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Thu 14 May, 2026

राष्‍ट्रीय समाचार

"मिजोरम अदरक मिशन" का शुभारंभ

  • पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मिजोरम में ₹189.79 करोड़ की लागत वाले "मिजोरम अदरक मिशन" का शुभारंभ किया।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • उद्देश्य : मिमिजोरम के फार्मा-ग्रेड अदरक को मूल्यवर्धन, प्रसंस्करण और निर्यात के माध्यम से वैश्विक प्रीमियम ब्रांड बनाना
  • कुल बजट: ₹189.79 करोड़
  • लक्ष्य समूह: राज्य के लगभग 20,000 किसान परिवारों को इस एकीकृत मूल्य-श्रृंखला पारिस्थितिकी तंत्र से जोड़ना
  • आर्थिक प्रासंगिकता: मिजो अदरक में 6-8% ओलियोरेसिन पाया जाता है, जो वैश्विक औसत (~3%) से दोगुना है।
  • वर्तमान में किसानों को केवल ₹8-15/किग्रा मिलता है, जबकि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इसका मूल्य ₹500/किग्रा से अधिक तक पहुंच जाता है।
  • मिशन का लक्ष्य इस मध्यस्थता को समाप्त करना है।
  • चार मुख्य स्तंभ: अभिसरण, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और बाजार एकीकरण
  • मुख्य प्रसंस्करण हब : मिजोरम के सबसे बड़े अदरक उत्पादक जिले चम्फाई के मुआलकावी में स्थापित किया जाएगा
  • जीआई टैग किस्में: 'थिंगपुई' और 'थिंगलैडुम' को वर्ष 2021 में भौगोलिक संकेतक (GI Tag) मिल चुका है

नेतृत्व :

  • कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय
  • ग्रामीण विकास मंत्रालय
  • खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय
  • NABARD, ICAR, और APEDA
  • प्रसंस्करण घटक के लिए उत्तर पूर्वी परिषद (NEC) के फोकस्ड डेवलपमेंट कंपोनेंट से ₹30.13 करोड़ की वित्तीय सहायता

यह मिशन केंद्र सरकार की "ब्रांड नॉर्थ ईस्ट" (Brand North East) रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत पूर्वोत्तर के प्रत्येक राज्य को एक विशिष्ट कृषि पहचान दी जा रही है:

  • सिक्किम: जैविक राज्य
  • अरुणाचल प्रदेश: कीवी
  • त्रिपुरा: क्वीन अनानास
  • नागालैंड: कॉफी
  • मेघालय: लाकाडोंग हल्दी
  • मिजोरम: अदरक (नीति आयोग द्वारा मिजोरम को भारत की 'अदरक राजधानी' भी घोषित किया गया है , नवंबर 2025 में)

डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के उन्नयन और आधुनिकीकरण को मंजूरी

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नागपुर के डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के उन्नयन और आधुनिकीकरण को मंजूरी दी।
  • यह विकास कार्य सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत दीर्घकालिक लाइसेंस के माध्यम से किया जाएगा।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • भूमि पट्टा विस्तार : मंत्रिमंडल ने भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) के स्वामित्व वाली भूमि की पट्टा अवधि को 6 अगस्त 2039 से आगे बढ़ाने की मंजूरी दी।
  • रियायत अवधि : यह विस्तार मिहान इंडिया लिमिटेड (MIL) को GMR नागपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (GNIAL) को व्यावसायिक संचालन तिथि (COD) से 30 वर्षों की अवधि के लिए दीर्घकालिक लाइसेंस प्रदान करने में सक्षम बनाएगा
  • सह-समान अवधि : नया पट्टा विस्तार अब GNIAL के 30 वर्ष के रियायत समझौते के समानांतर चलेगा, जिससे परिचालन में स्पष्टता आएगी।
  • संयुक्त उद्यम : वर्ष 2009 में AAI (49%) और महाराष्ट्र एयरपोर्ट डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (MADC - 51%) के बीच मिहान इंडिया लिमिटेड (MIL) का गठन किया गया था
  • निविदा और विवाद: वर्ष 2016 में PPP मॉडल के लिए वैश्विक बोलियां आमंत्रित की गईं, जिसमें GMR समूह सर्वोच्च बोलीदाता (राजस्व हिस्सेदारी 14.49%) बना। मार्च 2020 में MIL ने इस निविदा को रद्द कर दिया था
  • न्यायिक हस्तक्षेप: बॉम्बे हाई कोर्ट और उसके बाद 27 सितंबर 2024 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने GMR के पक्ष में फैसला सुनाया, जिसके बाद 8 अक्टूबर 2024 को आधिकारिक रियायत समझौते पर हस्ताक्षर किया गया।

