08 May, 2026
'लॉजिस्टिक्स ईज़ अक्रॉस डिफरेंट स्टेट्स' (LEADS) 2025 रिपोर्ट
Sat 16 May, 2026
संदर्भ :
- वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) ने 'लॉजिस्टिक्स ईज़ अक्रॉस डिफरेंट स्टेट्स' (LEADS) 2025 रिपोर्ट का 7वां संस्करण जारी किया।
मुख्य बिन्दु :
- यह रिपोर्ट भारत के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लॉजिस्टिक्स (रसद) अवसंरचना, सेवाओं और विनियामक माहौल का आकलन करने वाला एक राष्ट्रीय सूचकांक है।
- यह रिपोर्ट भारत के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लॉजिस्टिक्स (रसद) अवसंरचना, सेवाओं और विनियामक माहौल का आकलन करने वाला एक राष्ट्रीय सूचकांक है।
- उत्पत्ति और प्रेरणा: इस सूचकांक की शुरुआत वर्ष 2018 में की गई थी.
- यह विश्व बैंक के प्रसिद्ध 'लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस इंडेक्स' (LPI) की तर्ज पर आधारित है
- मूल्यांकन के आधार (स्तंभ): यह रिपोर्ट मुख्य रूप से तीन स्तंभों—अवसंरचना, सेवाएं, और नियामक वातावरण के आधार पर राज्यों की रसद सुगमता का मूल्यांकन करती है
- उद्देश्य : राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना और रसद लागत को कम करने के लिए नीतिगत सुधारों का मार्गदर्शन करना
- पूर्ण रूप (Full Form): LEADS का पूरा नाम Logistics Ease Across Different States (विभिन्न राज्यों में सुगम रसद व्यवस्था) है.
- जारीकर्ता मंत्रालय: यह रिपोर्ट वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय (Ministry of Commerce and Industry) द्वारा जारी की जाती है.
- नोडल विभाग: इसे मंत्रालय के अधीन उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) द्वारा तैयार किया जाता है.
- संस्करण (Edition): वर्ष 2025 में जारी की गई यह रिपोर्ट LEADS का 7वां संस्करण है.
- शुरुआत (Inception): इस सूचकांक की शुरुआत वर्ष 2018 में की गई थी.
- वैश्विक आधार: यह सूचकांक विश्व बैंक (World Bank) के 'लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस इंडेक्स' (LPI) पर आधारित है
- नया वर्गीकरण ढांचा: LEADS 2025 में पुराने 3-स्तरीय मॉडल को बदलकर 4-स्तरीय प्रदर्शन ढांचा (Four-Tier Framework) अपनाया गया है.
- वस्तुनिष्ठ संकेतकों का भारांश: साक्ष्य-आधारित और मापने योग्य संकेतकों को 59% वेटेज दिया गया है.
- तकनीकी मूल्यांकन: इसमें प्रमुख सड़क गलियारों पर वाहनों की गति को ट्रैक करने के लिए API-सक्षम स्पीड ट्रैकिंग का उपयोग किया गया है
LEADS 2025: राज्यों/UTs का प्रदर्शन :
| राज्य/संघ राज्य क्षेत्र श्रेणी | एकोनॉमलर्सी (शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्य/संघ राज्य क्षेत्र) | उच्च प्रदर्शनकर्ता (मजबूत और निरंतर परिणाम) | एक्सेलेर्सी (उल्लेखनीय सुधार गति) | विकासोन्मुख (विकास के प्रारंभिक चरण में) |
| तटीय राज्य | तमिलनाडु | गुजरात, केरल, महाराष्ट्र | आंध्र प्रदेश, ओडिशा, गोवा, कर्नाटक | पश्चिम बंगाल |
| स्थल-रुद्ध राज्य (लैंडलॉक) | उत्तर प्रदेश | हरियाणा, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, बिहार | पंजाब, झारखंड, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश | राजस्थान |
| पूर्वोत्तर राज्य | मिजोरम | त्रिपुरा, मेघालय | नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, असम | सिक्किम |
| संघ राज्य क्षेत्र | दिल्ली | जम्मू-कश्मीर, पुडुचेरी | दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव, चंडीगढ़, लद्दाख, लक्षद्वीप | अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह |
LEAPS 2025 के विजेता :
ए. कोर लॉजिस्टिक्स :
- एयर फ्रेट सेवा प्रदाता – फेडेक्स एक्सप्रेस ट्रांसपोर्टेशन एंड सप्लाई चेन सर्विसेज (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड
- समुद्री माल ढुलाई सेवा प्रदाता – MSC एजेंसी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड
- सड़क माल ढुलाई सेवा प्रदाता – सफ़एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिटेड
- रेल माल ढुलाई सेवा प्रदाता – DP वर्ल्ड रेल लॉजिस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड
- मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स (MTO) - पारादीप परिवहन लिमिटेड
- वेयरहाउस सेवा प्रदाता (औद्योगिक और उपभोग्य वस्तुएं) – TVS औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स पार्क
- वेयरहाउस सेवा प्रदाता (कृषि) – इंडिकोल्ड प्राइवेट लिमिटेड
B. MSME :
- MSME लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाता – शिपवेव्स ऑनलाइन लिमिटेड
सी. स्टार्टअप :
- स्टार्टअप – लॉजिस्टिक्स टेक्नोलॉजी सर्विस प्रोवाइडर – मैचलॉग सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड
- स्टार्टअप – लॉजिस्टिक्स ऑपरेशन सेवा प्रदाता – येलोइंग्स डिलीवरी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड
डी. संस्थान :
- लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को बढ़ावा देने वाला शिक्षण संस्थान – IIM मुंबई
ई. विशेष श्रेणियाँ :
- ई-कॉमर्स संचालन के लिए लॉजिस्टिक्स सेवा वितरण – दिल्लीवेरी लिमिटेड
- मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाता (3PL सेवा प्रदाता, फ्रेट फॉरवर्डर, कस्टम ब्रोकर/एजेंट) – इंडेव इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड
भारत के लॉजिस्टिक्स क्षेत्रक की वर्तमान स्थिति एवं चुनौतियाँ :
- वित्तीय वर्ष 2023-24 के अनुसार, भारत में लॉजिस्टिक्स लागत सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 7-8% से कम पर लाना है है।
- देश में लॉजिस्टिक्स क्षेत्रक तीव्र गति से विकसित हो रहा है, किन्तु इसे अनेक संरचनात्मक एवं परिचालन संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रमुख चुनौतियाँ:
- अवसंरचना संबंधी कमियाँ: कई क्षेत्रों में खराब सड़कें, बंदरगाहों पर अत्यधिक भीड़ तथा रेल संपर्क का अभाव लॉजिस्टिक्स दक्षता को प्रभावित करता है।
- सड़क परिवहन पर अत्यधिक निर्भरता: भारत में 60% से अधिक माल ढुलाई सड़क मार्ग से होती है, जिससे ईंधन खपत, ट्रैफिक जाम और परिवहन लागत में वृद्धि होती है।
- असंगठित क्षेत्र का प्रभुत्व: लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में छोटे ऑपरेटरों एवं कंपनियों की अधिक भागीदारी के कारण परिचालन में समन्वय और दक्षता की कमी देखी जाती है।
- अन्य चुनौतियाँ: जटिल विनियामक प्रक्रियाएँ तथा आधुनिक प्रौद्योगिकियों को अपनाने की धीमी गति भी इस क्षेत्र के विकास में बाधा उत्पन्न करती हैं।
नीतिगत और डिजिटल पहलें :
राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति (NLP), 2022:
- लक्ष्य: भारत में लॉजिस्टिक्स लागत को वैश्विक स्तर (GDP के 7-8%) पर लाना और वर्ष 2030 तक भारत को शीर्ष 25 देशों (LPI रैंकिंग) में शामिल करना।
- CLAP (Comprehensive Logistics Action Plan): इसके तहत 8 प्रमुख क्षेत्रों जैसे डिजिटल लॉजिस्टिक्स, मानव संसाधन विकास, और माल ढुलाई की दक्षता पर काम किया जा रहा है।
ULIP (यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म):
- यह एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो परिवहन मंत्रालय, नागरिक उड्डयन, जहाजरानी और रेलवे जैसे विभिन्न सरकारी विभागों के डेटा को एक साथ लाता है। इससे रीयल-टाइम कार्गो ट्रैकिंग संभव हुई है और कागजी कार्रवाई कम हुई है।
ई-लॉग्स (e-Logs) पोर्टल:
- रसद उद्योग संघों के लिए अपनी परिचालन समस्याओं और विनियामक बाधाओं को सीधे सरकार के सामने उठाने के लिए एक डिजिटल शिकायत निवारण प्रणाली।
एकीकृत अवसंरचना विकास :
- पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (PM GatiShakti): यह बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो 16 मंत्रालयों (रेलवे और सड़क सहित) को एकीकृत योजना और कार्यान्वयन के लिए एक मंच पर लाता है। इसका उद्देश्य विभागीय बाधाओं (Silos) को खत्म करना है।
- मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स पार्क (MMLPs): 'भारतमला परियोजना' के तहत देश भर के प्रमुख रणनीतिक स्थानों पर अत्याधुनिक MMLPs विकसित किए जा रहे हैं। ये पार्क माल के भंडारण, सीमा शुल्क मंजूरी (Customs Clearance) और परिवहन के विभिन्न साधनों (सड़क, रेल, वायु) के बीच आसान हस्तांतरण की सुविधा प्रदान करते हैं।
परिवहन माध्यमों का आधुनिकीकरण :
- रेलवे (रेल मार्ग): डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC): विशेष रूप से मालगाड़ियों के लिए बनाए गए 'पूर्वी' और 'पश्चिमी' फ्रेट कॉरिडोर माल ढुलाई की गति को दोगुना करने और यात्री लाइनों पर भीड़ कम करने में क्रांतिकारी भूमिका निभा रहे हैं।
- सड़क मार्ग (सड़क नेटवर्क): भारतमला परियोजना: इसके तहत आर्थिक गलियारों (Economic Corridors), एक्सप्रेसवे और सीमावर्ती सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है ताकि माल की आवाजाही तेज हो सके।
- FASTag और ई-वे बिल (e-Way Bill): टोल प्लाजा और राज्य सीमाओं पर वाहनों की प्रतीक्षा समय (Waiting Time) को लगभग समाप्त कर दिया है।
- जहाजरानी और जलमार्ग (समुद्र और अंतर्देशीय जलमार्ग):सागरमाला परियोजना: बंदरगाहों के आधुनिकीकरण, उनके रेल-सड़क संपर्क में सुधार और तटीय नौवहन (Coastal Shipping) को बढ़ावा देने के लिए।
- राष्ट्रीय जलमार्ग (National Waterways): अंतर्देशीय जलमार्गों (जैसे गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी) का विकास करना, जो माल ढुलाई का सबसे सस्ता और पर्यावरण-अनुकूल माध्यम है।









