राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार 2025
 
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राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार 2025

Tue 12 May, 2026

संदर्भ :

  • पंचायती राज मंत्रालय ने ‘राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार 2025’ के विजेताओं की घोषणा की है, जिसमें 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 42 पंचायतों को चुना गया है।

मुख्‍य बिन्‍दु :

  • पुरस्कार वितरण समारोह : 3 जून को नई दिल्ली में
  • यह पुरस्कार ग्रामीण क्षेत्रों में सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के स्थानीयकरण में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए दिए जाते हैं।
  • पुरस्कार की श्रेणियां : दीन दयाल उपाध्याय पंचायत सतत विकास पुरस्कार और नानाजी देशमुख सर्वोत्तम पंचायत सतत विकास पुरस्कार
  • दीन दयाल उपाध्याय पुरस्कार उन उत्कृष्ट ग्राम पंचायतों को सम्मानित करते हैं, जिन्होंने सतत विकास लक्ष्यों से जुड़े विषयों – जैसे गरीबी-मुक्त आजीविका, स्वास्थ्य, जल पर्याप्तता, स्वच्छता, महिला-अनुकूल शासन और सामाजिक न्याय, में बेहतरीन प्रदर्शन किया है।
  • नानाजी देशमुख सर्वोत्तम पंचायत सतत विकास पुरस्कार के तहत, जिला, ब्लॉक और ग्राम स्तर पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली पंचायतों को पुरस्कार दिए जाएँगे। इस श्रेणी के तहत आठ पंचायतों को चुना गया है, जिनमें तीन जिला पंचायतें, दो ब्लॉक पंचायतें और तीन ग्राम पंचायतें शामिल हैं।
  • 'राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार' की शुरुआत: इन पुरस्कारों की शुरुआत 2011 में की गई थी।
  • सबसे सफल राज्य: कर्नाटक ने सर्वाधिक 6 पुरस्कार जीतकर पहला स्थान हासिल किया है
  • इसके बाद आंध्र प्रदेश और ओडिशा को 5-5 पुरस्कार मिले हैं
  • सर्वश्रेष्ठ जिला पंचायत: सिपाहीजाला, त्रिपुरा
  • सर्वश्रेष्ठ ब्लॉक पंचायत: हरिपाद, केरल
  • सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत: न्यू नापम, असम

दीन दयाल उपाध्याय पंचायत सतत विकास पुरस्कार–2025 के विजेता :

गरीबी मुक्त एवं उन्नत आजीविका पंचायत :

  • प्रथम स्थान: कर्नाटक – मुद्रदी ग्राम पंचायत (हेब्री, उडुपी) – ₹1.00 करोड़
  • द्वितीय स्थान: आंध्र प्रदेश – चेम्मुल्लापल्ली ग्राम पंचायत (खाजीपेट, वाईएसआर) – ₹0.75 करोड़
  • तृतीय स्थान: सिक्किम – ग्यालशिंग ओमचुंग ग्राम पंचायत (ग्यालशिंग) – ₹0.50 करोड़

स्वस्थ पंचायत :

  • प्रथम स्थान: त्रिपुरा – कंचनबाड़ी ग्राम पंचायत (कुमारघाट, उनाकोटि) – ₹1.00 करोड़
  • द्वितीय स्थान: कर्नाटक – वंदसे ग्राम पंचायत (कुंडापुरा, उडुपी) – ₹0.75 करोड़
  • तृतीय स्थान: केरल – निरनम ग्राम पंचायत (पुलिकेझु, पथानामथिट्टा) – ₹0.25 करोड़
  • तृतीय स्थान: ओडिशा – पोटलमपुर ग्राम पंचायत (छतरपुर, गंजाम) – ₹0.25 करोड़

बाल-हितैषी पंचायत :

