marketing), और गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ निर्यात को बढ़ावा देना है।
  • उत्पादन तथ्य: भारत में कॉफी का सर्वाधिक उत्पादन कर्नाटक राज्य में होता है

अंतरराष्ट्रीय समाचार

भारत-नॉर्वे व्यापार और अनुसंधान शिखर सम्मेलन 2026

  • भारत-नॉर्वे व्यापार और अनुसंधान शिखर सम्मेलन 2026 का आयोजन मई 2026 में नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में किया गया।
  • इस सम्‍मेलन में भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं नॉर्वे के युवराज हाकोन और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर ने हिस्सा लिया।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • ग्रीन स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप : इस दौरे के दौरान भारत और नॉर्वे ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को 'हरित रणनीतिक साझेदारी' में बदल दिया। इसके तहत स्वच्छ ऊर्जा, हरित पोत परिवहन, नीली अर्थव्यवस्था और जलवायु वित्त पर विशेष ध्यान दिया जाएगा
  • TEPA निवेश लक्ष्य: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-EFTA व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (TEPA) के तहत 100 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश लक्ष्य को हासिल करने और भारत में 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित करने की प्रतिबद्धता पर जोर दिया. (नोट: भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के बीच हुआ व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता (TEPA) 1 अक्टूबर 2025 से लागू हो चुका, जिसमें नॉर्वे एक प्रमुख सदस्य है).
  • इनोवेशन इकोसिस्टम (Lab-to-Lab सहयोग): दोनों देशों ने अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए 'लैब-टू-लैब', 'यूनिवर्सिटी-टू-यूनीवर्सिटी' और 'साइंटिस्ट-टू-साइंटिस्ट' साझेदारी को मजबूत करने की घोषणा की, जिससे भारत के CSIR, स्टार्टअप्स और नॉर्वे के अग्रणी संस्थान आपस में जुड़ेंगे.
  • व्यापार सुगमता डेस्क : 'इन्वेस्ट इंडिया' के तहत विशेष रूप से नॉर्वेजियन निवेशकों के लिए एक समर्पित व्यापार सुगमता डेस्क स्थापित किया गया है ताकि उनकी निवेश प्रक्रिया को सुगम बनाया जा सके.
  • इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव (IPOI): नॉर्वे अधिकारिक तौर पर भारत की इस समुद्री पहल में शामिल हो गया है, जिससे दोनों देशों के बीच हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और सतत प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा.
  • गोलमेज सत्र: इस उच्च स्तरीय सम्मेलन से पहले ओस्लो में पांच प्रमुख क्षेत्रों पर गोलमेज बैठकें हुईं: स्वास्थ्य सेवा नवाचार, समुद्री सहयोग, बैटरी एवं ऊर्जा भंडारण, डिजिटलीकरण, और पवन ऊर्जा.

नॉर्वे :

  • राजधानी : ओस्लो
  • मुद्रा (Currency) : नॉर्वेजियन क्रोन (NOK)
  • महाद्वीप : यूरोप
  • आधिकारिक भाषा : नॉर्वेजियन
  • संसद : स्टॉर्टिंग
  • प्रसिद्धि : फियोर्ड, उत्तरी रोशनी, तेल और गैस भंडार
  • मानव विकास सूचकांक (HDI) में शीर्ष देशों में शामिल
  • नोबेल शांति पुरस्कार का वितरण ओस्लो में किया जाता है
  • नॉर्वे स्कैंडिनेवियाई देशों में शामिल है
  • सीमावर्ती देश : स्वीडन, फिनलैंड और रूस
  • राष्ट्रीय दिवस : 17 मई

‘अंतर्राष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल’ घोषित

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) और युगांडा में इबोला के प्रकोप को "अंतर्राष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल" (PHEIC) घोषित किया।
  • यह वैश्विक स्वास्थ्य चेतावनी का उसका उच्चतम स्तर है, क्योंकि वायरस का दुर्लभ बंडीबुग्यो स्ट्रेन पूर्वी अफ्रीका में सीमाओं के पार फैल गया है।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • वर्तमान प्रकोप का कारण बुंडीबुग्यो इबोलावायरस है।
  • यह इबोला का एक दुर्लभ प्रकार है जिसकी पहचान सबसे पहले 2007 में युगांडा में हुई थी।
  • ज़ैरे में पाए जाने वाले अधिक सामान्य प्रकार के विपरीत, बुंडीबुग्यो इबोला के लिए वर्तमान में कोई अनुमोदित टीके या लक्षित उपचार उपलब्ध नहीं हैं।