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) :

  • स्थापना: अप्रैल, 1995 में, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण अधिनियम, 1994 के तहत
  • विलय: इसका गठन पूर्ववर्ती 'राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण' और 'भारतीय अंतर्राष्ट्रीय विमानपत्तन प्राधिकरण' को मिलाकर किया गया
  • मुख्यालय: New Delhi
  • मंत्रालय: नागरिक उड्डयन मंत्रालय

भारत इनोवेट्स 2026

  • केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भारत इनोवेट्स 2026 के लिए आयोजित उद्योग जगत के नेताओं के गोलमेज सम्मेलन की अध्यक्षता की।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • भारत इनोवेट्स 2026 नवाचार साझेदारी के लिए एक वैश्विक मंच है।
  • यह भारत के डीप-टेक स्टार्टअप्स और अनुसंधान-आधारित नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को अंतरराष्ट्रीय निवेशकों, विश्वविद्यालयों, उद्योग जगत के नेताओं और नीति निर्माताओं के सामने प्रदर्शित करता है।
  • यह आयोजन 13 विषयगत STEM क्षेत्रों में 100 से अधिक स्टार्टअप्स को एक साथ लाएगा

'सतही कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को प्रोत्साहन देने की योजना'

  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹37,500 करोड़ के वित्तीय परिव्यय के साथ 'सतही कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को प्रोत्साहन देने की योजना' को मंजूरी दी।
  • यह योजना भारत के राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण मिशन (2021) को गति देने और 2030 तक 100 मिलियन MT कोयले के गैसीकरण के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • कुल वित्तीय आवंटन: ₹37,500 करोड़
  • कोयला गैसीकरण का राष्ट्रीय लक्ष्य (2030 तक): 100 मिलियन टन (MT) कोयले का गैसीकरण
  • इस योजना के तहत विशिष्ट लक्ष्य: लगभग 75 मिलियन टन कोयला/लिग्नाइट का गैसीकरण करना
  • अधिकतम वित्तीय सहायता (Incentive Subsidies): संयंत्र और मशीनरी (Plant & Machinery) की लागत का अधिकतम 20%
  • प्रोत्साहन राशि की किस्तें: 4 समान किस्तें (जो परियोजना के लक्ष्यों/Milestones पर आधारित होंगी)
  • अनुमानित कुल निवेश: इस योजना से देश में ₹2.5 लाख करोड़ से ₹3 लाख करोड़ का निवेश आने की उम्मीद है

योजना के तहत तय की गई वित्तीय सीमाएं (Caps) :

  • एकल परियोजना (Single Project) सीमा: अधिकतम ₹5,000 करोड़
  • एकल उत्पाद (Single Product) सीमा: अधिकतम ₹9,000 करोड़ (सिंथेटिक नेचुरल गैस और यूरिया को छोड़कर)
  • एकल व्यापारिक समूह (Single Entity Group) सीमा: सभी परियोजनाओं को मिलाकर अधिकतम ₹12,000 करोड़
  • कोयला लिंकेज अवधि (Coal Linkage Tenure): गैर-विनियमित क्षेत्र (NRS) के लिए इस अवधि को बढ़ाकर 30 वर्ष कर दिया गया है.
  • भारत का कुल कोयला भंडार: लगभग 401 बिलियन टन (विश्व के सबसे बड़े भंडारों में से एक).
  • भारत का कुल लिग्नाइट भंडार: लगभग 47 बिलियन टन.
  • ऊर्जा मिश्रण (Energy Mix) में कोयले का हिस्सा: भारत की कुल ऊर्जा आपूर्ति में कोयले का योगदान 55% से अधिक है.
  • भारत का आयात बिल (वित्त वर्ष 2025): एलएनजी, यूरिया, मेथनॉल जैसे उत्पादों के लिए भारत का आयात बिल लगभग ₹2.77 लाख करोड़ था