  • प्रथम स्थान: महाराष्ट्र – ईटगांव (पु) ग्राम पंचायत (भंडारा, भंडारा) – ₹1.00 करोड़
  • द्वितीय स्थान: कर्नाटक – हलनायकनहल्ली ग्राम पंचायत (बेंगलुरु पूर्व, बेंगलुरु शहरी) – ₹0.75 करोड़
  • तृतीय स्थान: केरल – ओटूर ग्राम पंचायत (वर्कला, तिरुवनंतपुरम) – ₹0.50 करोड़

जल-पर्याप्त पंचायत :

  • प्रथम स्थान: महाराष्ट्र – खारीवाली ग्राम पंचायत (खलापुर, रायगढ़) – ₹1.00 करोड़
  • द्वितीय स्थान: कर्नाटक – मदमक्की ग्राम पंचायत (हेब्री, उडुपी) – ₹0.75 करोड़
  • तृतीय स्थान: ओडिशा – पडुआ ग्राम पंचायत (चंपुआ, केन्दुझार) – ₹0.50 करोड़

स्वच्छ एवं हरित पंचायत :

  • प्रथम स्थान: मिजोरम – कावर्था नॉर्थ – ₹1.00 करोड़
  • द्वितीय स्थान: असम – जुमरमुर ग्राम पंचायत (कठियाटोली, नागांव) – ₹0.375 करोड़
  • द्वितीय स्थान: ओडिशा – हाथीबंधा ग्राम पंचायत (लाठीकटा, सुंदरगढ़) – ₹0.375 करोड़
  • तृतीय स्थान: छत्तीसगढ़ – सरदिह ग्राम पंचायत (बागिचा, जशपुर) – ₹0.25 करोड़
  • तृतीय स्थान: हिमाचल प्रदेश – लोहारदी ग्राम पंचायत (बल्ह, मंडी) – ₹0.25 करोड़

पंचायत में आत्मनिर्भर अवसंरचना :

  • प्रथम स्थान: केरल – मेलुकावु ग्राम पंचायत (एराट्टुपेट्टा, कोट्टायम) – ₹1.00 करोड़
  • द्वितीय स्थान: असम – हुग्रीजन ग्राम पंचायत (तेंगाखाट, डिब्रूगढ़) – ₹0.75 करोड़
  • तृतीय स्थान: आंध्र प्रदेश – गुंडामाला ग्राम पंचायत (कोठा पटनम, प्रकाशम) – ₹0.25 करोड़
  • तृतीय स्थान: कर्नाटक – सानूर ग्राम पंचायत (करकल, उडुपी) – ₹0.25 करोड़

सामाजिक रूप से न्यायपूर्ण और सामाजिक रूप से सुरक्षित पंचायत :

  • प्रथम स्थान: हिमाचल प्रदेश – शांशा ग्राम पंचायत (लाहौल, लाहौल और स्पीति) – ₹1.00 करोड़
  • द्वितीय स्थान: महाराष्ट्र – चम्भरली ग्राम पंचायत (खलापुर, रायगढ़) – ₹0.375 करोड़
  • द्वितीय स्थान: ओडिशा – मंदार ग्राम पंचायत (पोलोसारा, गंजाम) – ₹0.375 करोड़
  • तृतीय स्थान: जम्मू और कश्मीर – वागूरा ग्राम पंचायत (बीके पोरा, बुडगाम) – ₹0.25 करोड़
  • तृतीय स्थान: कर्नाटक – हकलाडी Gram Panchayat (कुंडापुरा, उडुपी) – ₹0.25 करोड़

सुशासन वाली पंचायत :

  • प्रथम स्थान: आंध्र प्रदेश – श्रृंगवरम ग्राम पंचायत (नाथावरम, विशाखापत्तनम) – ₹1.00 करोड़
  • द्वितीय स्थान: महाराष्ट्र – निंबाले ग्राम पंचायत (चांदवड, नासिक) – ₹0.75 करोड़
  • तृतीय स्थान: तेलंगाना – मोथुकुपल्ले ग्राम पंचायत (कोटेपल्ली, विकाराबाद) – ₹0.50 करोड़

