08 May, 2026
ग्रेट निकोबार परियोजना
Mon 11 May, 2026
संदर्भ
“ग्रेट निकोबार परियोजना” भारत की सबसे महत्वाकांक्षी एवं चर्चित अवसंरचनात्मक परियोजनाओं में से एक बनकर उभरी है।
परियोजना का परिचय
- वर्ष 2021 में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत इस ₹72,000 करोड़ की परियोजना का उद्देश्य ग्रेट निकोबार द्वीप को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक प्रमुख समुद्री एवं सामरिक केंद्र के रूप में विकसित करना है।
- मलक्का जलडमरूमध्य के निकट स्थित होने के कारण यह परियोजना भारत की आर्थिक, सामरिक तथा समुद्री महत्वाकांक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, इसके साथ पर्यावरणीय क्षति, जैव विविधता संरक्षण तथा जनजातीय अधिकारों को लेकर गंभीर चिंताएँ भी सामने आई हैं।
- “ग्रेट निकोबार द्वीप का समग्र विकास” (Holistic Development of Great Nicobar Island) नामक इस परियोजना की परिकल्पना NITI Aayog द्वारा की गई है तथा इसका क्रियान्वयन Andaman and Nicobar Islands Integrated Development Corporation Limited (ANIIDCO) द्वारा किया जा रहा है। यह परियोजना लगभग 30 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी तथा लगभग 166 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर करेगी।
परियोजना के प्रमुख घटक हैं:
- गैलेथिया खाड़ी में अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल (ICTT) – जिसका उद्देश्य भारत की कोलंबो एवं सिंगापुर जैसे विदेशी बंदरगाहों पर निर्भरता कम करना है।
- ग्रीनफील्ड अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा – जो बड़े विमानों एवं प्रतिवर्ष लगभग 1 करोड़ यात्रियों को संभालने में सक्षम होगा।
- हाइब्रिड गैस-सौर ऊर्जा संयंत्र – जिससे परियोजना क्षेत्र में निर्बाध ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
- आधुनिक टाउनशिप – आवासीय, वाणिज्यिक एवं संस्थागत आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु विकसित की जाएगी।
सामरिक महत्व
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की भूमिका
- ग्रेट निकोबार द्वीप पूर्व-पश्चिम अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्ग के निकट स्थित है, जहाँ से विश्व व्यापार का लगभग 25% भाग गुजरता है। यह स्थिति भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण ट्रांसशिपमेंट एवं लॉजिस्टिक्स केंद्र के रूप में स्थापित कर सकती है।
- वर्तमान में भारत के अनेक कंटेनर विदेशी बंदरगाहों जैसे कोलंबो एवं सिंगापुर के माध्यम से संचालित होते हैं, जिससे भारत को आर्थिक हानि होती है। गैलेथिया खाड़ी में प्रस्तावित ICTT प्राकृतिक रूप से गहरे जल (20 मीटर से अधिक) वाला बंदरगाह होने के कारण भारत की समुद्री प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बढ़ा सकता है।
रक्षा एवं राष्ट्रीय सुरक्षा
- यह परियोजना केवल आर्थिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। ग्रेट निकोबार की स्थिति भारत को सुंडा, लोम्बोक तथा ओम्बाई-वेटर जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की निगरानी करने में सक्षम बनाती है।
- परियोजना के अंतर्गत प्रस्तावित हवाई अड्डा नागरिक एवं सैन्य दोनों उद्देश्यों की पूर्ति करेगा। यह भारत की पूर्वी हिंद महासागर क्षेत्र में सामरिक उपस्थिति को सुदृढ़ करेगा।
- यह पहल भारत सरकार की Sagarmala Programme तथा “Maritime India Vision 2030” के अनुरूप है और “Act East Policy” को भी मजबूती प्रदान करती है।
आर्थिक लाभ
- सरकारी अनुमानों के अनुसार, केवल ट्रांसशिपमेंट बंदरगाह से वर्ष 2040 तक लगभग ₹30,000 करोड़ वार्षिक राजस्व प्राप्त हो सकता है। इसके अतिरिक्त, इस परियोजना से लगभग 50,000 रोजगार अवसर उत्पन्न होने की संभावना है, जिससे अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के आर्थिक विकास को गति मिलेगी।
पर्यावरणीय चिंताएँ
जैव विविधता पर खतरा
ग्रेट निकोबार एक वैश्विक जैव विविधता हॉटस्पॉट है, जहाँ लगभग 85% क्षेत्र वनाच्छादित है। पर्यावरणविदों का मानना है कि बड़े पैमाने पर निर्माण गतिविधियाँ पारिस्थितिकी तंत्र को अपूरणीय क्षति पहुँचा सकती हैं।
गैलेथिया खाड़ी:
- अंतरराष्ट्रीय महत्व की रामसर आर्द्रभूमि है।
- संकटग्रस्त लेदरबैक समुद्री कछुए का प्रमुख प्रजनन स्थल है।
- प्रवाल भित्तियों एवं समुद्री जैव विविधता से समृद्ध क्षेत्र है।
वनों की कटाई एवं ड्रेजिंग गतिविधियाँ समुद्री खाद्य श्रृंखला और पारिस्थितिक संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं।
प्राकृतिक आपदा जोखिम
- यह द्वीप भूकंपीय एवं चक्रवात-प्रवण क्षेत्र में स्थित है। विशेषज्ञों का मत है कि मैंग्रोव वनों के विनाश से सुनामी एवं तटीय क्षरण का खतरा बढ़ सकता है।
जनजातीय अधिकार एवं कानूनी मुद्दे
- ग्रेट निकोबार द्वीप पर शोम्पेन एवं निकोबारी जैसी विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTGs) निवास करते हैं। आलोचकों का आरोप है कि परियोजना से इनके पारंपरिक अधिकार एवं आजीविका प्रभावित हो सकती है।
इसके अतिरिक्त निम्न मुद्दों पर भी चिंता व्यक्त की गई है:
- तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) नियमों में शिथिलता।
- पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) की पारदर्शिता।
- Forest Rights Act, 2006 के प्रावधानों के अनुपालन को लेकर प्रश्न।
हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी जनजातीय समुदाय का विस्थापन प्रस्तावित नहीं है तथा उनकी बस्तियों को पुनर्वास योजनाओं से बाहर रखा गया है।
निष्कर्ष
- ग्रेट निकोबार परियोजना भारत की समुद्री, आर्थिक एवं सामरिक महत्वाकांक्षाओं का प्रतीक है। साथ ही यह पर्यावरणीय संरक्षण एवं जनजातीय अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करने की बड़ी चुनौती भी प्रस्तुत करती है।
- परियोजना की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि भारत विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा, पारिस्थितिक संरक्षण एवं सामाजिक न्याय के बीच किस प्रकार संतुलित दृष्टिकोण अपनाता है।