कोयला गैसीकरण क्या है? :

  • यह एक थर्मो-केमिकल (उष्मीय-रासायनिक) प्रक्रिया है, जिसमें उच्च तापमान और दबाव पर कोयले या लिग्नाइट को ऑक्सीजन और भाप के साथ आंशिक रूप से ऑक्सीकृत किया जाता है।
  • उत्पाद (Syngas): इस प्रक्रिया से ठोस कोयला 'सिंथेसिस गैस में बदल जाता है। यह मुख्य रूप से कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), हाइड्रोजनकार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन का मिश्रण होती है।

अहमदाबाद-सरखेज – धोलेरा सेमी हाई-स्पीड दोहरी लाइन परियोजना को मंजूरी

  • आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति (CCEA) ने लगभग 20,667 करोड़ रुपये की लागत से अहमदाबाद-सरखेज – धोलेरा सेमी हाई-स्पीड दोहरी लाइन परियोजना को मंजूरी दी।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • प्रथम स्वदेशी सेमी हाई-स्पीड परियोजना: यह पूर्णतः स्वदेशी रूप से विकसित तकनीक पर आधारित भारतीय रेलवे का पहला सेमी हाई-स्पीड कॉरिडोर है
  • कुल अनुमानित लागत: ₹20,667 करोड़
  • कुल लंबाई: लगभग 134 किलोमीटर
  • अधिकतम डिजाइन स्पीड: 220 किमी/घंटा
  • परिचालन स्पीड (Operating Speed): 200 किमी/घंटा
  • पूर्ण होने का वर्ष (Target Year): 2030-31
  • विशेषता: यह पूर्णतः स्वदेशी तकनीक (Indigenous Technology) पर आधारित भारतीय रेलवे का पहला सेमी हाई-स्पीड प्रोजेक्ट है
  • संबंधित योजना: इसे पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार किया जा रहा है

IP कैटलिस्ट और डिजिटल प्लेटफॉर्म का शुभारंभ

  • इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने नई दिल्ली में "पेटेंट से उत्पाद तक: इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी में बौद्धिक संपदा (IP) के व्यावसायीकरण को गति देना" विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया।
  • इस अवसर पर MeitY के सचिव एस. कृष्णन ने देश में बौद्धिक संपदा और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त करने के लिए 'आईपी कैटलिस्ट' (IP Catalyst) पहल और उसके आधिकारिक डिजिटल प्लेटफॉर्म (cipie.in) का शुभारंभ किया।

भारत में पेटेंट फाइलिंग के आंकड़े :

  • वित्तीय वर्ष 2024-25: भारत ने ऐतिहासिक 1,10,375 पेटेंट आवेदन दर्ज किए, जिसमें अकेले इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी क्षेत्र का योगदान लगभग 44% था
  • वित्तीय वर्ष 2025-26: कुल पेटेंट फाइलिंग बढ़कर 1,43,729 हो गई, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी क्षेत्र में 52% की अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई

भागीदारी से भाग्योदय" की परिकल्पना के तहत राष्ट्रीय सम्मेलन

  • केन्‍द्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने "भागीदारी से भाग्योदय" की परिकल्पना के तहत "अल्पसंख्यक कल्याण-विकसित भारत के लिए AI के माध्यम से समावेशी विकास" विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • सम्मेलन का उद्देश्य : समावेशी शासन को मजबूत करना, नीतिगत पहुंच बढ़ाना और देश भर में अल्पसंख्यक समुदायों के लिए प्रौद्योगिकी आधारित कल्याणकारी पहलों को बढ़ावा देना
  • सम्मेलन की अध्यक्षता : अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के सचिव डॉ. श्रीवत्स कृष्ण द्वारा
  • प्रतिभागी: बैठक में विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) के अल्पसंख्यक कल्याण विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों, केंद्रीय मंत्रालयों के प्रतिनिधियों और अग्रणी टेक/AI कंपनियों के विशेषज्ञों ने भाग लिया