इबोला :

  • एक अत्यंत घातक और संक्रामक वायरल बीमारी (Viral Disease) है
  • वायरस का नाम: यह ऑर्थोइबोलावायरस समूह के कारण होता है।
  • वायरस परिवार: यह फिलोविरिडे (Filoviridae) परिवार का सदस्य है।
  • आनुवंशिक सामग्री: इबोला वायरस में सिंगल-स्ट्रेंडेड आरएनए (Single-stranded RNA) पाया जाता है।
  • बीमारी का प्रकार: यह एक जूनोटिक (Zoonotic) बीमारी है, जो जानवरों से इंसानों में फैलती है।
  • अन्य नाम: इसे इबोला रक्तस्रावी बुखार (Ebola Hemorrhagic Fever) भी कहा जाता है।
  • प्रथम खोज: इबोला वायरस की पहचान सबसे पहले 1976 में हुई थी।
  • नामकरण: इसका नाम अफ्रीका के लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो (DRC) में बहने वाली 'इबोला नदी' के नाम पर रखा गया था, जिसके पास इसका पहला मामला मिला था।
  • प्राकृतिक मेजबान (Natural Host): जंगलों में रहने वाले फ्रूट बैट्स (Fruit Bats - फल खाने वाले चमगादड़) इस वायरस के मुख्य प्राकृतिक भंडार माने जाते हैं।
  • इंसानों में फैलाव: संक्रमित जानवरों (चमगादड़, बंदर, चिंपांजी) के सीधे संपर्क में आने से।
  • मानव-से-मानव संचरण: संक्रमित व्यक्ति के रक्त (Blood), लार, पसीना, उल्टी या अन्य शारीरिक तरल पदार्थों (Bodily Fluids) के सीधे संपर्क में आने से

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) :

  • प्रकृति: यह संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक विशेष एजेंसी है जो अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए जिम्मेदार है
  • मुख्यालय: जिनेवा, स्विट्जरलैंड
  • सदस्य: वर्तमान में 194 सदस्य देश हैं
  • कार्य: वैश्विक स्वास्थ्य मामलों पर नेतृत्व प्रदान करना, स्वास्थ्य अनुसंधान के एजेंडे तय करना, मानक निर्धारित करना और साक्ष्य-आधारित नीति विकल्प प्रदान करना
  • भारत और WHO: भारत WHO के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र का सदस्य है और इसका क्षेत्रीय मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है
  • विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस प्रत्येक वर्ष 10 अक्तूबर को मनाया जाता है

भारत को 11वीं सदी के 'अनाइमंगलम ताम्रपत्र' (लीडेन ताम्रपत्र) वापस सौंपे गए

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीदरलैंड की राजकीय यात्रा के दौरान भारत को 11वीं सदी के 'अनाइमंगलम ताम्रपत्र' (लीडेन ताम्रपत्र) वापस सौंपे गए।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • शासक: ये ताम्रपत्र चोल राजवंश के महान शासक राजराजा चोल प्रथम (985-1014 ईस्वी) और उनके पुत्र राजेंद्र चोल प्रथम (1012-1044 ईस्वी) के काल से संबंधित हैं
  • इन ताम्रपत्रों को 1712 में डच ईस्ट इंडीज कंपनी से जुड़े एक डच मिशनरी फ्लोरेंटियस कैंपर द्वारा नागपट्टिनम से नीदरलैंड ले जाया गया था
  • भौतिक बनावट: इसमें 21 बड़े और 3 छोटे ताम्रपत्र शामिल हैं, जिनका कुल वजन लगभग 30 किलोग्राम है। ये सभी प्लेटें एक बड़े कांस्य के छल्ले से आपस में जुड़ी हुई हैं, जिस पर राजेंद्र चोल प्रथम की शाही मुहर लगी हुई है।
  • प्रकार: इस पूरे संग्रह को शाही चार्टर (Royal Charter या Sasana) कहा जाता है।
  • विभाजन व भाषा:
  • संस्कृत भाग: कुल 5 प्लेटों पर संस्कृत भाषा में राजवंश की वंशावली और प्रशंसा लिखी गई है।
  • तमिल भाग: कुल 16 प्लेटों पर तमिल भाषा में प्रशासनिक, भूमि दान और राजस्व संबंधी विवरण दर्ज हैं

पुरस्‍कार और सम्‍मान

'ग्रेंड क्रास ऑफ दी रॉयल नार्वेजियन आर्डर ऑफ मैरिट'

