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किम्बर्ले प्रोसेस अंतर-सत्रीय बैठक 2026

Fri 15 May, 2026

संदर्भ :

  • भारत ने अपनी अध्यक्षता के अंतर्गत मुंबई में 'किम्बर्ले प्रोसेस (KP) अंतर-सत्रीय बैठक 2026' की सफल मेजबानी की।

मुख्‍य बिन्‍दु :

  • बैठक का मुख्य उद्देश्य : वैश्विक प्राकृतिक हीरा मूल्य श्रृंखला में पारदर्शिता, अनुपालन और उपभोक्ता विश्वास को मजबूत करना तथा संघर्षरत क्षेत्रों के हीरों को वैध बाजार में प्रवेश करने से रोकना
  • भारत ने 1 जनवरी, 2026 को किम्बर्ले प्रोसेस की अध्यक्षता ग्रहण की थी
  • मुंबई में आयोजित इस चार दिवसीय अंतर-सत्रीय बैठक का नेतृत्व केपी अध्यक्ष (KP Chair) श्री सुचिंद्र मिश्रा ने किया।
  • भारत की अध्यक्षता का विषय : "3C" - विश्वसनीयता, अनुपालन और उपभोक्ता विश्वास - पर केंद्रित है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय सहयोग और संवाद के माध्यम से जिम्मेदारी से प्राप्त प्राकृतिक हीरों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।
  • त्रिपक्षीय संरचना: बैठक में सरकारों (60 प्रतिभागी जो 86 देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं), उद्योग निकायों (जैसे विश्व हीरा परिषद - WDC) और नागरिक समाज के वैश्विक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया
  • आधुनिकीकरण पर चर्चा: बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य के अनुसार "संघर्ष वाले हीरों" की परिभाषा को व्यापक बनाने और इसमें सुधार करने पर बल दिया गया
  • तकनीकी एकीकरण: हीरों की ट्रेसबिलिटी के लिए ब्लॉकचेन तकनीक और डिजिटल सत्यापन उपकरणों के उपयोग पर विमर्श हुआ
  • कारीगरों का कल्याण: विकासशील देशों में कारीगरों और जलोढ़ हीरा खनिकों के सामाजिक-आर्थिक नियमितीकरण और आजीविका सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया

वैश्विक हीरा व्यापार में भारत का आर्थिक महत्त्व :

  • पॉलिशिंग का वैश्विक केंद्र: भारत दुनिया के लगभग 90% कच्चे हीरों की कटाई और पॉलिशिंग करता है
  • टर्नओवर में हिस्सेदारी: मूल्य के मामले में वैश्विक हीरा कारोबार का लगभग 75% हिस्सा भारत के पास है, जिसके मुख्य केंद्र सूरत और मुंबई हैं
  • कच्चे माल का आयात: भारत मुख्य रूप से संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बेल्जियम और रूस से कच्चे हीरों का आयात करता है
  • प्रयोगशाला में विकसित हीरे (LGD): भारत Lab-Grown Diamonds के बड़े उत्पादक के रूप में उभरा है, जिसका वैश्विक उत्पादन में 15% से अधिक का योगदान है

किम्बर्ले प्रोसेस (KP) और केपीसीएस (KPCS) क्या है? :

घटक विवरण
उत्पत्ति वर्ष 2000 में दक्षिण अफ़्रीकी देशों द्वारा शुरुआत; संयुक्त राष्ट्र महासभा संकल्प 55/56 (2000) के तहत स्थापित.
प्रकृति यह कोई औपचारिक अंतर्राष्ट्रीय संगठन या कानूनी रूप से बाध्यकारी संधि नहीं है। यह राष्ट्रीय कानूनों के माध्यम से लागू होता है.
सर्टिफिकेशन स्कीम (KPCS) वर्ष 2003 में लागू। इसके तहत कच्चे हीरों के शिपमेंट के साथ एक 'केपी प्रमाणपत्र' होना अनिवार्य है, जो प्रमाणित करता है कि हीरे 'संघर्ष-मुक्त' हैं.
भारत की भूमिका भारत इसके संस्थापक सदस्यों में से एक है और वर्ष 2026 में तीसरी बार इसकी अध्यक्षता कर रहा है.

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