14 खरीफ फसलों के MSP में वृद्धि को मंजूरी

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने विपणन सीजन 2026-27 के लिए 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में वृद्धि को मंजूरी दी।
  • यह निर्णय केंद्रीय बजट 2018-19 की घोषणा के अनुरूप फसल उत्पादन की अखिल भारतीय भारित औसत लागत (A2+FL) का कम से कम 1.5 गुना (50% लाभ) मूल्य सुनिश्चित करने की नीति के तहत लिया गया है।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • धान (Paddy): 'सामान्य' किस्म के धान का MSP ₹72 बढ़ाकर ₹2,441 प्रति क्विंटल कर दिया गया है (पिछला ₹2,369 था). 'ग्रेड ए' धान का मूल्य ₹2,461 निर्धारित हुआ है
  • सर्वाधिक पूर्ण वृद्धि: सबसे अधिक वृद्धि सूरजमुखी के बीज में ₹622 प्रति क्विंटल की गई है, जिससे इसका नया MSP ₹8,343 हो गया है
  • अन्य प्रमुख वृद्धियाँ: इसके बाद कपास (मध्यम रेशा) में ₹557 (नया मूल्य ₹8,267), नाइजरसीड में ₹515 (नया मूल्य ₹10,052) और तिल (Sesamum) में ₹500 (नया मूल्य ₹10,346) प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है
  • अधिकतम रिटर्न/लाभ (Expected Margins): किसानों को उनकी उत्पादन लागत पर सबसे अधिक अनुमानित लाभ मूंग (61%) में मिलेगा, जिसके बाद बाजरा (56%), मक्का (56%) और अरहर/तुर (54%) का स्थान है। अन्य सभी फसलों के लिए लाभ ठीक 50% रखा गया है
  • वित्तीय परिव्यय: इस सीजन में MSP व्यवस्था के तहत किसानों को कुल अनुमानित भुगतान ₹2.60 लाख करोड़ होने की उम्मीद है और लगभग 824.41 लाख मीट्रिक टन (LMT) वार्षिक खरीद का अनुमान है

न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य (MSP):

  • यह वह न्यूनतम मूल्य है जिस पर सरकार किसानों से उनकी फसलों को खरीदने की गारंटी देती है, चाहे बाजार मूल्य इससे कम ही क्यों न हो।
  • शुरुआत: 1966-67 (गेहूं के लिए)
  • घोषणा करने वाली संस्था: कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार
  • सिफारिश करने वाली संस्था: कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (Commission for Agricultural Costs and Prices : CACP)
  • घोषणा की समयावधि: वर्ष में दो बार : एक बार खरीफ और एक बार रबी सीज़न के लिए
  • वर्तमान में, CACP 22 फसलों के लिए MSP की सिफारिश करता है और गन्ने के लिए यह उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) की सिफारिश करता है।
  • अनाज : धान, गेहूँ, जौ, रागी, मक्का, ज्वार, बाजरा,
  • दालें: चना, अरहर, मूंग, उड़द, मसूर
  • तिलहन : मूंगफली, रेपसीड, सोयाबीन, तिल, सूरजमुखी, कुसुम, नाइजर बीज
  • वाणिज्यिक फसलें : खोपरा, कपास, कच्चा जूट, गन्ना FRP (Fair and Remunerative Price)

खरीफ फसल :

  • बुआई और कटाई का समय: खरीफ फसलें जून-जुलाई में दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत के साथ बोई जाती हैं और अक्टूबर-नवंबर (शरद ऋतु) में काटी जाती हैं।
  • प्रमुख खरीफ फसलें: धान (चावल), मक्का, बाजरा, ज्वार, रागी, तुअर (अरहर), मूंग, उड़द, मूंगफली, सोयाबीन, सूरजमुखी, तिल, नाइजरसीड और कपास।