  • प्रधानमंत्री मोदी को नार्वे के राजा 'हेराल्‍ड पंचम' ने सर्वोच्‍च नागरिक सम्‍मान 'ग्रेंड क्रास ऑफ दी रॉयल नार्वेजियन आर्डर ऑफ मैरिट' से सम्‍मानित किया।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • ऐतिहासिक दौरा: यह पिछले 43 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की नॉर्वे की पहली आधिकारिक यात्रा है। इससे पहले 1983 में तत्कालीन प्रधानमंत्री ने यहाँ का दौरा किया था
  • किसे दिया जाता है यह पुरस्कार?: 'रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट' की स्थापना 1985 में राजा ओलाव पंचम (King Olav V) द्वारा की गई थी। यह सम्मान विदेशी राष्ट्राध्यक्षों, राजनयिकों और विदेशी नागरिकों को नॉर्वे के हितों को आगे बढ़ाने, मानवता की सेवा और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करने में उनके असाधारण योगदान के लिए दिया जाता है
  • सर्वोच्च श्रेणी: 'ग्रैंड क्रॉस' इस ऑर्डर या सम्मान प्रणाली का सबसे सर्वोच्च स्तर माना जाता है
  • लगातार दो नॉर्डिक सम्मान: नॉर्वे से ठीक एक दिन पहले, प्रधानमंत्री मोदी को स्वीडन की यात्रा के दौरान वहाँ के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार, कमांडर ग्रैंड क्रॉस' से भी नवाजा गया था
  • राजनयिक पृष्ठभूमि: दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध वर्ष 1947 में स्थापित हुए थे

रक्षा समाचार

‘कैट-ए क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर’ योग्यता

  • स्क्वाड्रन लीडर सान्या ‘कैट-ए क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर’ योग्यता हासिल करने वाली प्रथम महिला अधिकारी बन गई हैं।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • सर्वोच्च ग्रेडिंग: 'कैट-ए' (Category-A) भारतीय वायुसेना की इंस्ट्रक्टर ग्रेडिंग प्रणाली में सबसे शीर्ष स्तर है। यह योग्यता केवल उन अत्यधिक कुशल पायलटों को दी जाती है जो असाधारण उड़ान कौशल और परिचालन परिपक्वता प्रदर्शित करते हैं।
  • प्रशिक्षण संस्थान: उन्होंने यह गौरवशाली उपलब्धि तमिलनाडु के चेन्नई में स्थित फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर्स स्कूल (FIS), एयर फोर्स स्टेशन तांबरम से प्राप्त की है
  • प्रोफाइल: स्क्वाड्रन लीडर सान्या को 20 जून 2015 को वायुसेना की फ्लाइंग ब्रांच में नियुक्त (Commissioned) किया गया था। वे 2021 में स्क्वाड्रन लीडर के पद पर पदोन्नत हुई थीं

भारतीय वायुसेना :

  • स्थापना: 8 अक्टूबर 1932 (रॉयल इंडियन एयर फोर्स के रूप में)
  • आदर्श वाक्य: 'नभः स्पृशं दीप्तम्' (Touch the Sky with Glory) — यह भगवद गीता के 11वें अध्याय से लिया गया है
  • सर्वोच्च कमांडर: भारत के राष्ट्रपति
  • वायु सेना प्रमुख (2026): एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत (AP) सिंह (28वें प्रमुख)
  • मुख्यालय: वायु भवन, नई दिल्ली

वायुसेना को 7 कमांड में विभाजित किया गया है:

  • पश्चिमी वायु कमान (WAC): नई दिल्ली (सबसे बड़ी कमांड)
  • पूर्वी वायु कमान (EAC): शिलांग
  • मध्य वायु कमान (CAC): प्रयागराज
  • दक्षिणी वायु कमान (SAC): तिरुवनंतपुरम
  • दक्षिण-पश्चिमी वायु कमान (SWAC): गांधीनगर
  • प्रशिक्षण कमान (TRC): बेंगलुरु
  • रखरखाव कमान (MTC): नागपुर

सौरभ विजय UIDAI के CEO नियुक्‍त

  • वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सौरभ विजय ने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में कार्यभार ग्रहण किया।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • कैडर और बैच: ये महाराष्ट्र कैडर के 1998 बैच के आईएएस अधिकारी हैं।
  • योग्यता: इन्होंने IIT दिल्ली से सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक (B.Tech) किया है।
  • पूर्व अनुभव: UIDAI के CEO बनने से पहले वे महाराष्ट्र सरकार के वित्त विभाग में प्रधान सचिव (व्यय) थे। इसके अतिरिक्त, वे नई दिल्ली में राष्ट्रपति सचिवालय में निदेशक और वाशिंगटन डीसी में विश्व बैंक में सलाहकार के रूप में भी सेवा दे चुके हैं।