महिला-हितैषी पंचायत :

  • प्रथम स्थान: आंध्र प्रदेश – बोक्कासम पालेम ग्राम पंचायत (श्रीकालाहस्ती, तिरूपति) – ₹1.00 करोड़
  • द्वितीय स्थान: झारखंड – झिकरहाटी पूर्वी ग्राम पंचायत (पाकुड़, पाकुड़) – ₹0.75 करोड़
  • तृतीय स्थान: तेलंगाना – फसलवाड़ी ग्राम पंचायत (सांगारेड्डी, संगारेड्डी) – ₹0.25 करोड़
  • तृतीय स्थान: त्रिपुरा – बैकुंठपुर ग्राम पंचायत (हेज़ामारा, पश्चिम त्रिपुरा) – ₹0.25 करोड़

नानाजी देशमुख सर्वोत्तम पंचायत सतत विकास पुरस्कार-2025 :

सर्वश्रेष्ठ जिला पंचायत :

  • प्रथम स्थान: त्रिपुरा – सेपाहिजाला – ₹5.00 करोड़
  • द्वितीय स्थान: ओडिशा – गंजम – ₹3.00 करोड़
  • तृतीय स्थान: तमिलनाडु – कोयंबटूर – ₹2.00 करोड़

सर्वश्रेष्ठ ब्लॉक पंचायत:

  • प्रथम स्थान: केरल – हरिप्पाड (अलाप्पुझा) – ₹2.00 करोड़
  • तृतीय स्थान: आंध्र प्रदेश – कुप्पम (चित्तूर) – ₹1.50 करोड़

सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत :

  • प्रथम स्थान: असम – न्यू नापम ग्राम पंचायत (गभोरू, सोनितपुर) – ₹1.50 करोड़
  • द्वितीय स्थान: बिहार – टेलकप ग्राम पंचायत (रोहतास, रोहतास) – ₹1.25 करोड़
  • तृतीय स्थान: उत्तर प्रदेश – बिरहारू ग्राम पंचायत (सैयान, आगरा) – ₹1.00 करोड़

 

पंचायती राज

  • पंचायती राज भारत में ग्रामीण स्थानीय स्वशासन (Local Self-Government) की एक प्रणाली है, जिसे 1992 के 73वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम द्वारा संवैधानिक दर्जा दिया गया

त्रिस्तरीय संरचना :

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243B के तहत पंचायती राज संस्थाओं के लिए एक त्रिस्तरीय संरचना (Three-tier Structure) का प्रावधान किया गया है

1. ग्राम स्तर (Gram Panchayat) : 

  • इकाई: ग्राम पंचायत
  • प्रमुख: मुखिया/सरपंच/प्रधान (इनका चुनाव राज्य कानून के अनुसार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हो सकता है)
  • सदस्य: ग्राम पंचायत के वार्ड सदस्य, जिनका चुनाव सीधे गाँव के मतदाताओं द्वारा होता है।
  • भूमिका: स्थानीय विकास योजनाओं को लागू करना और बुनियादी सुविधाओं (सफाई, प्रकाश, पानी) का प्रबंधन करना

2. मध्यवर्ती स्तर (Block/Mandal Level) :

  • इकाई: पंचायत समिति (विभिन्न राज्यों में इसे जनपद पंचायत या मंडल परिषद भी कहा जाता है)
  • प्रमुख: अध्यक्ष/प्रधान (इनका चुनाव निर्वाचित सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से किया जाता है)
  • सदस्य: इस क्षेत्र से सीधे चुने गए सदस्य, साथ ही क्षेत्र के विधायक और सांसद भी इसके सदस्य हो सकते हैं।
  • भूमिका: यह ग्राम पंचायतों और जिला परिषद के बीच एक कड़ी के रूप में कार्य करती है और ब्लॉक स्तर पर विकास योजनाओं का समन्वय करती है।

3. जिला स्तर (District Level) : 