16वीं पेंशन अदालत का शुभारंभ

  • कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज नई दिल्ली में 16वीं पेंशन अदालत का शुभारंभ किया।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • आयोजक: कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के तहत आने वाला पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग (DoPPW)
  • मामलों का निपटारा: कुल 985 लंबित मामलों में से लगभग 74% मामलों (728 मामलों) का मौके पर ही (On-the-spot) निवारण किया गया
  • शामिल मंत्रालय: इस अदालत में कुल 37 मंत्रालयों/विभागों ने हिस्सा लिया
  • शुरुआत का वर्ष: पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग (DoPPW) द्वारा पहली पेंशन अदालत वर्ष 2017 में शुरू की गई थी
  • उद्देश्य: पेंशनभोगियों की शिकायतों का 'ऑन द स्पॉट' (मौके पर ही) निर्णायक समाधान करना ताकि उन्हें कोर्ट-कचहरी के चक्कर न लगाने पड़ें.
  • ऐतिहासिक रिकॉर्ड: अब तक आयोजित कुल 15 पेंशन अदालतों में 27,812 मामलों में से 19,948 (71.72% से अधिक) का निवारण किया जा चुका है
  • CPENGRAMS पोर्टल: पेंशन अदालत में इस पोर्टल पर 45 दिनों से अधिक समय से लंबित शिकायतों को ही सुनवाई के लिए उठाया गया
  • CPENGRAMS का फुल फॉर्म: Centralized Pension Grievance Redress and Monitoring System (केंद्रीकृत पेंशन शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली)
  • अनुभव पोर्टल (Anubhav Portal): सेवानिवृत्त कर्मचारियों द्वारा राष्ट्र निर्माण के अपने अनुभवों को साझा करने के लिए इसे मार्च 2015 में पीएम मोदी की पहल पर लॉन्च किया गया

दिल्ली के पहले समर्पित ANTF पुलिस स्टेशन की स्थापना को मंजूरी

  • दिल्ली के उपराज्यपाल (L-G) तरनजीत सिंह संधू ने दिल्ली के पहले समर्पित एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) पुलिस स्टेशन की स्थापना को मंजूरी दी।
  • यह थाना मादक पदार्थों के तस्करों के वित्तीय नेटवर्क की जांच करने और 'नारको-अपराधियों' की अवैध संपत्ति को कुर्क करने पर विशेष ध्यान केंद्रित करेगा

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • नशामुक्त दिल्ली 2027: इस विशेष थाने की स्थापना का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2027 तक दिल्ली को पूरी तरह से नशामुक्त बनाने के लक्ष्य को हासिल करना है
  • सख्त कानूनी कार्रवाई: इसके तहत स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 (NDPS Act, 1985) और PITNDPS अधिनियम, 1988 के कड़े प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा।

चर्चित व्‍यक्ति

CBI निदेशक प्रवीण सूद

  • केंद्र सरकार ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के निदेशक प्रवीण सूद का कार्यकाल 24 मई 2026 से एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया है, जिसके बाद अब वे मई 2027 तक इस पद पर बने रहेंगे।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • मूल कानून: CBI का गठन दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (DSPE) अधिनियम, 1946 के तहत किया गया है।
  • निश्चित कार्यकाल: केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) अधिनियम, 2003 के तहत CBI निदेशक को 2 वर्ष का न्यूनतम और सुरक्षित कार्यकाल प्रदान किया जाता है।
  • कार्यकाल विस्तार (Extension): वर्ष 2021 में सरकार द्वारा लाए गए अध्यादेश (संशोधन) के तहत, DSPE अधिनियम में बदलाव कर केंद्र सरकार को यह शक्ति दी गई कि वह जनहित में CBI निदेशक का कार्यकाल 1-1 वर्ष करके अधिकतम 5 वर्ष तक (मूल 2 वर्ष + 3 वर्ष विस्तार) बढ़ा सकती है। प्रवीण सूद को मिला यह दूसरा सेवा विस्तार (पहला मई 2025 में मिला था) इसी नियम के तहत वैध है।
  • प्रवीण सूद का परिचय: ये 1986 बैच के कर्नाटक कैडर के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी हैं और पूर्व में कर्नाटक के पुलिस महानिदेशक (DGP) रह चुके हैं। इन्हें मई 2023 में 2 वर्ष के लिए नियुक्त किया गया था।
  • CBI निदेशक की नियुक्ति और कार्यकाल विस्तार की सिफारिश एक उच्च स्तरीय त्रि-सदस्यीय समिति द्वारा की जाती है, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) :

  • स्थापना : 1963, गृह मंत्रालय के प्रस्ताव से स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट (SPE) का नाम बदलकर CBI रखा गया
  • किस कानून से शक्ति मिलती है?: दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (DSPE) अधिनियम, 1946.
  • किसकी सिफारिश पर बना?: भ्रष्टाचार निवारण के लिए गठित संथानम समिति (1962-64) की सिफारिश पर
  • मुख्यालय : नई दिल्ली
  • प्रथम निदेशक : डी. पी. कोहली (धर्मनाथ प्रसाद कोहली)—इन्होंने 1 अप्रैल 1963 से 31 मई 1968 तक कार्यभार संभाला था। उन्हें 1967 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था
  • मंत्रालय: शुरुआत में यह गृह मंत्रालय के अधीन था, लेकिन वर्तमान में यह कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के तहत काम करता है