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) :

  • प्रकृति : आधार अधिनियम, 2016 के तहत स्थापित एक सांविधिक प्राधिकरण है।
  • मंत्रालय : इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY)
  • मुख्यालय: नई दिल्ली

आधार :

  • जारीकर्ता: भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI)
  • अंक संख्या: 12
  • उद्देश्य: पहचान और पते का प्रमाण
  • विशेषताएं: बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट, आइरिस स्कैन) और जनसांख्यिकीय डेटा पर आधारित
  • लाभ: सरकारी योजनाओं का लाभ, बैंकिंग, मोबाइल फोन कनेक्शन आदि।
  • सुरक्षा: डेटा उल्लंघन, पहचान की चोरी और निगरानी का खतरा
  • विवाद: डेटा गोपनीयता और सुरक्षा पूरी जानकारी के साथ एक इन्‍फोग्राफ बना दीजिए

महत्‍वपूर्ण दिवस

विश्व IBD दिवस

  • सूजन आंत्र रोग जैसे क्रोहन रोग और अल्सरेटिव कोलाइटिस के बारे में वैश्विक जागरूकता फैलाने के उद्देश्‍य से प्रतिवर्ष 19 मई को विश्व सूजन आंत्र रोग दिवस मनाया जाता है।
  • यह मुख्य रूप से क्रोहन रोग और अल्सरेटिव कोलाइटिस जैसी गंभीर और दीर्घकालिक पाचन तंत्र की बीमारियों को कवर करता है।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • प्रतीक चिन्ह : वैश्विक स्तर पर इस बीमारी के प्रति एकजुटता और समर्थन दर्शाने के लिए बैंगनी रिबन का उपयोग किया जाता है और प्रमुख इमारतों को बैंगनी रोशनी से रोशन किया जाता है।
  • शुरुआत: इसे आधिकारिक तौर पर यूरोपियन फेडरेशन ऑफ क्रोहन एंड अल्सरेटिव कोलाइटिस एसोसिएशंस (EFCCA) द्वारा वैश्विक रोगी संगठनों के साथ मिलकर शुरू किया गया था
  • वर्ष 2026 की थीम : "आंत्र रोग की कोई सीमा नहीं: देखभाल तक पहुंच"

सूजन आंत्र रोग (IBD) :

  • क्रोहन रोग : यह मुंह से लेकर गुदा तक पाचन तंत्र के किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकता है, जबकि अल्सरेटिव कोलाइटिस मुख्य रूप से केवल बड़ी आंत और मलाशय तक सीमित रहता है।
  • सूजन की गहराई : क्रोहन रोग में सूजन आंत की दीवारों की सभी परतों तक गहरी हो सकती है, जबकि अल्सरेटिव कोलाइटिस में सूजन केवल आंत की सबसे अंदरूनी परत को प्रभावित करती है।
  • लक्षणों का फैलाव : क्रोहन रोग में सूजन पाचन तंत्र में अलग-अलग हिस्सों में पैच के रूप में दिखाई देती है, जबकि अल्सरेटिव कोलाइटिस में सूजन लगातार एक समान रूप से फैलती है।
  • प्रमुख लक्षण: गंभीर पेट दर्द, ऐंठन, लगातार दस्त (मल के साथ खून आना), अत्यधिक थकान और अचानक वजन कम होना

चर्चित व्‍यक्ति

भुवन चंद्र खंडूरी का निधन

  • उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता भुवन चंद्र खंडूरी का 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • मेजर जनरल का पद: राजनीति में आने से पहले वह भारतीय सेना में एक प्रतिष्ठित अधिकारी थे और मेजर जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए थे।
  • उन्हें उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) से भी सम्मानित किया गया था।
  • सार्वजनिक जीवन और राजनीति में उन्हें सम्मानपूर्वक 'जनरल साहब' के नाम से जाना जाता था

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री: बी.सी. खंडूरी ने दो बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया:

  • प्रथम कार्यकाल: मार्च 2007 से जून 2009 तक
  • द्वितीय कार्यकाल: सितंबर 2011 से मार्च 2012 तक
  • संसदीय करियर: वे गढ़वाल लोकसभा सीट से पांच बार सांसद (MP) चुने गए थे

 

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