  • इकाई: जिला परिषद
  • प्रमुख: अध्यक्ष/चेयरमैन (इनका चुनाव भी निर्वाचित सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से होता है)
  • सदस्य: जिले से सीधे निर्वाचित सदस्य, सभी पंचायत समितियों के अध्यक्ष, और जिले के सांसद व विधायक
  • भूमिका: यह जिले की सभी पंचायत समितियों की गतिविधियों का निरीक्षण करती है, बजट को मंजूरी देती है और राज्य सरकार को सलाह देती है।

महत्वपूर्ण समितियाँ :

  • बलवंत राय मेहता समिति (1957): इसने त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था का सुझाव दिया था
  • अशोक मेहता समिति (1977): इसने द्विस्तरीय (Two-tier) संरचना की सिफारिश की थी
  • एल.एम. सिंघवी समिति (1986): इसने पंचायतों को संवैधानिक दर्जा देने की पुरजोर सिफारिश की थी

संवैधानिक प्रावधान :

  • संविधान का भाग: इसे संविधान के भाग IX (अनुच्छेद 243 से 243O) में शामिल किया गया है

 

 

  • अनुच्छेद 243 (परिभाषाएँ): इसमें 'ग्राम सभा', 'पंचायत' और 'पंचायत क्षेत्र' जैसी महत्वपूर्ण शब्दावलियों को परिभाषित किया गया है।
  • अनुच्छेद 243A (ग्राम सभा): यह पंचायती राज की बुनियादी इकाई है। इसमें गाँव के सभी पंजीकृत मतदाता शामिल होते हैं। इसकी शक्तियाँ राज्य विधानमंडल द्वारा निर्धारित की जाती हैं।
  • अनुच्छेद 243B (पंचायतों का गठन): त्रि-स्तरीय प्रणाली का प्रावधान (ग्राम, मध्यवर्ती और जिला स्तर)। अपवाद: 20 लाख से कम जनसंख्या वाले राज्यों में मध्यवर्ती स्तर (Block Level) अनिवार्य नहीं है।
  • अनुच्छेद 243C (पंचायतों की संरचना): सभी सीटों पर चुनाव प्रत्यक्ष मतदान द्वारा होगा। अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया राज्य विधानमंडल तय करेगा।

अनुच्छेद 243D (स्थानों का आरक्षण):

  • SC/ST के लिए उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण।
  • महिलाओं के लिए कम से कम 1/3 (33%) सीटें आरक्षित (अध्यक्ष पद सहित)।
  • अनुच्छेद 243E (पंचायतों की अवधि): कार्यकाल 5 वर्ष। यदि पंचायत भंग होती है, तो 6 महीने के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य है।
  • अनुच्छेद 243F (सदस्यता के लिए अयोग्यता): किसी भी व्यक्ति को 21 वर्ष की आयु पूरी करने पर अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता (जबकि विधानमंडल के लिए 25 वर्ष है)।
  • अनुच्छेद 243G (शक्तियाँ, प्राधिकार और उत्तरदायित्व): पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएँ बनाने की शक्ति। इसमें 11वीं अनुसूची के 29 विषय शामिल हैं।
  • अनुच्छेद 243H (कर लगाने की शक्ति): पंचायतों को कर, शुल्क और टोल लगाने तथा सरकारी निधि से सहायता अनुदान प्राप्त करने का अधिकार।
  • अनुच्छेद 243I (राज्य वित्त आयोग): राज्यपाल द्वारा हर 5 वर्ष में गठन, जो पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करता है।
  • अनुच्छेद 243K (राज्य निर्वाचन आयोग): पंचायतों के चुनावों के संचालन, निर्देशन और नियंत्रण के लिए एक स्वतंत्र निकाय।
  • अनुच्छेद 243O (न्यायालयों के हस्तक्षेप पर रोक): निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन या सीटों के आवंटन से संबंधित मामलों में न्यायालय हस्तक्षेप नहीं कर सकते।

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