आर. मुकुंदन

  • टाटा केमिकल्स के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) आर. मुकुंदन ने वर्ष 2026-27 के लिए भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के अध्यक्ष का पदभार ग्रहण किया।
  • वे 2025-26 के लिए उद्योग निकाय के नामित अध्यक्ष थे।
  • उन्होंने राजीव मेमानी का स्थान लिया है।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • भारत बायोटेक इंटरनेशनल की प्रबंध निदेशक सुचित्रा के. एला ने 2026-27 के लिए सीआईआई के नामित अध्यक्ष के रूप में पदभार ग्रहण किया।
  • आरपी-संजिव गोयनका समूह के उपाध्यक्ष शशवत गोयनका ने 2026-27 के लिए सीआईआई के उपाध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला है।
  • गोयनका ने हाल ही में उद्योग निकाय की पूर्वी क्षेत्रीय परिषद के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया था।

भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) :

  • प्रकृति : यह एक गैर-सरकारी, गैर-लाभकारी, उद्योग-नेतृत्व वाला और उद्योग-प्रबंधित संगठन है
  • स्थापना : इसकी स्थापना वर्ष 1895 में हुई थी (यह भारत के सबसे पुराने व्यावसायिक संघों में से एक है)

सुसान एलियास

  • दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफंस कॉलेज ने 'सुसान एलियास' को अपनी पहली महिला प्रिंसिपल नियुक्त किया।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • ऐतिहासिक घटना: वर्ष 1881 में स्थापित इस 145 साल पुराने संस्थान के इतिहास में पहली बार किसी महिला को प्रिंसिपल नियुक्त किया गया है।
  • क्रम संख्या: प्रोफेसर सुसान एलियास सेंट स्टीफंस कॉलेज की 14वीं प्रिंसिपल होंगी।
  • उत्तराधिकारी: वह प्रोफेसर जॉन वर्गीज का स्थान लेंगी
  • मंजूरी: इस नियुक्ति की घोषणा कॉलेज की सर्वोच्च परिषद (Supreme Council) द्वारा की गई, जिसके अध्यक्ष दिल्ली के बिशप राइट रेवरेंड डॉ. पॉल स्वरूप हैं।

सेंट स्टीफंस कॉलेज: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

  • स्थापना: इसकी स्थापना 1881 में कैंब्रिज मिशन टू दिल्ली द्वारा की गई थी और यह दिल्ली विश्वविद्यालय (स्थापना: 1922) के सबसे पुराने घटक कॉलेजों में से एक है।
  • सह-शिक्षा (Co-education): कॉलेज ने 1975 से महिला छात्रों को प्रवेश देना शुरू किया था, लेकिन नेतृत्व का पद 2026 तक पुरुष प्रधान ही बना रहा।
  • महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य: वर्ष 1906 में सुशील कुमार रुद्रा इस कॉलेज के पहले भारतीय प्रिंसिपल बने थे, जिनके घर पर महात्मा गांधी ठहरे थे और असहयोग आंदोलन की रूपरेखा तैयार की गई थी।

अंतरराष्ट्रीय समाचार

भारत-उज्बेकिस्तान के विदेश कार्यालय के विचार- विमर्श का 17वां दौर

  • भारत और उज्बेकिस्तान के विदेश कार्यालय के विचार- विमर्श का 17वां दौर आज नई दिल्ली में आयोजित किया गया।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • सह-अध्यक्षता: भारत के विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज और उज्बेकिस्तान के प्रथम उप विदेश मंत्री बखरमजोन अलोयेव द्वारा
  • प्रमुख सहयोगी क्षेत्र: दोनों पक्षों ने व्यापार, निवेश, पर्यटन, ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी (IT), नवाचार, शिक्षा, संस्कृति और कांसुलर मुद्दों सहित द्विपक्षीय संबंधों के संपूर्ण दायरे की समीक्षा की

उज्बेकिस्तान :

  • दोहरे भू-आबद्ध' देशों में से एक है (दूसरा लिकटेंस्टाइन है)
  • पड़ोसी देश: इसकी सीमाएं पांच देशों से लगती हैं—उत्तर और उत्तर-पश्चिम में कजाकिस्तान, पूर्व में किर्गिस्तान, दक्षिण-पूर्व में ताजिकिस्तान, दक्षिण में अफगानिस्तान, और दक्षिण-पश्चिम में तुर्कमेनिस्तान
  • प्रमुख नदियाँ: अमु दरिया और सिर दरिया
  • राजधानी: ताशकंद, यहीं 1966 में ऐतिहासिक 'ताशकंद समझौता' हुआ था
  • मुद्रा : उज्बेकिस्तान सोम (UZS)
  • आधिकारिक भाषा: उज्बेक
  • राष्ट्रपति : शावकत मिर्ज़ियोयेव

भारत-उज्बेकिस्तान संबंध:

  • भारत, 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद उज्बेकिस्तान की संप्रभुता को मान्यता देने वाले शुरुआती देशों में से था
  • दोनों देशों के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध 1992 में ताशकंद में स्थापित हुए थे
  • 'डस्टलिक' (DUSTLIK): यह भारत और उज्बेकिस्तान के बीच आयोजित होने वाला एक वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यास है, इसका 7वां संस्करण हाल ही में 'गुरुम सराय फील्ड ट्रेनिंग एरिया' (उज्बेकिस्तान) में संपन्न हुआ

श्री बासुकी माध्यमिक विद्यालय की आधारशिला : नेपाल

  • नेपाल के काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास के प्रथम सचिव नारायण सिंह और मेलेख ग्रामीण नगरपालिका के अध्यक्ष ज्वाला सिंह सऊद ने आज संयुक्‍त रूप से अचम जिले की मेलेख ग्रामीण नगरपालिका में स्थित श्री बासुकी माध्यमिक विद्यालय की आधारशिला रखी।
  • यह विद्यालय भवन भारत सरकार की लगभग 38 लाख नेपाली रुपये की वित्तीय सहायता से निर्मित किया जा रहा है।

नेपाल :

  • आधिकारिक नाम: संघीय लोकतान्त्रिक गणराज्य नेपाल
  • राजधानी: काठमांडू (यह नेपाल का सबसे बड़ा शहर भी है)
  • राष्ट्रपति: राम चंद्र पौडेल
  • प्रधानमंत्री: बालेन्द्र शाह 'बालेन'
  • संसद का नाम: संघीय संसद (इसके दो सदन हैं - प्रतिनिधि सभा और राष्ट्रीय सभा)
  • भूगोलीय विभाजन: नेपाल मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों में बंटा है - तराई (मैदानी), पहाड़ी और पर्वतीय क्षेत्र
  • सर्वोच्च बिंदु: माउंट एवरेस्ट (ऊंचाई: 8848.86 मीटर), जिसे नेपाल में 'सागरमाथा' कहा जाता है। विश्व की 10 सबसे ऊंची चोटियों में से 8 नेपाल में हैं
  • प्रमुख नदियाँ: कोसी (महाकाली), गंडकी (नारायणी), और कर्णाली (घाघरा)
  • मुद्रा (Currency): नेपाली रुपया (NPR).
  • राजभाषा: नेपाली (देवनागरी लिपि)
  • भगवान बुद्ध का जन्मस्थान: बौद्ध धर्म के प्रवर्तक गौतम बुद्ध का जन्मस्थान लुम्बिनी, नेपाल के दक्षिणी भाग में स्थित है
  • सार्क (SAARC) मुख्यालय: दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) का सचिवालय काठमांडू में स्थित है

कंट्री स्ट्रेटेजिक अपॉर्चुनिटीज प्रोग्राम' का शुभारंभ

  • भारत सरकार और अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष (IFAD) ने नई दिल्ली में आठ-वर्षीय 'कंट्री स्ट्रेटेजिक अपॉर्चुनिटीज प्रोग्राम' (COSOP) 2026-2033 का शुभारंभ किया।
  • यह कार्यक्रम भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन बढ़ाने पर केंद्रित है।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

मुख्य उद्देश्य :

  • ग्रामीण आय में वृद्धि: पूरे भारत में ग्रामीण परिवारों की आय को मजबूत करना और सतत आजीविका के अवसरों का विस्तार करना।
  • लचीलापन (Resilience) बढ़ाना: ग्रामीण समुदायों की सामाजिक, आर्थिक और जलवायु सहनशीलता को सुदृढ़ करना।
  • रणनीतिक संरेखण: यह कार्यक्रम भारत सरकार के 'विकसित भारत @2047' विजन के अनुरूप तैयार किया गया है।
  • ज्ञान प्रणाली का विस्तार: सफल ग्रामीण विकास मॉडलों को न केवल भारत में बल्कि ग्लोबल साउथ (Global South) के अन्य देशों (जैसे अफ्रीका, दक्षिण-पूर्वी एशिया और लैटिन अमेरिका) में साझा करना।

लक्षित समूह और भौगोलिक क्षेत्र :

  • लक्षित जनसंख्या: इसके तहत लगभग 30 लाख ग्रामीण परिवारों (1.32 करोड़ व्यक्ति) को कवर करने का लक्ष्य है।
  • विशेष ध्यान: यह गरीबी रेखा से नीचे (BPL) के परिवारों, छोटे/सीमांत किसानों, महिला प्रधान परिवारों, युवाओं, दिव्यांगों और अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) समुदायों को लक्षित करता है।
  • भौगोलिक क्षेत्र: इसके तहत जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशील हिमालयी राज्यों (विशेष रूप से 10 सबसे गरीब राज्यों) और नीति आयोग के 112 आकांक्षी जिलों (Aspirational Districts) पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा

अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष (IFAD) :

  • संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी एवं अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थान है।
  • प्रमुख कार्य : ग्रामीण समुदायों में भुखमरी और गरीबी को कम करना
  • स्थापना वर्ष: 1977 में
  • मुख्यालय (HQ): रोम, इटली
  • सदस्य देश: 180 (भारत इसका संस्थापक सदस्य है)

रिर्पोट एवं सूचकांक

वैश्विक वन लक्ष्य रिपोर्ट 2026

  • संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक कार्य विभाग (UN DESA) तथा संयुक्त राष्ट्र वन मंच (UNFF) द्वारा जारी वैश्विक वन लक्ष्य रिपोर्ट 2026 के अनुसार, 2015 और 2025 के बीच वैश्विक वन क्षेत्रफल में 4 करोड़ हेक्टेयर से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष :

  • जारीकर्ता संस्था: संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक कार्य विभाग (UN DESA) और संयुक्त राष्ट्र वन मंच (UNFF)
  • कुल वन क्षेत्र में गिरावट (2015-2025): पिछले 10 वर्षों में 4 करोड़ हेक्टेयर (40 मिलियन हेक्टेयर) से अधिक की शुद्ध कमी हुई है।
  • वैश्विक वन क्षेत्र का आंकड़ा: दुनिया का कुल वन क्षेत्र 2015 के 4.18 अरब हेक्टेयर से घटकर 2025 में 4.14 अरब हेक्टेयर रह गया है।
  • वार्षिक सकल हानि : वैश्विक स्तर पर हर साल औसतन 1.09 करोड़ हेक्टेयर वन क्षेत्र नष्ट हो रहा है।
  • प्राथमिक वनों का नुकसान: 2015 से 2025 के बीच दुनिया ने 1.6 करोड़ हेक्टेयर प्राथमिक वन (Primary Forests) खो दिए हैं।
  • सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र : वनों की सबसे तेज गिरावट दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका महाद्वीप में दर्ज की गई है।
  • वनों की कटाई का मुख्य कारण (Top Driver): वैश्विक स्तर पर वनों को कृषि भूमि में बदलना सबसे बड़ा कारण है।
  • एशिया का प्रदर्शन : वनों की बहाली के मामले में एशिया दुनिया में सबसे आगे रहा। एशिया ने अकेले 3.1 करोड़ हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र को दोबारा बहाल किया है।
  • रणनीतिक योजना की अवधि: 'संयुक्त राष्ट्र वन रणनीतिक योजना' वर्ष 2030 तक के लिए निर्धारित है, जिसके तहत 6 वैश्विक वन लक्ष्य और 26 उप-लक्ष्य तय किए गए हैं।

 

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